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narendra modi
चुनावबाज राजा ने जी20 को बनाया आत्म-प्रचार का तमाशा
मुहावरे जिस तरह बनते हैं, उस तर्ज पर यदि आने वाले दिनों में मर्ज का हद से गुजरना है मोदी का जी-20 हो जाना...
नफरत की राजनीति के घातक नशे से कैसे बचे वंचित समाज
तीन दिन पूर्व व्हाट्सप पर कोलकाता के एक घनिष्ठ मित्र द्वारा एक ऐसी सामग्री मिली, जिसकी अनदेखी न कर सका और यह आलेख लिखने...
मोदी सरकार की कारगुजारियों को देखकर कैसे उम्मीद हो कि भारत भेदभाव दूर करेगा
जिस देश में हजारों साल से जाति भेदभाव होता आ रहा है, जिसकी वजह से ही लोग आर्थिक विषमता झेल रहे हैं। ऐसे में...
फासिस्म को पराजित करने के मंसूबे में मजबूती से खड़े होते इंडिया के सामने चुनौतियों का चकव्यूह
पिछले दो महीने में भारत की राजनीति में विपक्ष ने जिस तरह से न्यूनतम शर्तों या अभी तक के परिदृश्य में बिना शर्तों के,...
नफरत की फितरत है सब कुछ निगलना, वह धर्म और मजहब नहीं देखती
अमरीका के केनेडी सेंटर में 24 जून को बोलते हुए जब नरेन्द्र मोदी भारत में हर सप्ताह एक नई यूनिवर्सिटी, हर दो दिन में...
संघ के दोमुंहें व्यवहार और संविधान विरोधी गतिविधियों का खामियाजा देश की जनता भुगत रही है
अपनी जांच के बाद हेमंत करकरे ने संघ के साथ प्रज्ञा सिंह और उनके सभी साथियों के संबंध खोज निकाले थे। इसीलिए प्रज्ञा को छुड़ाने के लिए संघ की इकाई भाजपा और उसके शीर्षस्थ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने उनके लिए गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर उसे जेल में अच्छी तरह से रखने की सिफारिश की।
हम चाँद पर पहुँचने के गुमान में थे और दक्षिण अफ्रीका में हमारी तानाशाही का चेहरा उजागर हो गया
मेजबान देश दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा के आमंत्रण पर अन्य देशाध्यक्षों की तरह भारतीय प्रधानमंत्री भी दक्षिण अफ्रीका पहुंचे थे पर इस यात्रा पर पहुंचते ही जहां भारतीय मीडिया में यह छपने लगा कि जोहानिसबर्ग एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भव्य स्वागत हुआ, वहीं साउथ अफ्रीका की मीडिया में प्रधानमंत्री के स्वागत पर घमासान मच गया।
दो दिन की संसदीय बहस में भी अनुत्तरित रहे राहुल गांधी के सवाल
यदि वह कांग्रेस के अतीत की गलती है, तब भी क्या देश के प्रधानमंत्री को इस विषय पर संसद में अपना पक्ष नहीं रखना चाहिए। जबकि पूरा विपक्ष और देश के तमाम नागरिक संगठन इसे पूरी तरह से सरकार की असफलता ही नहीं, बल्कि सरकार का सुनियोजित प्रयास बता रहे हैं। इस सबके बावजूद प्रधानमंत्री इस मामले पर कुछ भी कहने से लगातार बचते रहे हैं।
सरकार पर हमलावर हुए राहुल गांधी, कहा- आप भारत माता के हत्यारे हो
मैं आपका धन्यवाद करना चाहता हूं कि आपने मेरी सांसदी बहाल की। पिछली बार जब मैं बोला तो थोड़ा कष्ट भी पहुंचाया। इतनी जोर से अडाणीजी पर फोकस किया कि जो आपके सीनियर नेता हैं, उन्हें थोड़ा कष्ट हुआ। जो कष्ट हुआ, उसका असर आप पर भी हुआ। इसके लिए मैं माफी मांगता हूं। मैंने सिर्फ सच्चाई रखी थी।
नरेंद्र मोदी तिलक पुरस्कार के योग्य हैं ?
मणिपुर में निर्वस्त्र महिलाओं का वीडियो बनाने वाले को गिरफ्तार कर लिया गया है। दूसरी तरफ, गृहमंत्री अमित शाह का वक्तव्य देखकर लगता है...
