Wednesday, May 22, 2024
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मोहनसराय में प्रस्तावित ट्रांसपोर्ट नगर योजना से किसानों की परेशानियाँ बढ़ती जा रही हैं, लोकसभा चुनाव से पहले समाधान की माँग

वाराणसी। मोहनसराय में प्रस्तावित ट्रांसपोर्ट नगर (टीपी नगर) को लेकर यहाँ के किसानों में नाराज़गी बढ़ती जा रही है। बताया जा रहा है कि सरकार ने अभी तक सिर्फ आधे किसानों को ही मुआवजा दिया है। किसानों ने लोकसभा चुनाव से पहले समस्याओं के समाधान की माँग की है। आरोप है कि वाराणसी विकास प्राधिकरण […]

वाराणसी। मोहनसराय में प्रस्तावित ट्रांसपोर्ट नगर (टीपी नगर) को लेकर यहाँ के किसानों में नाराज़गी बढ़ती जा रही है। बताया जा रहा है कि सरकार ने अभी तक सिर्फ आधे किसानों को ही मुआवजा दिया है। किसानों ने लोकसभा चुनाव से पहले समस्याओं के समाधान की माँग की है। आरोप है कि वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) भूमि अर्जन एवं पुनर्वास कानून (2013) और हाइकोर्ट के आदेशों का उल्लंघन कर रही है।

वहीं, किसानों की समस्याओं को लेकर अपना दल (कमेरावादी) की विधायक पल्लवी पटेल ने कहा है कि इस मामले को विधानसभा में मजबूती के साथ उठाऊँगी। साथ ही इसकी जाँच के लिए एक टीम भी नियुक्त की जाएगी। देश के अन्नदाताओं को इंसाफ दिलवाकर रहूँगी।

किसान नेता उदय प्रताप बताते हैं कि ट्रांसपोर्ट नगर के लिए कुल 86 हेक्टेयर ज़मीन निर्धारित की गई थी। बाद में चार हेक्टेयर ज़मीन को प्रशासन ने यह कहकर कम कर दिया गया कि इसकी अधिसूचना हमारे पास नहीं है। 41.85 हेक्टेयर ज़मीन का मुआवजा भूमि अर्जन नियमावली 1997 के तहत 2011 में बांट दिया गया है।

बाकी ज़मीनों के मसले पर हाइकोर्ट ने 31 मई, 2005 को ‘दिल्ली बनाम अलीगढ़ विकास प्राधिकरण’ का संदर्भ देकर यह आदेश दिया कि सरकार किसानों का मुआवजा दे। बावजूद इसके किसानों को मुआवजा नहीं दिया गया। इसको लेकर उदय प्रताप ने हाइकोर्ट में एक ‘याचिका’ डाली है।

27 अप्रैल, 2011 को इस मामले को लेकर यहाँ के किसानों और तत्कालीन जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने किसानों को एक से डेढ़ लाख रुपये प्रति बिस्वा दिलाने का आश्वासन दिया था। जिलाधिकारी के अनुसार, सड़क से 30 मीटर तक की ज़मीनों को डेढ़ लाख रुपये और उसके अंदर की ज़मीनों के लिए एक लाख रुपये देने को कहा गया था। उस समय ही काफी किसानों ने मुआवजा लेकर अपनी ज़मीनों खाली कर दीं।

किसानों ने कहा, जिला प्रशासन ने कानून का पालन नहीं किया

भूमि अधिग्रहण नियम 1894 की धारा 17 (ए) के तहत किसी परियोजना में जब तक 80 प्रतिशत मुआवजा नहीं दे दिया जाता तब तक सरकार और प्रशासन उस पर कोई काम नहीं शुरू करवा सकता। वाराणसी प्रशासन ने इस कानून को नज़रअंदाज़ करते हुए किसानों पर ज़मीन खाली करने का दबाव बना रही है। यह मामला अभी भी हाइकोर्ट में विचाराधीन है।

