चाक चलाने से कुम्हारों का विकास होने वाला नहीं है : वंशमणि वर्मा

भुवाल यादव, संजय कुमार प्रजापति

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वाराणसी। किसी भी पार्टी ने हमको कुछ नहीं दिया। ऐसा इसलिए कि हमारे बीच एकता नहीं बन पाई। इसलिए सभी लोग एक होने की कोशिश कीजिए। प्रजापति समाज के सम्मेलन में किसी भी पार्टी और दल की बात मत कीजिए। पढ़ाई की बात कीजिए, लिखाई की बात कीजिए। हम लोग चाक और कुम्हार की बात हमेशा करते हैं। चाक चलाने से आपका विकास होने वाला नहीं है, चाहे आप एक हजार चाक चलाइए। अगर आप चाक चलाने की बात करेंगे तो आप सौ पोरसा नीचे चले जाएंगे, ऊपर उठने वाले नहीं है। चाक चलाने का जमाना चला गया।

ये बातें मध्य प्रदेश सरकार के पूर्व कृषि मंत्री वंशमणि वर्मा ने कही। वह बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के जगतपुर इंटर कॉलेज के खेल परिसर में आयोजित ‘कुम्हार (प्रजापति) अधिकार शौर्य महासम्मेलन’ को बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। भारतीय संविधान सभा के सदस्य, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, महाराष्ट्र सरकार के पूर्व गृह, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, पूर्व सांसद, पद्मश्री, देशभक्त डॉ. रत्नप्पा भरमप्पा कुम्भार की 113वीं जयंती के मौके पर प्रजापति शोषित समाज संघर्ष समिति (PS4),प्रजापति अंतर-विश्वविद्यालयी विद्यार्थी (PIUS)समूह और बरेका प्रजापति कर्मचारी कल्याण समिति ने संयुक्त रूप से इस महासम्मेलन का आयोजन किया था।

उत्तर प्रदेश और देश में कुम्हारों की दयनीय स्थिति से चिंतित पूर्व कृषि मंत्री ने यह भी कहा कि प्रजापतियों के मुख से मैं अक्सर सुनता रहता हूं कि हमारी संख्या इतनी है, हमारा प्रतिशत इतना है, हमारी आबादी इतनी है। उसके हिसाब से हमको कुछ नहीं मिला। हम अनेक हैं, हमारी असंख्य संख्या है लेकिन हम एक नहीं हैं। और, जब तक हम एक नहीं होंगे, तब तक हमें कुछ नहीं मिलने वाला, चाहे आप एक अथवा अनेक प्रजापति सम्मेलन कर लीजिए। सभी लोग मिलकर एक खेमा, प्रजापति खेमा बना लीजिए। आप कुम्हार हो, केवल कुम्हार बताओ। संतराम बी.ए. हों या डॉ. रत्नप्पा जी हों, उन्होंने इतना बड़ा काम किया कि उन्हें पूरी दुनिया में जाना जाता है। हम लोग हर सम्मेलन में उनका नाम लेते हैं लेकिन कभी हम लोगों ने उनके आचरण पर ध्यान नहीं दिया और ना ही उनके आचरण को स्वीकार करने का साहस किया। पहले स्वागत में फूलों की वर्षा होती थी, आज जलवृष्टि हो रही है और इंद्रदेव भी आपके महासम्मेलन का स्वागत कर रहे हैं, कृपया उनके आचरण को स्वीकार तो कीजिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के जगतपुर इंटर कॉलेज के खेल परिसर में आयोजित 'कुम्हार (प्रजापति) अधिकार शौर्य महासम्मेलन' में बतौर मुख्य अतिथि बोले मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री वंशमणि वर्मा।

 

बतौर मुख्य वक्ता महासम्मेलन को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश ग्राम्य विकास विभाग के सेवानिवृत्त अपर महानिदेशक डॉ. वरदानी प्रजापति ने कुम्हार समुदाय पिछले सौ सालों से खुद को ब्राह्मण और क्षत्रीय बनाने में समय बर्बाद कर रहा है। बाल गंगाधर तिलक ने 1914 में गुजरात में कुम्हार समुदाय के शिल्पकार करसन दास का जनेऊ संस्कार कराया था। इसके बाद वह कृष्णा ब्रह्मचारी कहलाने लगे थे। बाद में करसन दास हरिद्वार क्षेत्र में आकर अपनी जड़ें ढूढने लगे। उन्होंने 1919 में प्रजापति समाज नामक पत्रिका निकाली। इसमें उन्होंने कुम्हारों को प्रजापति सरनेम लगाने की बात लिखी। उसी साल दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में कुम्हार समुदाय के सोलह संगठनों का गठन प्रजापति नाम रखकर किया गया। लोग ब्राह्मण और क्षत्रिय बनने में अपनी ऊर्जा लगाने लगे। करीब सौ सालों लोग इसी दिशा में चल रहे हैं। इसका नतीजा यह हुआ कि सरकारी आंकड़ों में शिक्षा, जमीन, वार्षिक आय, नौकरी, आदि में कुम्हार अनूसूचित जाति से भी पीछे हो गए हैं। अगर कुम्हार समुदाय को इससे आगे निकलना है तो उसे शिक्षा और रोजगार पर विशेष ध्यान देना होगा। शिक्षा में भी उसे रोजगारपर शिक्षा हासिल करनी होगी। कुम्हार समुदाय के लोगों को अपनी संस्कृति और रोजगार से जुड़ी अन्य जमात को साथ लेकर आगे बढ़ना होगा। साथ ही संतराम बी.ए. डॉ. रत्नप्पा कुम्भार, मखली गोसाल जैसे समाज के महापुरुषों के विचारों को आदर्श बनाना होगा।

