Tuesday, July 21, 2026
Tuesday, July 21, 2026




Basic Horizontal Scrolling



पूर्वांचल का चेहरा - पूर्वांचल की आवाज़

होमग्राउंड रिपोर्ट

ग्राउंड रिपोर्ट

बिहार : ईंटों के बीच दबे भट्ठा मजदूरों की व्यथा

ईंट भट्ठों में काम करने वाले मजदूर हमारी सभ्यता की नींव हैं। वे हमारी इमारतें बनाते हैं, हमारे घरों को खड़ा करते हैं, लेकिन उनके अपने घर रहने लायक नहीं होते। अगर हमें एक विकसित समाज बनाना है, तो हमें इन मजदूरों की स्थिति सुधारने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। वरना उनकी गरीबी की ये ईंटें हमेशा उनकी तरक्की का रास्ता रोकती रहेंगी।

रामपुर गांव : ‘क्राफ्ट हैंडलूम विलेज’ में बुनकरों का अधूरा सपना और टूटती उम्मीदें

रामपुर गांव की कहानी सिर्फ एक गांव की नहीं है, बल्कि यह उन लाखों कारीगरों और बुनकरों की कहानी है, जो सरकारी योजनाओं के अधूरे वादों और बाजार की बेरुखी के बीच फंसे हुए हैं। यह समय है कि सरकार और समाज मिलकर इनके सपनों को साकार करने के लिए कदम उठाए। अगर समय रहते इनकी मदद नहीं की गई, तो यह अद्वितीय कला और कौशल हमेशा के लिए खो जाएगा। पढ़िए नाजिश महताब की ग्राउंड रिपोर्ट।

बिहार में ‘हर घर नल का जल’ की हकीकत : बरमा गांव की प्यास

पिछले कई वर्षों से हर घर नल जल योजना की धूम मची हुई है और इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में प्रचारित किया जा रहा है लेकिन वास्तविकता प्रचार के बिलकुल उलट है। लगातार बढ़ते साफ पानी के संकट के मद्देनज़र यह योजना एक मज़ाक बनकर रह गई है। बिहार के लाखों ग्रामीण गंदे और ज़हरीले पानी का इस्तेमाल करने को विवश हैं। गया जिले के बरमा गांव में पानी का कैसा संकट है और सरकार की योजना किस हालत में है इस पर नाज़िश मेहताब की रिपोर्ट।

अवधी में गानेवाली यूट्यूबर महिलाएं : कहीं गरीबी से रस्साकसी कहीं वायरल हो जाने की चाह

पिछले कुछ ही वर्षों में अवधी भाषी महिलाओं ने बड़ी संख्या में यूट्यूब पर अपनी धमाकेदार उपस्थिति दर्ज कराई है। यह ऐसी महिलाओं की कतार है जो निम्न मध्यवर्गीय और खेतिहर परिवारों से ताल्लुक रखती हैं और घर-गृहस्थी की व्यस्त दिनचर्या के बावजूद अपने गीतों से एक बड़े दर्शक समूह को प्रभावित किया है। इनमें से कई अब पूर्णकालिक और स्टार यूट्यूबर बन चुकी हैं। अपने बचपन में सीखे गीतों को वे बिना साज-बाज के गाती हैं और लाखों की संख्या में देखी-सुनी जाती हैं। यू ट्यूब पर गाना उनके लिए न केवल अपनी आत्माभिव्यक्ति है बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता भी है। इसके लिए उन्होंने कठिन मेहनत किया है। परिवार के भीतर संघर्ष किया है। जौनपुर, आजमगढ़ और अंबेडकर नगर जिलों के सुदूर गांवों की इन महिलाओं पर अपर्णा की यह रिपोर्ट।

पॉल्ट्री उद्योग : अपने ही फॉर्म पर मजदूर बनकर रह गए मुर्गी के किसान

भारत में पॉल्ट्री फ़ार्मिंग का तेजी से फैलता कारोबार है। अब इसमें अनेक बड़ी कंपनियाँ शामिल हैं जिनका हजारों करोड़ का सालाना टर्नओवर है लेकिन मुर्गी उत्पादक अब उनके बंधुआ होकर रह गए हैं। बाज़ार में डेढ़-दो सौ रुपये बिकनेवाला चिकन पॉल्ट्री फार्म से मात्र आठ रुपये किलो लिया जाता है। अब मुर्गी उत्पादक स्वतंत्र इकाई नहीं हैं। कड़े अनुबंध शर्तों पर वे कंपनियों के चूजे और चारे लेकर अपनी मेहनत से उन्हें पालते हैं और कंपनी तैयार माल उठा लेती है। मुर्गी उत्पादक राज्य और केंद्र सरकार से यह उम्मीद कर रहे हैं कि सरकारी नीतियाँ हमारे अनुकूल हों और हमें अपना उद्योग चलाने के लिए जरूरी सहयोग मिले। लेकिन क्या यह संभव हो पाएगा? पूर्वांचल के पॉल्ट्री उद्योग पर अपर्णा की रिपोर्ट।

जल संकट के कारण खेत सूख रहे हैं और लोग आर्सेनिक वाला पानी पी रहे हैं!

