Thursday, May 7, 2026
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राजनीति

सुनाली के ऊपर अत्याचार करनेवाले किस भ्रूण हत्या की बात कर रहे हैं और किन नारियों का वंदन ?

भाजपा ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को हर रूप में चुनाव जीतने का औज़ार बना लिया। जो अधिनियम तीन साल पहले पारित हो गया था उसे एक बार फिर परिसीमन के लिए संसद में लाया गया। मौजूदा संख्या में भागीदारी न देने की बेईमानी को परिसीमन की आड़ में छुपाने की संघी-भाजपाई मंशा का पर्दाफाश हो गया तब बेहिसाब पैसा खर्च करके प्रधानमंत्री मोदी भ्रूण हत्या का रोना रो रहे हैं। लेकिन सवाल कई और भी हैं। पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले की निवासी तीन महीने की गर्भवती घरेलू सहायिका सुनाली को जबरन बांग्लादेश की सीमा पार कराया गया। बिना किसी अपराध को उसे बांग्लादेश की जेल में रहना पड़ा। वहीं जेल में उसने अपने बच्चे को जन्म दिया। एक जटिल कानूनी लड़ाई के बाद वह अपने देश वापस आ पाई है। मोदी ने महिलाओं की गरीबी, लाचारी और भावनाओं का दोहन किया और उन्हें एकमुश्त वोटर के रूप देखा। आज देश में महिलाओं की दुर्दशा का कोई अंत नहीं। सबसे बड़ी बात कि संसद की मौजूदा स्थिति में महिलाओं को आरक्षण भाजपा देने को ही तैयार नहीं। ऐसे में किस भ्रूण हत्या की बात करके रोना-पीटना चल रहा है इसे समझा जाना चाहिए। जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता और चिंतक डॉ सुरेश खैरनार की खुली चिट्ठी।

क्या अब साम्राज्यवाद का सरगना नहीं रह पाएगा अमेरिका

क्यूबा के मौजूदा ऊर्जा संकट को पैदा करने और अब खुद क्यूबा पर कब्ज़ा जमाने की चाह रखने वाले ट्रंप के बयान को देखने के बाद, यह कहावत याद आ गई - 'नंगे से तो भगवान भी डरते हैं।' हालाँकि, इस 'नंगे' द्वारा शोषित की गई लड़कियों का गुस्सा अब पूरी दुनिया एपस्टीन फाइलों के ज़रिए देख रही है। फिर भी, इस 'नंगे' को रोकना ही दुनिया की सभ्यता पर मंडराता सबसे बड़ा खतरा है। आखिर किसी में भी इस बारे में खुलकर बोलने की हिम्मत क्यों नहीं है?

साम्राज्यवाद के नए दौर की शुरुआत है ईरान पर हमला

घटनाओं में भारत की भूमिका उसकी बदलती विदेश नीति के बारे में आँखें खोलने वाली है। शुरुआत में भारत गुटनिरपेक्ष था, और उसके ईरान के साथ बहुत सौहार्दपूर्ण संबंध थे। दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और आर्थिक आदान-प्रदान बेहतरीन था। अब हम देखते हैं कि भारतीय प्रधानमंत्री मोदी ने युद्ध से ठीक पहले इज़राइल का दौरा किया। इस दौरे का उद्देश्य देश को पता नहीं था। उन्हें इज़राइल का सर्वोच्च सम्मान मिला, और उन्होंने यह वचन दिया कि भारत हर सुख-दुख में इज़राइल के साथ खड़ा रहेगा। अगले ही दिन, I-A ने ईरान पर हमला कर दिया। श्री मोदी ने ईरान के सर्वोच्च नेता के निधन पर कोई ट्वीट नहीं किया, और एक ऐसा गोलमोल बयान जारी किया जिसमें हमलावर और पीड़ित देश, दोनों को एक ही तराज़ू में तौला गया।

ईरान युद्ध : तेल, साम्राज्य और शासन परिवर्तन की नई राजनीति

28 फरवरी, 2026 को, ईरानी समय के हिसाब से सुबह लगभग 7:00 बजे अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए, जिसके बाद नई जंग शुरू हो गई। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के भीतर किए गए संयुक्त हवाई हमलों (Operation Epic Fury) के बाद से दोनों देश सीधे सैन्य संघर्ष में हैं। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मृत्यु और कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों के नष्ट होने की खबरें हैं। लड़ाई की वजह तेल के सोर्स पर कंट्रोल की है।

