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राजस्थान : सरकार द्वारा खेती के लिए अनेक योजनाएं लागू करने के बाद भी कमी से जूझ रहे हैं किसान
किसानों के हितों में सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयासों के बावजूद ज़मीनी स्तर पर देखा जाये तो सूरतेहाल कुछ और ही नज़र आता है। देश के कई ऐसे राज्य हैं जहां अलग अलग भौगोलिक परिस्थितियों के कारण किसानों को कृषि कार्य में अलग तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। राजस्थान के बीकानेर जिला स्थित लूणकरणसर ब्लॉक ऐसा ही एक उदाहरण है। अपनी विशिष्ट भौगोलिक विशेषताओं और सीमित प्राकृतिक संसाधनों के कारण यहां कृषि संबंधी कार्यों में किसानों के लिए कई प्रकार की चुनौतियां हैं।
राजस्थान : भौगोलिक परिस्थिति में बदलाव के चलते कृषि संकट से जूझ रहें हैं किसान
रेगिस्तानी क्षेत्र होने के कारण पहले से ही पानी की सीमित मात्रा का सामना कर रहे इन किसानों के सामने अप्रत्याशित बारिश समस्या बनती जा रही है। लगातार बदलते पर्यावरण के कारण मानसून की बारिश असमय होने लगी है, जिसका सीधा असर खेती पर पड़ रहा है। सिंचाई की जरूरत के समय वर्षा के न होने से सूखे की स्थिति बनती जा रही है।
आजमगढ़ : किसान नेता वीरेंद्र यादव पर जानलेवा हमला, दोषियों के खिलाफ एफआईआर नहीं दर्ज़ की गई, तहरीर बदलने का दबाव
जिन राज्यों में भाजपा का शासन है, वहाँ भाजपा से जुड़े लोग खुले आम दबंगई करने में सबसे आगे हैं क्योंकि उन्हें अपने ऊपर किसी भी तरह की कार्रवाई का कोई भय नहीं है। विशेषकर समाज के दबे-पिछड़े, वंचित समुदाय के पक्ष में खड़े होने वाले नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर आए दिन हमले करवाए जा रहे हैं। आजमगढ़ के किसान नेता वीरेंद्र यादव पर भी हमला करवाया गया और हमले करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की गई। जबकि न्याय की बड़ी-बड़ी बातें करने वाली यह सरकार गैर भाजपा लोगों पर झूठी कार्रवाई कर उन्हें जेल में डालने से नहीं चुक रही है।
देवरिया : खेत और ग्रामीण मजदूरों को वर्ष भर काम और गरिमामय जीवन के लिए अखिल भारतीय खेग्रामस का धरना
ग्रामीण मजदूर, किसान लगातार बेरोजगारी का दंश झेल रहे हैं, जो काम उन्हें मिल रहा है, उसमें सरकार द्वारा तय न्यूनतम मजदूरी भी हासिल नहीं हो रही है। अपनी मांगों को पूरा करने के लिए 23 सितंबर को सुबह 11:00 बजे तहसील मुख्यालय भाटपार रानी में खेग्रामस (अखिल भारतीय खेत व ग्रामीण मजदूर सभा) द्वारा धरना प्रदर्शन किया जाएगा।
राजस्थान : किसानों के पशुपालन में होने वाले नुकसान को देखते हुए सरकार ने बजट में अनेक योजनाएँ लागू की
