Friday, June 26, 2026
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फ़लिस्तीन की जमीनी हकीकत : यात्रा से लौटकर

एक ज़िंदा शहर के ज़िंदा लोग किस तरह से अमानवीय परिस्थितियों में रहने को मजबूर हैं कि उन्हें पानी, बिजली और काम के लिए जूझना पड़ रहा है। कॉमरेड विनीत अपनी फ़लिस्तीन यात्रा के दौरान बेतेलहम, जेरूसलम, नाबलूस, जेनिन, आरमीनिया, जेरिकों तथा जोर्डन वैली गए थे। उन्होंने फ़लिस्तीन यात्रा के दौरान हुई दुश्वारियों और अनुभवों को साझा किया। पढ़िए, वहाँ के कठिन जीवन के संघर्ष का विस्तार से वर्णन। 

दिल्ली में दो-दिवसीय युवा सोशलिस्ट सम्मेलन का आयोजन

समाजवादी आंदोलन के 90 साल पूरा होने के ऐतिहासिक मौके पर युवा सोशलिस्ट पहल के तत्वावधान में  दिल्ली में 31 अक्तूबर (आचार्य नरेंद्रदेव जयंती दिवस) से 1 नवंबर 2025 को दिल्ली में दो दिन के युवा सोशलिस्ट सम्मेलन का आयोजन किया गया है। सम्मेलन राजेंद्र भवन (गांधी शांति प्रतिष्ठान के सामने), दीनदयाल उपाध्याय मार्ग नई दिल्ली) में सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक होगा।

आरएसएस ने भारत की आजादी में हिस्सा लेते हुए कौन सी कुर्बानियाँ दीं

आरएसएस के सौ वर्ष पूरे होने पर मोदी ने अपने भाषण में कहा कि देश की आजादी के लिए बड़ी-बड़ी कुर्बानियां दीं और चिमूर जैसे कई स्थानों पर ब्रिटिश शासन का विरोध भी किया। उनके अनुसार राष्ट्र निर्माण में संघ का जबरदस्त योगदान है। लेकिन संघ का राष्ट्रवाद ‘अलग‘ था यह तब स्पष्ट हुआ जब पंडित नेहरू ने 26 जनवरी, 1930 को तिरंगा फहराने का आव्हान किया। हेडगेवार ने भी झंडा फहराने का आव्हान किया, किंतु भगवा झंडा फहराने का। हेडगेवार नमक सत्याग्रह में शामिल हुए थे क्योंकि उन्हें लगा कि यह जेल में बंद स्वतंत्रता सेनानियों को अपने संगठन की ओर आकर्षित करने का एक अच्छा अवसर है। इसलिए उन्होंने सरसंघचालक के पद से इस्तीफा दिया, जेल गए और जेल से रिहा होने के बाद दुबारा वही पद ग्रहण किया। इस दौरान उन्होंने अन्य लोगों को स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के प्रति हतोत्साहित किया। एक संगठन के रूप में आरएसएस ने किसी भी ब्रिटिश विरोधी आंदोलन में भाग नहीं लिया।

राजस्थान : माहवारी के लिए सुविधा की सरकारी योजनाओं से वंचित हैं लड़कियां

माहवारी से जुड़ी चुनौतियाँ केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं हैं बल्कि यह सीधे शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक समानता से जुड़ा मुद्दा है। जब लड़कियाँ पैड की कमी के कारण पढ़ाई छोड़ने पर मजबूर होती हैं, तो यह केवल उनका नुकसान नहीं बल्कि पूरे समाज का नुकसान है। सरकार और समाज यदि मिलकर सुनिश्चित करें कि हर गाँव में पैड और स्वच्छता सुविधाएँ समय पर उपलब्ध हों, तो लाखों लड़कियों का जीवन आसान हो सकता है

‘अडानी भगाओ छत्तीसगढ़ बचाओ’ के नारे के साथ संयुक्त किसान मोर्चा ने मनाया कॉर्पोरेट विरोधी दिवस

किसान मोर्चा के नेताओं नेअपने विरोध प्रदर्शन में कहा कि छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार को अपनी कॉर्पोरेटपरस्त नीतियों के विरोध में आम जनता और किसान समुदाय का तीखा विरोध झेलना पड़ेगा। संयुक्त किसान मोर्चा ने भाजपा की मजदूर-किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ पूरे प्रदेश में किसानों और आदिवासियों को लामबंद करने की योजना बनाते हुए आज कॉर्पोरेट विरोधी दिवस मनाया गया।

दिल्ली : रैट माइनर आवास पर बुलडोजर संघ-भाजपा सरकार की मजदूर विरोधी कार्रवाई

गरीबों, शोषितों और अल्पसंख्यकों के घरों पर आज बुलडोजर चलाया जा रहा है । यह बीजेपी-आरएसएस की उन्हें डरा धमकाकर वोट हासिल करने की रणनीति का एक हिस्सा है ।

वरिष्ठ पत्रकार, नेशनल हेराल्ड की सलाहकार संपादक और लेखिका सुजाता आनंदन का निधन

सुजाता आनंदन ने एक तेज तर्रार राजनैतिक विश्लेषक के रूप में अपनी पहचान बनाई। साथ उनकी परिपक्व समझ और दृष्टि थी। जब वे युवा थीं तब से ही वे देश-दुनिया के अलग-अलग जगहों पर खबर को करने की विशेषज्ञता हासिल कर ली थीं। 65 वर्ष की उम्र में बुधवार को उनका निधन हो गया।

लद्दाख : मासिक धर्म की असहजता को दूर करने के लिए चल रहा जागरूकता कार्यक्रम

ऐसे समाज में जहां मासिक धर्म के बारे में बातचीत गोपनीयता में छिपी रहती है, लेह ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से अंतर को पाटने का प्रयास कर रहा है। हालांकि देश के अन्य हिस्सों की तरह लेह में भी अधिकांश दुकानदार सेनेटरीपैड को अखबार में लपेटकर देते हैं। जबकि अखबार में पैड लपेटना कोई समाधान नहीं है, बल्कि यह मासिक धर्म उत्पादों के अनुचित रखरखाव को बढ़ावा देता है।

उत्तराखंड : पिंगलो गांव में हरियाली के बीच बढ़ती गन्दगी से लोग परेशान

उत्तराखंड के बागेश्वर के पिंगलो गांव में तो हरियाली की कमी नहीं है लेकिन स्थानीय स्तर पर जागरूकता की कमी के कारण लोग अपने आसपास के स्थानों को ही गंदा कर रहे हैं।

जामिया मिलिया इस्लामिया शिक्षा और संस्कृति की पहचान है : वसीम अख्तर

जामिया एलुमनाई एसोसिएशन लखनऊ की ओर से बीते 18  फरवरी को डायमंड पैलेस होटल में एलुमनी मीट का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में देश और विदेश में बसे जामिया से पास आउट छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।

उत्तराखंड : पिंगलों गांव में बंदरों के आतंक से कृषि हो रही चौपट

पिंगलों गांव के लोग बंदरों के आतंक से परेशान हैं। यहाँ बन्दर न सिर्फ फसलों को नष्ट कर दे रहे हैं बल्कि लोगों के ऊपर झपट्टा मारकर घायल भी कर दे रहे हैं।
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