Tuesday, April 16, 2024
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कोयला खदान से खेती पर मंडरा रहा संकट

हजारीबाग जिले का सबसे बड़ा अनाज उत्पादन करने वाला प्रखंड, बड़कागांव अब अपनी पहचान खो चुका है। काले कोयले की काली नजर बड़कागांव को लग चुकी है। एनटीपीसी के कोयला खदान लगने के बाद गाँव की खेती और किसान दोनों संकट का सामना कर रहे हैं।

यूज़ एंड थ्रो के दौर में बहुत कम हो गए चाकू-कैंची पर धार लगानेवाले

भूमंडलीकरण से पहले हर चौक, चौराहे और मोहल्ले में कैंची-चाकू पर धार लगाने वाले, पीतल के बर्तनों में कलई करने वाले, पुराने तेल के पीपे से अनाज रखने के लिए टीपे बनाने वाले, लोहे के सामान बनाने वाले, लकड़ी का काम करने वाले, जो महीने में एक बार आकर चक्कर लगाते थे लेकिन बाजार ने जैसे ही उपभोक्ताओं को अपनी गिरफ्त में लेना शुरू किया, वैसे ही छोटे-छोटे काम करने वालों की रोजी-रोटी पर गाज गिरी।

देशभक्ति की चाशनी में रची बॉलीवुड सिनेमा की महिला जासूस और राज़ी

धार्मिक आधार पर उपजे द्विराष्ट्र सिद्धांत के सनकीपन ने खूबसूरत मुल्क भारत के बाशिंदों को चंद सियासतदानों की इच्छापूर्ति के लिए दो हिस्सों मे...

क्या मणिपुर में नागा, कूकी और मैतेई विवाद एक सांप्रदायिक भविष्य का संकेत है

मुश्किल में मणिपुर – जातीय घृणा की आग में लड़ते घाटी और पहाड़ के बीच झुलस रहे हैं आर्किड के फूल सत्ता और सिस्टम में...

किसानों की मर्ज़ी के खिलाफ सरकार ज़मीन नहीं ले सकती

जमीन मकान बचाओ संयुक्त मोर्चा, आज़मगढ़ के तहत गदनपुर हिच्छनपट्टी, जिगिना करमनपुर, जमुआ हरीराम, जमुआ जोलहा,  हसनपुर, कादीपुर हरिकेश, जेहरा पिपरी, मंदुरी, बलदेव मंदुरी व आसपास के ग्रामवासी 13 अक्टूबर 2022 से अनवरत खिरिया की बाग, ...

बहुजन नायकों-विचारकों के प्रति उपेक्षा और चुप्पी वामपंथ के लिए घातक साबित हुई

वक्ता, चिंतक, विचारक शैलेंद्र कुमार से हुई बेबाक बातचीत का यह तीसरा और अंतिम भाग है। इसमें उन्होंने जोतिबा फुले और पेरियार की उपेक्षा...

सरकार ने गांव और जिंदगी पर हमला किया है

सरकार ने गांव पर हमला किया है। जिंदगी पर हमला किया है। जनता में धर्म के नाम पर अंधविश्वास फैलाकर हमारी जीवन पर हमला किया जा रहा है। किसान आंदोलन में आंदोलनकारियों को आतंकवादी तक कहा गया। आज रेल की पटरियां नीलाम हो रहीं हैं। पटरी हमारी रेल मुनाफाखोर कंपनियों का हो रहा है। ठीक यही हाल एयरपोर्ट का भी हो रहा है।

एक बुरी खबर है, अपना राजू नहीं रहा!

राजू। इसी नाम से हम उन्हें पुकारा करते थे।  न राजू जी, न ही पाण्डेय जी। पता नहीं क्यों यही सम्बोधन बहुत अपना सा...

मौलिक समस्याओं के बजाय गैरजरूरी बहसों में उलझने से बचना होगा

शांति सद्भाव यात्रा का सेवापुरी विकास खंड के गाँवों में हुआ शानदार स्वागत सद्भावना के रास्ते शांति के वास्ते आयोजित 9 दिवसीय शांति सद्भावना यात्रा...

