सीतापुर में दलित नेताओं का पुलिस उत्पीड़न क्या योगी के विपक्ष के खात्मे के अभियान का हिस्सा है

सुशील मानव

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उत्तर प्रदेश में गांव, ब्लॉक तहसील स्तर पर उभरते दलित नेतृत्व को खत्म करने की मुहिम पुलिस ने उठा रखी है, इसकी तस्दीक सीतापुर जिले के हरगांव थाने के थानेदार बृजेश त्रिपाठी के इस धमकी भरे वाक्य से मिलती है जो उन्होंने माले के दलित नेता व जिला पंचायत सदस्य अर्जुन लाल को फोन पर कह रहे हैं कि –उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी जी ने मुझे तुम जैसे दलित नेताओं को खत्म करने, मिटा देने के लिये ही भेजा है। 

सिर्फ़ इतना ही नहीं ब्राह्मण थानेदार लगातार रक्खीपुरवा गांव के दलित ग्रामीणों को धमका रहा है कि अगर फिर धरना करोगे तो गैंगस्टर एक्ट लगा दूंगा, जेल में सड़ोगे हमेशा के लिये। तो क्या सूबे कि योगी सरकार ने गैंगस्टर एक्ट दलित, मुस्लिम, पिछड़ा वर्ग के नेतृत्व को खत्म करने के लिये ही बनाया है?

हरगांव थाने के ब्राह्मण थानाध्यक्ष द्वारा पहले इस तरह की भाषा में धमकी देना, जाति सूचक गालियां देना और बाद में कॉलर पकड़कर दलित समुदाय के माले नेता व जिला पंचायत सदस्य अर्जुनलाल को जेल में डाल देना आदि सारे घटनाक्रम उस क्रोनोलॉजी को उजागर करते हैं कि कैसे उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणवाद, पुलिस व्यवस्था और दक्षिणपंथी सत्ता का गठजोड़ दलित नेतृत्व का दमन कर रहा है।

दरअसल, सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय, आयकर विभाग आदि बड़े और राष्ट्रीय स्तर की जाँच एजेंसियां दलित पिछड़े नेताओं का शिकार कर रहे हैं तो वहीं ग्राम, ब्लॉक और जिलास्तर के दलित नेतृत्व का शिकार थाना स्तर के दरोगा व सीओ कर रहे हैं।

थानेदार बृजेश त्रिपाठी द्वारा भाकपा माले के सीतापुर सचिव व जिला पंचायत सदस्य बृजेशलाल को जाति सूचक गाली, अभद्र गाली व जान से मारने, परिवार को तबाह करने की धमकी देने के बाद बृजेश ने क्षेत्र की जनता के साथ धरना देकर थानेदार को बर्खास्त करने की मांग की थी। इसके बाद से ही थानेदार बृजेश त्रिपाठी माले नेता से बदला लेने के मौके की तलाश में थे।

क्या है सीतापुर का मामला 

सीतापुर जिले के रिक्खीपुरवा ग्राम पंचायत पिपरागुरी का है, जहाँ दलित जाति की विमला देवी ग्राम प्रधान हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गौशाला अभियान के ग्राम प्रधान विमला ने अपने ग्राम पंचायत में गौशाला निर्माण कराने का निर्णय लिया।

इसके लिये ज़मीन की ज़रूरत थी तो उन्होंने ग्रामसभा (जीएस) की अवैध कब्जे वाली ज़मीन की शिनाख़्त की। ग्राम प्रधान विमला ने पड़ोसी गांव के ठाकुर जाति के लोगों के अवैध क़ब्ज़ेवाली ग्रामसभा की ज़मीन को मुक्त करवाकर गौशाला निर्माण का काम शुरू किया, जिसका गांव के दबंग जाति के लोगों द्वारा विरोध किया गया लेकिन फिर भी ग्राम प्रधान विमला ने किसी तरह गौशाला बनवा ही दिया।

