Wednesday, May 22, 2024
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वाराणसी : छात्रा के साथ गैंगरेप मामले में विरोध प्रदर्शन करने वाले छात्रों को बीएचयू प्रशासन ने भेजा नोटिस

बीते वर्ष 1 नवंबर की रात को बीएचयू में आईआईटी की एक छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया गया था। इस घटना में 3 युवकों की संलिप्तता पाई गई थी। ये तीनों ही दुष्कर्मी- कुणाल पांडेय, सक्षम पटेल और अभिषेक चौहान भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हुए थे।

बीते वर्ष नवंबर माह में काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में हुई गैंगरेप की घटना के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों को 20 अप्रैल को विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से एक ई-मेल प्राप्त हुआ है। इस मेल में इन छात्रों को 5 नवंबर और 6 जनवरी को हुई घटनाओं के मामले में अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए बनाई गई स्थायी समिति के सामने 24 अप्रैल को पेश होने का आदेश दिया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन इन छात्रों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकता है। इन छात्रों के नाम रोशन पांडेय, चंदा यादव, अनुरति, आकांक्षा शर्मा, इपशिता, राणा रोहित, सुमन आनंद, राजीव नयन, अनुपम कुमार, मानव उमेश एवं आदर्श कुमार हैं।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बीते वर्ष 1 नवंबर की रात को बीएचयू में आईआईटी की एक छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया गया था। इस घटना में 3 युवाओं की संलिप्तता पाई गई थी। ये तीनों ही दुष्कर्मी- कुणाल पांडेय, सक्षम पटेल और अभिषेक चौहान भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हुए थे। गैंगरेप की घटना को अंजाम देने के बाद ये तीनों मध्य प्रदेश में जाकर विधानसभा चुनाव में भाजपा के चुनाव प्रचार के कार्य में लग गए थे। मध्य प्रदेश में 17 नवंबर को मतदान वाले दिन से पहले ही ये वाराणसी वापस लौट आए थे। पुलिस ने इन तीनों आरोपियों की पहचान 4 नवंबर को ही कर ली थी लेकिन तीनों की गिरफ्तारी घटना के करीब 2 महीने बाद हुई थी। 

रेप की घटना के खिलाफ प्रदर्शन में टकराव और आंदोलनकारी छात्रों पर मुकदमे

1 नवंबर को हुई रेप की घटना के विरोध में और पीड़ित छात्रा को न्याय की मांग करते हुए बीएचयू में छात्रों ने 2 नवंबर से प्रदर्शन शुरू कर दिया था। ये सभी छात्र कैंपस में छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित किए जाने और रेप के आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी किए जाने की मांग कर रहे थे। इस दौरान विश्वविद्यालय में 5 नवंबर को छात्रों के 2 गुटों के बीच टकराव हो गया था। प्रदर्शनकारी छात्रों ने ABVP से जुड़े छात्रों पर हमला करने का आरोप लगाया था एवं ABVP से जुड़े छात्रों ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर हमले का आरोप लगाते हुए कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज कराया था। ABVP से जुड़े छात्रों के आरोपों के आधार पर प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया लेकिन प्रदर्शनकारी छात्रों के आरोपों के आधार पर ABVP से जुड़े छात्रों पर केस दर्ज नहीं किया गया।

5 नवंबर को हुई इस घटना को लेकर प्रशासन ने इन छात्रों को नोटिस भेजा है एवं स्थायी समिति के सामने पेश होने का आदेश दिया है। प्रशासन की तरफ से दोनों पक्षों से जुड़े छात्रों को नोटिस भेजा गया है।

बीएचयू में चिकित्सा विज्ञान संस्थान के छात्र रोशन पांडेय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, ‘5 नवंबर को प्रदर्शनरत छात्रों पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े छात्रों ने हमला कर दिया था। इस हमले के बाद ABVP से जुड़े छात्रों ने प्रदर्शनरत छात्रों पर फर्जी मुकदमे भी दर्ज कराए थे।’