दिल्ली : फिलिस्तीनी अपने अधिकार के लिए आत्मसम्मान के साथ जीतने तक लड़ेंगे

इंडो-फिलिस्तीन सॉलिडैरिटी नेटवर्क (आईपीएसएन) ने 06 मार्च, 2026 को नयी दिल्ली के प्रेस क्लब में 'फिलिस्तीन, ज़ायोनी-साम्राज्यवादी प्रभुत्व, और बदलती भू-राजनीति' विषय पर एक परिचर्चा का आयोजन किया था जिसमें पश्चिम एशिया के मामलों के जानकार और वरिष्ठ पत्रकार शामिल हुए।

डीपी यादव : यूपी की हर सत्ता में सुरक्षा पाता रहा गाजियाबाद का शराब किंग

दूध के कारोबार से दुनियादारी शुरू की पर पहचान बनी दारू। जब दारू का नशा सिर चढ़कर बोलने लगा तब सत्ता के सियासी गलियारे में भी अपनी कुर्सी बुक करवा ली। सियासी सफर में जब सम्मान दांव पर लगा तो हथियारों की हुंकार से हवाओं में अपने नाम की सिहरन भर दी। हर पार्टी के साथ पर हर जगह अपनी मनमानी की, जिसकी वजह से किसी के साथ लंबा साथ नहीं चला तब अपनी ही पार्टी बना ली। अब राजनीति का राग कमजोर पड़ गया है, असलहों के बल पर हासिल की हुई ताकत कमजोर हो गई, फिलहाल कविता की किताब जरूर छप गई।

बृजेश सिंह : बदले की आग ने बनाया माफिया

उत्तर प्रदेश के जरायम की दुनिया को रोशन करने में पूर्वांचल किसी मशाल की तरह जलता दिखता है। रोशनी इतनी कि आँखें चकाचौंध हो जाएँ और आग इतनी की ख्याल भर से दिमाग में फफोले पड़ जाएँ। इस मशाल की सबसे तेज तपिश वाली लौ को बृजेश सिंह कहते हैं। जिसने पिता की हत्या के खिलाफ जब हथियार उठाया तो पैरों के हर निशान नया रास्ता बनाते गए और वाराणसी से उठा बवंडर उत्तर प्रदेश से निकलकर झारखंड, मुंबई तक  फैल गया।

जौनपुर के रक्तबीज- पायजामे की डोरी बांधना बाद में सीखे, हिस्ट्रीशीटर पहले ही बन गए धनंजय सिंह

उत्तर प्रदेश के बाहुबली -6 इनकी मनमानी को ना मानना इनके वसूल के खिलाफ था। मनमानी भी ऐसी कि एकदम गर्दा उड़ा दिए थे। तमंचा...

बृजभूषण शरण सिंह : संकट में है सियासत, क्या बेदाग रह पाएंगे गोंडा के पहलवान

हैंड ग्रेनेड दागकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, एसपी पर पिस्टल तानकर राजनीति का सफर शुरू किया पर अभी महिला पहलवानों ने ताल ठोंककर जो चुनौती दी है उससे निकलना आसान नहीं होगा। अब तक जिस आदमी की ताकत के आगे पार्टी से लेकर विरोधी तक चुप रहते थे वह संकट में दिख रहा है। अपने पहलवानी  प्रेम के चलते यह कई टर्म से रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष हैं। राजनीति मे मजबूत मुकाम बनाने के बावजूद इनका अखाड़ा और दंगल प्रेम कभी कम नहीं हुआ। गोंडा में यह अपने खर्च पर जूनियर और राष्ट्रीय चैम्पियनशिप का आयोजन करते रहे हैं।

क्या मुसलमानों को सपा से दूर करने में कामयाब हो रही है भाजपा

लखनऊ। निकाय चुनाव को सत्ता साम्राज्य की सीढ़ियाँ बनाने में लगी भाजपा क्या उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुसलमानों की एकता को चकनाचूर करके...

कुंडा का गुंडा–हारा नहीं है पथिक सियासी सफर का, पर आजकल तलुओं में जलन बहुत है

उत्तर प्रदेश के बाहुबली -4 मायावती ने वजूद पर तलवार चलाई तो मुलायम सिंह ढाल बनकर बचाने खड़े हुए, अखिलेश ने हाथ झटका तो भाजपा...
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