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क्या अब साम्राज्यवाद का सरगना नहीं रह पाएगा अमेरिका
क्यूबा के मौजूदा ऊर्जा संकट को पैदा करने और अब खुद क्यूबा पर कब्ज़ा जमाने की चाह रखने वाले ट्रंप के बयान को देखने के बाद, यह कहावत याद आ गई - 'नंगे से तो भगवान भी डरते हैं।' हालाँकि, इस 'नंगे' द्वारा शोषित की गई लड़कियों का गुस्सा अब पूरी दुनिया एपस्टीन फाइलों के ज़रिए देख रही है। फिर भी, इस 'नंगे' को रोकना ही दुनिया की सभ्यता पर मंडराता सबसे बड़ा खतरा है। आखिर किसी में भी इस बारे में खुलकर बोलने की हिम्मत क्यों नहीं है?
साम्राज्यवाद के नए दौर की शुरुआत है ईरान पर हमला
घटनाओं में भारत की भूमिका उसकी बदलती विदेश नीति के बारे में आँखें खोलने वाली है। शुरुआत में भारत गुटनिरपेक्ष था, और उसके ईरान के साथ बहुत सौहार्दपूर्ण संबंध थे। दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और आर्थिक आदान-प्रदान बेहतरीन था। अब हम देखते हैं कि भारतीय प्रधानमंत्री मोदी ने युद्ध से ठीक पहले इज़राइल का दौरा किया। इस दौरे का उद्देश्य देश को पता नहीं था। उन्हें इज़राइल का सर्वोच्च सम्मान मिला, और उन्होंने यह वचन दिया कि भारत हर सुख-दुख में इज़राइल के साथ खड़ा रहेगा। अगले ही दिन, I-A ने ईरान पर हमला कर दिया। श्री मोदी ने ईरान के सर्वोच्च नेता के निधन पर कोई ट्वीट नहीं किया, और एक ऐसा गोलमोल बयान जारी किया जिसमें हमलावर और पीड़ित देश, दोनों को एक ही तराज़ू में तौला गया।
ईरान युद्ध : तेल, साम्राज्य और शासन परिवर्तन की नई राजनीति
28 फरवरी, 2026 को, ईरानी समय के हिसाब से सुबह लगभग 7:00 बजे अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए, जिसके बाद नई जंग शुरू हो गई। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के भीतर किए गए संयुक्त हवाई हमलों (Operation Epic Fury) के बाद से दोनों देश सीधे सैन्य संघर्ष में हैं। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मृत्यु और कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों के नष्ट होने की खबरें हैं। लड़ाई की वजह तेल के सोर्स पर कंट्रोल की है।
दिल्ली : फिलिस्तीनी अपने अधिकार के लिए आत्मसम्मान के साथ जीतने तक लड़ेंगे
इंडो-फिलिस्तीन सॉलिडैरिटी नेटवर्क (आईपीएसएन) ने 06 मार्च, 2026 को नयी दिल्ली के प्रेस क्लब में 'फिलिस्तीन, ज़ायोनी-साम्राज्यवादी प्रभुत्व, और बदलती भू-राजनीति' विषय पर एक परिचर्चा का आयोजन किया था जिसमें पश्चिम एशिया के मामलों के जानकार और वरिष्ठ पत्रकार शामिल हुए।
अगर टीपू सुलतान हिन्दू राजा होते तो क्या करती भाजपा
महाराष्ट्र के मालेगाँव में नवनिर्वाचित उपमहापौर निहाल अहमद ने शान-ए-हिन्द टीपू सुल्तान का एक चित्र अपने कार्यालय में लगाया। इसकी जानकारी मिलने के बाद शिवसैनिकों ने अधिकारियों का हस्तक्षेप करवाकर उसे हटवा दिया। कुछ विरोध प्रदर्शन भी हुए। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने चित्र हटाए जाने को अनुचित बताते हुए कहा कि टीपू का मैसूर के लिए उतना ही योगदान है जितना छत्रपति शिवाजी महाराज का महाराष्ट्र के लिए है। इस बात का भाजपा ने घोर विरोध दर्ज करते हुए कांग्रेस कार्यालय पर पथराव किया।
लोकसभा चुनाव : क्या है आरएसएस और भाजपा के चुनावी सर्वे की वायरल रिपोर्ट की सच्चाई?
यदि यह आरएसएस और भाजपा की सर्वे रिपोर्ट है तो भाजपा के लिए इस बार राह आसान नहीं रहने वाली है। क्या भाजपा 400 पार का नारा सिर्फ माहौल बनाने के लिए दे रही है?
लोकसभा चुनाव : असली जंग 70 सीटों की, ये सीटें बनाएंगी-बिगाड़ेंगी NDA और INDIA का चुनावी खेल
विपक्षी गठबंधन इंडिया भाजपा की सीटों में से करीब 70 सीटों की कमी करना चाहता है और उसे लगता है कि भाजपा के कुल योग यानी कि 303 में से करीब 70 सीटें कम हो जाएं तो वह 220-250 के आसपास रह जाएगी और बहुमत से इतने दूर हो जाएगी कि फिर अन्य दलों के सहयोग से भी वह सरकार नहीं बना पाएगी।
लोकसभा चुनाव : सुप्रीम कोर्ट से ‘आप’ नेता संजय सिंह को मिली बेल, क्या यूपी के सुल्तानपुर से इण्डिया गठबंधन के प्रत्याशी होंगे?
सुप्रीम कोर्ट से बेल मिलने के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में सुल्तानपुर लोकसभा सीट से संजय सिंह के चुनाव लड़ने की चर्चा तेज हो गई है। राजनितिक जानकार कह रहे हैं कि संजय सिंह ‘आप’, सपा और कांग्रेस यानी इण्डिया गठबंधन के प्रत्याशी हो सकते हैं।
लोकसभा चुनाव : राहुल गांधी ने वायनाड से दाखिल किया नामांकन, बहन प्रियंका गांधी के साथ किया रोड शो
भारत जोड़ो यात्रा और भारत न्याय यात्रा के बाद चुनाव यात्रा पर निकले राहुल गांधी ने आज वायनाड में नामांकन दाखिल करने से पहले बहन प्रियंका गांधी के साथ रोड शो भी किया।
लोकसभा चुनाव 2024 : गठबंधन प्रत्याशी पर भाजपा को लाभ पहुँचाने का आरोप लगाते हुए डॉ यासमीन राव का इस्तीफा
सहारनपुर की अल्पसंख्यक कांग्रेस की जिला अध्यक्ष डॉ यासमीन राव ने जिलाध्यक्ष मुजफ्फर अली गुर्जर को पद से हटा देने के कारण पूरी कमेटी के साथ इस्तीफा दे दिया।
कच्चातिवु द्वीप मामला क्या है, क्यों मचा है सियासी घमासान ? जानिए
वर्तमान में तमिलनाडु के कई क्षेत्र में मछलियां खत्म हो गई हैं। जिस कारण भारतीय मछुआरे समुद्री सीमा को पार करते हुए कच्चातिवु द्वीप पहुंचते हैं और उन्हें कई बार हिरासत में लेने की खबरें मिलती रहती हैं।

