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नेहरू को कोसते कोसते नेहरू ही बेंचमार्क बन गए
हमारे देश का लोकतांत्रिक सिस्टम अविश्वसनीय हो गया है। देश की सभी संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता खत्म कर दी गई है — संसद से लेकर सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग और सभी जांच एजेंसियों तक। आज सभी संवैधानिक संस्थाएं सिर्फ़ BJP और RSS के इशारे पर काम कर रही हैं। आज से दो हफ़्ते बाद, 25 जून को, जब 1975 में 19 महीने की इमरजेंसी और सेंसरशिप लागू होने के 51 साल पूरे हो जाएंगे, तो RSS और BJP के लोग अभिव्यक्ति की आज़ादी और 19 महीने की तानाशाही पर चर्चा करेंगे। 51 साल पहले हम भी उस इमरजेंसी के शिकार हुए थे। लेकिन 19 महीने की इमरजेंसी की तुलना में, हम पिछले 12 सालों से — यानी एक दशक से ज़्यादा समय से — अघोषित इमरजेंसी और सेंसरशिप का सामना कर रहे हैं।
जॉर्ज फर्नांडिस के बहाने विवादों की सियासत को मुड़कर देखना
जॉर्ज फर्नांडिस राजनीतिक जीवन विवादों से भरा रहा। 1974 की रेल हड़ताल को सरकार ने देशद्रोह कहा। दो करोड़ रेलकर्मी हड़ताल पर गए, रेल सेवा ठप हुई। विपक्ष ने इसे अराजकता कहा, सरकार ने बर्बादी। आपातकाल के दौरान 'बड़ौदा डायनामाइट केस' में उन पर बम विस्फोट की साजिश का आरोप लगा। बाद में आरोप साबित नहीं हुए, पर सरकार विरोध के नाम पर हिंसा की राह चुनने की आलोचना हुई। रक्षामंत्री रहते 2001 में 'तहलका डॉट कॉम' स्टिंग ऑपरेशन हुआ। उनके ऑफिस के लोगों को रक्षा सौदों में रिश्वत लेते दिखाया गया। आरोपों के चलते उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। बाद में क्लीन चिट मिली, पर छवि धूमिल हो चुकी थी। आलोचक कहते हैं वे सत्ता विरोध के नाम पर टकराव की राजनीति करते थे। IBM/कोका-कोला को भगाने से भारत में निवेश और टेक्नोलॉजी आने में देरी हुई। सिद्धांत की जिद में कई बार व्यावहारिक फैसले पीछे छूट गए। कई मुलाकातों की याद और जॉर्ज फर्नांडिस की लंबी तथा विवादभरी राजनीतिक पारी का विश्लेषण करते हुये उनकी 99वीं जयंती पर जाने-माने चिंतक, लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ सुरेश खैरनार।
सुनाली के ऊपर अत्याचार करनेवाले किस भ्रूण हत्या की बात कर रहे हैं और किन नारियों का वंदन ?
भाजपा ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को हर रूप में चुनाव जीतने का औज़ार बना लिया। जो अधिनियम तीन साल पहले पारित हो गया था उसे एक बार फिर परिसीमन के लिए संसद में लाया गया। मौजूदा संख्या में भागीदारी न देने की बेईमानी को परिसीमन की आड़ में छुपाने की संघी-भाजपाई मंशा का पर्दाफाश हो गया तब बेहिसाब पैसा खर्च करके प्रधानमंत्री मोदी भ्रूण हत्या का रोना रो रहे हैं। लेकिन सवाल कई और भी हैं। पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले की निवासी तीन महीने की गर्भवती घरेलू सहायिका सुनाली को जबरन बांग्लादेश की सीमा पार कराया गया। बिना किसी अपराध को उसे बांग्लादेश की जेल में रहना पड़ा। वहीं जेल में उसने अपने बच्चे को जन्म दिया। एक जटिल कानूनी लड़ाई के बाद वह अपने देश वापस आ पाई है। मोदी ने महिलाओं की गरीबी, लाचारी और भावनाओं का दोहन किया और उन्हें एकमुश्त वोटर के रूप देखा। आज देश में महिलाओं की दुर्दशा का कोई अंत नहीं। सबसे बड़ी बात कि संसद की मौजूदा स्थिति में महिलाओं को आरक्षण भाजपा देने को ही तैयार नहीं। ऐसे में किस भ्रूण हत्या की बात करके रोना-पीटना चल रहा है इसे समझा जाना चाहिए। जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता और चिंतक डॉ सुरेश खैरनार की खुली चिट्ठी।
क्या अब साम्राज्यवाद का सरगना नहीं रह पाएगा अमेरिका
क्यूबा के मौजूदा ऊर्जा संकट को पैदा करने और अब खुद क्यूबा पर कब्ज़ा जमाने की चाह रखने वाले ट्रंप के बयान को देखने के बाद, यह कहावत याद आ गई - 'नंगे से तो भगवान भी डरते हैं।' हालाँकि, इस 'नंगे' द्वारा शोषित की गई लड़कियों का गुस्सा अब पूरी दुनिया एपस्टीन फाइलों के ज़रिए देख रही है। फिर भी, इस 'नंगे' को रोकना ही दुनिया की सभ्यता पर मंडराता सबसे बड़ा खतरा है। आखिर किसी में भी इस बारे में खुलकर बोलने की हिम्मत क्यों नहीं है?
