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जमीनों पर जबरदस्ती कब्जे हेतु आदिवासी निशाने पर

विकास के नाम पर आज पूरे देश में किसान और आदिवासियों की जमीनों पर सरकार की नज़रें हैं। केंद्र सरकार हो या राज्य सरकारें सभी का…
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अस्पताल की अमानवीयता और लापरवाही ने ली एक प्रतिभाशाली गायिका मोनिका की जान

किसी भी देश या क्षेत्र के विकास का मापदंड उसकी आधारभूत सुविधाओं जैसे शिक्षा,रोज़गार और स्वास्थ्य सुविधाओं से नापा जा सकता है। आये दिन सोशल…
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स्थापना के साढ़े छह दशक बाद भी पर्याप्त रेल संपर्क से वंचित है मध्यप्रदेश

मध्य प्रदेश (छत्तीसगढ़ समेत) का गठन 1 नवम्बर, 1956 को हुआ था। राज्यों के पुनर्गठन के लिए एक विशेष आयोग बनाया गया था जिसका नाम राज्य पुनर्गठन…
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बारह वर्षों में कहाँ तक पहुँचा है तमनार का कोयला सत्याग्रह

ऊपर की तस्वीर में गाँव के कुछ लोग मंच बनाते दिख रहे हैं। ये किसी टेंट हाउस के कर्मचारी नहीं है बल्कि उरवा और आसपास के गाँव के ग्रामीण हैं।…
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ज़मीन की लूट और मुआवजे के खेल में लगे सेठ-साहूकार और अधिकारी-कर्मचारी

कहते हैं चतुर आदमी चालीस साल आगे का सोचकर निर्णय लेता है। और जिसके मुंह में मुनाफे का शहद लगा हो उससे ज्यादा चतुर कोई हो नहीं सकता। ऐसे चतुर…
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सामुदायिक वन अधिकार से कितना बदलेगा आदिवासियों का जीवन

जंगल आदिवासियों का ही है लेकिन उन्हीं को वहाँ से बेदखल करने की कोशिशें लगातार होती रही हैं। वन विभाग और पुलिस द्वारा आदिवासियों के दमन और…
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विकास के नाम पर भू-अधिग्रहण के अनुभव, परिदृश्‍य और सबक

पहला हिस्सा- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 28 जून, 2022 को जल-जंगल-ज़मीन की कॉर्पोरेट लूट, दमन और विस्थापन के खिलाफ जनसंघर्षों का एक…
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 भावनाएं केवल ताकतवालों की आहत होती हैं जज साहब! डायरी (3 सितंबर, 2021)

कल का दिन बेहद खास रहा। खास कहने के पीछे कोई व्यक्तिगत कारण नहीं है। वैसे भी जब आदमी तन्हा हो तो व्यक्तिगत कारणों का संकट बना रहता है्,…
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‘शाश्वत सत्य’ और राज्य डायरी (9 अगस्त, 2021)

भारतीय सामाजिक व्यवस्था का केंद्रीय चरित्र पूंजीवादी है और यह कोई नयी बात नहीं है। चार वर्णों की व्यवस्था इसलिए ही बनायी गयी है। संसाधनों का…
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