घोसी,मऊ। अखिलेश यादव ने घोसी में जनसभा को आगाह करते हुए कहा था कि 2024 में अगर बीजेपी की सरकार बनी तो हम और आप फिर कभी वोट नहीं दे पाएंगे, क्योंकि वर्तमान बीजेपी की सरकार संविधान विरोधी है। यह सरकार संविधान को ही बदलना चाह रही है। घोसी में जनसभा को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने वर्तमान बीजेपी सरकार को किसान और नौजवान विरोधी बताते हुए कहा कि आज किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। युवाओं को रोजगार मांगने पर लाठियों से पीटा जा रहा है। डबल इंजन की यह सरकार हर स्तर पर फेल नजर आ रही है।
वहीँ दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोसी की जनता से पार्टी के प्रत्याशी दारा सिंह चौहान को जिताने की अपील की। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि सुबह का भूला शाम को घर लौट आए तो उसे भूला नहीं कहते। मऊ जिले का विकास सिर्फ एनडीए के नेतृत्व वाली डबल इंजन की सरकार ही कर सकती है। इसी सभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी को गुंडों और बदमाशों की हिमायती पार्टी कह डाला।
अब सवाल यहाँ पर उठता है कि क्या चुनाव के वक्त सार्वजनिक मंच से किसी पार्टी को गुंडों और बदमाशों की पार्टी कहना आचार संहिता का उल्लंघन नहीं है। अगर देखा जाय तो उत्तर प्रदेश के बीजेपी के कुल 312 विधायकों में से 114 के ऊपर आपराधिक मुकदमे चल रहे हैं। इनमें से 83 के ऊपर गंभीर आपराधिक केस हैं। वहीं सपा के 14 विधायकों आपराधिक केस चल रहें हैं, तो बसपा के 5, कांग्रेस के 1 विधायक पर आपराधिक मुक़दमा चल रहा है।
ऐसे में एक प्रश्न खड़ा होता है कि क्या मुख्यमंत्री योगी का सार्वजनिक मंच से एक पार्टी को गुंडों और माफियाओं की पार्टी कहना उचित है, जबकि देखा जाय तो उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा आपराधिक मामले बीजेपी सरकार के विधायकों के ही ऊपर हैं। क्या चुनाव आयोग को इस पूरे मामले का का संज्ञान नहीं लेना चाहिए।
[bs-quote quote=”दलित वर्ग अब भी बीजेपी से नाराज चल रहा है। उसका वोट किसी भी स्थिति में बीजेपी को नहीं जायेगा। घोसी विधानसभा क्षेत्र में लगभग चार लाख बीस हजार वोटर हैं। इनमें से मुस्लिम 80-85 हजार, दलित 65- 70 हजार, यादव 55-60 हजार, राजभर 50-55 हजार, चौहान 40-45 हजार, भूमिहार 20 हजार के लगभग और 15 हजार ठाकुर वोटर हैं।” style=”style-2″ align=”center” color=”#1e73be” author_name=”” author_job=”” author_avatar=”” author_link=””][/bs-quote]
उत्तर प्रदेश की घोसी विधानसभा सीट पर 5 सितम्बर को होने जा रहा उपचुनाव कई मायनों में बेहद अहम है यह चुनाव अब महज एक विधानसभा सीट तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि एनडीए बनाम इंडिया गठबंधन का लिटमस टेस्ट बन गया है। घोसी उपचुनाव के लिए बीजेपी ने हाल ही में सपा के विधायक पद से इस्तीफा देकर आए दारा सिंह चौहान को अपना उम्मीदवार बनाया तो वहीं, सपा ने अपने पुराने धुरंधर नेता सुधाकर सिंह पर विश्वास जताया है। कुल मिलकर देखा जाय तो यह मुकाबला एनडीए बनाम इंडिया गठबंधन के बीच हो चुका है।
घोसी का यह उपचुनाव कई मामलों में रोचक होने जा रहा है
सपा के सुधाकर सिंह को कांग्रेस के अलावा इंडिया गठबंधन के घटक दलों का समर्थन प्राप्त है तो वहीं दूसरी तरफ बीजेपी को ओमप्रकाश राजभर की पार्टी सुभासपा का समर्थन प्राप्त है। बहुजन समाज पार्टी ने इस उपचुनाव में अपना कोई उम्मीदवार नहीं उतरा है, ऐसे में चुनाव विश्लेषकों का मानना है कि इसका सीधे-सीधे फायदा समाजवादी पार्टी को मिलेगा, क्योंकि दारा सिंह चौहान जीत जायेंगे तो लोकसभा चुनाव के लिए ओमप्रकाश राजभर अपनी दावेदारी पेश कर देंगे। दलित वर्ग अब भी बीजेपी से नाराज चल रहा है। उसका वोट किसी भी स्थिति में बीजेपी को नहीं जायेगा। घोसी विधानसभा क्षेत्र में लगभग चार लाख बीस हजार वोटर हैं। इनमें से मुस्लिम 80-85 हजार, दलित 65- 70 हजार, यादव 55-60 हजार, राजभर 50-55 हजार, चौहान 40-45 हजार, भूमिहार 20 हजार के लगभग और 15 हजार ठाकुर वोटर हैं।
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देखा जाय तो मुस्लिमों का वोट किसी भी दशा में समाजवादी पार्टी से इतर नहीं जायेगा। यादवों का वोट समाजवादी पार्टी का बंधा-बंधाया वोट है। जबकि राजभर और चौहानों का वोट बीजेपी को मिलना तय है, इन वोटरों में दलितों का वोट जिस तरफ जायेगा उसी के माथे पर जीत का तिलक लगेगा। स्थानीय स्तर पर देखा जाय तो सुधाकर सिंह की छवि, एक मिलनसार और कर्मठ नेता के रूप में रही है। वहीं दूसरी तरफ दारा सिंह चौहान की छवि एक दलबदलू नेता के रूप में हो चुकी है, जिसका असर इस उपचुनाव में दिखाई पड़ सकता है। ठाकुर एक स्वाभिमानी जाति है। वह कभी भी अपने लोगों को छोड़कर पिछड़ों के साथ नहीं जायेंगे। ठाकुरों का स्वाभिमान दारा सिंह चौहान की नैया को बीच मँझधार में डुबो सकता है।
यूँ तो देखा जाय तो उत्तर प्रदेश की घोसी विधानसभा सीट की लड़ाई दो ही पार्टियों सपा और बीजेपी के बीच है। दोनों पार्टियाँ अपनी-अपनी जीत के प्रति आश्वस्त हैं लेकिन स्थानीय स्तर पर वोटरों को धमकाने जैसे मामले भी सामने आ रहे हैं। यही नहीं वोटर लिस्ट में बड़ी संख्या में लोगों के नाम के साथ छेड़खानी की गयी है, जिसकी शिकायत समाजवादी पार्टी के नेता शिवपाल यादव और रामगोपाल यादव चुनाव आयोग से कर चुके हैं। देखना अब यह है कि चुनाव आयोग इस पूरे मामले को कितनी गंभीरता से लेता है। चुनाव में सत्ता पक्ष द्वारा सत्ता की हनक दिखाकर चुनाव को प्रभावित करने की कोशिशें भी लगातार हो रही हैं, ऐसे में निष्पक्ष चुनाव की उम्मीद कैसे की जाय यह एक बड़ा सवाल है!
राहुल यादव गाँव के लोग से संबद्ध हैं।




