Saturday, April 13, 2024
होमविचारएक ताकतवर सरकार आखिर किससे डरती है?

ताज़ा ख़बरें

संबंधित खबरें

एक ताकतवर सरकार आखिर किससे डरती है?

ज़किया जाफ़री बनाम गुजरात राज्य मामले में हाल में अपना फैसला सुनाते हुए उच्चतम न्यायालय ने ज़किया जाफ़री की याचिका ख़ारिज कर दी। ज़किया जाफ़री ने अपनी याचिका में मांग की थी कि उस षड्यंत्र की जांच की जाए जिसके चलते 27 फरवरी, 2002 की सुबह गोधरा में ट्रेन में आग लगने की घटना के […]

ज़किया जाफ़री बनाम गुजरात राज्य मामले में हाल में अपना फैसला सुनाते हुए उच्चतम न्यायालय ने ज़किया जाफ़री की याचिका ख़ारिज कर दी। ज़किया जाफ़री ने अपनी याचिका में मांग की थी कि उस षड्यंत्र की जांच की जाए जिसके चलते 27 फरवरी, 2002 की सुबह गोधरा में ट्रेन में आग लगने की घटना के बाद गुजरात में बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी। याचिका को खारिज करते हुए न्यायालय ने मानवाधिकार कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ और गुजरात पुलिस के तत्कालीन शीर्ष अधिकारियों संजीव भट्ट और आरबी श्रीकुमार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि इन लोगों ने सनसनी फैलाने के लिए बेबुनियाद आरोप लगाए। निर्णय में तीस्ता सीतलवाड़ और इन अधिकारियों के बारे में काफी सख्त शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। तीस्ता उन अनेक लोगों में शामिल हैं जिन्होंने हिंसा पीड़ितों को न्याय दिलवाने के लिए प्रयास किये थे।

फैसले के बाद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने एक साक्षात्कार में इन अधिकारियों और तीस्ता पर तीखा हमला किया। गुजरात पुलिस ने आनन-फानन में तीस्ता और राज्य के सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक आरबी श्रीकुमार को गिरफ्तार कर लिया। तीस्ता के साथ धक्कामुक्की भी की गई। संजीव भट्ट, जो पहले से ही जेल में हैं, के खिलाफ एक नया प्रकरण दायर कर दिया गया।

यह भी पढ़ें…

मुहावरों और कहावतों में जाति

गुजरात में हिंसा की शुरुआत साबरमती एक्सप्रेस के एस-6 कोच में आग लगने के बाद हुई थी। इस भयावह और दुखद त्रासदी में 58 कारसेवक (रामसेवक) मारे गए थे। गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस घटना को आतंकी साजिश बताया और यह भी कहा कि इसे आईएसआई और अंतर्राष्ट्रीय आतंकी गिरोहों के सहयोग से स्थानीय मुसलमानों द्वारा अंजाम दिया गया है। यह बताया गया कि मुसलमानों ने बाहर से कोच में कोई ज्वलनशील पदार्थ फेंका और फिर उसमें आग लगा दी। हाजी उमरजी को मुख्य षड़यंत्रकर्ता बताया गया और उनके अलावा करीब 60 लोगों को इसी आरोप में गिरफ्तार किया गया। कई साल चली अदालती कार्यवाही की बाद हाजी उमरजी को निर्दोष घोषित कर दिया गया, क्योंकि उनके खिलाफ कोई सुबूत नहीं मिला। गुजरात फॉरेंसिक लेबोरेटरी ने कहा कि कोच में बाहर से ज्वलनशील पदार्थ फेंकना संभव नहीं है। गोधरा काण्ड की जांच के लिए नियुक्त बनर्जी आयोग ने हिन्दुत्ववादी संगठनों के इस दावे को नकार दिया कि यह घटना एक षड़यंत्र का नतीजा थी। इसी कथित षड़यंत्र के नाम पर घटना के बाद हुए मुसलमानों के कत्लेआम को उचित ठहराया जा रहा था। अन्य स्वतंत्र विशेषज्ञों ने भी बनर्जी आयोग के निष्कर्ष की पुष्टि की।

