Sunday, July 21, 2024
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बेहमई हत्याकांड: 43 साल बाद कोर्ट ने सुनाया फैसला, एक दोषी को उम्रकैद

पोरवाल ने कहा कि इस मामले में फूलन देवी समेत कुल 35 आरोपी थे। जिसमें श्याम बाबू और विश्वनाथ को छोड़कर बाकी सबकी मौत हो चुकी है। 14 फरवरी 1981 को फूलन और उसके गिरोह ने कानपुर देहात के बेहमई गांव में 20 लोगों को एक लाइन में खड़ा कर गोलियों से भून दिया था।

बृजभूषण के खिलाफ यौन उत्पीड़न के मामले में पुलिस रिपोर्ट पर अदालत दो मार्च को सुनाएगी फैसला

नई दिल्ली। भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के पूर्व प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली एक नाबालिग पहलवान की शिकायत...

दाभोलकर हत्याकांड : न्यायालय ने आरोपी को दी गई जमानत के खिलाफ दायर याचिका की खारिज

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने महाराष्ट्र के तर्कवादी दिवंगत नरेंद्र दाभोलकर की बेटी की उस याचिका को शुक्रवार को खारिज कर दिया, जिसमें एक...

नीरव मोदी ने ब्रिटेन की अदालत में कहा शायद कई साल तक इंग्लैंड में रह सकता हूं मैं

 लंदन,  (भाषा) भारत में बैंक धोखाधड़ी और धन शोधन के मामलों में वांछित भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी ने बृहस्पतिवार को ब्रिटेन की एक...

केरल की अदालत ने अलुवा दुष्कर्म और हत्या के आरोपी को सुनाई मौत की सजा

कोच्चि(भाषा)।  केरल की एक अदालत ने अलुवा में बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले में दोषी व्यक्ति को मंगलवार को मौत की सजा...

ज्ञानवापी मामला दूसरी अदालत में भेजने के खिलाफ दायर याचिका खारिज

वाराणसी/ नई दिल्ली (भाषा)। ज्ञानवापी मामले में मुस्लिम पक्ष को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अंजुमन इंतजामिया...

कोर्ट ने कहा, महिलाओं के लिए अलग नहीं हो सकते मानदंड

मुंबई (भाषा)। महाराष्ट्र में विभिन्न नगर निगमों ने दमकल कर्मी के पद के लिए आवेदन करने वाली महिला उम्मीदवारों के लिए लंबाई के अलग-अलग...

हत्या की कोशिश के मामले में मोनू मानेसर को14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया

गुरुग्राम, (भाषा)।  पटौदी की अदालत ने बुधवार को कथित गो रक्षक और बजरंग दल कार्यकर्ता मोनू मानेसर को हत्या की कोशिश के मामले में...

सर्वोच्च न्यायालय से नहीं मिला स्टे, निचली अदालत में करेंगे अपील ,सर्वसेवा संघ में जारी रहेगा सत्याग्रह

वाराणसी।  सर्वसेवा संघ परिसर को विध्वंस से बचाने के लिए धरना सोमवार को 58वें दिन भी जारी रहा। इस बीच उपरोक्त मामले की सुनवाई...

न्यायपालिका में सेंध लगाकर बिछाई जाती नफरती सुरंगें!!

हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति करने वाले कॉलेजियम का दावा है कि 'विक्टोरिया गौरी के इस तरह के कथनों के बारे में इंटेलिजेंस ब्यूरो ने उन्हें कोई जानकारी नहीं दी थी, अब नियुक्ति की प्रक्रिया इतनी आगे बढ़ चुकी है कि वे कुछ नहीं कर सकते।' मगर मामला इतना सरल नहीं है। यह अनजाने में, धोखे से हुयी नियुक्ति नहीं है, बल्कि बाकायदा योजनाबद्ध तरीके से न्यायपालिका में सेंध लगाकर नफरती बारूद की सुरंग बिछाने का एक और उदाहरण है।

कब तक रुके रहेंगे ये फैसले उर्फ सिनेमा में न्याय व्यवस्था का चित्रण

भारतीय संविधान में देश की राजव्यवस्था को संचालित करने के लिए व्यवस्थापिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका की व्यवस्था की गई थी और इन तीनों पर...

अदालत-अदालत का फर्क या फिर कुछ और? (डायरी 22 मई, 2022)

यह कोई नई बात नहीं है कि सेवानिवृत्त हो चुके जजों के अलावा नौकरशाहों की अंतरात्मा जाग जाती है। उनके बयान ऐसे प्रतीत होते...

जेलों में यातना की अंतहीन कहानियाँ

भारतीय जेलें पुलिस महकमे की भागीदारी के बिना अधूरी ही मानी जायेंगी। यह तथ्य किसी से छिपा नही है कि आज भी पुलिस-प्रशासन का जेण्डर दृष्टिकोण सामन्ती और पिछड़ा है। यहां तक कि महिला पुलिस अधिकारी और कर्मचारी भी उन्हीं महिला विरोधी मानदण्डों और गालियों का प्रयोग बेधड़क करती हैं जो कि पुरुषों द्वारा किये जाते हैं। यहां पर सवर्ण पितृसत्तात्मक मानसिकता का इतना अधिक प्रभाव होता है कि पुलिसकर्मी महिला मामलों को संवेदनशील तरीके हल करने में सक्षम नहीं होते हैं। अधिकांश तो महिला को अपराधी सिद्ध कर देने भर की ड्यूटी तक ही सीमित रहते हैं। कई बार यह देखा गया है कि महिला पुलिसकर्मी पुरुषवादी दृष्टिकोण से महिला अपराधियों के साथ ज्यादा अमानवीय और अभद्र व्यवहार करती हैं।

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