राजस्थान से आए कुम्हार महासभा के प्रदेश अध्यक्ष किशोर दुल्हेपुरा ने कहा कि उत्तर प्रदेश की सत्ता में काबिज सभी राजनीतिक पार्टियों ने कुम्हार समुदाय की लगातार उपेक्षा की है। सूबे की वर्तमान भाजपा सरकार में कुम्हारों पर उत्पीड़न के मामले तेजी से बढ़े हैं, चाहे वह मैनपुरी में कुम्हार समुदाय के एक ही परिवार के पांच लोगों को जिंदा जलाने का मामला हो या प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में प्लंबर कन्हैया लाल प्रजापति की हत्या का मामला। ताजा मामला गोरखपुर का है जहां फर्जी पुलिस मुठभेड़ में विजय प्रजापति की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इन सभी मामलों समेत राजस्थान में कमलेश प्रजापत फर्जी एनकाउंटर जैसे बड़े मामलों में सभी राजनीतिक दलों ने कुम्हार समाज का सहयोग नहीं किया। अब समाज को एक स्वर में एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए बड़ा आंदोलन करना होगा। सभी राजनीतिक दल देश की आजादी के 74 साल बाद भी कुम्हार समाज के हक और अधिकारों की बात नहीं कर रहे हैं और ना ही राजनीतिक भागीदारी दे रहे हैं। उत्तर प्रदेश की वर्तमान भाजपा सरकार ने भी कुम्हार समाज के साथ वादाखिलाफी की है। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने कहा था कि कुम्हार समाज को सरकार में हिस्सेदारी देंगे लेकिन सरकार बनने के बाद उसने कुम्हार समुदाय के एकमात्र विधायक ब्रजेश प्रजापति को सरकार में मंत्री नहीं बनाया। इससे साफ जाहिर कि सरकार कुम्हार समाज को हल्के में ले रही है। अब समय आ गया है कि कुम्हार समुदाय सत्ताधारी भाजपा के साथ विपक्षी पार्टियों को संगठित रूप से जवाब दे।

भारतीय संविधान सभा के सदस्य और पद्मश्री डॉ. रत्नप्पा भरमप्पा कुम्हार द्वारा देश हित में किए गए कार्यों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी समाज के लिए तीन बातें महत्वपूर्ण हैं- शिक्षा, संघर्ष और सत्ता। हमें सबसे पहले समाज में शिक्षा के लिए प्रयास करना होगा ताकि समाज अपने हक और अधिकारों के लिए जागरूक हो सके। फिर अन्याय और अत्याचार के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष करना होगा ताकि हम सुरक्षित रह सकें। अंत में समाज के युवाओं को ज्यादा से ज्यादा राजनीति में आकर सत्ता हासिल करना होगा तभी कुम्हार समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित हो सकेगी।

वनांचल एक्सप्रेस के संपादक शिव दास ने भी महासम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने शिक्षा की ताकत पर जोर देते हुए कहा कि कुम्हार समुदाय के लोगों को उच्च शिक्षा पर जोर देना होगा। बच्चों की शिक्षा में अंग्रेजी को अनिवार्य विषय बनाना होगा ताकि वे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी समझ बना सकें। संस्कृत और हिन्दी में लिखी गई पुस्तकें एक एजेंडे के तहत लिखी गई हैं। भारत की सत्ता में काबिज कुछ विशेष जातियों के लोगों ने शिक्षा का राजनीतिकरण कर दिया है। इसे समझने के लिए आपको अपने बच्चों को अंग्रेजी पढ़ाना होगा ताकि वे भारतीय संविधान की मूल प्रति में उल्लिखित प्रावधानों, उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के आदेशों, अंग्रेजों द्वारा लिखित गैजेटियर के साथ तथ्यपूर्ण किताबों को पढ़ सकें और समझ सकें। जब तक आपके बच्चे वास्तविक तथ्यों को समझेंगे नहीं तो तर्क भी नहीं करेंगे। फिर वे अपना हक भी नहीं ले पाएंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपने समुदाय के महापुरुषों के इतिहास और उनके विचारों को जानना चाहिए। साथ ही उन्हें दूसरे समुदाय के विद्वानों और उनके विचारों का भी अध्ययन करना चाहिए ताकि आप समाज के विकास के लिए जरूरी पहलुओं पर गौर कर सकें और उन्हें लोगों के सामने ला सकें।

