Wednesday, July 24, 2024
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मिर्ज़ापुर : कहने को मंडल पर स्वास्थ्य का चरमराता ढाँचा ढोने को विवश

किसी मंडलीय अस्पताल उर्फ मेडिकल कॉलेज के पर्ची काउंटर पर साँड़ आराम फरमा रहा हो और अस्पताल के ठीक पीछे मेडिकल वेस्ट का डम्पिंग ग्राउंड हो तो आप आसानी से समझ सकते हैं कि यह अस्पताल शहर और जिले का स्वास्थ्य कितने बेहतरीन ढंग से दुरुस्त रखता होगा। इसके लिए कहीं दूर जाने की आवश्यकता भी नहीं है। बस विंध्याचल मंडल के मुख्यालय मिर्ज़ापुर आइये और यह नज़ारा देख लीजिये।

उत्तर प्रदेश में प्रचंड गर्मी का कहर लगातार जारी है। सरकारी अस्पतालों से लेकर निजी अस्पतालों में बेड मरीजों से पटे पड़े हुए हैं। अस्पतालों में आने वाले सर्वाधिक मरीजों में बुखार, हीट स्ट्रोक लू और बेचैनी घबराहट से ग्रसित लोगों की संख्या है। कुछ समय पहले सम्पन्न हुए लोकसभा चुनाव के मतदान वाले दिन से शुरू हुआ हीट स्ट्रोक का कहर अभी भी जारी है। प्रदेश में हीट स्ट्रोक लू से जान गंवाने वाले लोगों की संख्या में जहां इजाफा होता जा रहा है, तो वहीं सरकारी अस्पतालों की हालत खस्ता बनी हुई है। खुद इनकी हालत बीमारों जैसी बनी हुई है। अस्पतालों में संसाधनों की इतनी कमी है कि गर्मी से निपटने के पर्याप्त इंतजाम न होने से लोगों को परेशान देखा जा सकता है। सर्वाधिक बुरी गत ग्रामीण इलाकों के उन सरकारी अस्पतालों की हैं जहां इलाज तो क्या दोपहर बाद डाक्टर ही नज़र नहीं आते। रात्रि के पहर य़दि कोई बीमार हो जाएं या घटना-दुर्घटना हो जाए तो उसे जिला मुख्यालय का ही रास्ता दिखाया जाता है।

वरिष्ठ अधिवक्ता कमलेश दुबे सरकारी अस्पतालों की जर्जर और बदहाल व्यवस्था पर तंज़ कसते हुए कहते हैं ‘सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे करने से पीछे नहीं है, लेकिन उसकी ज़मीनी हक़ीक़त क्या है? उसकी ओर न तो कोई अधिकारी झांकने आता है न ही कोई जनप्रतिनिधि। इससे इनकी सच्चाई छुप कर रह जाती है। यदि कभी-कभार किसी अधिकारी या जनप्रतिनिधि का आना होता भी है तो उसके पहले से व्यवस्था को चौकस कर सभी को चौकन्ना कर दिया जाता है। मरीजों को उनके पास फटकने तक नहीं दिया जाता है। ऐसे हालात में सरकारी अस्पताल की बदहाली छिपकर रह जाती है। गरीब मरीज जुबान खोलने से परहेज़ कर जाते हैं। उन्हें इस बात का भय होता है कि यदि कहीं उन्होंने शिकायत की तो उनके मरीज के इलाज में डाक्टर कोई कांटा न खड़ा कर दे, इसलिए वह बोलने से बचते हैं।’

वह मिर्ज़ापुर मंडलीय अस्पताल जिसे अब मेडिकल कॉलेज के अधीन कर दिया गया है पर पुनः तंज कसते हुए कहते हैं, ‘ऊंची दुकान, फीके पकवान’ यानी मीरजापुर को मेडिकल कॉलेज की भले ही सौगात मिली हुई है, लेकिन यहां की स्वास्थ्य सेवाओं में कोई खास बदलाव नहीं आया है। भ्रष्टाचार और मनमानी के साथ स्वास्थ्य सेवाओं की लचर स्थिति आज भी बनी हुई है।’