कूड़े और पानी की बदबू के बीच अटकी है हुकुलगंजवासियों की ज़िंदगी
सरकारी पानी की गंदगी के कारण खड़ा हो रहा 'आरओ वॉटर' का बाज़ार
वाराणसी। 'सुना पत्रकार भइया, बनारस में अमृत जल योजना क खाली ढिंढोरा...
देश में लज्जा और उधर निर्लज्जता की सारी हदें पार करती सत्ता
इधर मणिपुर में घटी घटना राष्ट्रीय शर्म से आगे जाकर देश के लिए अंतर्राष्ट्रीय लज्जा का विषय बन चुकी है। उधर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी...
मोदी जी को ग़ुस्सा क्यों आता है?
मोदी जी जो कुछ भी करते हैं या बहुत बार नहीं भी करते हैं, विरोधी षडयंत्रपूर्वक उनके खिलाफ दुष्प्रचार का मौका निकाल ही लेते...
सर्व सेवा संघ खाली कराये जाने के विरोध में प्रतिरोध सभा की गई
वाराणसी। राजघाट स्थित सर्व सेवा संघ परिसर को पुलिस बल प्रयोग कर प्रशासन और रेलवे द्वारा खाली कराए जाने के विरोध में गांधी जनों...
सर्व सेवा संघ को जबरन ढहाने पहुँचे अमले के पास कोर्ट का कोई आदेश नहीं था
अपर्णा -
अफलातून दीवाल पर लगी एक नोटिस की तरफ इशारा करते बताते है कि एविक्शन का एक आर्डर 27 जून को आया था (जो सर्व सेवा संघ के प्रकाशान भवन के सामने चस्पा था) जिसमें 30 जून तक खाली करने का आदेश था। जब सुप्रीम कोर्ट का आदेश एक बार आ गया तो उन्हें एविक्शन का एक फ्रेश आर्डर देना चाहिए था। क्या ऐसा कोई आर्डर अभी प्रशासन के पास है या प्रशासन ने सर्व सेवा संघ को ऐसी कोई नोटिस हाल-फ़िलहाल में जारी की है?
बंगाल में हिंसा के प्रचारक मणिपुर पर क्यों नहीं चीखते!
कोलकाता। करीब ढाई महीने से हिंसा की आग में जलते मणिपुर से एक शर्मनाक दिल दहला देने वाले वीडियो के वायरल हो जाने के...
अंदरूनी मामले कितने अंदरूनी, बाहरी आलोचनाएं कितनी बाहरी
वास्तव में यह दिन 1879 में इसी रोज शुरू हुई फ्रांसीसी क्रांति की सालगिरह के रूप में मनाया जाता है, जिसकी शुरुआत इस कुख्यात जेल में बंद क्रांतिकारियों को छुड़ाने के लिए हमला कर जेल तोड़े जाने के साथ हुई थी। जाहिर है कि भारत से भी बढ़कर फ्रांस में, मानवता को 'स्वतंत्रता, समानता तथा भाईचारा' के लक्ष्य देने वाली, इस फ्रांसीसी क्रांति की सालगिरह की परेड में मुख्य अतिथि प्रधानमंत्री मोदी जैसे भाईचारा-विरोधी नेता को बनाए जाने की काफी आलोचना हुई है।
टीबी के खिलाफ अपनों से जंग हारता है मरीज़
'साल 2015 की बात है, तब मैं छोटे-छोटे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाता था। इसी बीच मैं खांसी-बुखार से पीड़ित हो गया। जांच के बाद...
संघ द्वारा बोई गई नफरत की चिंगारी से जल रहा है मणिपुर
मणिपुर, मई माह की तीन तारीख से जातीय हिंसा के कारण चर्चा में है। सत्तारूढ़ पार्टी हिंसा रोक पाने में पूरी तरह से असफल...
सड़क पर हुए जलभराव में की गई धान की रोपाई, भाजपा के विकास मॉडल को बताया झूठा
भगवानपुर-छित्तूपुर मुख्य मार्ग की दुर्दशा, इस रास्ते ट्रॉमा सेंटर पहुँचने में हो जाती है देर
स्मार्ट सिटी के तमगे से विभूषित बनारस शहर और गाँव...