भविष्य के अंदेशों के बीच बम्बइया मिठाई

सामान्य शहर में रहने वाले व्यक्ति का मुंबई जाकर सरवाइव करना मुश्किल होता है। एक तो वहाँ की भागती-दौड़ती ज़िंदगी, लोकल ट्रेन का सफर और बेतहाशा भीड़, जहां स्वयं को देख पाने की याद और फुरसत दोनों नहीं मिलती। ऐसे में घर से गया अकेला आदमी अक्सर घबरा जाता है और जल्द ही वापस अपने घर आने की सोचता है।

आखिर क्यों विषगंगा में बदलती जा रही है कोल्हापुर में पंचगंगा नदी

पंचगंगा महाराष्ट्र में स्थित भारत की महत्वपूर्ण नदी में से एक है। यह नदी चार नदियों के संगम से बनती है: कसारी, कुंभी, तुलसी और भोगवती। कोल्हापुर में पंचगंगा नदी प्राथमिक नदी है, जो नरसोबावाड़ी के पास कृष्णा नदी से मिलने तक जिले भर में 136 किलोमीटर बहती है। वाटर क्वालिटी इंडेक्स (WQI)  के आधार पर, पंचनगंगा नदी बेसिन को तीन क्षेत्रों में विभाजित किया जा सकता है अर्थात् उत्कृष्ट जल गुणवत्ता क्षेत्र के रूप में, अच्छी गुणवत्ता वाले क्षेत्र के रूप में और खराब गुणवत्ता वाले नदी जल क्षेत्र के रूप में। अपस्ट्रीम से डाउनस्ट्रीम तक बढ़ने की दिशा में नदी के पानी की गुणवत्ता उत्कृष्ट से खराब गुणवत्ता में बदल जाती है।

क्या रिंकू को अपने परिवार का कहना मान लेना चाहिए?

‘ज़िंदगी में कभी-कभी कोई ऐसा मोड़ आता है जब यह समझ में नहीं आता कि किधर जाएँ। और अगर घर के लोग अपने मन-मुताबिक...

कहाँ है ऐसा गाँव जहाँ न स्कूल है न पीने को पानी

अगर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मानें तो अगले हफ्ते आने वाले आज़ादी के अमृत महोत्सव तक भारत के हर आदमी को पक्का घर, घर...

आखिर क्यों नहीं बनतीं गिरमिटिया पूर्वजों पर फ़िल्में

प्रवासी भारतीयों के सिनेमा पर एमफिल करते वक्त सन 2007-08 में ह्यूग टिंकर (HughTinker) की किताब में  गिरमिटिया मजदूरों के बारे में पढ़ने-जानने का...

हेलंग की घटना के वास्तविक पेंच को भी समझिए

ऐसा लगता है कि उत्तराखंड के सीमावर्ती जिले चमोली के हेलंग गाँव की मंदोदरी देवी ने अपने घास के मैदानों और चरागाहों की रक्षा...

संसदीय और असंसदीय शब्दों के बीचों-बीच (डायरी, 15 जुलाई, 2022) 

शब्द महत्वपूर्ण होते हैं। कितने महत्वपूर्ण होते हैं, यह एक सवाल हो सकता है। लेकिन इसका कोई पैमाना तय नहीं हो सकता। फिर चाहे...

संवैधानिक संस्थाओं की हत्या (डायरी,12 जुलाई, 2022) 

सियासत की कोई एक परिभाषा लगभग नामुमकिन है। अक्सर हमें यह लगता है कि सियासत का मतलब केवल और केवल राज करना होता है,...

यह गंदगी तुम्हीं लोगों ने किया अब चाहे इसका पानी पियो चाहे कमाओ…

‘नदी में ई गंदगी तोही लोगन त कइला, नदी त तहू लोगन क हौ अब वही के पीया चाहे एसे कमा... गंदा तो होते...

न्याय और अन्याय इस गणितीय प्रमेय से समझिए (डायरी, 2 जुलाई, 2022) 

न्याय के अनेक रूप होते हैं। यह इस वजह से भी कि जिनके उपर इसकी जिम्मेदारी होती है, उनकी प्रतिबद्धताएं अलग-अलग होती हैं। इसे...

ताकि जकिया जाफरी को मिले ‘न्याय’ (डायरी, 25 जून, 2022)

तानाशाह... तानाशाह ही होता है। हालांकि उसके भी दो हाथ, दो पैर, दो आंखें और बाकी सब अंग भी अन्य इंसानों के जैसे ही...

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