Friday, February 23, 2024
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मासा ने पूरे देश में मनाया मजदूर प्रतिरोध दिवस, 40 से ज्‍यादा जगहों पर प्रदर्शन

भारत में 17 संघर्षशील और क्रांतिकारी श्रमिक संगठनों/यूनियनों के एकसमन्वय मंच, मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा) ने सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ और देश में मेहनतकश जनता की जायज मांगों को लेकर पूरे देश में ‘मजदूर प्रतिरोध दिवस/श्रमिक प्रतिरोध दिवस’ मनाया। दिल्ली, हरियाणा, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, राजस्थान, बिहार, आंध्रप्रदेश, पश्चिमबंगाल, तेलंगाना, तमिलनाडु, कर्नाटक […]

भारत में 17 संघर्षशील और क्रांतिकारी श्रमिक संगठनों/यूनियनों के एकसमन्वय मंच, मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा) ने सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ और देश में मेहनतकश जनता की जायज मांगों को लेकर पूरे देश में ‘मजदूर प्रतिरोध दिवस/श्रमिक प्रतिरोध दिवस’ मनाया। दिल्ली, हरियाणा, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, राजस्थान, बिहार, आंध्रप्रदेश, पश्चिमबंगाल, तेलंगाना, तमिलनाडु, कर्नाटक और 40 से अधिक स्थानों पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए। दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, पटना, जयपुर आदि विभिन्न राज्यों की राजधानियों, गुड़गांव-मानेसर, रुद्रपुर-हरिद्वार, गोदावरी बेसिन कोयला बेल्ट आदि जैसे विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों के आलावा और अलग-अलग जिला मुख्यालयों में रैलियां, प्रदर्शन और कार्यक्रम एकसाथ आयोजित किए गए।

८ फरवरी को अखिल  भारतीय स्तर पर देश के विभिन्न हिस्सों में  किये गए विरोध प्रदर्शनों से पहले, देश भर के विभिन्न  औद्योगिक क्षेत्रों और शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पोस्टरिंग, पर्चे, नुक्कड़ बैठकें, नुक्कड़ थिएटर, रैलियाँ आदि के माध्यम से एक महीने का प्रचार अभियान चलाया गया। मासा के घटक संगठनों ने व्यक्तिगत रूप से और संयुक्त रूप से इस अभियान में भाग लिया। साथ ही सोशल मीडिया में भी कैंपेन चलाया गया।

मोदी सरकार और विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा देशी-विदेशी बड़ी पूंजी के इशारे पर नए मजदूर विरोधी श्रमकोड, बड़े पैमाने पर निजीकरण, बेरोजगारी, महंगाई, यूनियन अधिकारों पर हमला और अन्य श्रमिक विरोधी नीतियों के रूप में देश की मेहनतकश जनता पर बड़े पैमाने पर हमले किये जा रहे हैं। इसके साथ ही फासीवादी ताकतें सांप्रदायिक नफरत फैला रही हैं और मेहनतकश जनता को धार्मिक-जातिगत भेदभाव और हिंसा की राजनीति में फंसाया जा रहा है। आरएसएस-भाजपा जैसी फासीवादी ताकतें राजनीतिक लाभ के लिए धर्म को एक साधन के रूप में इस्तेमाल कर रही हैं और आम लोगों के बीच नफरत और विभाजन के बीज बो रही हैं, जिसका उद्देश्य मेहनतकश जनता को पूंजीवादी-साम्राज्यवादी शोषण के खिलाफ आंदोलन और आजीविका पर हो रहे हमलों के खिलाफ संघर्ष से मजदूरों को भटकाना है। आज, ‘मजदूर प्रतिरोध दिवस/श्रमिक प्रतिरोध दिवस’ मनाते हुए, मेहनतकश लोगों पर देशी-विदेशी पूंजीपतियों और फासीवादी ताकतों द्वारा किये जा रहे हमलों के खिलाफ और सम्मानजनक जीवन और वास्तविक जनवाद के लिए शहरी, औद्योगिक और ग्रामीण मेहनतकश जनता पूरे देश में मासा के आह्वान पर सड़कों पर उतर आई।

