Wednesday, February 11, 2026
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नियंत्रित स्वतंत्रता की प्रतीकात्मक प्रस्तावना तो नहीं है लोकतंत्र की पीठ पर राज-दंड की स्थापना

राजदंड के माध्यम से राजा होने का सपना बुना जा रहा है या धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र की भावना पर धर्म और राज-सत्ता का प्रतीक चिन्ह...

ख़बरदार! किसी ने इसे मोदीजी की ‘हार’ कहा तो…!

माना कि कर्नाटक में पब्लिक ने मोदी की मन की बात नहीं सुनी है। मोदीजी ने पूरे राज्य में घूम-घूमकर सुनाई, पर पब्लिक ने...

कर्नाटक में डबल इंजनियों की सांप्रदायिक पैंतरेबाजी

कर्नाटक के चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आखिरकार, खुल्लमखुल्ला सांप्रदायिक-धार्मिक नारों का सहारा लेने पर उतर आने पर, जैसा कि अनुमान लगाया जा...

प्रधानमंत्री की चुप्पी के कानफाड़ू बोल!

इसमें शायद ही किसी को सचमुच हैरानी होगी कि ओलंपिक स्तर के खिलाड़ियों के, भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष और भाजपा सांसद, ब्रजभूषण शरण...

सुनो दिलदार सुनो, सेंचुरी पार सुनो, मोदीजी के मन की बात सुनो!

अब तो विरोधियों की भी समझ में आ जाना चाहिए कि चाहे कितना विरोध हो, चाहे कितनी मुश्किलें सामने आएं, चाहे कितनी कुर्बानियां देनी...

‘मोदियों’ के बारे में राहुल गांधी का वक्तव्य क्या OBC का अपमान है?

इसी रणनीति का सबसे ताजा उदाहरण है भाजपा द्वारा जाति जनगणना का विरोध। केंद्र सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्लूएस) के लिए 10 प्रतिशत कोटे के निर्धारण को अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी का निर्वहन बताया है। सरकार का कहना है कि गरीबों की मदद करना उसका नैतिक और संवैधानिक कर्त्तव्य है। परंतु आलोचक मानते हैं कि ईडब्लूएस कोटा जाति के आधार पर भेदभाव करता है क्योंकि सरकार ने रुपये 8 लाख प्रतिवर्ष से कम आय वाले गैर-एससी, एसटी व ओबीसी परिवारों के लिए जो 10 प्रतिशत कोटा निर्धारित किया है वह केवल उच्च जातियों के लिए है।

देश की बदनामी चालू आहे!

नये इंडिया के डंके ही डंके, बल्कि मंदिर वाले घंटे ही घंटे। सब अच्छा ही अच्छा होना था। नोबेल वालों का भी गांधीजी को पुरस्कार न दे पाने का कलंक मिट जाता। भारत के इतिहास की तरह, नोबेल पुरस्कारों का भी इतिहास दुरुस्त हो जाता। एक गुजराती को न सही, दूसरे गुजराती को सही, पर किसी गुजराती को तो शांति का नोबेल मिल जाता।

हँसे तो फंसे!

मोदीजी का दु:ख गलत नहीं है। पौने नौ साल हो गए बेचारों को इंतजार करते कि कोई आलोचक आए, कोई आलोचक मिले, पर कोई...

डॉ. अंबेडकर की तस्वीर पर माला और उनकी 22 प्रतिज्ञाओं के विरोध की दोमुंही राजनीति

दिल्ली की ‘आप' सरकार में मंत्री राजेंद्र पाल गौतम से हाल में उनका इस्तीफा ले लिया गया। उन्होंने 5 अक्टूबर (अशोक विजयादशमी दिवस) को दिल्ली...

ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2022 के आइने में असमानता ख़त्म करने का एक अभिनव विचार!

विश्व आर्थिक महाशक्ति बनने का ढिंढोरा पीटने वाली मोदी सरकार की पोल खोलने वाली एक और रिपोर्ट सामने आई है। वह है ग्लोबल हंगर...

सुभाषचंद्र बोस के तथ्यों को तोड़ने-मरोड़ने का प्रयास

इस साल 8 सितबर 2022 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सुभाषचन्द्र बोस के विचारों और उनकी राजनीति को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करने का एक...

क्या बिना मजबूत गठबंधन के मोदी को हराया जा सकता है?

6 अप्रैल भाजपा का स्थापना दिवस होता है। इस वर्ष उसके स्थापना दिवस पर बीबीसी के संवाददाता जुबैर अहमद ने बीजेपी के 42 वर्षों...

बिलकीस बानो प्रकरण पर एक टिप्पणी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अपने भाषण में महिलाओं का सम्मान करने की अपील की थी। उसके बाद देश में दो ऐसी...

प्रधानमंत्री का स्वतंत्रता दिवस उद्बोधन कथनी और करनी के विद्रूप

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का स्वतंत्रता दिवस उद्बोधन कुछ ऐसा था कि जो कुछ उन्होंने कहा वह चर्चा के उतना योग्य नहीं है जितना कि...

धरी की धरी रह गई नरेंद्र मोदी की अंतरिक्ष में अमर होने की तमन्ना (डायरी, 8 अगस्त, 2022) 

अंतरिक्ष में कचरा सुनकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। हालांकि मैं कोई वैज्ञानिक नहीं हूं जो इससे जुड़े अन्य वैज्ञानिक सवालों के बारे...

संजीव भट्ट, वरवर राव और आनंद तेलतुंबड़े जैसे लोगों के नाम (डायरी, 4 अगस्त, 2022)

आज 4 अगस्त है और ठीक ग्यारह दिन बाद इस देश में स्वतंत्रता का जश्न मनाया जाएगा। इस बार का जश्न बहुत खास है...

अशोक स्तम्भ विवाद में जो कुछ हो रहा है वह अप्रत्याशित नहीं

सेंट्रल विस्टा की ऊपरी मंजिल पर स्थापित अशोक स्तंभ की प्रतिकृति के अनावरण के बाद से प्रारंभ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा...

क्या राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भारत आदिवासियों के साथ होनेवाले अन्याय को ख़त्म करेंगीं

संविधान निर्माताओं समेत स्वाधीनता संग्राम से मंज-तपकर निकले सिद्धान्तनिष्ठ और खरे राजनेताओं की उस पुरानी पीढ़ी ने (जिसे यह पता था कि हमारा लोकतंत्र...

एक ताकतवर सरकार आखिर किससे डरती है?

ज़किया जाफ़री बनाम गुजरात राज्य मामले में हाल में अपना फैसला सुनाते हुए उच्चतम न्यायालय ने ज़किया जाफ़री की याचिका ख़ारिज कर दी। ज़किया...

वाराणसी को पहचान देने वाली ‘वरुणा’ और ‘असि’ की उखड़ती साँसें क्यों नहीं सुन पा रहे मोदी

वरुणा कॉरिडोर बनवाकर सपा सुप्रीमो अखिलेश ने साल 2016 में खूब सुर्खियां बटोरी थी। उस समय इस नदी को बचाने के लिए मुहिम चला रहे जनसरोकारीय संगठनों और स्थानीय लोगों में उम्मीद जगी कि नदी साफ हो जाएगी। सत्ता बदली तो जैसे इस नदी के नसीब ही फूट गए। इसका भाग्य संवारने के लिए कोई दूसरा भगीरथ नहीं आया। अब जनवादी संगठन पदयात्रा निकाल रहे हैं और इस नदी के पुनरुद्धार के लिए मुहिम चला रहे हैं।

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