Wednesday, February 18, 2026
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विचार

किशन पटनायक के चिंतन में अच्छी राजनीति का विकल्प बचा हुआ था

किशन पटनायक विकास के विनाशकारी मॉडलों का विरोध करने वाले आंदोलनों में सक्रिय रहे, कभी अपने स्वास्थ्य की परवाह नहीं की। एक सच्चे दार्शनिक की तरह निरंतर लिखते और सोचते रहे। वे एक लोकतांत्रिक समाजवादी थे, इसमें कोई शक नहीं, लेकिन उन्होंने अपने लेखों या भाषणों में कभी किसी नेता का हवाला देते नहीं देखा। सच्चे अर्थों में एक स्वतंत्र विचारक थे। ‘विकल्पीन नहीं है दुनिया’ से लेकर ‘भारत शूद्रों का होगा’ तक, समाजवाद, किसानों के मुद्दे, सांप्रदायिकता, धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र और लैंगिक संबंधों को कवर करने वाली उनकी रचनाएँ, विचारों की मौलिकता को दर्शाती हैं। पढ़िये, उनके साथ बिताए लेखक के अनुभव और संस्मरण।

भाजपा शासन के ग्यारह वर्ष : संविधान और धर्मनिरपेक्षता का लगातार दमन

पिछले 11 वर्षों से केंद्र सरकार और कई राज्य सरकारों पर नियंत्रण रखते हुए, ये ताकतें संविधान के तीन स्तंभों..धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र और संघवाद  को कमज़ोर करने और उसकी जगह समाज के एक अंधकारमय, मध्ययुगीन दृष्टिकोण पर आधारित एक फ़ासीवादी हिंदू राष्ट्र स्थापित करने के लिए जी-जान से जुटी हैं।

हिंदुत्ववादी राजनीति ने इतिहास के पाठ्यक्रम से गायब किया मुस्लिम शासन का पाठ

भारतीय शिक्षा प्रणाली पर हिंदू साम्प्रदायिक तत्वों के पहले भी आरएसएस के साम्प्रदायिक संस्करण के माध्यम से प्रतिभाओं, एकल संप्रदायों और शैक्षणिक संस्थानों को बढ़ावा दिया जा रहा था। एनसीईआरटी की इतिहास की किताब से कक्षा सात से मुगलकालीन शासकों का पाठ हटाकर कुम्भ मेला का पाठ शामिल किया गया।

पहलगाम त्रासदी : आतंकवाद के चलते क्या कभी कश्मीर में शान्ति संभव हो पाएगी

आतंकवाद का खात्मा कैसे हो सकता है? स्थानीय लोगों को राज्य के मामलों से दूर रखने का निरंकुश तरीका आतंकवाद से निपटने में सबसे बड़ी बाधा है। सुरक्षा में बार-बार विफल होना, पुलवामा और अब पहलगाम में सुरक्षा व्यवस्था का विफल होना गहरी चिंता का विषय है।

क्या नेहा सिंह राठौर पर एफआईआर से आतंकवाद की कमर टूट जाएगी

नेहा राठौर और लखनऊ विश्वविद्यालय की प्रोफेसर डॉ माद्री ककोटी उर्फ डॉ मेडुसा के ऊपर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज कर लिया गया। गोदी मीडिया और भाजपा के ट्रोल ने उनके खिलाफ ज़हर उगलना शुरू कर दिया है।न तो नेहा राठौर और न ही माद्री ककोटी ने इस मामले में कोई खेद व्यक्त किया बल्कि नेहा लगातार आलोचना जारी रखे हुये हैं। एक वीडियों में उन्होंने गोदी मीडिया को देश का गद्दार और अपराधी भी कहा।

नवीन शेखरप्पा का हत्यारा कौन? (डायरी 2 मार्च, 2022)  

भारत में नरेंद्र मोदी सरकार बहुत काम करती है। यही बताना उद्देश्य रह गया है भारतीय अखबारों और न्यूज चैनलों का। यही वजह है...

डाक्टर बनने के लिए भारतीय छात्र-छात्राओं के यूक्रेन जाने का सबब (डायरी 1 मार्च, 2022)

मनुष्यों की औसत आयु का हिसाब-किताब बदलता रहता है। यह अलग-अलग देशों में अलग-अलग है। मसलन, वर्तमान में भारत में 69.4 वर्ष है और...

किसके लिए हैं हिंदी के ‘अखबार’? (डायरी 28 फरवरी, 2022)

रांची संस्करण के जैकेट पर यूक्रेन-रूस युद्ध की खबर है और पहले पृष्ठ पर झारखंड की ‘महत्वपूर्ण’ खबरें। महत्वपूर्ण को कोट्स में रखने के पीछे आशय यह है कि हर अखबार के लिए कौन सी खबर महत्वपूर्ण है, अखबार के मालिक लोग तय करने लगे हैं। पहले यह काम संपादक करते थे। अब पटना संस्करण के जैकेट पर यूक्रेन-रूस की खबर नहीं है।

भारत के नाम पर बाइडेन की हंसी का निहितार्थ (डायरी 27 फरवरी, 2022)  

भारतीय पत्रकार ललित झा ने बाइडेन से पूछा था कि भारत आपके महत्वपूर्ण सामरिक सहयोगी देशों में से एक है, तो क्या रूस के सवाल पर वह आपके साथ पूरी प्रतिबद्धता के साथ है? ललित झा के सवाल को पहली बार में या तो बाइडेन समझ नहीं पाए या फिर उन्हें लगा होगा कि भारतीय पत्रकार ने भूलवश ऐसा सवाल किया है। उन्होंने सवाल दुहराने काे कहा। ललित झा ने फिर वही सवाल दुहराया। बाइडेन ने बिना हंसते हुए कहा कि अभी तक तो भारत हमारा महत्वपूर्ण सामरिक सहयोगी नहीं बना है, वैसे इस मामले पर आज ही भारत से बात करता हूं। बाइडेन के इतना कहते ही सब हंस पड़े।

गोवा की आज़ादी में देरी के लिए क्या नेहरू जिम्मेदार थे?

अंग्रेजों द्वारा भारतीय उपमहाद्वीप के औपनिवेशीकरण की प्रक्रिया शुरू करने के बहुत पहले की बात है। पुर्तगालियों ने कई सदियों तक गोवा पर शासन किया। उनका शासन अत्यंत कड़ा था। पुर्तगालियों की बड़े पैमाने पर खिलाफत पहली बार सन 1718 में हुई जब वहां के पॉस्टरों के एक समूह ने टीपू सुल्तान की मदद मांगी और पुर्तगाली सरकार के खिलाफ विद्रोह कर दिया। इसे पिंटो षड्यंत्र कहा जाता है। यह विद्रोह बुरी तरह असफल हुआ और इसके कर्ताधर्ता पॉस्टरों को अमानवीय यातनाएं दी गईं।

यूक्रेन-रूस युद्ध का आज अंतिम दिन, लेकिन चर्चा पश्चिम बंगाल में चल रहे अजीबाेगरीब जंग की (डायरी 26 फरवरी, 2022)

पश्चिम बंगाल विधानसभा का बजट सत्र आगामी सात मार्च को शुरू होगा। जाहिर तौर पर यह एक बेहद सामान्य खबर है। लेकिन इस खबर...
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