कहने को मंडलीय अस्पताल लेकिन हालत खस्ता

मिर्ज़ापुर का बैरिस्टर युसुफ इमाम जिला चिकित्सालय जिसे मंडलीय अस्पताल का भी दर्जा प्राप्त रहा है। यहां मिर्ज़ापुर के सूदूर अंचलों से चलकर आने वाले मरीजों के अलावा सोनभद्र, भदोही और पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के रीवा, हनुमना, मऊगंज से भी बड़ी संख्या में मरीज उपचार कराने के लिए आते रहे हैं। लेकिन कहते हैं ‘जैसे-जैसे इलाज किया त्यों-त्यों मर्ज बढ़ता गया’। ठीक उसी प्रकार से मिर्ज़ापुर जिला अस्पताल के व्यवस्थाओं में सुधार की जैसे-जैसे कवायद होनी शुरू हुई है, वैसे ही इसकी बुरी गत भी होने लगी। सबसे दु:खद पहलू यह है कि जिला/मंडलीय अस्पताल के ‘मां विंध्यावासिनी स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय’ के रूप में मेडिकल कॉलेज का दर्जा प्राप्त होने के बाद लोगों को जो उम्मीदें थीं वह चकनाचूर होने लगी हैं। भ्रष्टाचार और मनमानी के आरोपों से घिरे मंडलीय अस्पताल को इससे न तो छुटकारा मिल पा रहा है न ही यहां की व्यवस्थाओं में सुधार हो पा रहा है।

कांग्रेस शासन काल में स्थापित मिर्ज़ापुर का सरकारी अस्पताल कभी अपने बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर न केवल अति पिछड़े पहाड़ी इलाके में शुमार रहा है, बल्कि पड़ोसी जनपद और सीमावर्ती राज्य मध्य प्रदेश के रीवा जिले के लोगों के लिए भी राहत प्रदान किया करता था। बढ़ती आबादी के साथ ही व्यवस्थाओं और अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत को महसूस करते हुए इसे जिला अस्पताल से मंडलीय अस्पताल का दर्जा प्रदान किया गया। अब इसे मेडिकल कॉलेज के तौर भी पहचाना जाता है।

मिर्ज़ापुर जिले में 16 सामुदायिक स्वास्थ केंद्र, 39 प्राथमिक स्वास्थ केंद्र व 251 उपकेन्द्रों का संचालन किया जा रहा है। वर्ष 2011 के जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक इस जिले की कुल आबादी 24,96,970 लाख आंकी गई है। जबकि बढ़ती आबादी के अनुपात में मौजूदा आबादी की बात करें तो तकरीबन 29 लाख आंकी जा रही है। बढ़ती आबादी और स्वास्थ्य सेवाओं में बढ़ोत्तरी के क्रम में शासन से 14 नए प्राथमिक स्वास्थ केन्द्रों की स्वीकृति मिल जाने के बाद जिले में अब इनकी संख्या बढ़कर कुल 53 हो जाएगी। इनमें 8 प्राथमिक स्वास्थ केंद्र अर्बन क्षेत्र के बसनहीं बाजार, इमामबाड़ा, मुकेरी बाजार, सिटी कोतवाली, घंटाघर, भटवा की पोखरी, बुंदेलखंडी व त्रिमोहानी में खोला जाना है। इसके अलावा 6 प्राथमिक स्वास्थ केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में खुलेंगे। इनमें दो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चुनार के अंतर्गत, दो प्राथमिक स्वास्थ केंद्र अहरौरा अंतर्गत, दो प्राथमिक स्वास्थ केंद्र कछवां में खोले जाने हैं। फिलहाल ये सभी किराये के कमरे में ही खोले जाने हैं। जगह मिलने पर भवन का निर्माण भी कराया जाएगा।

 

मिर्ज़ापुर के सीएमओ डॉ सी एल वर्मा बताते हैं कि ‘सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने तथा शासन द्वारा प्रदत्त सेवाओं का समुचित लाभ पहुंचाने के लिए निरंतर निरीक्षण कर ग्रामीण क्षेत्रों के सभी सामुदायिक स्वास्थ केन्द्र (सीएचसी), प्राथमिक स्वास्थ केंद्र (पीएचसी) का औचक निरीक्षण भी किया जाता है। मौजूदा समय में चिकित्सकों को तैनाती स्थल पर पूरी मुस्तैदी से ड्यूटी देने के निर्देश दिए गए हैं। यदि कोई शिकायत मिलती है तो उसे दूर करने का भी प्रयास किया जाता।’