ज्ञापन देते हुए

इसके बाद उन्होंने गांव के किसानों की फ़सलों को चरकर नुकसान पहुंचा रहे छुट्टा सांड़ों, गायों को पकड़ पकड़कर नवनिर्मित गौशाला में डाल दिया और एक व्यक्ति को पहरे पर लगा दिया। यहां यह बता देना ज़रूरी है कि रिक्खीपुरवा और बक्सोहिया पड़ोसी गांव हैं। ग्राम प्रधान विमला ने जहां गौशाला बनवाया है वह रिक्खीपुरवा गांव का सरहद क्षेत्र है। उसके आगे बक्सोहिया गांव शुरू होता है। इसी का फायदा उठाते हुये बक्सोहिया गांव के दंबग ठाकुरों ने रिक्खीपुरवा की जीएस ज़मीन पर अवैध क़ब्ज़ा कर रखा था।

13 अगस्त की रात जब गौशाला का प्रहरी खाना खाने अपने घर गया ठीक उसी समय बक्सोहिया गांव के ठाकुर बिरादरी के लोगों ने मौका देखकर गौशाला का गेट खोल दिया और सारे गायों और साँड़ों को गौशाला से भगा दिया। गौशाला से निकलने के बाद जानवरों ने उन्हीं के फसल चरना शुरू कर दिया, क्योंकि वहाँ अग़ल-बग़ल उन्हीं लोगों के खेत थे। फिर जानवर थोड़े ही यह जानता है कि किसके खेत चरने हैं किसके नहीं।

इस मसले को लेकर ठाकुर समुदाय के लोगों ने विवाद खड़ा कर दिया। सुबह जब ग्राम प्रधान विमला गौशाला आई तो बक्सोहिया गांव के ठाकुरों ने उन्हें दौड़ा लिया, मारने-पीटने लगे। हमलावर कोई बात सुनने को तैयार ही नहीं थे, क्योंकि वे  मारने के ही इरादे से लाठी-डंडे से लैस होकर आये थे। उन लोगों ने कोई बात की ही नहीं, न ही किसी की कोई बात, सुलह-सफाई ही सुनी उन लोगों ने। ग्राम प्रधान विमला देवी और अन्य लोग किसी तरह जान बचाकर घर भागे।

अगली सुबह यानि 14 अगस्त को गांव के लोग इकट्ठा होकर जब थाने एफआईआर कराने गये तो पता लगा वहां पहले ही बक्सोहिया गांव के ठाकुरों द्वारा ग्राम प्रधान विमला देवी व अन्य लोगों के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज़ हो चुका है। पुलिस ने उल्टा इन्हीं लोगों पर लाठीचार्ज कर दिया। कुछ लोगों को मार-पीट कर भगा दिया और कुछ लोगों को वहीं थाने में बैठा लिया।

दलित नेता की बेटी अर्चना आगे के घटनाक्रम में बताती हैं कि उनके पिता, जिला पंचायत सदस्य और ग्राम रिक्खीपुरवा निवासी अर्जुन लाल ने सुना तो अविलंब हरगांव थाने इन लोगों की जमानत लेने जा पहुंचें। वे अभी गाड़ी से उतरे भी नहीं थे कि थानेदार बृजेश त्रिपाठी ने दौड़कर उनका कॉलर पकड़कर गाड़ी से खींच लिया और मारते-पीटते घसीटकर थाने के अंदर ले गया और थाने में बलवा के फर्जी आरोप में उन्हें लॉकअप में बंद कर दिया।

ज्ञापन देते हुए लोग

थानेदार ने कहा- तिरंगा पकड़ने लायक नहीं हो

जिला पंचायत सदस्य अर्जुनलाल की बेटी अर्चना बताती हैं कि सीतापुर के हरगाँव क्षेत्र के रिक्खीपुरवा गाँव की महिला प्रधान को सामंतों के द्वारा इसलिए पीटा गया, क्योंकि उन्होंने योगी सरकार की योजना के तहत गौशाला बनाने के लिए ग्राम समाज की ज़मीन पर गैर कानूनी रूप से काबिज सामंतों को हटाया था। इसकी वजह से ठाकुर जाति के लोगों ने दलित महिला प्रधान के साथ मारपीट किया।

