क्या 2023 में भी अशोक गहलोत अपना जादू दिखा पाएंगे?

देवेन्द्र यादव

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भले ही, गुजरात विधानसभा चुनाव की चुनाव आयोग ने अभी घोषणा नहीं की है, मगर पांच राज्यों के चुनाव के परिणाम के बाद चार राज्यों में भाजपा की जीत के 1 दिन बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के अहमदाबाद में जीत का जश्न मनाते हुए रोड शो कर गुजरात विधानसभा चुनाव का आगाज कर दिया है।

गुजरात में लगभग दो दशक से भाजपा की सरकार है। 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सरकार बनाने से रह गई।

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 2018 के विधानसभा चुनाव में अपना ऐसा जादू चलाया की केंद्र और गुजरात मैं भाजपा की सरकार होने के बावजूद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में भाजपा को 3 डिजिट का आंकड़ा भी नहीं छूने दिया और भाजपा केवल 99 सीट ही जीत पाई वह बात अलग है कि भाजपा ने जोड़-तोड़ कर बमुश्किल अपनी इज्जत बचाई, और गुजरात में सरकार बनाई।

गुजरात, राजस्थान का सीमावर्ती राज्य है, राजस्थान का एक बड़ा हिस्सा, ऐसा है जहां की संस्कृति आपस में मिलती है और रिश्तेदारी भी है।

गुजरात में राजस्थान व्यापारी और मजदूर भी बड़ी संख्या में हैं, ऐसे में गुजरात के चुनाव में  राजस्थान के नेताओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, इसका प्रमाण 2017  में अशोक गहलोत ने दिया था, जब कांग्रेस गुजरात में सरकार बनाने के करीब पहुंच गई थी, तब गुजरात विधानसभा चुनाव की कमान अशोक गहलोत के हाथों में थी, हालांकि कांग्रेस ने राजस्थान के नेता रघु शर्मा को गुजरात प्रांत का प्रभारी बनाया है! डॉ रघु शर्मा राजस्थान सरकार में चिकित्सा मंत्री थे उन्हें मंत्री पद से हटाकर, पार्टी में गुजरात का प्रभारी बनाया है, रघु शर्मा अशोक गहलोत के खास सिपहसालारओं में से एक रहे हैं।

रघु शर्मा की बात करें तो रघु शर्मा संगठनात्मक रूप से काफी अनुभवी नेता रहे हैं, मगर राजस्थान से निकालकर पार्टी ने पहली बार रघु शर्मा को किसी अन्य राज्य में पार्टी को मजबूत करने की जिम्मेदारी दी है, रघु शर्मा को पार्टी में ऐसे समय पर गुजरात की जिम्मेदारी दी है जब इसी वर्ष के अंत में गुजरात में विधानसभा के चुनाव होने हैं।

लंबे समय से काँग्रेस गुजरात की सत्ता से बाहर है, गुजरात में कांग्रेस को सत्ता में कैसे लाया जाए यह चुनौती रघु शर्मा के सामने सबसे बड़ी है।

गुजरात में कांग्रेस के नेता पुत्रों की बड़ी तादाद है, नेता पुत्रों को संभालना और संभाल कर उन्हें जिम्मेदारी देना, और चुनाव जीतना यह बड़ी जिम्मेदारी है।

गुजरात में राजस्थान व्यापारी और मजदूर भी बड़ी संख्या में हैं, ऐसे में गुजरात के चुनाव में राजस्थान के नेताओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, इसका प्रमाण 2017 में अशोक गहलोत ने दिया था, जब कांग्रेस गुजरात में सरकार बनाने के करीब पहुंच गई थी, तब गुजरात विधानसभा चुनाव की कमान अशोक गहलोत के हाथों में थी, हालांकि कांग्रेस ने राजस्थान के नेता रघु शर्मा को गुजरात प्रांत का प्रभारी बनाया है! डॉ रघु शर्मा राजस्थान सरकार में चिकित्सा मंत्री थे उन्हें मंत्री पद से हटाकर, पार्टी में गुजरात का प्रभारी बनाया है, रघु शर्मा अशोक गहलोत के खास सिपहसालारओं में से एक रहे हैं।

2017 के विधानसभा चुनाव में अशोक गहलोत ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए, नेता पुत्रों को भी भरोसे में लिया और गुजरात में नए युवा चेहरों को भी उजागर किया, परिणाम यह हुआ कि कांग्रेस ने गुजरात में भाजपा को केवल 99 सीटों पर लाकर खड़ा कर दिया।

अशोक गहलोत ने गुजरात में 2017  में जो फसल बोई थी कांग्रेस 2022  के विधानसभा चुनाव में उस फसल को काटकर अपने घर ले आएगी यह सबसे बड़ा सवाल है और इस सवाल का एक ही जवाब है कांग्रेस को गुजरात के चुनाव की कमान फिर एक बार अशोक गहलोत के हाथों में देनी चाहिए, क्योंकि हार्दिक पटेल जिग्नेश मेवानी जैसे प्रभावशाली नेता अशोक गहलोत के प्रभाव के कारण ही उस समय कांग्रेस से जुड़े थे।

गुजरात राजनैतिक दृष्टि से, देश का एक मजबूत प्रांत है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह गुजरात से ही आते हैं, नरेंद्र मोदी लगातार लंबे समय तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए ही 2014 में देश के प्रधानमंत्री बने थे !

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नरेंद्र मोदी और अमित शाह की मौजूदगी में गुजरात में भाजपा को चुनौती देने के लिए, कांग्रेस के पास कोई बड़ा नेता नहीं है।

2018  के विधानसभा चुनाव में मोदी और शाह को राजस्थान के नेता मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पहली बार बड़ी चुनौती दी थी भाजपा को एक-एक सीट जीतने पर मजबूर कर दिया था वह बात अलग है कि भाजपा ने गुजरात में जोड़तोड़ कर अपनी सरकार बना ली थी लेकिन अशोक गहलोत ने मोदी और शाह की जोड़ी को मजबूर तो कर ही दिया था।

आगामी विधानसभा चुनाव में मोदी और शाह को टक्कर देने के लिए कांग्रेस फिर एक बार जादूगर अशोक गहलोत को अपना जादू बिखेरने के लिए गुजरात की जिम्मेदारी देगी इसका हमें अभी इंतजार करना होगा।

देवेंद्र यादव कोटा (राजस्थान) स्थित वरिष्ठ पत्रकार हैं।

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