बाबू बजरंगी ने तहलका के आशीष खेतान द्वारा किये गए एक स्टिंग ऑपरेशन के दौरान यह दावा किया कि उन लोगों को (हिंसा करने के लिए) तीन दिन का समय दिया गया था, यह कि उसे वन-डे मैच खेलना था और लोगों की जान लेते हुए उसे ऐसा लग रहा था मानों वह महाराणा प्रताप हो।

इस वीभत्स घटना में बुरी तरह जले शवों को एक जुलूस में गोधरा से अहमदाबाद लाया गया। तत्समय अहमदाबाद के पुलिस आयुक्त पीसी पांडे ने नानावटी आयोग के समक्ष गवाही देते हुए कहा कि शवों को अहमदाबाद लाने का निर्णय उच्चतम स्तर पर लिया गया था। बाद में भड़के दंगों में हिंसा करने वालों के पास मुसलमानों के घरों और दुकानों की सूचियाँ थीं। इस हत्याकांड के पहले से ही यह प्रचारित किया जा रहा था कि गुजरात, हिन्दू राष्ट्र की प्रयोगशाला है।

हिंसा शुरू होने के दिन ही सेना को बुला लिया गया। लेफ्टिनेंट जनरल ज़मीरुद्दीन शाह के नेतृत्व में 3,000 सैनिकों की टुकड़ी अहमदाबाद एयरफील्ड पर 1 मार्च को 7 बजे सुबह पहुँच गई थी। परन्तु उन्हें एक दिन तक इंतज़ार करना पड़ा क्योंकि राज्य सरकार ने उन्हें वाहन उपलब्ध नहीं करवाए।

दंगों के दौरान माया कोडनानी ने जो भूमिका निभायी उसके कारण उन्हें उम्रकैद की सजा दी गई। वे बाद में मोदी मंत्रिपरिषद में कैबिनेट मंत्री बनीं। वर्तमान में वे ज़मानत पर हैं। बाबू बजरंगी ने तहलका के आशीष खेतान द्वारा किये गए एक स्टिंग ऑपरेशन के दौरान यह दावा किया कि उन लोगों को (हिंसा करने के लिए) तीन दिन का समय दिया गया था, यह कि उसे वन-डे मैच खेलना था और लोगों की जान लेते हुए उसे ऐसा लग रहा था मानों वह महाराणा प्रताप हो।

आशीष खेतान ने अपनी पुस्तक अंडरकवर में बाबू बजरंगी की दुनिया का खाका खींचा है। बाबू बजरंगी नरोदा पाटिया काण्ड, जिसमें एक सौ से अधिक मुसलमान मारे गए थे, में मुख्य आरोपी था। बजरंगी ने स्वीकार किया कि राज्य के शीर्ष नेतृत्व का दंगों पर पूर्ण नियंत्रण था। उसने यह भी बताया कि दंगों के बीच उसने 23 रिवाल्वरों की व्यवस्था की थी। बाबू बजरंगी ने यह भी कहा कि उसके केवल दो दुश्मन हैं- मुसलमान और ईसाई।

पूर्व में उच्चतम न्यायालय ने गुजरात सरकार को जमकर लताड़ लगाई थी। न्यायालय ने कहा था कि सरकार ने निर्दोष लोगों, बच्चों और अन्यों की रक्षा करने के लिए ज़रूरी कदम नहीं उठाए। बेस्ट बेकरी काण्ड के सन्दर्भ में अदालत ने कहा था, जब बेस्ट बेकरी में मासूम लोग आग में जल रहे थे तब आधुनिक नीरो दूसरी तरफ देख रहे थे और शायद इस पर विचार कर रहे थे कि अपराधियों को कैसे बचाया जाए। बिलकिस बानो बलात्कार की शिकार हुईं और उन्हें न्याय पाने के लिए लम्बा संघर्ष करना पड़ा था।