इस गाँव के आखिरी छोर पर एक सरकारी नल लगा है, यहीं से सम्पूर्ण ग्रामीणवासी पानी भरते हैं। गाँव के सभी चापाकल सूख गए हैं, अब इस गाँव में 700 फिट से ज्यादा पर पानी मिलता है जिसका खर्च आमतौर दलित मोहल्ला के ग्रामीण वासी नहीं कर पाते हैं। गर्मियों के मौसम में पानी की समस्या की वजह से बहुएं अपने मायके चली जाती हैं, गाँव के कई युवकों की शादी नहीं हो रही है, क्योंकि जब शादी करके कोई महिला आएगी तो उसे पानी लेने के लिए दूर गाँव के छोर पर जाना पड़ेगा।

किसान आत्महत्या के सरकारी रिपोर्ट्स के दावे झूठे

कृषि क्षेत्र में रोजगार लगातार घट रहा है। भारत में 1972-73 में कृषि क्षेत्र में 74 प्रतिशत लोगों को रोजगार देता था, वहीं 1993-94 में 64 प्रतिशत और अब केवल 54 प्रतिशत लोगों को रोजगार देता है। इसी तरह, सकल घरेलू उत्पाद में कृषि का हिस्सा 1972-73 में 41 प्रतिशत, 1993-94 में 30 प्रतिशत और अब घटकर मात्र 14 प्रतिशत रह गया है।

नौगढ़ : कहाँ है ऐसा गाँव जहाँ न स्कूल है न पीने को पानी

अगर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मानें तो अगले हफ्ते आने वाले आज़ादी के अमृत महोत्सव तक भारत के हर आदमी को पक्का घर, घर में नल, नल में जल, शौचालय, बिजली, एलइडी बल्ब, बल्ब में रोशनी, सिलेंडर और सिलेंडर में गैस का जो सपना उन्होंने देखा था वह पूरा होनेवाला है। लेकिन उन्हीं के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से सटे (बल्कि कुछ साल पहले उसी का हिस्सा रहे) जिला चंदौली के नौगढ़ तहसील के अनेक गाँवों में उनका यह सपना अभी झूठ और छलावा मात्र है।

रामराज्य के दौर में बेटे का शव तीस किलोमीटर तक पैदल कंधे पर ढोने को मजबूर पिता

पिता बजरंगी द्वारा बेटे की लाश कंधे पर लेकर घर तक जाने के मामले में जांच रिपोर्ट आ गई है। डीएम द्वारा मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य तथा एसडीएम करछना की कमेटी ने शुक्रवार को जांच रिपोर्ट डीएम को सौंपी। जांच रिपोर्ट में पहले से निलंबित इंस्पेक्टर व सिपाही पर कार्रवाई की संस्तुति की है।

उत्तराखंड : हेलंग की घटना के वास्तविक पेंच को भी समझिए

मंदोदरी देवी ने किसी भी तरह का कोई अपराध नहीं किया था क्योंकि चारागाह गाँव समाज की संपत्ति होता है। लेकिन पुलिस ने उसके घास का गट्ठर छीन लिया और जबरन उसे पुलिस की गाड़ी मे डाल दिया।  महिला पुलिसकर्मियों ने उन्हें  पकड़ लिया और उनकी देवरानी तथा बहू के साथ पुलिस वाहन में बिठा लिया। उनके चार वर्षीय पोते को भी उनके साथ हिरासत में लिया गया और उन सभी को गांव से लगभग 8 किलोमीटर दूर जोशीमठ ले जाया गया, जहां उन्हें बिना खाए-पिए छह घंटे तक बैठाया गया। बाद में उनके ऊपर अतिक्रमण के लिए जुर्माना लगाने के बाद छोड़ दिया गया।

मछुआरों की उपेक्षा भी है नदी प्रदूषण का एक बड़ा और गम्भीर कारण

नदी एवं पर्यावरण संचेतना यात्रा अब गाँव से शहर की तरफ बढ़ने लगी है। 31 जुलाई दिन रविवार को शास्त्री घाट से निषाद राज...
Bollywood Lifestyle and Entertainment