इस घटना की FIR दर्ज करवाने के लिए जिला पंचायत सदस्य व भाकपा (माले) के स्टैडिंग कमेटी सदस्य अर्जुनलाल जब हरगाँव थाने में गए तो थाना प्रभारी ने उनके साथ न सिर्फ मारपीट किया बल्कि झूठी कहानी बनाकर उनको 15 अगस्त को जेल भेज दिया और प्रधान से मारपीट करने वाले दबंग खुलेआम घूम रहे हैं। अर्जुनलाल के समर्थन में जब ऐपवा नेता सरोजिनी महिलाओं के साथ थाने गईं तो थाना इंचार्ज ने उनके हाथ से राष्ट्रीय झंडा छीन लिया और  कहा कि तुम इस झंडे को पकड़ने के लायक नहीं हो।

सीतापुर जिले का हरगांव थाना

एफआईआर का बदला लेने के लिये थानेदार ने की कार्रवाई 

अर्जुनलाल अपने क्षेत्र के जनप्रिय नेता हैं। अतः क्षेत्र के तमाम लोग पेंशन, आवास (कालोनी),  शौचालय, राशन आदि की मांग लेकर उनके पास आते हैं। अतः अर्जुनलाल ने सभी ज़रूरतमंदों से 20 जुलाई, 2022 को हरगांव ब्लॉक पर धरना देने आने की अपील की। 20 जुलाई को जिला पंचायत सदस्य अर्जुनलाल आवास, पेंशन, शौचालय आदि के मुद्दे को लेकर ब्लॉक हरगांव पर धरना दे रहे थे। इस धरने में अपनी अपनी मांगों को लेकर साढ़े तीन-चार सौ लोग धरने में शामिल हुये।

शाम चार-साढ़े चार बजे धरना खत्म करके जिला पंचायत सदस्य अर्जुनलाल चले गये, बस कुछ कार्यकर्ता बचे थे जोकि सर-सामान समेट रहे थे। इतने में थानेदार बृजेश त्रिपाठी आए और कार्यकर्ताओं से पूछा किसका धरना था,  क्यों धरना दे रहे थे। वहां मौजूद लोगों ने बताया कि हमारी यह समस्या थी उसी को लेकर धरना दिये थे। इस पर थानेदार उनको मां- बहन की गालियां देने लगे और पूछा नेता कौन है उसका मोबाइल नंबर दो। कार्यकर्ताओं से नंबर लेकर थानेदार ने वहीं खड़े-खड़े जिला पंचायत सदस्य व माले नेता अर्जुनलाल के मोबाइल फोन पर कॉल लगाया और उन्हें सबके सामने ही जातिसूचक व लैंगिक गालियां देने लगा।

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इसके बाद जिला पंचायत सदस्य अर्जुनलाल ने थानेदार के ख़िलाफ़ एससी/ एसटी एक्ट समेत, डराने-धमकाने, जान से मारने जैसी तमाम संगीन धाराओं में एफआईआर दर्ज़ करवाया लेकिन थानेदार के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं हुई। थानेदार बृजेश त्रिपाठी द्वारा भाकपा माले सीतापुर सचिव व जिला पंचायत सदस्य अर्जुन लाल को जातिसूचक गाली,  अभद्र गाली व जान से मारने, परिवार को तबाह करने की धमकी देने के बाद अर्जुन ने क्षेत्र की जनता के साथ धरना देकर थानेदार को बर्खास्त करने की मांग की।

बर्खास्तगी की मांग को लेकर धरना

जातिवादी, मनुवादी थानेदार की बर्खास्त करने की मांग लेकर हुये धरने के दौरान अर्जुनलाल ने एक वीडियो बयान ज़ारी किया था। उक्त वीडियो बयान में उन्होंने कहा है कि पुलिस प्रशासन जनता और जनता के नेता के साथ कैसा व्यवहार करती है ये हरगांव थानाध्यक्ष के बयान से जाहिर होता है। अर्जुनलाल ने बताया कि उन्होंने मारपीट के संदर्भ में हरगांव थाना के बाहर विरोध-प्रदर्शन किया। उन्होने मांग की कि मारपीट की घटना में दोनों पक्षों पर कार्रवाई होनी चाहिए।