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के विधि संकाय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मुकेश कुमार मालवीय ने कहा कि देशभक्त रत्नप्पा कुम्हार की जयंती पर आयोजित कार्यक्रमों से हमें यह सीख मिलती है कि प्रजापति समाज को भी ऊंचा उठाने की आवश्यकता है। संविधान में सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय की व्यवस्था की गई है लेकिन देश की आजादी के 75 साल बाद भी कुम्हार समाज वहीं की वहीं है। हमें अपने पुश्तैनी रोजगार को अब त्यागने की आवश्यकता है। समाज के लोगों को अन्य व्यवसाय में जाना होगा। समुदाय के लोगों को रोजगारपरक उच्च शिक्षा हासिल कर ऊंचे और निर्णायक पदों को प्राप्त करना होगा। साथ ही साथ समुदाय के लोंगो को राजनीति में आना होगा। हालांकि इस समय चुनौती यह है कि प्रजापति समुदाय के गरीबों को उपर कैसे लाया जाए? प्रजापति समुदाय के लोगों के साथ उत्पीड़न और शोषण की घटनाएं बढ़ी हैं, उन्हें कैसे रोका जाए? हमें इसके लिये संगठन और अनवरत संघर्ष करने की आवश्यकता है। पीएस4 एक अच्छा विकल्प है। संगठन प्रमुख और इनके सहयोगी समाज के लिए ईमानदारी से कार्य करते हैं। उनकी कर्तव्यनिष्ठा और कार्य की बदौलत ही आज करीब पांच हजार लोग यहां इस कार्यक्रम में इकट्ठा हुए हैं। इस कार्यक्रम से राजनैतिक लोंगो में हलचल भी बढ़ गई होगी क्योंकि प्रजापति समाज अब जाग गया है। उसे भी अब राजनैतिक प्रतिनिधित्व चाहिए। आज के महासम्मेलन में साफ दिख रहा है कि प्रजापति समाज के युवाओं में कुछ कर गुजरने की क्षमता है जो आगामी विधानसभा चुनावों में अपनी ताकत का अहसास जरूर कराएगा।

प्रजापति शोषित समाज संघर्ष समिति (पीएस4), प्रजापति अंतर-विश्वविद्यालयी विद्यार्थी (पीआईयूएस) समूह और बरेका प्रजापति कर्मचारी कल्याण समिति के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित हुए महासम्मेलन में दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश और बिहार समेत उत्तर प्रदेश के विभिन्न इलाकों से शामिल हुए करीब पांच हजार कुम्हार और उनके नेता।

प्रजापति शोषित समाज संघर्ष समिति (पीएस4) के प्रमुख छेदी लाल प्रजापति ‘निराला’ ने पद्मश्री और देशभक्त रत्नप्पा कुम्हार के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए ‘कुम्हार अधिकार शौर्य महासम्मेलन’ की विस्तृत रूपरेखा रखी। उन्होंने महासम्मेलन में शामिल अतिथियों और कुम्हार समुदाय के लोगों का स्वागत करते हुए कहा कि भाजपा की वर्तमान सरकार के दौरान उत्तर प्रदेश में कुम्हार समुदाय के लोगों के उत्पीड़न और अत्याचार के मामलों में जबरदस्त इजाफा हुआ है। पिछले साढ़े चाल सालों के दौरान करीब 50 ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं जिसमें कुम्हार समुदाय के लोगों को सीधे उनकी जाति के आधार पर निशाना बनाया गया है। इनमें बेटियों के दुष्कर्म और हत्या तक की घटनाएं शामिल हैं। हमें इन घटनाओं को रोकने के लिए संगठित होकर संघर्ष करना पड़ेगा। साथी ही उन्होंने कुम्हारों के लिए आबादी के अनुपात में आरक्षण लागू करने और सभी वर्गों की जाति जनगणना कराने की मांग भी की।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बिहार प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अपर जिलाधिकारी राम नयन प्रजापति ने कहा कि अतीत में कुम्हारों का इतिहास अद्वितीय रहा है। भारत की ऐतिहासिक सभ्यता में कुम्हार कोई जाति नहीं थी। आदिकाल में कुम्हार समुदाय शासक रहा है लेकिन आर्यों के आने के बाद कुम्हार समुदाय पीछे हो गया। उसी तरह सभी शिल्पकार जातियां भी पीछे हो गईं। वर्तमान सरकार उसी ब्राह्मणवादी व्यवस्था को लागू कर रही है। कुम्हारों को उनके ही पारंपरिक व्यवसाय में लगाना चाहती है जबकि उससे जीवन यापन करना मुश्किल हो गया है। आप लोग अपने बच्चों को कुम्हारी कला में बिल्कुल ही मत लगाइए। उन्हें उच्च शिक्षा दीजिए ताकि वे वर्तमान व्यवस्था में अन्य जाति समूहों से प्रतिस्पर्धा कर मुख्य धारा में शामिल हो सकें और सरकारी तंत्र में भी अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सकें।

