नई दिल्ली। दिल्ली के एक स्कूल में अपने वरिष्ठों द्वारा कथित तौर पर पीटे जाने के कुछ दिनों बाद अस्पताल में जान गंवाने वाले 12 वर्षीय स्कूली छात्र के परिवार के सदस्यों ने बताया कि लड़का फाइटर पायलट बनना चाहता था। इसके साथ ही छात्र के पिता राहुल शर्मा ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की और स्कूल प्रशासन को नसीहत देते हुए कहा कि हम अपने बच्चों को अच्छा इंसान बनाने के लिए स्कूल भेजते हैं। हमारे बच्चों की देखरेख करना स्कूल के शिक्षकों और प्रधानाचार्य की ज़िम्मेदारी है।
घटना 11 जनवरी को उत्तरी दिल्ली के शास्त्री नगर इलाके के एक सरकारी स्कूल में हुई। लड़के ने 20 जनवरी को अस्पताल में दम तोड़ दिया। पोस्टमार्टम मंगलवार को किया गया।
एक तरफ बच्चे का परिवार आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहा है। बच्चे के दादा विनोद शर्मा ने कहा, ‘मेरे पोते का सपना फाइटर पायलट बनने का था, लेकिन हमारे सपने अब टूट गए हैं। हमें उसका शव मंगलवार शाम को पोस्टमार्टम के बाद मिला और हम दाह संस्कार के बाद अपने घर लौट रहे हैं।’
उन्होंने कहा कि बच्चे के पिता सहित परिवार के सदस्य तीन से अधिक बार सरकारी स्कूल जा चुके है और स्कूल के प्रधानाचार्य ने उन्हें मामले में कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
शर्मा ने कहा, ‘हम अपने बच्चों को अच्छा इंसान बनने के लिए स्कूल भेजते हैं। हमारे बच्चे की देखरेख करना स्कूल के शिक्षकों और प्रधानाचार्य की जिम्मेदारी थी।’
दूसरी तरफ पुलिस ने कहा कि वे बच्चे की मौत का वास्तविक कारण जानने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं, उसके बाद प्राथमिकी दर्ज की जाएगी।
इससे पहले बच्चे के पिता राहुल शर्मा ने कहा था कि उनके बेटे के साथ स्कूल में उसके वरिष्ठों ने मारपीट की थी जिससे उसके पैर में चोटें आई थीं।
लड़के के पिता राहुल शर्मा ने भाषा को बताया था कि 11 जनवरी को जब मेरा छठी कक्षा में पढ़ने वाला बेटा सरकारी स्कूल से घर लौटा तो वह लंगड़ा रहा था और उसे बहुत दर्द हो रहा था। मैंने उससे पूछा लेकिन उसने कुछ नहीं बताया।’
शर्मा के मुताबिक उसके बाद वे बेटे को अस्पताल ले गए जहां पर उसे कुछ दवाएं दी गई और कुछ दिनों तक आराम करने के लिए कहा गया। बावजूद सबके उसकी हालत दिन-ब-दिन खराब होती गई और शनिवार 20 दिसंबर को उसकी मौत हो गई ।
बहरहाल, जो भी हो अक्सर स्कूलों में छात्रों के साथ ऐसी बर्बरतापूर्ण घटनाएं देखने सुनने को मिल जा रही हैं। हालांकि ऐसी घटनाओं के लिए काफी हद तक स्कूल प्रशासन तो जिम्मेदार होता ही है लेकिन शासन स्तर पर भी इसे रोकने के लिए कोई ठोस पहल अभी तक नहीं दिखी है। शासन स्तर से जब तक ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई ठोस पहल नहीं होगी, घर को रोशन करने वाले चिराग ऐसे ही बुझते रहेंगे।
यह भी पढ़ें…
कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देर से मिला लेकिन घोषणा से देश में खुशी का माहौल
22 जनवरी ग्राहम स्टेंस और उनके दो मासूम बच्चों को ज़िंदा जलाने का काला दिन भी था