उन्होंने बताया कि ‘मेरी इस बात से थानेदार चिढ़ गया और धरने के बाद वह मौके पर आया और कार्यकर्ताओं को अभद्र और गालियां दी। उसने कार्यकर्ताओं से पूछा कि तुम्हारा नेता कौन है और उनसे नंबर लेकर फोन पर मुझे भी जातिसूचक गालियां दी। उसने कहा मुझे मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश ने भेजा है तुम्हारी नेतागीरी को खत्म करने के लिये। जो भी दलित नेता हैं उनको मिटा देने के लिये। उसने ऐसी तमाम धमकियां दी और कहा कि अगर आगे से कोई धरना-प्रदर्शन करोगे या  सीतापुर जिले में कहीं भी बैठोगे तो जेल भेज दिया जाएगा,  तुम्हारे परिवार को तबाह कर दिया जाएगा। तुमको मिटा दिया जाएगा और जान से मार दिया जाएगा।’

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बताया जाता है कि थानेदार बृजेश त्रिपाठी द्वारा भाकपा माले के सीतापुर सचिव व जिला पंचायत सदस्य अर्जुन लाल को जाति सूचक गाली, अभद्र गाली व जान से मारने, परिवार को तबाह करने की धमकी देने के बाद अर्जुन ने क्षेत्र की जनता के साथ धरना देकर थानेदार को बर्खास्त करने की मांग की थी। इसके बाद से ही थानेदार बृजेश त्रिपाठी माले नेता से बदला लेने के मौके की तलाश में थे। ग्राम प्रधान विमला समेत गांव के ही दलित जाति के लोगों की ज़मानत के लिये जब जिला पंचायत सदस्य अर्जुनलाल थाने पहुंचे तो थानेदार को मौका मिल गया। उन्होंने फर्जी केस लगाकर उनको जेल भेज दिया। जबकि घटना के वक्त वे किसी अन्य गांव में थे। घटना के बाद वे थाने अपने गांववासियों की ज़मानत के लिये पहुंचे थे।

गांव वालों की रिहाई के लिये ब्लॉक पर लगातार धरना-प्रदर्शन

अपने दलित नेता और गांववासियों की रिहाई के लिये 14 अगस्त से ही सीतापुर मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन चल रहा। 26 अगस्त को जिला मुख्यालय पर एक विशाल प्रतिवाद सभा आयोजित की गई, पुलिस के लगातार डराने धमकाने, वाहनों को गांव से न निकलने देने के बावजूद आतंक को तोड़कर भारी संख्या में गरीब-गुरबे व जनवाद पसंद लोग एकत्र हुए, सभा को माले नेताओं के अलावा भी कई अन्य सामाजिक संगठनों के नेताओ ने संबोधित किया।

सीतापुर जेल में बंद भाकपा माले के प्रदेश के नेता और जिला पंचायत सदस्य  अर्जुनलाल और उनके साथियों की रिहाई की मांग को लेकर भाकपा (माले) नेता सरोजनी के नेतृत्व में शुक्रवार 26 अगस्त को जिलाधिकारी कार्यालय पर ज़ोरदार प्रदर्शन किया। प्रतिवाद सभा को संबोधित करते हुए एक्टू के प्रदेश अध्यक्ष विजय विद्रोही ने हरगांव पुलिस द्वारा दलित महिला का सरोजनी के हाथ से राष्ट्रीय ध्वज छीने जाने और ज़मीन पर फेंकने की कड़ी निन्दा करते हुए थानाध्यक्ष को तुरंत बर्खास्त करने की मांग करते हुए कहा कि भाजपा की यह सरकार पुलिस के बल पर लोकतांत्रिक आंदोलनों को दबाने के साथ ही दलितों, मजदूरों तथा महिलाओं का दमन कर रही है। लेकिन तानाशाही और दमन की राजनीति की उम्र लम्बी नहीं होती। सरकार के इस दमन और अत्याचार के ख़िलाफ़ और न्याय मिलने तक यह आन्दोलन और तेज होगा।