वहीं, जून 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मोहनसराय में ट्रांसपोर्ट नगर के लिए अधिग्रहीत भूमि के खिलाफ दाखिल याचिकाएं आंशिक रूप से स्वीकार कर ली थीं। कोर्ट ने उन किसानों की याचिकाएं खारिज कर दीं थीं, जिनका अवार्ड घोषित किया जा चुका है और उनके भूस्वामियों ने मुआवजा भी प्राप्त कर लिया है।

जिन भू स्वामियों की जमीनों का न तो अवार्ड घोषित किया गया और न ही उन्होंने मुआवजा प्राप्त किया है, कोर्ट ने उन्हें राहत देते हुए कहा था कि इन किसानों का जमीन पर कब्जा बरकरार रहेगा और सरकार उन्हें तब तक वहां से नहीं हटा सकती, जब तक अवार्ड घोषित करके मुआवजा नहीं दिया जाता है। यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र एवं न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की खंडपीठ ने भूमि अधिग्रहण को चुनौती देने वाली ठाकुर प्रसाद व अन्य और हरिवंश पांडेय सहित कई किसानों की याचिकाओं पर सुनवाई के बाद दिया है।

दूसरी तरफ, जिला प्रशासन के इस दबाव को देखते हुए यहाँ के किसानों ने बीते शुक्रवार को एक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया था। कार्यक्रम में विधायक पल्लवी पटेल ने कहा कि भाजपा सरकार शुरू से ही किसानों और आदिवासियों के ज़मीन पर अपना हक़ जताकर उसे हड़प रही है। पल्लवी ने महिला किसानों को भी भरोसा जताया है कि विधानसभा में इस गम्भीर मामले को अवश्य उठाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि ट्रांसपोर्ट नगर को लेकर हाइकोर्ट के आदेशों का उल्लंघन जिला प्रशासन कर रहा है, बावजूद इसके सरकार की चुप्पी उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रही है।

किसान रविवार को बैठकब करेंगे

ट्रांसपोर्ट नगर परियोजना को लेकर स्थानीय किसान रविवार को बैठक करेंगे। इसमें मुआवजा सहित विभिन्न समस्याओं पर चर्चा करेंगे। इसके बाद एक रणनीति बनाकर लोकसभा चुनाव से पहले अपनी माँगे उठाएँगे। किसानों ने कहा है कि चुनाव के पहले अगर हमारी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो हम लोग उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे। किसानों को जब भी मुआवजा देने की बात आती है तो सरकार और मशीनरियाँ दोहरी रणनीति अपनाती हैं। ट्रांसपोर्ट नगर परियोजना में भी यही कहानी गढ़ी गई है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा। किसान अपना हक़ लेकर रहेंगे।

 योजना के विषय में सरकारी दावा 

विकास प्राधिकरण अवस्थापना निधि से ट्रांसपोर्ट नगर में मूलभूत सुविधाएँ विकसित की जाएँगी। टीपी नगर बनने के बाद शहर में भारी वाहनों का आना काफी कम हो जाएगा। इसके चलते प्रमुख मार्गों पर आम पब्लिक को जाम से निजात मिलेगी। कहा जा रहा है कि ट्रांसपोर्ट नगर में नए बस स्टैंड की सौगात मिल सकती है। विकास प्राधिकरण ने शासन को प्रस्ताव भेजा है। स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य कराए जाएँगे।

इसके पहले वीडीए की ओर से ट्रांसपोर्ट नगर क्षेत्र में सड़क, जल निकासी के लिए सीवर और स्ट्रीट लाइट की सुविधा मुहैया कराई जाएगी। कैंट स्टेशन के पास से बस अड्डे को विस्थापित करने के लिए वीडीए ने 12 स्थानों को चिह्नित किया है। बस स्टैंड के निर्माण का प्रस्ताव भी शासन को भेजा है। इसमें ट्रांसपोर्ट नगर में मोहनसराय के पास भी एक बस अड्डे का निर्माण प्रस्तावित है।

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