Friday, November 6, 2026
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पूर्वांचल का चेहरा - पूर्वांचल की आवाज़

साहित्य

यादवों ने किस कृष्ण का निर्माण किया है?

पिछड़ों के साहित्य की खोज में जेल की कोठरियों की छानबीन, अदालती पराजयों का गहन अध्ययन, फांसी के फंदों और थानों की हवालातों के विश्लेषण से पिछड़ों का साहित्य खोजने की परिकल्पना की गई है। इसके साथ ही आदि लिपिकार पथरकटों, आदि आविष्कारक चरवाहों, किसानों, देशों के अन्वेषक और खोजी मल्लाहों, नाइयों, धोबियों, बुनकरों की ऐतिहासिक जीवन यात्राओं के अलावा विभिन्न घटनाओं के प्रभावों का गहन अध्ययन भी एक मुख्य परिकल्पना है और मुझे लगता है इन्हीं सब में एक विराट पिछड़ा साहित्य मौजूद है।

वीरेंद्र यादव बनाम ज्वालामुखी यादव

आज सुबह अभी हम इलाहाबाद से आई प्रो राजेंद्र कुमार के न रहने की दुखद खबर से उबरे भी नहीं थे कि लखनऊ से प्रख्यात आलोचक वीरेंद्र यादव के जाने की स्तब्धकारी खबर आई। सहसा भरोसा करना मुश्किल था कि यह कैसे हो सकता है? दो दिन पहले उनके बीमार होने की सूचना मिली थी, लेकिन यह बीमारी इतनी घातक है यह न मालूम था। उनके जाने से बहुत कुछ खाली हो गया. वह गर्मजोशी से भरे बुद्धिजीवी थे जो केवल किताबी आलोचना तक सीमित नहीं थे, बल्कि लगभग सभी समकालीन मुद्दों पर लिखते और बोलते थे और बेलाग बोलते थे। उनके व्यक्तित्व के इन्हीं पहलुओं को छूता प्रख्यात कथाकार मधु कांकरिया की एक छोटी टिप्पणी जो उनके बहत्तरवें जन्मदिन पर चार साल पहले प्रकाशित की गई थी। आज पुनः उनको श्रद्धांजलिस्वरूप प्रकाशित की जा रही है।

मूँदहु आंख भूख कहुं नाहीं

अब गरज तो विश्व गुरु कहलाने से है, भूख बढ़ाने में विश्व गुरु कहलाए तो और भूख मिटाने में विश्व गुरु कहलाए तो। उसके ऊपर से 111 की संख्या तो वैसे भी हमारे यहां शुभ मानी जाती है। भारत चाहता तो पिछली बार की तरह, भूख सूचकांक पर 107वें नंबर पर तो इस बार भी रह ही सकता था। पर जब 111 का शुभ अंक उपलब्ध था, तो भला हम 107 पर ही क्यों अटके रहते? कम से कम 111 शुभ तो है। भूख न भी कम हो, शुभ तो ज्यादा होगा।

विश्वगुरु की सीख का अपमान ना करे गैर गोदी मीडिया

इन पत्रकारों की नस्ल वाकई कुत्तों वाली है। देसी हों तो और विदेशी हों तो, रहेंगे तो कुत्ते...

तुम्हारी लिखी कविता का छंद पाप है

मणिपुर हिंसा पर केन्द्रित कवितायें  हम यहाँ ख्यातिलब्ध बांग्ला कवि जय गोस्वामी की कुछ कवितायें प्रकाशित कर रहे हैं।...

जब तक मैं कोई चीज सोचता हूँ आर डी आनंद उसको लिख चुके होते हैं- स्वप्निल श्रीवास्तव

सर्वप्रथम, वरिष्ठ मार्क्सवादी-आम्बेडकरवादी चिंतक, आलोचक एवं कवि कॉमरेड आर डी आनंद के कविता-संग्रह 'नीला कोट लाल टाई' का लोकार्पण हुआजनमोर्चा सभागार, फैजाबाद। प्रगतिशील लेखक...

चींटी के पहाड़ पर चढ़ने के हौसले की कहानी

आत्मकथा लिखने के लिए जिस साहस और ज़ज्बे की आवश्यकता होती हैं वह दोनों ही तसनीम जी के भीतर मौजूद हैं I आत्मकथा का कोई भी ऐसा अंश पकड़ में नहीं आता जहाँ सच्चाई महसूस न होती हो I ईमानदारी से जुटाएं गए तजुर्बों और हौसलों की सच्ची दास्तान पाठक के मन को गहरे तक द्रवित करने का पूरा दमख़म रखती है I पितृसत्तात्मक मानसिकता स्त्री की आजादी को बहुत कम महत्त्व देती है या यूँ कहिए की स्त्रियों की ‘आज़ादी’ जैसा कोई टर्म उनके शब्दकोश में है ही नहीं I

जो कभी शहर के सन्नाटे को तोड़ता था

 मेरे मित्रों में उमेश प्रसाद सिंह एक ऐसे रचनाकार हैं जिन्होंने साहित्य की सर्वाधिक विधाओं में काम किया है अर्थात लेखन। लेकिन उनकी छवि...

बीपी मंडल के नाम पर सम्मान मिलना मेरे लिए गौरव की बात है       

हिन्दी दलित साहित्य में सुशीला टाकभौरे एक जाना-पहचाना नाम है। कविता, कहानी,  उपन्यास के साथ ही आलोचना की कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।...

मेयार भाई हरहुआ में रहते थे !

सजाकर दामने-अल्फ़ाज़ में ख़याल के फूल/ मैं दे रहा हूँ ज़माने को बोल-चाल के फूल जैसे बेहतरीन शे'र और ग़ज़लों से दुनिया को नवाज़ने...

हमारा दुख है पानी की बोतल उनका संघर्ष पहाड़ सरीखा

डॉ. गुलाबचन्द  यादव (जन्म 1 जनवरी 1965) जाने-माने हिन्दी गद्यकार हैं जिनके यात्रा वृत्तान्त आज के ग्रामीण मन-मिजाज की बहुत संवेदनशील आईनादारी करते हैं।...
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