अमानवीय और समाज के लिए निंदनीय है अंकिता हत्याकांड

अशोक सिंह

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झारखंड के दुमका जिले में शाहरुख हुसैन नाम के एक सिरफिरे युवक द्वारा अंकिता नाम की एक 17 वर्षीय नाबालिग लड़की को पेट्रोल छिड़क जलाकर मार देने की अमानवीय घटना की जितनी भी निन्दा की जाय कम है।

किसी भी सभ्य समाज में इस तरह की जघन्यतम घटना समाज के लिए कलंक है। ऐसे कुत्सित विचारों और घृणित मानसिकता वाले लोगों के लिए समाज में कोई जगह नहीं है। ऐसे अपराधी को यथाशीघ्र फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई कर कठोर से कठोर सजा दी जानी चाहिए, चाहे वो किसी भी जाति व कौम का क्यों न हो! क्योंकि अपराधियों की कोई जाति और कौम नहीं होती।

इस घटना से न सिर्फ झारखंड बल्कि पूरा देश शर्मशार हुआ है। आज पूरे देश की संवेदना अंकिता और उसके परिवारजनों के साथ है। इतना ही नहीं इस तरह की जघन्यतम और अमानवीय घटना के लिए शाहरुख हुसैन जैसे घृणित मानसिकता वाले युवकों को कठोरतम सजा दिलाने के लिए उसके विरुद्ध खड़ा भी है‌।

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आवश्यकता है जाति धर्म और राजनीति से ऊपर उठकर इसपर अपना वैचारिक प्रतिरोध दर्ज कराने की और सरकार और पुलिस प्रशासन द्वारा की जा रही कारवाई में अपेक्षित सहयोग करने की, ताकि सामाजिक सौहार्द्र बिगाड़ने की मंशा रखने वाले लोगों और उपद्रवियों को कहीं कोई अप्रिय घटना की साज़िश रचने का मौका न मिले।

हमारा मानना है कि यह घटना सीधे तौर पर सिर्फ और सिर्फ पुरुषवादी क्रूर मानसिकता का मामला है न कि किसी प्रकार के धार्मिक विवाद और साम्प्रदायिक तनाव का। यह सच कि शाहरुख इस घटना का दोषी और हत्या का अपराधी है उसे फांसी की सजा मिलनी चाहिए लेकिन संयम और सावधानी यह भी बरती जानी चाहिए कि कहीं किसी प्रकार के तनाव की वजह से उत्पन्न ऐसी कोई अप्रिय घटना न हो कि उसके इस कृत्य की सजा उसके समाज और उसके मोहल्ले के लोगों को  भुगतना पड़े।

जैसा सर्वविदित है कि इस तरह की अमानवीय घटना का हर कोई जाति धर्म समुदाय से ऊपर उठकर विरोध करता है और मानवता का पक्ष लेता है।

ऐसे में इस घटना को लेकर साम्प्रदायिक तनाव बनाने की हर उस कोशिश के प्रति हमें सचेत और सावधान रहने की ज़रुरत है जिसमें तरह-तरह की अफवाहों को लेकर आज हमारे शहर का माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है। यह समय संयम व सामाजिक सौहार्द्र बनाये रखने का समय है न कि राजनीतिक रंग देकर आपसी भाईचारा बिगाड़ने का।

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एक आम नागरिक होने के नाते संकट की इस घड़ी में हमारा यह कर्तव्य बनता है कि हम झण्डे और नारों की राजनीति से बाहर आकर नागरिक एकता का परिचय देते हुए सामूहिक रूप से यथाशीघ्र न्याय के लिए शांतिपूर्ण और संयमित जन दबाव बनायें न कि अफवाहों के पीछे भागें। जाति और धर्म के आधार पर गुनाहगार या बेकसूर बताना और किसी के प्रभाव में आकर घटना का विरोध या समर्थन करना अपराधियों और हत्यारों को बढ़ावा देने की समाज-विरोधी है। इससे बचने की ज़रुरत है।

यहां मुस्लिम समाज को भी चाहिए कि वो इस अमानवीय घटना की घोर निन्दा करें। साथ ही साथ जाति धर्म की संकीर्णता से बाहर निकलकर शाहरुख जैसे मनचले सिरफिरे, कुत्सित व विकृत मानसिकता वाले लोगों के विरोध में पूरी सख्ती से खड़ा होकर सरकार और पुलिस प्रशासन की जांच प्रक्रिया में पीछे नहीं, बल्कि सबसे आगे आकर अपेक्षित सहयोग करें और दोषी को कड़ी से कड़ी सजा दिलवाने में भागीदार बनें।

कुल मिलाकर हत्यारे को सजा दिलाना और साम्प्रदायिक तत्वों की मंशा को नाकाम करना हम सबका सामाजिक दायित्व है। इसलिए शांति और संयम के साथ  अन्याय के विरुद्ध और न्याय के पक्ष में खड़े होकर संघर्ष करें। इस  घटना को लेकर यही तात्कालिक समय की मांग है और हमारा नागरिक कर्तव्य भी।

अशोक सिंह सोशल एक्टिविस्ट और  फ्रीलांस जर्नलिस्ट हैं, दुमका में रहते हैं।

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