साम्राज्यवाद के नए दौर की शुरुआत है ईरान पर हमला
घटनाओं में भारत की भूमिका उसकी बदलती विदेश नीति के बारे में आँखें खोलने वाली है। शुरुआत में भारत गुटनिरपेक्ष था, और उसके ईरान के साथ बहुत सौहार्दपूर्ण संबंध थे। दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और आर्थिक आदान-प्रदान बेहतरीन था। अब हम देखते हैं कि भारतीय प्रधानमंत्री मोदी ने युद्ध से ठीक पहले इज़राइल का दौरा किया। इस दौरे का उद्देश्य देश को पता नहीं था। उन्हें इज़राइल का सर्वोच्च सम्मान मिला, और उन्होंने यह वचन दिया कि भारत हर सुख-दुख में इज़राइल के साथ खड़ा रहेगा। अगले ही दिन, I-A ने ईरान पर हमला कर दिया। श्री मोदी ने ईरान के सर्वोच्च नेता के निधन पर कोई ट्वीट नहीं किया, और एक ऐसा गोलमोल बयान जारी किया जिसमें हमलावर और पीड़ित देश, दोनों को एक ही तराज़ू में तौला गया।
लोकसभा चुनाव : मणिपुर में दूसरे चरण के मतदान से 2 दिन पहले हुए धमाके, एक पुल क्षतिग्रस्त
मणिपुर में भाजपा ने नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) और नगा पीपुल्स फ्रंट (NPF) के साथ गठबंधन किया है। मणिपुर में भाजपा का मुकाबला कांग्रेस के साथ है। मणिपुर में कुकी समुदाय से कोई भी प्रत्याशी चुनाव मैदान में नहीं है।
Lok Sabha Election : भाजपा की ‘बी-टीम’ की भूमिका निभा रही है बसपा, पीएम मोदी हताशा से ग्रस्त हैं – इंडिया के प्रत्याशी कुंवर...
भाषा -
कांग्रेस नेता दानिश अली ने आरोप लगाया, 'पार्टी (बसपा) जिस आधार पर बनी थी, उससे दूर चली गई है। आज संविधान बचाने का सवाल है। भाजपा के नेता कह रहे हैं कि वे संविधान बदल देंगे। ऐसा कोई और नहीं बल्कि छह बार के (भाजपा) सांसद अनंत कुमार हेगड़े ने कहा। बसपा ‘इंडिया’ गठबंधन से अलग रही और उसके उम्मीदवार का फैसला भाजपा ने किया।
Lok Sabha Election : पीएम मोदी के नफरती भाषण के बाद 17,000 लोगों ने कार्रवाई की मांग की, निर्वाचन आयोग की भूमिका पर उठ...
मुस्लिम समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करने के साथ ही पीएम मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के एक पुराने बयान में झूठ का तड़का लगाते हुए उसे तोड़-मरोड़कर पेश किया।
Lok Sabha Election : सपा के आंवला लोकसभा सीट से उम्मीदवार नीरज मौर्य के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज
आंवला लोकसभा सीट से सपा के उम्मींदवार नीरज मौर्य के खिलाफ धोखाधड़ी के मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस के अनुसार यह प्राथमिकी बसपा उम्मींदवार आबिद अली की शिकायत पर की गई है।
Lok Sabha Election : पंजाब में भाजपा उम्मीदवारों का गाँव में प्रवेश को लेकर कई क्षेत्रों में किसानों ने किया प्रदर्शन
भाजपा ने किसान विरोधी नीतियों को ही तरजीह दी, इस वजह से किसान अच्छे-खासे नाराज हैं और अब जब लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी गाँव पहुँच रहे हैं, तब ग्रामीण उनका विरोध कर उन्हें गाँव से भगा रहे हैं। गुरुदासपुर में हुई यह घटना कोई पहली घटना नहीं है, ऐसे अनेक मामले पूरे देश में सोशल मीडिया के माध्यम से सामने आ रहे हैं।
Lok sabha Election : राहुल गांधी की जनता से अपील, रेलवे को बचाना है तो मोदी सरकार को हटाइए
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जनता से अपील करते हुए कहा है कि भारतीय रेलवे को बचाना है तो सबसे पहले केन्द्र की मोदी सरकार को हटाइए। मोदी भारतीय रेलवे को निजी हाथों में सौंपना चाहते हैं।