इस भयावह घटनाक्रम से आतंकित मुसलमान अपने मोहल्लों में सिमटने लगे और अहमदाबाद का एक इलाका जुहापुरा उनकी शरणस्थली बन गया। इसी जुहापुरा में स्थित एक राहत शिविर में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी पहुंचे थे और वहां के बुरे हालात देखकर उन्होंने मोदी को उनका राजधर्म निभाने की सलाह दी है। मोदी का जवाब था कि वे वही कर रहे हैं।

गुजरात दंगों का इस्तेमाल मोदी ने अपना हिन्दू राष्ट्र अभियान शुरू करने के लिए किया। मोदी और उनके साथियों, जिनमें विहिप के अशोक सिंघल शामिल थे, ने कहना शुरू कर दिया कि अब हिन्दू और नहीं सहेंगे। गुजरात दोहराया जायेगा, एक तरह की धमकी बन गई। इस दिल दहलाने वाली हिंसा ने दोनों समुदायों के रिश्तों में और खटास घोल दी।

यह शायद पहली बार है कि किसी अदालत ने हिंसा पीड़ितों को न्याय दिलवाने के लिए संघर्षरत लोगों के बारे में इस तरह की टिप्पणी की है। गुजरात पुलिस ने तीस्ता सीतलवाड़ और आरबी श्रीकुमार को गिरफ्तार करने में जबरदस्त तत्परता दिखाई। इस मनमानी पुलिस कार्यवाही की चारों ओर निंदा हो रही है। मानवाधिकार संगठन इसका विरोध कर रहे हैं और देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा है, ‘भारतीय प्राधिकारियों द्वारा प्रमुख मानवाधिकार कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ को कैद करना उन लोगों के खिलाफ प्रतिशोध की प्रत्यक्ष कार्यवाही है जो सरकार के मानवाधिकार रिकॉर्ड पर प्रश्न उठाने की हिम्मत दिखा रहे हैं। यह नागरिक समाज के लिए डरावना सन्देश है और देश में असहमति के लिए स्थान को और सीमित करता है। मानवाधिकारों के लिए वैध रूप से काम करने वालों को निशाना बनाया जाना अस्वीकार्य है। भारतीय प्राधिकारियों को तीस्ता सीतलवाड़ को तुरंत रिहा करना चाहिए और नागरिक समाज और मानवाधिकार रक्षकों का उत्पीड़न बंद करना चाहिए।’

अगोरा प्रकाशन की किताबें किन्डल पर भी…

संयुक्त राष्ट्रसंघ की मानवाधिकार रक्षकों की स्थिति पर विशेष प्रतिनिधि मैरी लाव्लोर ने ट्वीट किया, गुजरात पुलिस के आतंकवाद निरोधक दस्ते द्वारा तीस्ता सीतलवाड़ को निरुद्ध किया जाना चिंता का विषय है। तीस्ता नफरत और भेदभाव के खिलाफ एक मज़बूत आवाज़ हैं। मानवाधिकारों की रक्षा करना अपराध नहीं है। मैं उनकी रिहाई की मांग करतीं हूँ और चाहती हूँ कि भारतीय राज्य द्वारा उनका उत्पीड़न बंद हो।

अंग्रेजी से रूपांतरण अमरीश हरदेनिया

लेखक आईआईटी मुंबई में पढ़ाते थे और सन् 2007 के नेशनल कम्यूनल हार्माेनी अवार्ड से सम्मानित हैं।

गाँव के लोग
गाँव के लोग
पत्रकारिता में जनसरोकारों और सामाजिक न्याय के विज़न के साथ काम कर रही वेबसाइट। इसकी ग्राउंड रिपोर्टिंग और कहानियाँ देश की सच्ची तस्वीर दिखाती हैं। प्रतिदिन पढ़ें देश की हलचलों के बारे में । वेबसाइट की यथासंभव मदद करें।

4 COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

लोकप्रिय खबरें