सीमा आज़ाद की किताब को लाडली मीडिया सम्मान

गाँव के लोग

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अगोरा प्रकाशन से प्रकाशित सीमा आज़ाद की किताब औरत का सफर : जेल से जेल तक को लाडली मीडिया सम्मान से सम्मानित किया गया। सम्मानित होने पर लेखिका सीमा आज़ाद ने एक वीडियो शेयर कर अपनी ख़ुशी जाहिर की। इस दौरान उन्होंने कहा कि मेरी किताब को इस अवार्ड के लिए चुने जाने के लिए लाडली मीडिया के आयोजकों और ज्यूरी का बहुत बहुत धन्यवाद। यह किताब इसलिए मैंने लिखी थी कि मैं ये बता सकूं कि पितृसत्ता और अपराध का क्या रिश्ता है। क्योंकि जेल में रहते हुए मैंने देखा कि वहां रहने वाली बहुत सारी औरतें इसलिए जेल में हैं, क्योंकि समाज में पितृसत्ता है, जिसके कारण उनसे बहुत सारे अपराध हुए या फिर उन्होंने अपराध नहीं किये फिर भी वे जेल पहुंच गई हैं। इस किताब में ऐसी कई औरतों का वर्णन है जिससे यह पता लगता है कि पितृसत्ता इस समाज के लिए कितनी घातक है…

 

लाडली मीडिया सर्टिफिकेट

गौरतलब है कि सीमा आज़ाद ने अपनी गिरफ्तारी के बाद नैनी जेल स्त्री अपराधियों की त्रासद जिंदगी को बहुत नजदीक से देखा। उनसे बात करते हुये उन्होंने पाया कि उनमें से अनेक महिलाएं बिना किसी संगीन अपराध के भी सज़ा पाई। ऐसी 27 महिलाओं की जिंदगी की कहानियों को उन्होंने दर्ज़ किया जिसे अगोरा प्रकाशन ने औरत का सफर : जेल से जेल तक शीर्षक से छापा। यह किताब बहुत चर्चित हुई और खूब पढ़ी गई।

लाडली मीडिया सम्मान की तो लाडली मीडिया एंड एडवर्टाइजिंग अवॉर्ड फॉर जेंडर सेंसिटिव्हिटी—2021’ रीजनल अवार्ड के विजेताओं का एलान 19 नवम्बर, देर शाम को एक ऑनलाइन आयोजन में हुआ। मुंबई की एक सामाजिक संस्था ‘पॉपुलेशन फर्स्ट’ और ‘संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष’ (यूएनएफपीए) द्वारा संयुक्त रूप से हर साल दिए जाने वाले इस अवार्ड का यह ग्यारहवां संस्करण था। कोरोना वायरस कोविड—19 महामारी की वजह से लगातार दूसरा साल है, जब यह आयोजन यूट्यूब चैनल पर ऑनलाइन किया गया। इस ऑनलाइन आयोजन की मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार फाये डिसूजा और विशिष्ट अतिथि यूएनएफपीए के भारत में प्रतिनिधि श्रीराम हरिदास थे। इस साल लाडली मीडिया अवार्ड के लिए पूरे देश से 900 से ज्यादा एंट्री पहुंची थीं। जिसमें 10 भाषाओं हिंदी, अंग्रेजी, तमिल, तेलुगू, मलयालम, कन्नड़, ओड़िया, असमिया, बंगाली, गुजराती के कुल 71 पत्रकारों को इस सम्मान के लिए चुना गया।

 

जाहिर है कि लाडली मीडिया एंड एडवर्टाइजिंग अवार्ड फॉर जेंडर सेंसिटिव्हिटी देश के उन मीडियाकर्मियों को दिया जाता है जो कि प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, न्यूज पोर्टल, ब्लॉग, वेबसाईट, रेडियो प्रोग्राम, कम्युनिटी मीडिया, फिल्म, किताब, विज्ञापन, डाक्युमेंट्री आदि 23 कैटेगरी यानी मीडिया के किसी भी माध्यम के जरिए समाज में लैंगिक संवेदनशीलता का प्रसार एवं लैंगिक समानता, लैंगिक न्याय की बात करते हैं। देश में लैंगिक उत्पीड़न और लैंगिक असमानता के ख़िलाफ़ अपनी आवाज़ उठाते हैं।

अगर आप यह किताब पढ़ना चाहते हैं तो अगोरा प्रकाशन को सीधे 9479060031 पर फोन करके मंगा सकते हैं। इसकी कीमत मात्र 120/- रुपए है जो बिना अतिरिक्त डाकखर्च के आप तक पहुंचा दी जाएगी।

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