Monday, June 24, 2024
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 नफरत-बंटवारे और साम्प्रदायिक राजनीति के खिलाफ बेहद जरूरी है जाति जनगणना- अली अनवर अंसारी

बनारस में जाति जनगणना की मांग को लेकर वक्ताओं ने तर्क और तथ्य के जरिए भाजपा सरकार को जमकर घेरा। उन्होंने कहा कि औपनिवेशिक काल में अंग्रेज़ों ने भारत देश के गैर-बराबरी से भरे समाज में अलग-अलग समूह की गणना कर उनके जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं का वैज्ञानिक तरीके से अध्ययन करने का निर्णय […]

बनारस में जाति जनगणना की मांग को लेकर वक्ताओं ने तर्क और तथ्य के जरिए भाजपा सरकार को जमकर घेरा। उन्होंने कहा कि औपनिवेशिक काल में अंग्रेज़ों ने भारत देश के गैर-बराबरी से भरे समाज में अलग-अलग समूह की गणना कर उनके जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं का वैज्ञानिक तरीके से अध्ययन करने का निर्णय लिया और इस कड़ी में भारत में जातिवार जनगणना की शुरुआत सन् 1881ई० में हुई। अंतिम बार जाति आधारित जनगणना 1931 में हुई थी। उसी आधार पर आजादी के बाद से अब तक सरकारें जनकल्याणकारी योजनाओं को क्रियान्वित करती हैं, जो कतई सही नहीं है। काका कालेलकर ने भी अपनी 1955 की रिपोर्ट में 1961 की जनगणना में जातिवार जनगणना कराने की अनुशंसा की थी, लेकिन तत्कालीन सरकार नहीं मानी।

मंडल कमीशन लागू होने के बाद से जातिवार जनगणना की मांग हर बार होती रही है। जातिवार जनगणना की मांग को देखते हुए कई बार राजनेताओं सहमति जताई, बाकी किन्हीं न किन्हीं कारणों से जनगणना नहीं हो पायी। केन्द्र की भाजपा सरकार के तत्कालीन गृहमंत्री श्री राजनाथ सिंह ने भी चुनावी जुमला फेंकते हुए 2018-19 में कहा था कि पुनः सरकार बनने के बाद हम ओबीसी की जनगणना करवायेंगे। लेकिन वर्तमान सरकार सदन और कोर्ट दोनों जगह कह चुकी है कि हम जातिवार जनगणना नहीं करा सकते। इसी जातिवार जनगणना की मांग को लेकर आज रविवार को बनारस के शास्त्री घाट कचहरी पर राष्ट्रीय स्तर का सम्मेलन का आयोजन किया गया था।

जाति जनगणना को लेकर जागरूकता बढ़ रही है

सम्मेलन में वक्ताओं ने जातिवार जनगणना की मांग को लेकर तर्क और तथ्य के जरिए भाजपा सरकार को खूब घेरा और कहा कि ‘जाति गणना को जनगणना से जोड़ो, वरना मोदी सरकार गद्दी छोड़ो।’ पूर्व राज्यसभा सांसद अली अनवर ने कहा कि जाति जनगणना साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण-नफरत और बटवारे की राजनीति को कमजोर करेगा। इसके साथ ही साथ मुस्लिम,हिन्दू,सिख,ईसाई की एकता को मजबूत करेगा और बहुजनों के व्यापक हक-हकूक की लड़ाई को आगे बढ़ायेगा। इसलिए आज की तमाम समस्याओं को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए सबसे जरूरी मांग है- जातिवार जनगणना।

महिलाओं ने बड़ी संख्या में भागीदारी

सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए डॉ लक्ष्मण यादव ने कहा कि जाति जनगणना राष्ट्र निर्माण के की बुनियादी जरूरत है। बहुसंख्यक आबादी को हक अधिकार, शिक्षा – रोजगार से वंचित कर दिया गया है। किसी भी देश या राष्ट्र में आबादी के हिसाब से हिस्सेदारी दिये बगैर वहां विकास व नव-निर्माण की प्रक्रिया संभव ही नही है। इसीलिए बहुसंख्यकों को उनके आबादी के अनुपात में हिस्सेदारी और देश के विकास के लिए जाति जनगणना बेहद जरूरी मांग है, जिसे सरकार द्वारा पूरा किया जाना चाहिए। सम्मेलन में एलायंस फार डिफेंडिंग फ्रीडम, यूनाइटेड क्रिस्चियन फ्रंट के ए. सी. माइकल ने जन व अल्पसंख्यक विरोधी यूपी धर्मांतरण कानून के खिलाफ आवाज उठाते हुए कहा कि योगी सरकार ने जिस धर्मांतरण कानून को लायी है, वह न केवल संविधान विरोधी है, बल्कि ईसाई-मुस्लिम समाज को निशाना बनाने वाला भी है। अबतक यूपी में एक साल के अंदर ईसाई समाज से जुड़ी 300 घटनायें घटित हुई, जिसमें 100 लोगो को जेल भेजा गया। ऐसे में ये बेहद जरूरी है कि इस जनविरोधी, संविधान विरोधी कानून को तत्काल रद्द किया जाए।

कार्यक्रम में उपस्थित लोग

सम्मेलन में मुख्य रूप से डा. अनूप श्रमिक, सुक्खु मरावी, मनीष शर्मा, सागर गुप्ता, शहज़ादी बानो, नेहाल, सबलू, सज्जन भाई, सुरेश राठौर, राजकुमार गुप्ता, मुस्तफ़ा, मुश्ताक, गणेश, जैशलाल, हरिशंकर, बब्बू, ओमप्रकाश, शिवकुमार, महेंद्र राठौर, प्रभु नारायण, रीना, नीशा, रेनू, श्रद्धा, योगिराज सिंह पटेल, डॉ छेदी लाल निराला, अपर्णा, रामजी यादव, राजेन्द्र मेहता, रामजनम यादव, चौधरी राजेन्द्र, राजीव मौर्य, अरविंद यादव, प्रवीण यादव, श्रवण भारती, अशोक महिंद्रा, श्री नंद किशोर, आर के प्रसाद , अरुण कुमार प्रेमी , पी राम, हरि शंकर, हाजी निशार अहमद, इंदरजीत पटेल, जयंत, रंजू, सुरेंद्र, अजय पाल, गणेश गौतम, रंजीत, मुकेश झंझारवाला, अबू हाशिम, बच्चेलाल, जय राम प्रसाद, एड. महेंद्र यादव, शोभना, दौलत राम, शेर बहादुर, ज्योति, हरीश चंद, जागृति, मालती देवी आदि लोग मौजूद थे।
गाँव के लोग
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