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टेबल जर्नलिज्म के दौर में एक स्वतंत्र पत्रकार के सरोकार ‘आफ़त में गाँव’
पूर्वी उत्तर प्रदेश (पूर्वांचल) में जिसकी आबादी 6 करोड़ से ज़्यादा है, जो यहाँ की आबादी का एक-चौथाई है। पिछले बारह सालों में विकास के नाम पर विस्थापन की विभीषिका का दस्तावेजीकरण किताब 'आफत में गांव' में है। इस किताब में वाराणसी, आजमगढ़, चंदौली और दूसरी जगहों के गांवों का और रोजी-रोटी कमाने के लिए संघर्ष कर रहे विस्थापित लोगों से सीधे बात कर उनकी त्रासदियों को दर्ज किया गया है। यह किताब असल में हमारे देश भर के उन गांवों की कहानी दिखाती है जो ऐसे संकटों में फंसे हैं।
मैदानी गांवों की सच्ची दास्तान बताती आवश्यक किताब ‘आफत में गांव’
पत्रकारिता की भाषा और शैली में जो सुस्पष्टता वाकई में होनी चाहिए, वह इन रिपोर्ट्स को पढ़कर लगा, जो बात कही गई है, वह आंखन-देखी हों, कहीं किसी कागज में लिखी हुई बात नहीं। कागजों में लिखी हुई बात यानि प्रेस विज्ञप्तियों में काट-छांट करके खबरें लिखी जा सकती हैं,रिपोर्ट्स नहीं। रिपोर्ट और खबरों में यही बेसिक अंतर है। 'आफत में गांव' में प्रकाशित ग्राउंड रिपोर्ट्स इन बातों को साबित करती है।
वाराणसी : सभी निजी शैक्षणिक संस्थानों द्वारा मातृत्व लाभ देना जरूरी, राष्ट्रीय महिला आयोग ने दिया आदेश
राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने वाराणसी स्थित सनबीम वीमेंस कॉलेज वरुणा को शिकायतकर्ता संगीता प्रजापति को सात दिनों के अंदर मातृत्व लाभ मुहैया कराने का आदेश दिया। उन्होंने कहा- मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 के अनुसार मातृत्व लाभ प्रत्येक शैक्षणिक संस्थान पर लागू होता है, क्योंकि यह प्रत्येक महिला का मूलाधिकार है। मातृत्व लाभ अधिनियम के तहत यह एक बड़ी जीत हासिल हुई है।
बनारस : गांधी जयंती के अवसर पर ‘एक कदम गांधी के साथ’ पदयात्रा आरंभ
सर्व सेवा संघ की 'एक कदम गांधी के साथ' पदयात्रा गांधी जयंती के दिन वाराणसी राजघाट से शुरू की गई है, जो अनवरत 56 दिनों तक विभिन्न जिलों-प्रदेशों से होती हुई संविधान दिवस के दिन दिल्ली राजघाट में सम्पन्न होगी। यह यात्रा 1000 किमी की दूरी तय करेगी। इस यात्रा का उद्देश्य देश में चल रहे नफरत और सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ अहिंसात्मक तरीके से विरोध दर्ज करना है।
वाराणसी : हिन्दू कट्टरपंथी ताक़तों के दबाव में आईआईटी बीएचयू में गौहर रज़ा का कार्यक्रम रद्द
वाराणसी स्थित आईआईटी-बीएचयू में प्रसिद्ध वैज्ञानिक, कवि और विचारक गौहर रज़ा के व्याख्यान का 23 सितंबर कोऑनलाइन कार्यक्रम हिन्दू कट्टरपंथी संगठनों के दबाव में रद्द कर दिया गया। देश में असहमति की आवाज और प्रगतिशील विचारों को कुचलने की बढ़ती प्रवृत्ति और लगातार कोशिशें फासीवादी मानसिकता का परिचायक है।
बिहार में राजनीतिक परिवर्तन और उसके मायने
बिहार में नीतीश कुमार की सरकार गिर गयी है और ये लेख लिखे जाने तक अगली सरकार के गठन की रूपरेखा सामने नहीं आयी...
प्रधानमंत्री हैदराबाद में एक तीर से कई निशाने लगा आये
अट्ठारह बरस बाद भाजपा ने अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हैदराबाद में की, जिसमें भाग लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यहाँ पहुँचे। हैदराबाद...
कश्मीर में शांति कैसे स्थापित हो?
पाकिस्तान में प्रशिक्षित और पाक-समर्थित आतंकवादी कश्मीर घाटी में लंबे समय से सक्रिय हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नोटबंदी की घोषणा करते समय दावा...
अमेठी में संजय सिंह और मनकेश्वर सिंह अपनी ताकत को बरकरार रख पाएंगे
अमेठी में गांधी परिवार की राजनीतिक ताकत रहे, डॉक्टर संजय सिंह भाजपा में शामिल होकर, अमेठी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, क्या...
क्या कांग्रेस अमेठी में राहुल गांधी की हार का बदला में ले पाएगी
2017 और 2019 का विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव दोनों गांधी परिवार के लिए अमेठी ठीक नहीं रहा। 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस...
चन्नी के बयान को लपककर मोदी-योगी क्या हासिल कर लेंगे
पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के बयान को लेकर राजनीति गरमा गई है। 16 फरवरी को पंजाब में चन्नी द्वारा उत्तर प्रदेश और...

