Friday, April 19, 2024
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जिलेटिन रॉड के हादसे को मोबाइल विस्फोट बताने का प्रयास

अच्छे इलाज के लिए घायल आशीष को लेकर दर-दर भटक रहा गरीब परिवार मीरजापुर। जिस जिलेटिन रॉड को पहाड़ों को तोड़ने और ब्लास्टिंग के काम में लिया जाता है, बच्चे ने उसे खिलौना समझ मोबाइल की बैटरी से जैसे ही जोड़ा, वह ब्लास्ट कर गया। हादसे में आशीष (14) बुरी तरह से जख्मी हो गया। […]

अच्छे इलाज के लिए घायल आशीष को लेकर दर-दर भटक रहा गरीब परिवार

मीरजापुर। जिस जिलेटिन रॉड को पहाड़ों को तोड़ने और ब्लास्टिंग के काम में लिया जाता है, बच्चे ने उसे खिलौना समझ मोबाइल की बैटरी से जैसे ही जोड़ा, वह ब्लास्ट कर गया। हादसे में आशीष (14) बुरी तरह से जख्मी हो गया। उसके दोनों हाथ के पंजे फट गए, आंखों पर भी ब्लास्टिंग का असर हुआ है। गरीब परिवार बच्चे का इलाज कराने में सक्षम नहीं है। बेहतर उपचार के लिए उसे सरकारी अस्पताल से रेफर किया जा रहा है। यह दर्द भरी दास्तां मीरजापुर के एक परिवार की है, जहां के मुख्यालय स्थित अस्पताल को अब मेडिकल कालेज के नाम से जाना जाता है। जहां दो कैबिनेट मंत्री (एक केंद्र में दूसरे प्रदेश में), दो एमएलसी, दो सांसद (एक राज्यसभा), पांच विधायक, जिला पंचायत अध्यक्ष से लगायत जनप्रतिनिधियों की पूरी फौज तैनात है। बावजूद इसके गरीब बेबस को उपचार के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।

जनपद मुख्यालय से तकरीबन 75 किलोमीटर तथा राजगढ़ विकास खंड मुख्यालय से 25 किलोमीटर की दूरी पर तालर गांव की पहाड़ी पर दो दिनों पूर्व देर शाम हुए ब्लास्ट ने लोगों को सकते में डाल दिया था। मीरजापुर के राजगढ़ थाना क्षेत्र के तालर गांव के पहाड़ी पर स्थित जंगल में बसे पड़ोसी जनपद सोनभद्र के बसदेवा गांव निवासी आशीष कुमार विश्वकर्मा (14) पुत्र सुरेश अपने ननिहाल आया हुआ था। 31 मई, 2023 (बुधवार) की शाम को तकरीबन 7 बजे आशीष ब्लास्टिंग तार हाथ में लेकर खेल रहा था। खेलने के ही दौरान उसने मोबाइल की बैटरी में तार लगा दिया। ब्लास्ट होने से आशीष की एक आंख और दोनों हाथ झुलस गए। बालक को परिजनों द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र राजगढ़ ले जाया गया। हालत गंभीर देख उसे जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया है। ग्राम प्रधान तालर राजकुमार सिंह ने बताया कि दूसरे दिन गुरुवार की आशीष के घायल होने की सूचना मिली थी। स्वास्थ्य केंद्र में सुविधाएँ नहीं होने के कारण उसे रेफर किया गया है। इस मामले में ग्रामीण बताते हैं कि जल निगम की टंकी और कर्मचारियों के आवास पास में ही है। निगम के ठेकेदार जिलेटिन रॉड को सुरक्षित नहीं रखते। संभवतः इसी कारण रॉड आशीष के हाथ लग गया।

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सरकारी अस्पताल से संतोषजनक मदद नहीं

घायल के परिजनों के मुताबिक, आशीष को सबसे पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र राजगढ़ ले जाया गया जहां से मंडलीय अस्पताल मीरजापुर के लिए रेफर कर दिया गया। मेडिकल कॉलेज का दर्जा होने के बावजूद यहां समुचित उपचार नहीं मिला। घायल को वाराणसी के लिए रेफर कर दिया गया। परिजन बालक को लेकर वाराणसी से मधुपुर (सोनभद्र) स्थित एक निजी अस्पताल आ गए। जहां आंख के डॉक्टर से मिलकर बालक का इलाज कराया जा रहा है। उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। आर्थिक तंगी और ग़रीबी बालक के बेहतर उपचार में रोड़ा बनी हुई है।बेटे की सलामती के लिए परिजन रिश्तेदारों से आर्थिक मदद मांग रहे हैं।

