Sunday, June 23, 2024
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स्वार उपचुनाव- आजम का रुतबा बेअसर, अखिलेश के गलत फैसले से भाजपा को मिला फायदा

रामपुर। उत्तर प्रदेश के रामपुर की स्वार विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा गठबंधन, सपा से यह सीट छीनने में कामयाब हुआ है। सपा के दिग्गज नेता आजम खान के बेटे की विधायकी निरस्त होने के बाद खाली हुई सीट पर भाजपा गठबंधन के तहत अपना दल (एस) से खड़े प्रत्याशी शफीक अंसारी ने […]

रामपुर। उत्तर प्रदेश के रामपुर की स्वार विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा गठबंधन, सपा से यह सीट छीनने में कामयाब हुआ है। सपा के दिग्गज नेता आजम खान के बेटे की विधायकी निरस्त होने के बाद खाली हुई सीट पर भाजपा गठबंधन के तहत अपना दल (एस) से खड़े प्रत्याशी शफीक अंसारी ने सपा की अनुराधा चौहान को 8000 से ज्यादा मतों से पराजित कर दिया है। लंबे समय से समाजवादी पार्टी का गढ़ बनी यह सीट भाजपा के पाले में जाने को जहां एक तरफ भाजपा की रणनीतिक कामयाबी मानी जा रही है वहीं सपा के समर्थक इसे अखिलेश की गलती बता रहे हैं। सपा समर्थकों का कहना है कि इस सीट के लिए पार्टी ने गलत उम्मीदवार को मैदान में उतारकर खुद ही सपा को हराने का काम किया है।

मुस्लिम बाहुल्य वाली इस सीट पर अनुराधा चौहान को टिकट दिए जाने का आजम खान ने विरोध भी किया था। नामांकन के बाद भी आजम खान अनुराधा के पक्ष में नहीं उतरे। दूसरी तरफ, अपना दल (एस) ने कभी आजम के करीबी रहे शफीक अंसारी को मैदान में उतारकर हिन्दू वोट बैंक के साथ बड़ी मात्रा में पिछड़ी जाति और मुसलमान वोटरों को भी अपने पाले में खींच लिया।

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अखिलेश के इस फैसले से आहत आजम खान ने चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में अनुराधा चौहान को जिताने के लिए भले ही पूरी ताकत लगा दी हो पर तब तक बहुत देर हो चुकी थी। उत्तर प्रदेश के इस उपचुनाव के साथ निकाय चुनाव के जो रुझान मिल रहें हैं, उससे साफ दिख रहा है कि मुस्लिम मतदाता अब अपनी पुरानी प्रतिबद्धता के साथ समाजवादी पार्टी के साथ नहीं खड़ा है। अखिलेश यादव अगर ऐसे ही कंजूस मंसूबे के साथ चुनाव में उतरते रहे तो 2024 में भी भाजपा के सामने सपा की किसी बड़ी जीत तो दूर की बात किसी मजबूत टक्कर का कयास लगाना भी बेमानी साबित होगा। सवार सीट सपा के सम्मान की सीट थी, जिसका जाना सपा के कमजोर होते जनाधार को दिखाने के लिए काफी है। कमजोर हौसले और खराब दृष्टि से देखे हुए सपने कभी हकीकत की रंगत नहीं पाते। इस सीट पर आजम खान 10 बार विधायक रहे हैं। बाद में उनके बेटे अब्दुल्ला आजम ने भी इस सीट पर जीत दर्ज की थी। सपा की इस हार को आजम और अखिलेश के बीच बढ़ती दूरी के रूप में भी देखा जा रहा है। इस सीट पर हारने से प्रदेश राजनीति में आजम खान की हैसियत पर भी गहरा असर पड़ेगा।

कुमार विजय गाँव के लोग डॉट कॉम के मुख्य संवाददाता हैं।

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