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हिन्दू धर्म त्यागकर क्यों प्रसन्न थे डॉ. अम्बेडकर
मैं आज बहुत ही प्रफुल्लित हूं। मैं जरूरत से ज्यादा प्रसन्न हूं। मैंने जिस क्षण हिन्दू धर्म छोड़कर बौद्ध धर्म स्वीकार किया है, मुझे...
बहुजन छात्रों के साथ नाइंसाफी का जिम्मेदार आखिर कौन है
23 जुलाई, 2022 के हिन्दू समाचार पत्र में एक महत्वपूर्ण ख़बर है कि मदुरई के कम्युनिस्ट पार्टी के सांसद एस वेंकटेशन के एक सवाल...
क्या भारत सरकार बदले की भावना से काम कर रही है?
देश की जनता को अगर आप ध्यान से देखें तो इस वक़्त आप इन्हें चार भागों में बाँट सकते हैं। एक वो लोग जो...
जनसंख्या विस्फोट एक और झूठ के सिवा कुछ भी नहीं
भारत में जनसंख्या विस्फोट को एक बड़ी समस्या के रूप में पेश करते हुए इस पर बहस हो रही है। बहुत से लोगों को...
श्रीलंका संकट से भारत को क्या सबक लेना चाहिए?
श्रीलंका के हालिया राजनैतिक संकट ने उस देश के नागरिकों के अलावा पड़ोसी देशों बल्कि पूरे विश्व के रहवासियों का ध्यान खींचा है। वहाँ...
देखिये कि आप खड़े कहाँ हैं !
मानव सभ्यता के इतिहास का अध्ययन ये बताता है कि हानि-लाभ के तमाम गुणा-गणित के बावजूद मनुष्य लगातार बेहतर हुआ है, उसने प्रकृति के...
कन्हैया के कातिल ये दोनों ही नहीं और भी हैं…
आसिफ़ा के बलात्कार और हत्या के आरोपियों के पक्ष में जिन्होंने तिरंगा यात्रा निकाली थी, जो इस तिरंगा यात्रा के पक्ष में तर्क दे...
क्या भारत संविधान की बजाय सभ्यता की संकीर्ण व्याख्या पर चलेगा?
कुछ वर्ष पहले संविधान से अनुच्छेद 370 हटाया गया था। हमारे उच्चतम न्यायालय को अभी यह फैसला देना बाकी है कि यह निर्णय संवैधानिक...
आदिवासी समाज का राष्ट्रपति, ज़रूरत या सियासत
देश को पहली बार आदिवासी समाज से राष्ट्रपति मिलने जा रहा है, मीडिया में इसे भारतीय जनता पार्टी के एक महत्वपूर्ण कदम के रूप...
धर्म भी एक सियासत है
भारत सहित दुनिया के बहुत से मुल्क धर्म आधारित सियासत का या तो हिस्सा हैं या इससे पीड़ित हैं या इस तरह की राजनीति...
मेरा गांव सोन नद की बांहों में विचारों में उलझी मेरी महबूबा सा…
मेरा गांव
सोन नद की बांहों में
विचारों में उलझी
मेरी महबूबा सा.....
कभी गांव को लेकर मैंने एक लंबी कविता लिखी थी। यह कविता मेरे आलोचकीय विवेक पर...
इस उपन्यास का कल्पनालोक समझने के लिए अपने दौर की समझ जरूरी है
लेख का दूसरा और अंतिम हिस्सा
बहुत सारे आलोचक जार्ज ऑरवेल के उपन्यास 1984 में अतीत का वर्णन देखते हैं। बीसवीं शताब्दी के पहले...
मैं कभी किसी कहानी आंदोलन का हिस्सा नहीं रही
बातचीत का पहला हिस्सा
आप अपने बचपन के बारे में कुछ बताएं! पुराने घर की कुछ स्मृतियां?
कलकत्ता में बीते बचपन की पुरानी स्मृतियों में एक...
गाँधी जयंती पर ट्विटर पर गोडसे जिंदाबाद का तूफ़ान
गत 2 अक्टूबर (गाँधी जयंती, 2021) को ट्विटर पर ‘नाथूराम गोडसे अमर रहे’ और ‘नाथूराम गोडसे जिंदाबाद’ की ट्वीटस का अंबार लग गया। ये...
हमारी अस्तित्व रक्षा हेतु आवश्यक है गांधीवाद
साम्प्रदायिक एकता गांधी जी के लिए महज एक आदर्श नहीं थी वह उनकी आत्मा में रची बसी थी। साम्प्रदायिक सद्भाव तथा समरसता के प्रति...
उफ्फ! एक दशक बाद अब आसाम में एक और भजनपुरा डायरी (24 सितंबर 2021)
बाजदफा यह सोचता हूं कि क्या किसी एक मुल्क में एक ही मजहब को मानने वाले लोग हो सकते हैं? यदि हां तो क्या...
पत्रकारिता, संसद, न्यायपालिका और बेपरवाह हुक्मरान (डायरी, 16 अगस्त, 2021)
प्रधानमंत्री के पद पर बैठा व्यक्ति बेहद महत्वपूर्ण होता है। उसे अपना अपना महत्व बनाए रखना चाहिए। इसके लिए उसका उदार होना, सौम्य होना...
हिन्दू-मुस्लिम सद्भाव और भविष्य की चुनौतियाँ
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने हाल में कहा था कि भारत में इस्लाम खतरे में नहीं है; कि कलह करने...