तालर ग्राम प्रधान राजकुमार सिंह बताते हैं कि आशीष के परिजन जहां रहते हैं, वहां लाइट की व्यवस्था नहीं हैं। सिर्फ सोलर लाइट का एक छोटा पैनल लगा हुआ है, जो मोबाइल चार्ज और बल्ब जलाने के लिए इस्तेमाल होता है। हालत यह है कि पहाड़ी पर बसे लोग लगभग एक किलोमीटर दूर से पीने के लिए पानी लाते हैं। ऐसे में जल निगम की लापरवाही बच्चे के परिवार पर भारी पड़ गई है।

पहाड़ों को तोड़ने, खनन-खदानों में प्रयोग होने वाला ब्लास्टिंग तार आखिरकार कैसे आशीष के हाथों तक पहुंचा, यह जांच का विषय है। वहीं जिलेटिन रॉड के ब्लास्ट होने पर अपर पुलिस अधीक्षक नक्सल ओपी सिंह ने राजगढ़ थाना प्रभारी निरीक्षक को मामले की जांच करने का निर्देश दिया है। दूसरी ओर, ब्लास्टिंग से गंभीर रूप से घायल हुए आशीष के घर से जल निगम के कार्यालय की दूरी महज 500 मीटर है। जल निगम का कार्यालय भी जंगल में बना हुआ है। जहां पाईप लाइन बिछाने के दौरान पहाड़ों को तोड़ने वास्ते ब्लास्टिंग किया जाता है, जिसके लिए जिलेटिन रॉड रखा जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि यह (ब्लास्टिंग तार) बच्चे के हाथ में आया कैसे? हालांकि, इस बारे में किसी को कुछ भी पता नहीं है।

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ग्रामीण मान रहे ठेकेदार की लापरवाही

ब्लास्टिंग तार से अपनी एक आंख और शरीर के अन्य हिस्से जख्मी कर बैठे आशीष के परिजनों को उसके उपचार के लिए जहां काफी परेशान होना पड़ रहा है, वहीं ग्रामीण इस हादसे में जल निगम के ठेकेदार की लापरवाही मान रहे हैं। ग्रामीणों का सवाल हैं कि यदि यही ब्लास्टिंग तार असमाजिक तत्वों के हाथ लग जाता तो क्या होता? ग्रामीणों का कहना है कि पाइप लाइन बिछाने के कार्य के दौरान सावधानी व सतर्कता को पूरी तरह नजरअंदाज कर ग्रामीणों के लिए जल निगम मौत की खाई खोदता जा रहा है। यह हादसा भी उसी का हिस्सा है।” वहीं, पहाड़ों को तोड़ने के काम में आने वाले ‘तार’ से हुए विस्फोट के दौरान गंभीर रूप से घायल बालक को लेकर भी अफवाहों का बाजार गर्म है। पहले इसे मोबाइल की बैटरी फटने से घायल होना करार देकर सच को छुपाए जाने का भरसक प्रयास किया जाता रहा, लेकिन जैसे ही खुलासा हुआ कि यह जिलेटिन रॉड से हुए विस्फोट का परिणाम है, तो खलबली मच गई।

परिवार के साथ घायल आशीष

नक्सलियों से कहीं ज्यादा ब्लास्टिंग का बना रहता है खौफ

नक्सल प्रभावित इलाकों में धमक रखने वाले राजगढ़ विकास खंड क्षेत्र में भले ही नक्सलियों की धमक अब समाप्त हो चुकी है, लेकिन ब्लास्टिंग का खौफ आज भी बरकरार है। जिनके जद में आकर जंगली जीव-जंतु मौत के मुंह में समा जा रहें हैं, तो गाहे-बगाहे लोग भी इनकी चपेट में आकर घायल होते हैं। मासूमों के लिए तो यह खिलौने के तौर पर मौत का खिलौना सरीखे होते हैं, बावजूद इसके इसे सुरक्षित रखने से लेकर इसके लिए कोई गाईड लाईन न होने से यह लोगों के लिए ख़तरा बने हुए हैं। मजे कि बात तो यह है कि पूर्व में जिले के मड़िहान, अहरौरा के खनन क्षेत्र से लगायत आसपास के इलाकों में इन्हीं ब्लास्टिंग के तार से हादसे हो चुके हैं। फिर भी इनसे कोई सबक ले पा रहा है।

गाँव के लोग
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