महासम्मेलन को दिल्ली से आए प्रजापति वैवाहिक पत्रिका के संपादक एलसी राठौर, बालकृष्ठ प्रजापति, पीएस4 के संरक्षक और समाजसेवी चेखुर प्रसाद प्रजापति, बरेका प्रजापति कर्मचारी कल्याण समिति के अध्यक्ष वीके विजय, ऊर्जांचल प्रजापति महासंघ, सोनभद्र के जिलाध्यक्ष राधाकृष्ण मोहन, पूर्वांचल के जाने माने थायराइड, इंडोक्राइन एवं ब्रेस्ट कैंसर सर्जन डॉ. ओम प्रकाश प्रजापति, महादेव प्रजापति, भारतीय समता समाज पार्टी के अध्यक्ष मोहिन्दर कुमार प्रजापति, लोकप्रिय समाज पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मंगला प्रसाद प्रजापति, राष्ट्रीय भागीदारी पार्टी के संयोजक मंडल के सदस्य और मिर्जापुर के पूर्व परिवहन आयुक्त चुन्नीलाल प्रजापति, महेंद्र कुमार प्रजापति, सुनील कुमार प्रजापति, श्याम प्रजापति, बरेली से आए उत्तर प्रदेश प्रजापति महासभा के अध्यक्ष पूरन लाल प्रजापति, कमलाकांत प्रजापति, पीएस4 के मिर्जापुर जिलाध्यक्ष सोहन लाल प्रजापति, राम प्रवेश प्रजापति, सचिन प्रजापति आदि ने भी संबोधित किया।

कार्यक्रम की शुरुआत देशभक्त रत्नप्पा कुम्भार की प्रतिमा पर मुख्य अतिथि वंशमणि वर्मा और कुम्हार महासभा के राजस्थान अध्यक्ष किशोर दुल्हेपुरा द्वारा संयुक्त रूप से माल्यार्पण कर किया गया। बुधवार की सुबह से रुक-रुक कर हो रही बारिश के बीच शुरू हुए कार्यक्रम के करीब एक घंटे बाद ही भारी बारिश शुरू हो गई लेकिन वह कुम्हार समुदाय के लोगों को वहां से भगा नहीं सकी। वक्ताओं ने भारी बारिश के बीच अपने वक्तव्य को जारी रखा। उसी जज्बे के साथ कुम्हार समुदाय के हजारों लोगों ने उनके वक्तव्य सुनें। कार्यक्रम के दौरान काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मुकेश कुमार मालवीय द्वारा संकलित एवं संपादित पुस्तक ‘कुम्हार(प्रजापति) वैचारिकी एवं महापुरुष’ और डॉ. वरदानी प्रजापति द्वारा लिखित पुस्तक ‘पिछड़ों का शौर्यः कल, आज और कल’ का विमोचन मंचासीन अतिथियों ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम का संचालन पीएस4 प्रमुख छेदी लाल प्रजापति ‘निराला’, डॉ. मुकेश कुमार मालवीय और सतीश प्रजापति ने सामुहिक तौर पर किया। पीएस4 प्रमुख शिव प्रसाद प्रजापति ने महासम्मेलन में शामिल हुए लोगों का धन्यवाद ज्ञापन किया।

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से पीएस4 के मुख्य महासचिव राजेश कुमार प्रजापति, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष इंजीनियर रमेश चौधरी, जिला मीडिया प्रभारी राजेश कुमार प्रजापति, राकेश प्रजापति, जीउत लाल प्रजापति, कृष्ण कुमार प्रजापति, सुभाष प्रजापति, राम राज प्रसाद, सुनील प्रजापति, बलवंत प्रजापति, सुनील कुमार प्रजापति समेत करीब पांच हजार लोग मौजूद रहे।

 

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