वाराणसी के करसड़ा गांव की घटना पहुंची हाईकोर्ट

भुवाल यादव , संवाददाता , गाँव के लोग डॉट कॉम

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वाराणसी। रोहनिया थाना-क्षेत्र के करसड़ा गांव के मुसहर परिवारों के घर उजाड़ने का मामला तूल पकड़ लिया है। पीड़ित मुसहर परिवारों के पक्ष से बात करने के लिए कई राजनीतिक-सामाजिक संगठन आगे आये हैं। सभी लोगों ने पीड़ित परिवारों की मांगों को लेकर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के यहां एक मेल भेजा है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को भेजे मेल के जरिए उन्होंने मांग की है कि ज़िम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी एससी-एसटी एक्ट के तहत मुक़दमा दर्ज किया जाए और पीड़ित परिवारों को उचित सम्मान के साथ पुनर्वास की व्यवस्था की जाए।
वाराणसी के राजातालाब तहसील प्रशासन द्वारा करसड़ा गांव की मुसहर बस्ती उजाड़ने के मामले में मंगलवार को दलित फ़ाउंडेशन से जुड़े वाराणसी के सामाजिक कार्यकर्ता राजकुमार गुप्ता की अगुवाई में फैक्ट फ़ाइंडिंग टीम ने इलाहाबाद के मुख्य न्यायाधीश, मानवाधिकार और एससी-एसटी आयोग में शिकायत दर्ज कराई और इसकी जांच कर कार्रवाइ की मांग की।
मेल द्वारा दी गयी शिकायत में आरोप है कि करसड़ा में अपनी जमीन पर रहने वाले वनवासी (मुसहर) समुदाय के 13 परिवारों की जमीन पर कब्ज़ा करने की नीयत से बीते शुक्रवार को उनके घर प्रशासन द्वारा असंवैधानिक तरीके से फ़ोर्स लगाकर उजाड़ दिये गये। ऐसे में प्रेषित मेल में इस आशय की मांग की गयी है कि शासन-प्रशासन द्वारा जबरदस्त तरीके से हुए दमन और उत्पीड़न (दलित उत्पीड़न) के खिलाफ तत्काल कमीशन गठित कर मामले की जाँच कराते हुए दोषियों को दंडित किया जाए।
सामाजिक कार्यकर्ता राजकुमार ने बताया कि उजाड़े गए सभी 13 परिवार जिस जमीन पर रह रहे हैं वह इन्ही मुसहर समुदाय के स्व. मठल की पत्नी चमेली देवी की है। इनका नाम भी खतौनी में दर्ज है। इसके बावजूद पिछले एक माह से इन 13 परिवार को तहसील प्रशासन द्वारा बस्ती से जमीन छोड़ कर चले जाने की धमकियां दी जा रही थी और प्रशासन द्वारा कहा जा रहा था कि यदि जमीन छोड़ोगे या बस्ती से घर नहीं हटाओगे, तो गंभीर परिणाम भुगतना होगा। राजकुमार गुप्ता ने बताया कि मुसहर परिवारों की 4 बीघा जमीन को हड़पने की नीयत से विगत 29 अक्टूबर को राजातालाब तहसील की उपजिलाधिकारी प्रशिक्षु (तहसीलदार) मीनाक्षी पांडेय, कानूनगो रामेश्वर तिवारी व स्थानीय लेखपाल बिना किसी लिखित आदेश के JCB लेकर पहुंचे और यह कहते हुए कि यह जमीन हथकरघा विभाग की है, इनके घरों को तोड़ना शुरु कर दिया। जब बस्ती के लोगों ने इस असंवैधानिक करार देते हुए उसकी वीडियो बनाने का प्रयास किया तो उनकी मोबाइल को छीन लिया गया।

इसके साथ ही सामाजिक कार्यकर्ताओं ने यह भी मांग किया है कि पीड़ित 13 परिवारों को तत्काल इनकी जमीन पर बसाये जाने का आदेश पारित करते हुए सभी मूलभूत सुविधाएँ जैसे- आवास, राशन कार्ड, जॉब कार्ड आदि अविलंब बनवाने की भी व्यवस्था किया जाय। उधर समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व दर्जा प्राप्त मंत्री मनोज राय 'धूपचंडी' ने उक्त मामले में लेखपाल नीलम प्रकाश के निलंबित हो जाने के बाद पीएमओ को ट्वीट करके यह मांग रखी है कि तहसीलदार, एसडीएम और डीएम को भी दोषी ठहराते हुए इनके ख़िलाफ़ भी उचित कार्रवाई की जाए।

सामाजिक संगठनों द्वारा पीड़ित मुसहर परिवारों के पक्ष से प्रशासन के उपर्युक्त अनैतिक कार्य के संबंध में निम्नलिखित आपत्ति और सवाल है, जिसकी जाँच कराकर दोषी अधिकारियों के खिलाफ SC/ST एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया जाना आवश्यक है।

सवाल :
 1.बिना किसी पूर्व नोटिस के इन 13 परिवार को इनकी ही जमीन से किसके आदेश पर हटाया गया?
2.यदि यह जमीन हथकरघा विभाग की थी, तो चमेली देवी पत्नी स्व मठल का नाम खतौनी में कैसे दर्ज हुआ? साथ ही यह भी कि खतौनी में गलत नाम दर्ज करने वाले सभी उच्चाधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज क्यों नहीं किया गया?
3.इन्हें हटाने से पूर्व इनके रहने/खाने आदि की उचित व्यवस्था प्रशासन ने क्यों नहीं किया? इनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार क्यों किया गया?
 4. इन सभी परिवार का गाँव के परिवार/कुटुंब रजिस्टर में पिछले 25 वर्षों से रहने के बावजूद नाम क्यों नहीं दर्ज है?
इसके साथ ही सामाजिक कार्यकर्ताओं ने यह भी मांग किया है कि पीड़ित 13 परिवारों को तत्काल इनकी जमीन पर बसाये जाने का आदेश पारित करते हुए सभी मूलभूत सुविधाएँ जैसे- आवास, राशन कार्ड, जॉब कार्ड आदि अविलंब बनवाने की भी व्यवस्था किया जाय। उधर समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व दर्जा प्राप्त मंत्री मनोज राय ‘धूपचंडी’ ने उक्त मामले में लेखपाल नीलम प्रकाश के निलंबित हो जाने के बाद पीएमओ को ट्वीट करके यह मांग रखी है कि तहसीलदार, एसडीएम और डीएम को भी दोषी ठहराते हुए इनके ख़िलाफ़ भी उचित कार्रवाई की जाए।
सामाजिक संगठनों और पीड़ित परिवारों के आक्रोश को देखते हुए आनन फ़ानन में पीड़ितों को पास के बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में एक-एक बिस्वा जमीन का आवंटन देकर आवास बनाया जा रहा है, जिसे पीड़ितों ने लेने से इंकार कर दिया गया है।
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