सामुदायिक केंद्र की एक्स-रे मशीन खराब है इसलिए मिर्ज़ापुर जिला अस्पताल जाइए

हाथ में चोट लगने पर कई दिनों से दर्द के मारे कराह रही चेरूईरामपुर गांव की रहने वाली गीता देवी उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लालगंज जाती हैं, जहां से उन्हें मिर्ज़ापुर जिला अस्पताल जाने की सलाह दी जाती है। बताया जाता है कि यहां एक्स-रे की सुविधा नहीं है। आपको मिर्ज़ापुर जाना होगा। हाथ में चोट के दर्द से कराहती, ग़रीबी, बेबसी की शिकार गीता देवी अपने गांव से 32 किलोमीटर की दूरी तय कर तपती दुपहरी में मिर्ज़ापुर जिला अस्पताल आती हैं। उन्हें लंबी कतार में लगकर घंटों बाद अपनी बारी आने पर एक्सरे कराने की सुविधा तो मिल जाती है लेकिन इस प्रचंड गर्मी में एक्सरे कराने से लेकर पर्चा बनवाने, डाक्टर को दिखाने और दवा काउंटर से कुछ लाल-पीली गोली लेने में जो परेशानी होती है उसकी कल्पना करने मात्र से ही वह कांप उठती हैं। कहती हैं ‘गरीबी, बेबसी और परेशानी न हो तो भला कौन जाए सरकारी अस्पताल? सरकारी अस्पताल में जाने के बाद जो ज़लालत झेलनी पड़ रही है वह इस गर्मी में जान पर भारी पड़ जा रही है।’

यह सिर्फ गीता ही नहीं कहती हैं बल्कि अन्य मरीज भी सरकारी अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर यही कहते हैं। हलिया विकास खंड क्षेत्र के मड़वा धनावल गांव से आए सतेंद्र कुमार हाथ में अस्पताल की पर्ची को दिखाते हुए कहते हैं ‘दवा कराने के लिए आया हूं, डॉक्टर ने पर्चा लिख दिया है। उसी के साथ एक छोटी पर्ची का टुकड़ा भी थमा दिया है। एक दवा अंदर (दवा वितरण काउंटर) से मिली है बाकी बाहर की दुकान से लेना है।’ वह बताते हैं कि जब उन्होंने प्रधानमंत्री जन औषधि केन्द्र से दवा लेने की बात कही तो उन्हें हिदायत दी गई कि जहां बताया गया है दावा उसी दुकान से लेना है वरना आप (मरीज) जानो।’

दावे के विपरीत है हकीकत

जिले में भले ही नक्सली गतिविधियों पर पिछले कई सालों से पूरी तरह से विराम लग चुका है, लेकिन अभी भी इसका ढोल पीटा जा रहा है। इसी नक्सल प्रभावित क्षेत्र राजगढ़ और मड़िहान सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की बदहाल स्थिति में सुधार लाने तथा विभिन्न प्रकार की जांच के लिए हेल्थ मशीन की सुविधा प्रदान की गई थी जो मात्र शो-पीस बनकर रह गई है।

राजगढ़ और मड़िहान में भाजपा विधायक रमाशंकर पटेल ने हेल्थ मशीन का उद्घाटन करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर उपचार की सुविधा प्रदान करने का दावा किया था कि इस मशीन के जरिए मड़िहान तहसील क्षेत्र के लोगों को जांच के लिए कहीं अन्यत्र जाने की आवश्यकता नहीं होगी बल्कि अब उन्हें अपने क्षेत्र के ही अस्पतालों में कई प्रकार के जांच की सहूलियत मिलेगी। दावा किया गया था कि इस हेल्थ एटीएम मशीन से एक मिनट में 70 तरह के जांचें होंगी। इससे मड़िहान क्षेत्र के तकरीबन डेढ़ लाख लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। लेकिन 70 तरह के जांच की बात तो दूर एक जांच की भी सुविधा नहीं मिल पा रही है। हेल्थ एटीएम मशीन पूरी तरह से शो-पीस बनकर सीसे के पिंजरे में कैद है और आने वाले ग्रामीणों को मुंह चिढ़ाती  नजर आ रही है।

मौसम के बिगड़ते मिजाज के साथ बढ़ती जा रही है मरीजों की संख्या

मौसम विभाग लगातार मौसम के मिजाज का अनुमान बताता चल रहा है। मौसम विभाग के अनुसार अभी 3 दिनों तक गर्मी के सताए जाने का आशंका बनी हुई है। तापमान 47.6 से 45.6 डिग्री सेल्सियस बना हुआ है। उतार-चढ़ाव के साथ फिलहाल मौसम में नरमी के आसार नहीं नज़र आ रहे हैं।