एक समय था किसान की आजीविका का मुख्य साधन खेती के साथ पशुपालन था लेकिन आज किसान पशुपालन से बचना चाहते हैं क्योंकि किसान को यहाँ लगातार नुकसान हो रहा है लेकिन राजस्थान सरकार ने अपने बजट में पशुपालन में बीमा जैसी महत्त्वपूर्ण योजना शुरू कर किसानों को इस काम में आगे आने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।
बिहार : बेहिसाब परेशानियों को देखकर खेती के प्रति नई पीढ़ी का रुझान घट रहा है
केंद्रीय बजट 2024-25 में भी कृषि और किसानों का विशेष ध्यान रखते हुए कई नई घोषणाएं कर कृषि और इससे जुड़े सेक्टरों के लिए 1.52 लाख करोड़ रुपए प्रावधान किया गया है। लेकिन कृषि समस्याओं और जरूरतों को देखते हुए यह पर्याप्त नहीं है। बीज और खाद की बढ़ी हुई कीमत के साथ सिंचाई की सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाने के कारण आने वाली पीढ़ी खेती-किसानी का काम नहीं करना चाह रही है। साथ ही बजट में हुई घोषणाएँ सीमांत किसान तक पहुँच पाएँ, ऐसी व्यवस्था की जानी जरूरी है।
Varanasi : वरुणा नदी में कई नालों का पानी गिरने से अब पानी खेती के लायक नहीं रहा
बनारस में वरुणा नदी के बहुत अधिक प्रदूषण के कारण किसान खेत की सिंचाई भी इस पानी नहीं कर पाते. यदि इसी तरह वरुणा प्रदूषित होती रही तो जल्द ही नाले में तब्दील हो जाएगी.
खेती पर बाज़ार की मार और सरकार की नीतियों से आक्रोश में हैं धानापुर (चंदौली) के किसान
अपर्णा -
चंदौली पूर्वांचल के सर्वाधिक पिछड़े जिलों में एक है लेकिन यहाँ धान की पैदावार समेत अनेक कृषि उत्पाद इतनी प्रचुरता में होते हैं कि वे देश के अन्य इलाकों तक भी जाते हैं। यहाँ धान की कई किस्में पैदा होती हैं जिनका एक बड़ा बाज़ार है। इसके बावजूद यहाँ के किसान बाज़ार की मनमानी और सरकारी नीतियों तथा स्थानीय विभागों से परेशान हैं। उनकी शिकायत है कि उन्हें अपनी फसल का उचित दाम नहीं मिल पाता। चंदौली के प्रमुख क्षेत्र धानापुर में सैकड़ों किसान गंगा कटान से पीड़ित हैं लेकिन जनप्रतिनिधियों ने उन्हें इस समस्या से उबारने में कोई सहयोग नहीं किया। अपनी व्यथा-कथा कहते किसान इन स्थितियों से बहुत आक्रोश में हैं।
किशनगंज – ‘सिल्की’ सपना टूट गया, बची सिर्फ रेशमी यादें
पूरे देश में खेती करने वाले किसानों का खस्ताहाल है। सरकारी सुविधा से न तो उन्हें बीज उपलब्ध हो पाता है न खाद और न ही बाजार। ऐसे में किसान उत्पादित फसल को औने-पौने दामों में बेचने को मजबूर हो जाता है या फिर अपना पुश्तैनी काम छोडकर किसी दूसरे काम को करते हुए बामुश्किल अपनी जीविका चला पाता है। बिहार के किशनगंज से रेशम की खेती करने वाले किसानों की जमीनी हकीकत की पड़ताल करती यह रिपोर्ट
आत्महत्या : मौसम की मार और कर्ज के बोझ ने फिर ली यूपी के एक किसान की जान
एनसीआरबी द्वारा ज़ारी ताजा आंकड़ों के अनुसार देश में प्रतिदिन 30 किसान आत्महत्या करने को मजबूर हैं।
बनारस के किसान क्यों ‘काशी द्वार प्रोजेक्ट’ की वजह से अपनी जान दे रहे हैं?