 विरोध कार्यक्रमों में उठाई गई निम्नलिखित मुख्य केंद्रीय मांगें 

चारनई श्रम संहिताओं को वापस लिया जाए! मजदूर हित में श्रमकानूनों में सुधार किया जाए, सभी मजदूरों के लिए श्रमकानून की सुरक्षा को सुनिश्चित किया जाए!

निजीकरण पर रोक लगाई जाए! बुनियादी क्षेत्रों और सेवाओं का राष्ट्रीयकरण किया जाए!

सभी के लिए रोजगार की, सुरक्षित व स्थाई आय की व्यवस्था की जाए! स्कीम वर्करों (आशा, आंगनवाड़ी, भोजन माता आदि), घरेलु कामगार, आईटी श्रमिक, गिगवर्कर को ‘मजदूर’ का दर्जा देकर सभी श्रमकानूनों का सुरक्षा और सम्मान जनक वेतन दिया जाये! ग्रामीण मजदूरों के लिए साल भर काम, सामाजिक सुरक्षा और सम्मान जनक वेतन हो!

यूनियन बनाने और संगठित होने का अधिकार, हड़ताल-प्रदर्शन का अधिकार सुनिश्चित किया जाये!

महीने में 26 हजार रुपये न्यूनतम मजदूरी लागू की जाए! सभी के लिए सम्मानजनक निर्वाह मजदूरी सुनिश्चित किया जाये।

धार्मिक-जातिगत-लैगिक भेद-भाव व धार्मिक नफरत की राजनीति बंद की जाए! धर्म को निजी मामला मानते हुए उसका राजनैतिक प्रदर्शन बंद किया जाए!

इन मुख्य मांगों के साथ-साथ मेनतकश जनता के लिए क्षेत्रीय स्तर की विभिन्न मांगें भी उठाई गईं । भारत के राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजे गए।

दिल्ली में, जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया, जिसमें कारखाने के श्रमिकों, घरेलू श्रमिकों, स्वच्छता श्रमिकों, गिग श्रमिकों और विभिन्न असंगठित क्षेत्रों के श्रमिकों ने भाग लिया। यह प्रदर्शन दिल्ली में MASA  के घटकों – IMK, MSK, IFTU(S), GMU, TUCI, MSS – द्वारा आयोजित किया गया था और इसमें MEC, लोकपक्ष, SKM, AIFTU (न्यू) आदि जैसे अन्य संघर्षरत और क्रांतिकारी श्रमिक संगठन/यूनियन भी शामिल हुए थे।

हरियाणा में गुड़गांव, फ़रीदाबाद, कुरूक्षेत्र, कैथल, जींद, गोहाना और करनाल में विरोध प्रदर्शन आयोजित किये गये। गुड़गांव में राजीव चौक से डीसी ऑफिस तक कर्मचारियों की रैली निकाली गई और वहां प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम में मारुति सुजुकी मानेसर और गुड़गांव प्लांट, बेलसोनिका, डाइकिन, एमएमटीसी, आईजीएलओ आदि के श्रमिकों और यूनियन नेताओं, उद्योग विहार परिधान क्षेत्र के श्रमिकों, गुड़गांव की विभिन्न झुग्गियों के असंगठित श्रमिकों ने भाग लिया। फ़रीदाबाद में औद्योगिक श्रमिकों ने सेक्टर12, फ़रीदाबाद स्थित डीसी कार्यालय पर प्रदर्शन किया।जींद, कैथल, करनाल, गोहाना और कुरुक्षेत्र में, मनरेगा श्रमिकों, निर्माणश्रमिकों, आंगनवाड़ी-मध्याह्नभोजन-आशा कार्यकर्ताओं और ग्रामीण कृषिश्रमिकों ने विभिन्न आंदोलनात्मक विरोध प्रदर्शनों में भाग लिया। हरियाणा में मासा के घटकों–जनसंघर्ष मंच हरियाणा, आईएमके, एमएसके ने विरोध प्रदर्शनों के आयोजन में सक्रिय भाग लिया।

