प्रोफेसर चौथीराम यादव हमारे दौर के महत्वपूर्ण आलोचक और ओजस्वी वक्ता हैं। अपनी सुदीर्घ जीवन यात्रा में उन्होंने अनेक स्तरों पर कार्य किया है। वे एक लोकप्रिय प्राध्यापक रहे हैं। बनारस की हर जरूरी पहलकदमी में शामिल रहे हैं। चाहे वह छात्र-छात्राओं के अधिकारों का संघर्ष रहा हो चाहे सामाजिक सद्भाव को लेकर होने वाली सांस्कृतिक गतिविधियां प्रोफेसर चौथीराम यादव हमेशा पहली पंक्ति में खड़े मिलते रहे हैं। गाँव के लोग के लिए उनके जीवन और कृतित्व को लेकर उनसे बहुत लंबी बातचीत रिकॉर्ड की गई जो क्रमशः पाँच-छः खंडों में प्रकाशित की जाएगी। इस पहले हिस्से में उन्होंने अपने गाँव और शिक्षा के साथ ही गाजीपुर में पहली नौकरी एवं बीएचयू में आने तक के अनुभवों को साझा किया है।
इधर बीच
ग्राउंड रिपोर्ट
बीएचयू में जाति का कॉकस हमेशा से ही मजबूत रहा है- चौथीराम यादव
प्रोफेसर चौथीराम यादव हमारे दौर के महत्वपूर्ण आलोचक और ओजस्वी वक्ता हैं। अपनी सुदीर्घ जीवन यात्रा में उन्होंने अनेक स्तरों पर कार्य किया है। वे एक लोकप्रिय प्राध्यापक रहे हैं। बनारस की हर जरूरी पहलकदमी में शामिल रहे हैं। चाहे वह छात्र-छात्राओं के अधिकारों का संघर्ष रहा हो चाहे सामाजिक सद्भाव को लेकर होने वाली […]

गाँव के लोग
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