पूर्वी अंचल में 21 से आंधी और बारिश के आसार बताए जा रहे हैं तो प्रदेश के कई इलाकों में अभी भी लू की चेतावनी दी जा रही है। इनमें पूर्वांचल के सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, वाराणसी जिले भी शामिल हैं। कुल मिलाकर मौसम के मौजूदा रूप को देखकर इन्हें झुठलाया नहीं जा सकता है। ऐसे में सरकारी अस्पतालों में व्याप्त बदइंतजामी का आलम यह है कि ठंडी हवा के नाम पर वार्डों में लगे पंखे गर्म हवा उगल रहे हैं तो कूलरों की संख्या वार्ड के अनुपात में अपर्याप्त बताई जाती है। ऊपर से मरीजों की बढ़ती भीड़ परेशानी में इजाफा किए हुए है।

शिकायत दर शिकायत के बाद नहीं हुआ सुधार

मिर्ज़ापुर के सरकारी अस्पताल का विवादों से गहरा नाता रहा है। फिलहाल इससे नाता टूटने को कौन कहे यह रिश्ता अटूट होता जा रहा है। कई बार शिकायत करने और मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन किए जाने के बाद भी न कोई कार्रवाई हुई और न ही सुधार की कोई गुंजाइश नज़र आती है। मानवीय सरोकार से नाता रखने वाले चिकित्सकों की शासन-सत्ता में बैठे हुए लोगों से गहरी यारी मरीजों की सेहत के साथ-साथ शासन-सत्ता की पारदर्शी नीतियों को भी धूमिल करती आई है।

मिर्ज़ापुर के मंडलीय अस्पताल की अव्यवस्थाओं को लेकर पिछले कई महीनों से मुखर पूर्व छात्र नेता मनीष दुबे कहते हैं कि ‘मंडलीय अस्पताल की दुर्व्यवस्थाओं और यहां व्याप्त भ्रष्टाचार तथा मनमानी पर लगाम लगाने की आवश्यकता है।’ मनीष इसको लेकर लगातार आवाज उठाते आ रहे हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। वह कहते हैं कि ‘दुखदाई है कि इतनी शिकायतों के बाद भी आरोपित टस से मस नहीं हो रहें हैं।’

15 जून 2024 को मंडलीय अस्पताल में चल रहे भ्रष्टाचार की जांच एवं दोषियों पर कार्यवाही किए जाने को लेकर अधिवक्ताओं सहित अन्य लोगों द्वारा कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन कर 10 सूत्री मांगों का ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा गया था। ज्ञापन में प्रमुख रूप से डॉक्टरों द्वारा बाहर की दवा लिखने, ओपीडी चिकित्सक के कमरे में प्राइवेट एमआर का आने, मरीजों के लिए पर्याप्त सुविधा न होने आदि प्रमुख मांगें शामिल थीं।

इस मामले में मनीष दुबे आरोप लगाते हुए कहते हैं कि ‘मंडलीय चिकित्सालय में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार व्याप्त है, जिसमें ‘मां विंध्यवासिनी स्वशासी राज्य चिकत्सा महाविद्यालय मिर्ज़ापुर उत्तर प्रदेश के प्रधानाचार्य सहित बड़े अधिकारी भी शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ दिन पूर्व जिलाधिकारी द्वारा हॉस्पिटल में मैनेजर पद पर तैनात अनुज ठाकुर की नियुक्ति की जांच कराई गई थी जो पूर्ण रूप से फर्जी साबित हुई है। इसके बाद सीएमओ द्वारा उन्हें पदमुक्त कर सीएमओ कार्यालय से संबद्ध कर दिया था, इसके बावजूद वह अस्पताल में कार्य कर रहे हैं जिसको लेकर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाए और साथ ही प्रधानाचार्य की भूमिका की भी जांच हो।’

वह आगे कहते हैं कि अस्पताल के कई आर्थो सर्जन हैं जो बाहरी मेडिकल संचालकों से सेटिंग कर के मरीजों और उनके तीमारदारों को ‘कोड वर्ड’ में लिखी गई पर्ची देते हैं। इसकी रसीद मरीजों और उनके परिजनों को नहीं दी जाती है। और तो और पर्ची में लिखा ‘कोड वर्ड’ वाला सामान सीधा ओपीडी में पहुंचता है।’

