तीस्ता सीतलवाड़ और आरबी श्रीकुमार की गिरफ़्तारी के विरोध में धरना

मुनीज़ा रफ़ीक खान

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वाराणसी। जानी-मानी सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ गुजरात दंगे के समय में पीड़ितों को न्याय दिलाने वाली एक सशक्त आवाज हैं। तीस्ता सीतलवाड़ और आरबी श्रीकुमार को असंवैधानिक तरीके से गुजरात पुलिस के द्वारा गिरफ्तार किया गया है। इस गिरफ्तारी के विरोध में बनारस का नागरिक समाज ने शास्त्री घाट पर धरना दिया। बनारस के तमाम सामाजिक संगठनों, राजनैतिक और सामाजिक लोगों ने इस धरने में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। धरने की शुरुआत सर्वधर्म प्रार्थना से हुई। सामाजिक कार्यकर्ता चित्रा सहस्रबुद्धे के नेतृत्व में धरने में शामिल महिलाओं के द्वारा जिलाधिकारी के प्रतिनिधि को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में यह मांग की गई कि तीस्ता सीतलवाड़ और आरबी श्रीकुमार को अविलंब रिहा किया जाए। सभी मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर जो फर्जी मुकदमे हैं उसे भी सरकार वापस ले। धरने में समाजवादी विचारक विजय नारायण, सुनील सहस्रबुद्धे, अफलातून, फादर आनन्द, मुनीजा रफीक खान ने भी इस गिरफ्तारी के विरोध में अपना वक्तव्य रखा। इस दौरान पारमिता, रामजी यादव, मनीष शर्मा, रामजनम, लक्ष्मण प्रसाद मौर्या, नंदलाल मास्टर, अपर्णा, जागृति राही, रंजू,  सतीश सिंह, धनंजय त्रिपाठी, अनूप श्रमिक, प्रबल सिंह, अरविंद मूर्ति, फजलुर्रहमान, जुबेर खान आदि लोग शामिल हुए।

बैठक में विचार-विमर्श

दूसरी तरफ, राजातालाब, जन आंदोलन की राष्ट्रीय समन्वयन ने भी मानवाधिकार कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ को मुम्बई में हिरासत में लिए जाने का विरोध किया और मनमानी पर सवाल उठाए। आराजीलाईन ब्लाक के समक्ष स्थित मनरेगा मज़दूर यूनियन के सभागार में कार्यकर्ताओं ने हाथों में सितलवाड़ के समर्थन में तख़्तियाँ लेकर इस मनमानी के खिलाफ नारेबाज़ी की इस दौरान एनएपीएम राज्य समन्वयक सुरेश राठौर ने कहा कि तीस्ता को तुरंत रिहा करो और भारतीय नागरिक समाज और मानवाधिकार रक्षकों के उत्पीड़न को समाप्त करने की मांग की है। राठौर ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि सीतलवाड़ के खिलाफ यह कार्रवाई उच्चतम न्यायालय द्वारा गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य को 2002 के गोधरा दंगा कांड में विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा दी गई क्लीन चिट को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करने के एक दिन बाद हुई है।

महिलाओं और बच्चियों ने भी जताई नाराजगी

मनरेगा मज़दूर यूनियन की सह-संयोजिका रेनू पटेल ने आरोप लगाया कि सीतलवाड़ की गिरफ्तारी सभी लोकतांत्रिक विचारधारा वाले नागरिकों के लिए यह ‘अशुभ खतरा’ है कि वे किसी राज्य या सरकार की भूमिका पर सवाल उठाने की हिमाकत न करें, जिसके कार्यकाल में साम्प्रदायिक हिंसा हुई हो।

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श्रद्धा देवी ने कहा कि यह नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर घृणित कार्रवाई है। हालांकि, प्रशासन ने उन्हें गिरफ्तार करने की कार्रवाई उच्चतम न्यायालय की तीन सदस्यीय पीठ के उस संदिग्ध फैसले के बाद की गयी, जिसमें शिकायकर्ता को आरोपी बना दिया गया।

इस दौरान सुरेश राठौर, पूजा, रेनु, श्रद्धा, कविता, रीना, निशा, प्रियंका, ख़ुश्बु, मुस्तफ़ा, लक्ष्मी, पूनम, प्रीति, उजाला, आँचल, अजय। जनकनंदनी, सीता आदि शामिल थे।

यह है मामला 

तीस्ता सीतलवाड़ एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जो मुंबई में रहती हैं। गुजरात एंटी टेरेरिस्ट स्क्वॉड ने बीते शनिवार को तीस्ता को हिरासत में लिया है। तीस्ता पर आपराधिक साजिश रचने, धोखाधड़ी और 2002 के गुजरात दंगों में बेगुनाहों को फंसाने के लिए अदालत में फर्जी सबूत पेश करने का आरोप है। तीस्ता पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित भी हो चुकी हैं।

तीस्ता सीतलवाड़ की गिरफ़्तारी का विरोध करते विभिन्न सामाजिक संगठनों के लोग

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