वाराणसी में पिंडरा ब्लॉक में काशी द्वार परियोजना प्रस्तावित है, जिसका विरोध यहाँ के किसान कर रहे हैं।
महाराष्ट्र : किसानों की पत्नियाँ कर्ज चुकाते जी रही हैं बदतर ज़िंदगी
आज समूचे देश में कृषि-क्षेत्र में 72 प्रतिशत से ज़्यादा लड़कियाँ और महिलाएँ दिन-रात पसीना बहा रही हैं। मगर उनका अस्तित्व आज भी उनके पति के अस्तित्व पर निर्भर करता है। फिर भी इन औरतों ने परिस्थितियों से जूझना बंद नहीं किया है। महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या के बाद उनकी पत्नियाँ किस तरह उनका कर्ज उतारकर जीवन जी रही हैं, पढ़िये ग्राउंड रिपोर्ट
आजमगढ़ : मोदी के लिए खड़ी फसल रौंदी गई, प्रशासन ने मुआवजा देने से किया इंकार
एक तरफ जहां देश के प्रधानमंत्री किसानों के हित की बात करते हैं वहीं दूसरी तरफ उनका आचरण किसान विरोधी नजर आता है। आजमगढ़ में किसानों की खड़ी फसल रौंद दी गई, अब जिला प्रशासन उचित मुआवजा देने में आनाकानी कर रहा है।
महाराष्ट्र : कर्ज़ से छुटकारा पाने के लिए आत्महत्या करें या गुलामगीरी पर गुलेल चलाएँ?
महाराष्ट्र का विदर्भ क्षेत्र का नाम किसानों की आत्महत्या के मामले में अक्सर सुनाई देता रहा है। लेखिका डॉ लता प्रतिभा मधुकर ने विदर्भ के यवतमाल और वर्धा जिले के मृतक किसानों की पत्नियों से मिलकर उनके संघर्ष और जीजीविषा को नजदीक से देखा। ये आत्महत्या न कर ज़िंदगी से क्यो और कैसे लड़ती हैं? पढ़िये ग्राउंड रिपोर्ट का भाग एक-
वाराणसी : काशी द्वार योजना के विरोध में किसानों का अनशन शुरू
काशी द्वार के नाम पर किसानों से ली जायेंगी 10 गांवों की 15 सौ बीघा जमीनें। किसानों ने चेताया है कि यदि योजना जल्द ही रद्द नहीं हुई तो लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करेंगे।
मिर्जापुर : सरकारी खरीद केंद्र न होने के कारण किसान एमएसपी से कम दाम पर बेच रहे हैं सरसों
किसान चाहते हैं कि सरसों भी तय की गई एमएसपी पर बिके। ब्लॉक और जिले स्तर पर सरसों के लिए कोई भी खरीदी केंद्र न होने से किसान खुले बाजार में औने-पौने दाम में सरसों बेचने के बाद खुद को छला हुआ महसूस कर रहे है
दिल्ली की सरहदों पर जुटेंगे देशभर के किसान, इस बार एमएसपी की गारंटी कानून बनवाने के लिए करेंगे संघर्ष
देश के किसान एक बार फिर आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। प्रमुख मुद्दा ‘एमएसपी की गारंटी’ है। 13 फरवरी को दिल्ली के प्रमुख...
आज़मगढ़ में वृद्धा ने लगाया पेंशन के नाम पर ज़मीन रजिस्ट्री कराने का आरोप
आजमगढ़। जिले के स्थानीय तहसील क्षेत्र में ज़मीन विवाद का मामला सामने आया है। यह मामला रसूलपुर पासीपुर गाँव का है। यहाँ गाँव की...
यूपी में किसान बेहाल, सरकार की नज़र में सब हैं खुशहाल
वाराणसी। 'पहले किसान कर्ज में डूबा था आज खुशहाल है', यह बात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने एक बयान में कही। यह भी कहा...
मेरठ : वन विभाग पर जमीन कब्जा करने का आरोप लगा किसान ने किया आत्मदाह का प्रयास किया, हालत गंभीर
मेरठ (भाषा)। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में कथित तौर पर एक किसान ने उसकी भूमि को सरकारी बताकर उस पर वन विभाग द्वारा...