अधिवक्ता कमलेश दुबे तो यह भी आरोप लगाते हैं कि ‘पूर्व में जनप्रतिनिधियों द्वारा अस्पताल में कई वाटर कूलर लगवाए गए थे जिनको मौजूदा अस्पताल प्रशासन ने न जाने कहाँ गायब करा दिया जिससे आम जनता को इस तपती गर्मी में ठंडा पानी तक नहीं मिल पा रहा है।’

जिलाधिकारी का दौरा और अस्पताल की दुर्व्यवस्था

जब स्वास्थ्य संस्कृति में ही खामी हो तो निरीक्षण के समय भी लचर स्थिति दिख ही जाया करती है। पिछले दिनों जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने मिर्ज़ापुर मंडलीय अस्पताल का निरीक्षण किया जहां उन्हें एक नहीं बल्कि अनगिनत खामियां नजर आई थीं जिस पर उनका मूड खराब हो गया। फिर क्या था। उन्होंने जमकर फटकार लगाई और खामियां दूर कर व्यवस्था में सुधार लाने के निर्देश दिए।

दरअसल, जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन 18 जून 2024 को मंडलीय अस्पताल का निरीक्षण किया था। उनका सामना सर्वप्रथम अस्पताल के मुख्य गेट के पास एवं परिसर में खड़े बेतरतीब वाहनों से हुआ जिनको देख उन्होंने नाराजगी व्यक्त की और अस्पताल परिसर में खाली जमीनों को चिन्हित कर पार्किंग की व्यवस्था कराने के भी निर्देश दिए। गर्मी से परेशान लोगों को देख अस्पताल के पुराने भवन में मरीजों के बैठने के स्थान पर तत्काल पंखा व कूलर लगवाने का निर्देश दिया। इमरजेंसी वार्ड के कोने में नालियों का पानी फैला देखकर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुये उन्होंने कहा कि जनरेटर व्यवस्था को तत्काल सही कराया जाए।

उस समय अस्पताल के पुराने भवन के इमरेजेंसी वार्ड के सामने एक्सरे रूम के सामने गली में काफी भीड़ थी, जहां पर मरीज और उनके तीमारदार गर्मी से परेशान थे। कोई पंखा अथवा कूलर नही लगाया था। जिलाधिकारी ने दो घण्टे के अन्दर पंखा व कूलर लगाकर अवगत कराने का निर्देश दिया। जिला अस्पताल के भवन में कई जगह गंदगी का अंबार तथा गंदे बेंच और टेबल पाये जाने पर भी नाराजगी व्यक्त करते हुये नियमित रूप से सफाई देने का निर्देश दिया। जिलाधिकारी ने अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारियों को कड़ी चेतावनी देते हुये कहा कि साफ-सफाई नाली की व्यवस्था ठीक कराई जाय और वाहनों को सुव्यवस्थित तरीके से पार्क कराया जाए। जिलाधिकारी ने कहा कि प्रतिदिन किसी न किसी समय उनके द्वारा निरीक्षण किया जायेगा अथवा किसी वरिष्ठ अधिकारी से निरीक्षण कराया जाता रहेगा। गंदगी और बदइंतजामी पाये जाने पर सम्बन्धित के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्यवाही की जायेगी। देखना यह है कि जिलाधिकारी के आदेशों का कितना अनुपालन सुनिश्चित होता है?

आवारा पशुओं, गंदगी और धूल का अंबार

मंडलीय अस्पताल परिसर में बिजली के केबल, पेयजल आपूर्ति हेतु पाइपलाइन और सीवर लाइन बिछाने के लिए गड्ढा खोद दिए जाने से पूरा अस्पताल परिसर धूल के गुबार से नहा उठा है। गेट नंबर एक से लेकर अस्पताल पुलिस चौकी, प्रधानमंत्री जन औषधि केन्द्र, ब्लड बैंक, बच्चा वार्ड आदि मार्ग खोद कर मानकविहीन ढंग से इंटरलॉकिंग ईंट बिछाकर छोड़ देने से बरसात होते ही बैठने की आशंका प्रबल हो चली है। उपर से इधर-उधर बिखरे पड़े मिट्टी की सफाई नहीं होने से धूल के गुबार ने सांस लेना भी मुश्किल कर दिया है। अस्पताल परिसर गंदगी से पटा रहता है जबकि दावा किया जाता है कि अस्पताल के पास सफाईकर्मियों की अच्छी-ख़ासी संख्या है।

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