सर्द हवाओं से बचने के लिए आशा ट्रस्ट ने मुसहर बस्ती में बाँटा कम्बल

भुवाल, विशेष संवाददाता, गाँव के लोग डॉट कॉम

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आज से एक पखवाड़े पूर्व सरकार द्वारा उजाड़े गये करसड़ा गाँव की मुसहर बस्ती के पीड़ित परिवारों के लिए सर्दी की रातें बहुत भारी पड़ रही हैैं। रात में खुले आसमान के नीचे सोना उनके लिए मरने के बराबर हो गया है। एक तरह से देखा जाए तो हर रोज सुबह उनका जगना दूसरा जन्म लेने के बराबर होता है। रोज जीने-मरने के बीच पीड़ित परिवारों को तलाश थी कि कोई आकर उन्हें सर्द हवाओं से बचने में मदद करे और मुसीबत से बचा सके। और इस काम को पूरा किया आशा ट्रस्ट ने, उनके बीच कम्बल बाँट करके। हालांकि ऐसे कई लोग हैं, जिनकी संवेदना और सहानुभूति मरी नहीं है। इंसानियत उनके रग-रग में समाई हुई है। ऐसे लोग ही गरीबों की पीड़ा को समझते हुए नेक कार्य के लिए आगे आते हैं और गर्म कपड़े, कंबल आदि जरूरत की चीजों का वितरण कर लोगों की सेवा के लिए दूसरों को भी प्रेरित करते हैं।

पीड़ितों की जरुरत और मजबूरियों को देखते हुए आशा ट्रस्ट ने मिशाल पेशकर शनिवार को करसड़ा गांव के उजाड़े हुए मुसहर बस्ती के पीड़ितों के बीच कम्बल वितरित किया। हम पीड़ित परिवारों की ओर से इनके प्रति आभार व्यक्त करते हैं। समाज में आज भी कई ऐसे लोग हैं, जो गरीबों की पीड़ा को समझते हैं और उनकी मदद के लिए आगे भी आते हैं। सहयोगियों का यह कार्य समाज को प्रेरणा देने वाला है।

 

दलित फ़ाउंडेशन से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता राजकुमार गुप्ता ने बताया कि यहाँ के मुसहरों के आशियाने को तहसील प्रशासन द्वारा गैर क़ानूनी तरीक़े से बुल्डोजर लगा कर उजाड़े हुए आज पूरे 16 दिन बीत गया है। पीड़ित परिवारों के छोटे-बड़े सभी सदस्य खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। उनके लिए सर्दी का मौसम काफी कष्टप्रद होता जा रहा है। बड़े बूढ़े बच्चे लगातार बीमार हो रहे हैं। सर्दी उनके लिए भारी मुसीबत बनती जा रही है। दिन में भी उनको परेशानी होती है, लेकिन धूप निकलने पर कुछ राहत मिल जाती है। इस स्थिति में पीड़ित व गरीब परिवार के लिए गर्म कपड़े और कंबल आदि की जरूरतें बढ़ गयी थी।
पीड़ितों की जरुरत और मजबूरियों को देखते हुए आशा ट्रस्ट ने मिसाल पेशकर शनिवार को करसड़ा गांव के उजाड़े हुए मुसहर बस्ती के पीड़ितों के बीच कम्बल वितरित किया। हम पीड़ित परिवारों की ओर से इनके प्रति आभार व्यक्त करते हैं। समाज में आज भी कई ऐसे लोग हैं, जो गरीबों की पीड़ा को समझते हैं और उनकी मदद के लिए आगे भी आते हैं। सहयोगियों का यह कार्य समाज को प्रेरणा देने वाला है। यही कारण है कि हम पीड़ितों की मदद के लिए लोगों से लगातार अपील कर रहे है। राजकुमार गुप्ता ने अपनी बात को रखते हुए कहा कि ऐसे संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के बदौलत ही पिछड़ा, वंचित और मजदूर वर्ग के वे लोग जो सत्ता में कोई पहुंच नहीं रखते हैं; विपक्षी दल के नेता केवल वोट के बहाने उनके दरवाजे पर हाजिरी लगाते हैं, कुछ करने की जज्बा बना लेते हैं और अपना लक्ष्य प्राप्त करते हैं। कम्बल वितरण के दौरान राजकुमार गुप्ता, योगीराज सिंह पटेल, महेंद्र राठौर, अनिल कुमार, बीरभद्र सिंह, राजेश कुमार, राहुल कुमार, धर्मू कुमार, बुद्धु राम, सदानंद, विजय, शंकर आदि लोग उपस्थित रहे।
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