दलित उत्पीड़न के विरोध में ज्ञापन देते लोग

सभा को सम्बोधित करते हुए भाकपा (माले) की राज्य स्थाई समिति के सदस्य कॉ रमेश सिंह सेंगर ने कहा कि पुलिस-सामंत गठजोड़ दमन के दम पर हरगांव क्षेत्र की दलित उत्पीड़ित जनता की लोकतांत्रिक चेतना को कुचल देने पर आमादा है जिसे भाकपा (माले) बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने ऐलान किया कि इस जुल्म के ख़िलाफ़ और न्याय के लिए 9 सितम्बर को हरगांव मुख्यालय पर विशाल रैली की जाएगी।

खेत और ग्रामीण मजदूर सभा के प्रदेश सचिव कॉ राजेश साहनी ने कहा कि ग्रामीण गरीबों की न्याय पाने की उम्मीद को साकार करने के लिए पार्टी संघर्ष को निर्णायक मोड़ तक ले जाएगी। उन्होंने कहा कि ग़रीबों के ख़िलाफ़ चल रहे योगी के बुल्डोजर राज को गरीब अपने एकताबद्ध आन्दोलन के दम पर रोकेंगे। ऐपवा की प्रदेश संयुक्त सचिव मीना ने कहा कि भाजपा सरकार ने गुजरात के 11 बलात्कारियों की सज़ा माफ करके यह साबित कर दिया है कि यह सरकार न सिर्फ महिला विरोधी है, बल्कि वह महिलाओं की इज्ज़त और स्वाभिमान पर लगातार चोट कर रही है।

संगतिन किसान मजदूर संगठन की अध्यक्ष ऋचा सिंह ने इस आन्दोलन के साथ अपनी एकजुटता व्यक्त करते हुए गिरफ्तार नेताओं की रिहाई की मांग करते हुए कहा कि हम न्याय की लड़ाई में माले के साथ हैं। किसान मंच के नेता शिवप्रकाश सिंह और किसान नेता सिद्धू सिंह ने भी आन्दोलन का समर्थन किया। सभा को लखनऊ की स्कीम वर्कर्स फेडरेशन की नेता कॉ कमला गौतम, बलिया जिले के लक्ष्मण यादव, लखीमपुर के माले नेता कॉ श्रीनाथ, पार्टी के जुझारू नेता का कन्हैया कश्यप, किसान नेता कॉ संतराम ने भी सभा को सम्बोधित किया।

क्या है ताजा स्थिति

फिलहाल दलित नेता अर्जुनलाल और उनके गांव के कुल 9 लोग अभी तक जेल में बंद हैं। मामला अदालत में लंबित है और जमानत याचिका पर सुनवाई की तारीख 8 सितंबर मिली है। अर्जुनलाल की पत्नी और ऐपवा नेता सरोजिनी कहती हैं कि ‘हां, एक हद तक बात हुई है प्रशासन से। थानेदार पर जांच बैठा दी गई है, ऐसा एसपी का कहना है। बाक़ी न्यायिक प्रक्रिया में ज़मानत की प्रक्रिया चल रही है। 8 सितंबर को रिलीज करने की बात है। धरना जिला मुख्यालय से समाप्त होकर एक नये जन कैंपेन के रूप में शुरू हो गया है, जिसमें क्षेत्रीय लोगों से संपर्क कर 8 सितंबर को एक बड़ी रैली की जाएगी। इसमें 2 हजार से ज्यादा की जनसंख्या में उपस्थिति की तैयारी है।’

इससे पहले 29 जून, 2021 को आजमगढ़ जिले के पलिया गांव के ग्राम प्रधान मंजू व उनके पति मुन्ना पासवान तथा गांव के तमाम दलितों के ख़िलाफ़ एकतरफा कार्रवाई में पुलिस ने बुलडोजर चलाकर उनके घरों को ढहा दिया था। पुलिस ने बर्बरता की हद पार करते हुये दलित महिलाओं का शारीरिक शोषण किया और उनके गहने व रुपये लूट लिये थे।

सुशील मानव स्वतंत्र पत्रकार हैं।

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