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वाराणसी : डीएनटी समुदाय द्वारा महिला दिवस का आयोजन
वाराणसी के बेलवा स्थित डीएनटी यूथ रिसोर्स सेंटर में अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस एवं माता सावित्रीबाई फुले स्मृति दिवस के अवसर पर नट समुदाय संघर्ष समिति एवं उड़ान (UDAAN) के संयुक्त तत्वावधान में एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
टेबल जर्नलिज्म के दौर में एक स्वतंत्र पत्रकार के सरोकार ‘आफ़त में गाँव’
पूर्वी उत्तर प्रदेश (पूर्वांचल) में जिसकी आबादी 6 करोड़ से ज़्यादा है, जो यहाँ की आबादी का एक-चौथाई है। पिछले बारह सालों में विकास के नाम पर विस्थापन की विभीषिका का दस्तावेजीकरण किताब 'आफत में गांव' में है। इस किताब में वाराणसी, आजमगढ़, चंदौली और दूसरी जगहों के गांवों का और रोजी-रोटी कमाने के लिए संघर्ष कर रहे विस्थापित लोगों से सीधे बात कर उनकी त्रासदियों को दर्ज किया गया है। यह किताब असल में हमारे देश भर के उन गांवों की कहानी दिखाती है जो ऐसे संकटों में फंसे हैं।
मैदानी गांवों की सच्ची दास्तान बताती आवश्यक किताब ‘आफत में गांव’
पत्रकारिता की भाषा और शैली में जो सुस्पष्टता वाकई में होनी चाहिए, वह इन रिपोर्ट्स को पढ़कर लगा, जो बात कही गई है, वह आंखन-देखी हों, कहीं किसी कागज में लिखी हुई बात नहीं। कागजों में लिखी हुई बात यानि प्रेस विज्ञप्तियों में काट-छांट करके खबरें लिखी जा सकती हैं,रिपोर्ट्स नहीं। रिपोर्ट और खबरों में यही बेसिक अंतर है। 'आफत में गांव' में प्रकाशित ग्राउंड रिपोर्ट्स इन बातों को साबित करती है।
वाराणसी : सभी निजी शैक्षणिक संस्थानों द्वारा मातृत्व लाभ देना जरूरी, राष्ट्रीय महिला आयोग ने दिया आदेश
राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने वाराणसी स्थित सनबीम वीमेंस कॉलेज वरुणा को शिकायतकर्ता संगीता प्रजापति को सात दिनों के अंदर मातृत्व लाभ मुहैया कराने का आदेश दिया। उन्होंने कहा- मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 के अनुसार मातृत्व लाभ प्रत्येक शैक्षणिक संस्थान पर लागू होता है, क्योंकि यह प्रत्येक महिला का मूलाधिकार है। मातृत्व लाभ अधिनियम के तहत यह एक बड़ी जीत हासिल हुई है।
बनारस : गांधी जयंती के अवसर पर ‘एक कदम गांधी के साथ’ पदयात्रा आरंभ
सर्व सेवा संघ की 'एक कदम गांधी के साथ' पदयात्रा गांधी जयंती के दिन वाराणसी राजघाट से शुरू की गई है, जो अनवरत 56 दिनों तक विभिन्न जिलों-प्रदेशों से होती हुई संविधान दिवस के दिन दिल्ली राजघाट में सम्पन्न होगी। यह यात्रा 1000 किमी की दूरी तय करेगी। इस यात्रा का उद्देश्य देश में चल रहे नफरत और सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ अहिंसात्मक तरीके से विरोध दर्ज करना है।
बोले किसान, इस बार हमें आश्वासन नहीं चाहिए, सरकार ने पंजाब में 16 तक इंटरनेट सेवाएं बंद की
भाषा -
पंजाब-हरियाणा सीमा पर हरियाणा प्रशासन द्वारा तैनात सुरक्षाकर्मियों द्वारा किसानों के खिलाफ की गई कार्रवाई का जिक्र करते हुए किसान नेताओं ने किसानों के खिलाफ 'बल' प्रयोग करने के लिए अर्धसैनिक बल के जवानों की आलोचना की। इस कार्रवाई में कई लोग घायल हो गए थे। उन्होंने आंसू गैस के कुछ गोले भी दिखाए।
बेहमई हत्याकांड: 43 साल बाद कोर्ट ने सुनाया फैसला, एक दोषी को उम्रकैद
पोरवाल ने कहा कि इस मामले में फूलन देवी समेत कुल 35 आरोपी थे। जिसमें श्याम बाबू और विश्वनाथ को छोड़कर बाकी सबकी मौत हो चुकी है। 14 फरवरी 1981 को फूलन और उसके गिरोह ने कानपुर देहात के बेहमई गांव में 20 लोगों को एक लाइन में खड़ा कर गोलियों से भून दिया था।
बिहार में राज्यसभा सीट पर हमारा दावा वैध था : दीपांकर भट्टाचार्य
उन्होंने कहा, “महागठबंधन से नीतीश कुमार के बाहर निकलने के बाद भाकपा माले निश्चित रूप से आगामी लोकसभा चुनाव में बड़ी हिस्सेदारी मांगेगी। एक-दो दिन में आरजेडी समेत महागठबंधन के नेताओं से इस मामले पर चर्चा की जाएगी।’’
छत्तीसगढ़: राष्ट्रवाद की चाशनी में लिपटा कॉर्पोरेटपरस्त और चुनावी जुमलेबाजी वाले बजट में किसानों-मजदूरों के लिए कुछ नहीं
असल में मोदी गारंटी के नाम पर जितनी भी लोक-लुभावन घोषणाएं बजट में की गई हैं, उनका असली उद्देश्य आम जनता को फायदा पहुंचाना नहीं, केवल चुनावी लाभ बंटोरना है। इसलिए इन योजनाओं में पात्रता के नाम पर ऐसी शर्तें थोपी जा रही हैं, जिससे अधिक से अधिक लोग इन योजनाओं के दायरे से ही बाहर हो जाए।
हल्द्वानी हिंसा : बनभूलपुरा में लगे कर्फ्यू में दी गई ढील, डीएम ने शर्तों के साथ जारी किया आदेश
भाषा -
बनभूलपुरा में अवैध रूप से बनाए गए एक मदरसे को ढहाने के बाद आठ फरवरी को इलाके में हिंसा भड़क गई थी। स्थानीय निवासियों ने नगर निगम के कर्मियों और पुलिस पर पथराव किया था और पेट्रोल बम फेंके थे जिसके कारण कई पुलिसकर्मियों को एक थाने में शरण लेनी पड़ी थी जिसे भीड़ ने बाद में आग के हवाले कर दिया था।
बिहार में ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ की रैली को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे करेंगे संबोधित
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वर्तमान में बिहार पर कमजोर होती पकड़ के बावजूद कांग्रेस औरंगाबाद और सासाराम संसदीय क्षेत्रों में पूरा दमखम दिखा रही है। पार्टी ने औरंगाबाद में आखिरी बार 2004 में जीत हासिल की थी। कांग्रेस नेता निखिल कुमार औरंगाबाद संसीदय क्षेत्र से निर्वाचित हुए थे, जो बाद में नगालैंड और केरल में राज्यपाल के पद पर भी रहे थे।