उत्तराखंड में रुद्रपुर, हरिद्वार, काशीपुर व देहरादून में विरोध कार्यक्रम आयोजित किये गये। रुद्रपुर में, सिडकुल औद्योगिक क्षेत्र में श्रमिक संयुक्त मोर्चा, इन्टरार्क, लुकासटीवीएस, एलजीबी, करोलियालाइटिंग, रॉकेटरिद्धिसिद्धि, एडविक, आनंदनिशिवाका (एएलपी), गुजरातअंबुजा, यजाकी, बजाजमोटर्स, टेंपोयूनियन, महिंद्राएण्डमहिंद्रा, ऑटोलाइन,  पीडीपीएल, ठेकामज़दूरपंतनगर, बड़वेइंजी., नीलमेटल, मंत्रीमेटल, टाटाऑटोकाम, सीआईईइंडिया, भगवतीमाइक्रोमैक्स, नेस्ले आदि विभिन्न कारखानों के औद्योगिक श्रमिकों ने श्रमिकरैली और विरोध प्रदर्शन में भाग लिया। साथ ही जनवादी लोकमंच, एक्टू, भाकपा माले, बीएमएस, सीपीआई, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन आदि के प्रतिनिधि भी शामिल रहे / रुद्रपुर शहर में श्रम में धरना–प्रदर्शन और डीएम कोर्ट तक रैली निकली। हरिद्वार सिडकुल क्षेत्र में भेल मजदूर ट्रेड यूनियन एवं अन्य कारखाना श्रमिकों द्वारा भेल फैक्ट्री गेट पर धरना प्रदर्शन किया गया। काशीपुर औद्योगिक क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन किया गया। मासा के घटक आईएमके, एमएसके, एमएसएस और एलजेएमयू ने उत्तराखंड में विरोध कार्यक्रम आयोजित करने में सक्रिय भूमिका निभाई।

उत्तर प्रदेश में बलिया, बरेली, शामली और मेरठ में विरोध प्रदर्शन आयोजित किये गये। पूर्वी यूपी के मऊ और बलिया में विभिन्न क्षेत्रों के ग्रामीण श्रमिकों ने भाग लिया। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बरेली, शामली और मेरठ में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों से विभिन्न क्षेत्रों के संगठित श्रमिक विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। सुल्तानपुर जिले में दिहाड़ी मजदूर, सफाईकर्मी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता/सहायिका, मनरेगा मजदूर तथा छात्रों ने भागीदारी किया। मासा के घटक दलों आईएमके, एमएसएस ने उत्तर प्रदेश में विरोध कार्यक्रम आयोजित करने में सक्रिय भूमिका निभाई।

बिहार में, राज्य की राजधानी पटना और रोहतास जिले में विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए। पटना में, निर्माण श्रमिक और अन्य असंगठित क्षेत्र के श्रमिक बड़ी संख्या में पटना जंक्शन के बुद्ध स्मृति पार्क में शामिल हुए और विरोध कार्यक्रम आयोजित किया। रोहतास जिले में भी विरोध प्रदर्शन किया गया, जिसमें मनरेगा समेत अन्य क्षेत्रों के ग्रामीण मजदूरों ने हिस्सा लिया। MASA के घटकI FTU (सर्वहारा), ग्रामीण मजदूर यूनियन, बिहार और भाई चारा संगठन- बिहार निर्माण व असंगठित श्रमिक यूनियन, AIFTU (न्यू) ने MASA के साथ समन्वय में बिहार में विरोध कार्यक्रम आयोजित करने में सक्रिय भूमिका निभाई।

