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मोहम्मद दीपक : देश में बिगड़ती दोस्ती के हालात में भाईचारा बनाए रखना
लोकतंत्र को एक सांप्रदायिक राष्ट्रवादी देश में बदलने की इस कोशिश के दौरान, उन्होंने खासकर मुसलमानों और ईसाइयों के खिलाफ नई-नई भाषाएं और नारे बनाए। अब हालात बहुत खराब हैं। सामाजिक कॉमन सेंस मुसलमानों के खिलाफ नफरत से भरा है और यह दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा है। लेकिन हिंदू राष्ट्रवाद के मानने वालों की फैलाई गई नफ़रत की बाढ़ में इंसानियत पूरी तरह खत्म नहीं हो जाएगी। दीपक उन गहरे हिंदू-मुस्लिम रिश्तों का जीता-जागता उदाहरण हैं जो यहां पहले थे लेकिन अब एक अपवाद बन गए हैं।
वेनेज़ुएला पर हमला असभ्य गुंडागिरी की निशानी
दुनिया अच्छे से जानती है कि रूस और यूक्रेन के दरम्यान जंग छेड़ने और नाटो के मसले के पीछे भी अमेरिकी षड्यंत्र है, और फ़लस्तीन के ग़ज़ा में जारी नरसंहार के पीछे भी इजरायल को हासिल अमेरिकी शह है और अब अमेरिकी राष्ट्रपति एक सनकी की तरह व्यवहार करते हुए अपनी सनक में दुनिया को नाभिकीय युद्ध के मुहाने पर ला रहे हैं।
अल्पसंख्यक ईसाइयों की दुर्दशा
यह प्रोपेगेंडा कि ईसाई धर्म परिवर्तन कर रहे हैं, इस पर फिर से विचार करने की ज़रूरत है। ईसाई धर्म भारत में एक पुराना धर्म है, जो 52 ईस्वी में सेंट थॉमस के ज़रिए मालाबार तट पर आया था। यह सामाजिक धारणा कि यह ब्रिटिश शासन के साथ आया, इसका कोई आधार नहीं है। 52 ईस्वी से 2011 तक, जब आखिरी जनगणना हुई थी, जनगणना के आंकड़ों के अनुसार ईसाइयों का प्रतिशत बढ़कर 2.3% हो गया। यह कोई नहीं कह सकता कि कुछ जानबूझकर धर्म परिवर्तन का काम नहीं हुआ होगा।
वंदे मातरम् : पहले परहेज अब मौका देख विवाद खड़ा कर रही संघी ताकतें
सांप्रदायिक धारा अब पूरा वंदे मातरम् गाना लाने की मांग कर रही है, उसने यह गाना कभी नहीं गाया था। यह मुख्य रूप से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की बैठकों में गाया जाता था। वंदे मातरम् का नारा अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने वालों ने लगाया था। चूंकि RSS आज़ादी के आंदोलन से दूर रहा और अंग्रेजों की 'बांटो और राज करो' की नीति को जारी रखने में उनकी मदद की, इसलिए उन्होंने यह गाना नहीं गाया और न ही यह नारा लगाया।
सांप्रदायिक राष्ट्रवाद और ‘कर्तव्यों-अधिकारों’ की अवधारणा
जैसे-जैसे भारत में हिंदू राष्ट्रवाद बढ़ रहा है, हमारे राष्ट्रीय आंदोलन और संविधान में मौजूद 'अधिकारों' की अवधारणा को हिंदुत्व की राजनीति द्वारा धीरे-धीरे कमज़ोर किया जाना है। यहीं से नॉन-बायोलॉजिकल नरेंद्र मोदी अधिकारों को कमज़ोर करने और कर्तव्यों को हाईलाइट करने के लक्ष्य को हासिल करने की यात्रा शुरू करते हैं। लॉर्ड मैकाले द्वारा शुरू किए गए डंपिंग एजुकेशन सिस्टम की मांग इसी दिशा में एक छोटी सी कोशिश थी। अब 26 नवंबर को संविधान दिवस पर इसे और साफ़तौर पर कहें तो, 'हाल ही में संविधान दिवस (26 नवंबर, 2025) पर भारतीय नागरिकों को लिखे एक लेटर में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों के लिए अपने आधारभूत कर्तव्यों को पूरा करने के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने तर्क दिया कि इन ड्यूटीज़ को पूरा करना एक मज़बूत डेमोक्रेसी और 2047 के लिए उनके 'विकसित भारत' विज़न की दिशा में देश की तरक्की की नींव है।
Lok Sabha Election : सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) ने नगीना में चंद्रशेखर आजाद को दिया समर्थन
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के अनुसार, 'वह न सिर्फ इस देश के गरीब, दलित, वंचित समाज के अधिकारों के लिए लड़ने वाले सबसे सशक्त उम्मीदवार हैं बल्कि भारत के लोकतंत्र व संविधान पर आए संकट के खिलाफ भी मजबूती से लड़ सकते हैं।'
लोकसभा चुनाव : मणिपुर में अमित शाह की रैली के बीच कुकी संगठनों ने किया चुनाव बहिष्कार का ऐलान, कांग्रेस ने पीएम मोदी को...
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की इम्फाल में रैली के दौरान आज ही मणिपुर के कुकी समुदायों से जुड़े संगठनों ने लोकसभा चुनाव के बहिष्कार का ऐलान कर दिया है।
Lok Sabha Election : राहुल गांधी ने वायनाड में किया रोड शो, स्थानीय समस्याओं का समाधान करने का आश्वासन दिया
वायनाड में एक सभा को संबोधित करते हुए राहुल गाँधी ने मानव-पशु संघर्ष के मुद्दे को उठाया और इस समस्या से लोगों को निजात दिलाने का आश्वासन दिया।
बस्तर लोकसभा : मोदी के जुमलों पर न्याय का हथौड़ा भारी
बस्तर लोकसभा में पांच साल पहले कांग्रेस से 4.27% वोटों से पीछे रहने वाली भाजपा आज 7.91% वोट से आगे है। निश्चित ही ये आंकड़ें प्रभावशाली हैं और भाजपा के पक्ष में हैं। इसके बावजूद भाजपा के चेहरे पर चिंता की लकीरें हैं और वह पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं।
Lok Sabha Election : भाजपा और कांग्रेस ने सिर्फ 13-14 फीसदी महिलाओं को ही टिकट दिया, महिला आरक्षण के दावे हवा-हवाई
लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर उम्मीदवारों की घोषणा जारी है। हैरान करने वाला तथ्य यह है कि भाजपा और कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव 2024 के लिए अभी तक मुस्लिम समुदाय की एक भी महिला को अपना उम्मीदवार नहीं बनाया है।
कांग्रेस ने जारी की दस उम्मीदवारों की सूची, दिल्ली में मनोज तिवारी के खिलाफ कन्हैया कुमार को मैदान में उतारा
कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव के लिए यूपी, पंजाब और दिल्ली से दस प्रत्याशियों की सूची जारी की है, इस सूची में पार्टी ने कन्हैया कुमार समेत पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को प्रत्याशी बनाया है।

