होमशिक्षा
शिक्षा
शिक्षा
बिहार : ग्रामीण स्कूलों में क्यों अधूरी रह जाती है डिजिटल शिक्षा?
शिक्षा मंत्रालय के यू-डाइस प्लस (UDISE+) के आंकड़े बताते हैं कि बिहार में केवल लगभग 53.6 प्रतिशत स्कूलों में ही पुस्तकालय की सुविधा उपलब्ध है, जबकि कंप्यूटर की सुविधा वाले स्कूलों की संख्या महज 20 से 25 प्रतिशत के आसपास है। राष्ट्रीय औसत की तुलना में यह स्थिति काफी कमजोर है। राज्य के 94 हजार से अधिक स्कूलों में से लगभग 31 हजार स्कूलों में पुस्तकालय नहीं हैं और 70 हजार से अधिक स्कूलों में कंप्यूटर की सुविधा उपलब्ध नहीं है। यह आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल शिक्षा और पठन संस्कृति अभी भी मजबूत नहीं हो पाई है।
बिहार के ग्रामीण समाज में लड़कियों के लिए उच्च शिक्षा की चुनौतियां
बिहार में महिला साक्षरता दर में वृद्धि जरूर हुई है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च शिक्षा में लड़कियों की भागीदारी अभी भी सीमित है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, 2015 के आसपास यह प्रतिशत लगभग 10–12 प्रतिशत था, जो धीरे-धीरे बढ़कर 2024-25 तक करीब 18–20 प्रतिशत तक पहुंचा है। हालांकि यह वृद्धि सकारात्मक संकेत देती है, लेकिन राष्ट्रीय औसत की तुलना में यह अभी भी काफी कम है।
राजस्थान : वंचित समुदाय सरकारी योजनाओं की कमी के चलते शिक्षा पाने में नाकामयाब
राजस्थान में सरकारी स्कूलों की स्थिति का हाल कुछ ऐसा है कि स्कूलों में मास्टर की कमी सबसे बड़ी समस्या है। उदाहरण के लिए, राज्य में लगभग 1.17 लाख शिक्षण पदों पर अभी भी टीचरों की नियुक्ति नहीं हुई है। स्कूलों को उच्च माध्यमिक स्तर पर अपग्रेड किया गया है, लेकिन नए पदों पर टीचर की नियुक्ति नहीं होने के कारण कक्षाएँ नियमित रूप से नहीं चल पा रही हैं। UDISE ( Unified District Information System for Education) रिपोर्ट बताती है कि 7,688 स्कूलों में सिर्फ एक ही शिक्षक होते हैं, और 2,167 सरकारी स्कूल ऐसे हैं जहाँ एक भी छात्र नामांकित नहीं है।
छतीसगढ़ शिक्षा विभाग : सरकार की गति कुछ और भविष्य की दिशा कोई और
छत्तीसगढ़ में भाजपा शासन में 4077 विद्यालय बंद किए जा चुके हैं। सरकार शिक्षा के स्तर सुधारने और नई भर्ती करने की बजाए उसे बिगाड़ने का काम कर गाँव के बच्चों को पढ़ाई से वंचित करने की व्यवस्था बना रही है। सदैव से भाजपा की यही रणनीति रही है कि शिक्षा एक खास वर्ग ही हासिल कर पाए। भाजपाशासित प्रदेशों में शिक्षा और शिक्षा नीति में लगातार बदलाव कर तर्क सम्मत पाठ्यक्रमों को हटाकार धार्मिक विषयों को शामिल करने की होड़ लगी है।
देश के विश्वविद्यालयों में भर्ती प्रक्रिया प्रश्नों के घेरे में
असली जातिवाद देखना है तो विश्वविद्यालयों की वर्तमान स्थिति को देखा जा सकता है। जातिवाद के सबसे क्रूर, घिनौने और घिनौने स्थान विश्वविद्यालय बन गए हैं। जहां गले तकभ्रष्टाचार खुले आम हो रहा है। विश्वविद्यालय के मुखिया से लेकर प्रोफेसरों की नियुक्ति अब आरएसएस और भाजपा के इशारे पर हो रही है।
जेएनयू में फिर हिंसक घटना हुई, एबीवीपी पर हमला करने का आरोप
भाषा -
झड़प विश्वविद्यालय के भाषा संस्थान की इमारत में बृहस्पतिवार देर रात हुई। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और वाम समर्थित समूहों के छात्रों ने एक-दूसरे के खिलाफ वसंत कुंज उत्तर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई है। विश्वविद्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि कई छात्रों को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
वाराणसी : काशी विद्यापीठ में रिजल्ट में देरी से भड़के छात्रों ने प्रशासनिक भवन में जड़ा ताला
रिजल्ट घोषित होने में हो रही देरी से प्रशासनिक भवन के सामने छात्र नारेबाजी करने लगे। थोड़ी ही देर में छात्र प्रशासनिक भवन के मुख्य गेट में ताला जड़ दिए, जिससे अफरातफरी की स्थिति उत्पन्न हो गई।
फ़तेहपुर : डॉ. भीमराव आम्बेडकर राजकीय महाविद्यालय में सरस्वती की मूर्ति लगाने का विरोध
फ़तेहपुर। बाबा साहेब डॉ. भीमराव आम्बेडकर राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय (फ़तेहपुर) परिसर में सरस्वती मूर्ति लगाने हेतु मंदिर निर्माण का कार्य चल रहा है।...
केरल के शिक्षा विभाग ने 1890 के दशक से प्रकाशित 1,000 से अधिक पाठ्यपुस्तकों का किया डिजिटलीकरण
भाषा -
तिरुवनंतपुरम (भाषा) केरल के शिक्षा विभाग ने विभिन्न विषयों पर आधारित किताबों डिजिटलीकरण किया है। यह डिजिटलीकरण 1,250 से अधिक पाठ्यपुस्तकों का किया गया...
पेपर लीक रोकने हेतु आ सकता है सख़्त कानून, दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई
नई दिल्ली: केंद्र सरकार पेपर लीक मामले से निपटने के लिए लोकसभा में एक विधेयक पेश करने की तैयारी में है। इस विधेयक का...
ठंड के कारण कक्षा में बच्चे की हालत बिगड़ी, कुछ दिन और स्कूल बंद रखने की माँग
भदोही। जिले के विकास खंड ज्ञानपुर के प्राथमिक विद्यालय घोरहां में सुबह स्कूल पहुँचे बच्चे की हालत बिगड़ गई। कांपते हुए वह बेहोश हो...