वे बताते हैं, ‘जब प्रदर्शनकारी छात्र ABVP से जुड़े छात्रों के हमले की शिकायत दर्ज कराने पुलिस के पास गए तो पुलिस ने उनकी नहीं सुनी और एफआईआर भी दर्ज नहीं की। ABVP द्वारा प्रदर्शन कर न्याय मांग रहे छात्रों पर ही साजिशन एससी/एसटी एक्ट समेत अन्य गंभीर धाराओं में फर्जी मुकदमे दर्ज करा दिए गए। फर्जी मुकदमों से जुड़ा यह मामला इलाहाबाद उच्च न्यायालय में लंबित है।’

पीड़िता के साथ खड़े होने वाले छात्रों को कार्रवाई का अंदेशा

छात्र रोशन पांडेय बताते हैं, ‘माननीय उच्च न्यायालय में इन फर्जी मुकदमों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत किए जा चुके हैं। ABVP ने हम पर सुनियोजित तरीके से हमला किया था, सुनियोजित तरीके से फर्जी मुकदमे दर्ज कराए गए, इसका मुख्य उद्देश्य गैंगरेप के मामले से ध्यान भटकाना था, छात्रों के आंदोलन ने इस पूरी घटना में पीड़िता को न्याय दिलाने के असल सवाल को जिंदा रखा जिसने भाजपा से जुड़े तीनों अपराधियों की गिरफ्तारी को सुनिश्चित किया।’

आगे उन्होंने कहा, ‘घटना के 6 महीने बाद जब देश में आम चुनाव हो रहे हैं, बीएचयू प्रशासन पीड़िता के साथ खड़े छात्रों को टारगेट कर रहा है। 20 अप्रैल, 2024 को गैंगरेप के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल छात्र-छात्राओं को बीएचयू प्रशासन का ईमेल आया है। इसमें लिखा गया है कि प्रशासन द्वारा अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए एक स्टैंडिंग कमेटी का गठन किया गया है। सभी को 24 अप्रैल को कमेटी के सामने पेश होने के लिए कहा गया है। यह पूरी कार्रवाई राजनीतिक रूप से प्रेरित है तथा भाजपा और सरकार के इशारे पर की जा रही है।’

नोटिस मिलने के मामले पर बीएचयू में हिंदी विभाग की छात्रा चंदा यादव कहती हैं, ‘बलात्करियों के बजाय प्रदर्शनकारियों पर एक्शन क्यों? गैंगरेप के खिलाफ बोलने पर पहले फर्जी मुकदमें और उसके बाद अनुशासनात्मक कार्रवाई की धमकियाँ। मैसेज बिल्कुल साफ है। प्रशासन बलात्कारियों के साथ खड़ा है। यह कार्रवाई उन संगठनों के खिलाफ है जो भाजपा और आरएसएस की राजनीति से सहमति नहीं रखते। यह कैंपस में उन आवाजों को खामोश कर देने की साजिश है जो सामाजिक न्याय, लैंगिक समानता, लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और गरीबों मजलूमों के हक के लिए उठती हैं। यह एक पूरे छात्र समुदाय को चेतावनी है कि वो अपने कैंपस में सामूहिक दुष्कर्म देखने के बावजूद खामोश बैठे रहें।’

छात्र विश्वजीत कहते हैं, ‘बीएचयू में अभिव्यक्ति के कत्लेआम का सिलसिला चल पड़ा है। जो प्रशासन के सुर में सुर नहीं मिलाएगा उसे यूनिवर्सिटी से बेदखल कर दिया जाएगा। यूनिवर्सिटी के चौक चौराहे पर दरिंदों का आतंक और खौफजदा महिलाएं, विश्वविद्यालयी व्यवस्था को बेआबरू करते हैं। ऐसे समय में न्याय के लिए उठने वाली आवाजें उस विचार को बचाती हैं जिस पर विश्वविद्यालय टिका हुआ है।’

कल 24 अप्रैल को बीएचयू के इन छात्रों को अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए बनाई गई स्थायी समिति के सामने पेश होना है। छात्रों को अंदेशा है कि विश्वविद्यालय प्रशासन रेप की घटना के विरोध में आंदोलन करने वाले इन छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकता है।

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