पश्चिम बंगाल में, फरवरी मास में माध्यमिक परीक्षाएं होने के कारण, कार्यक्रम गत 20 जनवरी के दिन किया गया। उस दिन 1000 से अधिक मजदूरों ने कोलकाता में गवर्नर हाउस तक मार्च करते हुए एक मजदूरों की रैली का आयोजन किया। इस रैली में कोयला, चाय, जूट, इंजीनियरिंग, आईटी-आईटीईएस, बीएसएनएल और अन्य सार्वजनिक क्षेत्रों के श्रमिक, गिग श्रमिक, घरेलू कामगार, परिवहन श्रमिक, मनरेगा श्रमिक और विभिन्न शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के श्रमिक कार्यक्रम में शामिल हुए। कोलकाता की विभिन्न होजरी-जूट-कॉटन-टेक्सटाईल फैक्ट्रियों में फैक्ट्री स्तर के कार्यक्रम आयोजित किये गये। मासा के घटक एसडब्ल्यूसीसी, लाल झंडा मजदूर यूनियन, आईएफटीयू (सर्वहारा), टीयूसीआई ने पश्चिम बंगाल में विरोध कार्यक्रम आयोजित करने में सक्रिय भूमिका निभाई।

पंजाब में लुधियाना में दो कार्यक्रम आयोजित किये गये। मासा घटक आईएमके-पंजाब, प्रगतिशील असंगठित निर्माण मजदूर यूनियन, मोल्डर एंडस्टील वर्कर्स यूनियन औरलोक एकता संगठन ने संयुक्त रूप से लुधियाना बस स्टैंड के पास छतर सिंह पार्क में एक कार्यक्रम आयोजित किया। कारखाना मजदूर यूनियन, टेक्सटाइल-होजरी कामगार यूनियन, पेंडू मजदूर यूनियन (मशाल) द्वारा समराला चौक पर एक और विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया। जगराओं और रामपुरा में कार्यक्रम आयोजित किए गए जहां कृषि श्रमिकों ने भाग लिया।

राजस्थान में, राज्य की राजधानी जयपुर के झालाना में विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया, जिसमें सफाई कर्मचारियों, झुग्गी-झोपड़ी आधारित असंगठित श्रमिकों ने भाग लिया। एमएसके ने विरोध प्रदर्शन के आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाई।

तेलंगाना राज्य की राजधानी हैदराबाद में विरोध प्रदर्शन आयोजित किये गये। आंध्रप्रदेश में विजयवाड़ा और गुंटूर में विरोध कार्यक्रम आयोजित किया गया। गोदावरी बेसिन सिंगरेनी कोयला बेल्ट के कोयला उद्योग के श्रमिकों, परिवहन श्रमिकों, छोटे कारखाने के श्रमिकों, लोडिंग-अनलोडिंग, स्वच्छता और अन्य क्षेत्रों के असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों ने विरोध प्रदर्शन में भाग लिया। मासा के घटक आईएफटीयू ने विरोध प्रदर्शन के आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाई।

तमिलनाडु में राज्य की राजधानी चेन्नई में, मासा घटक एनडीएलएफ (एससीसी) ने विभिन्न फैक्ट्री गेटों पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किया। तो वहीं कर्नाटक में, मासा के घटक- कर्नाटक श्रमिक शक्ति ने विभिन्न जिलों में विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया।

मासा का मानना है कि भारतीय और विदेशी पूंजीपतिवर्ग और फासीवादी ताकतों के खिलाफ देश भर में निरंतर, जुझारू और निर्णायक संघर्ष विकसित करना समय की मांग है और मासा इस कार्य के लिए प्रतिबद्ध है। आज का कार्यक्रम उसी दिशा में एक कदम है। मजदूर वर्ग जब भी जागा है, इतिहास ने अपनी करवट बदली है।

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