सामाजिक कार्यकर्ता सुरेंद्र नारायण गौड़ का संघर्ष और बनारस के तालाबों-कुंडों की दुर्दशा

अमन विश्वकर्मा

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वाराणसी। तालाबों, कुंडों और सरोवरों के शहर कहे जाने वाले बनारस का हाल आज के समय में काफी बद्हाल है। सुंदरीकरण के लिए विभागीय तौर पर लाखों-करोड़ों रुपये का बजट भी जारी हुआ, बावजूद इसके समस्याएँ जस की तस बनी हुई है। विभागीय स्थिति पर बात करें तो नगर निगम के बाहर 63 तालाबों और कुंडों की सूची बोर्ड लगी हुई है। वहीं विज्ञानियों के अनुसार बनारस में लगभग 110 तालाब और कुंड थे। 2014 में मोदी सरकार ने अपनी महत्वाकाँक्षी योजना नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा के तहत इन तालाबों और कुंडों के लिए कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) फंड का इंतजाम किया था। आलम यह है कि कभी-कभार सम्बंधित अधिकारियों की ओर से इन कुछ प्रमुख-तालाबों का निरीक्षण कर अपने कार्य की इतिश्री समझ ली जाती है। तालाबों को पाटकर आज भी कब्जा किया जा रहा है। एक समय था जब इन कुंड और तालाबों के पास मेले लगते थे जिस कारण इनकी साफ-सफाई भी हो जाती थी। वर्तमान में अधिकतर तालाब उपेक्षित हो गए हैं। सफाई नहीं होने के कारण इनका पानी भी पीने योग्य नहीं रह गया है। कई तालाबों में तो हर वर्ष हजारों-लाखों मछलियाँ भी मर जाती हैं।

सुरेंद्र नारायण गौड़ और उनको मिला सम्मान

तालाबों और कुंडों की खराब स्थिति को ठीक करवाने के लिए बनारस के जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता इंजीनियर सुरेन्द्र नारायण गौड़ (5 सितम्बर, 1935 से 24 अक्टूबर 2016) का अहम योगदान था। गौड़ साहब के अभियान का परिणाम ही था कि भू-माफियाओं को तालाबों और कुंडों की जमीन पर कब्जा करने की कोशिश नाकाम होने लगी थी। इस काम के लिए उन्होंने ‘जन अधिकार एवं स्वापक निषेध अपराध नियंत्रण जाँच ब्यूरो’ का गठन किया था। कई तालाबों पर बिना नक्शा पास करवाए बनी बड़ी-बड़ी इमारतों के खिलाफ संस्था के माध्यम से कागजी कार्रवाइयाँ भी करवाई गई थी। इसके लिए उन्हें धमकियाँ भी मिलती थी।

गौड़ साहब के बेटे सुमित बताते हैं कि पिताजी हम लोगों को अपना मोबाइल कभी नहीं देते थे। उनको इस बात का भय था कहीं मेरे परिवार को धमकी वाली बात न पता चल जाए। सुमित के अनुसार, परिवार को धमकी वाली बात तब पता चली जब पिताजी की आँख लगने पर उन्होंने मोबाइल उठा लिया। संस्था का काम देखने वाले एक वकील से जब सुमित ने इसकी चर्चा की तो यह सचाई सामने आई कि ऐसी धमकियाँ तो काफी वर्षों से मिल रही हैं, कुछ पर तो शिकायत भी दर्ज है।

खैर, गौड़ साहब तो अब इस दुनिया में नहीं रहे। बीते 24 अक्टूबर 2016 को दिल की बीमारी के कारण उनकी मौत हो गई थी। कुछ वर्ष पहले ही उनके हार्ट की सर्जरी हुई थी। घर से बाहर आना-जाना बंद हो गया था, बावजूद इसके वे अपने कामों और संघर्षों के कारण समाज में बने रहे। उनकी संस्था का काम देख रहे उनके बेटे सुमित बताते हैं कि पिताजी के अभियान को देखते हुए बनारस में एक उच्च कमेटी का गठन किया गया था जिसमें तत्कालीन कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण समेत जिलाधिकारी, नगर निगम और वीडीए के अफसरों के साथ निजी संस्थाओं के साथ बैठक हुआ करती थी। इस बैठक में बनारस के सभी तालाबों और कुंडों की चर्चा होती थी। उनको कब्जामुक्त और सुंदरीकरण के लिए निर्देश के साथ कार्रवाई भी की जाती थी। यह बैठक प्रत्येक 15 दिन पर होती थी। प्रत्येक अगली बैठक में हुई कार्रवाइयों की पड़ताल की जाती थी।

बता दें, बीते अक्टूबर 2018 में वीडीए ने 10 तालाबों और कुंडों को संवारने का जिम्मा उठाया था। इस काम के डीपीआर के लिए प्राइवेट संस्था इंटेक को जिम्मेदारी के साथ पाँच लाख रुपये की धनराशि तत्काल मुहैया कराई गई थी। उस समय जैतपुरा का बकरिया कुंड, दुधिया तालाब, कबीर तालाब, कलहा तालाब, करौंदी तालाब, लक्ष्मी कुंड, मच्छोदरी तालाब, पहड़िया तालाब, रेवा तालाब और सोना तालाब का चिन्हांकन किया गया था। अभी हाल ही में वीडीए ने कई तालाबों को निरीक्षण कर नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (एनएमसीजी) को अपनी रिपोर्ट भेज दी है। उनके अनुसार तालाबों के सुंदरीकरण का काम होगा। उनके चारों ओर पाथ-वे, लाइट, बेच और साफ-सफाई की व्यवस्था की जाएगी।

वाराणसी विकास प्राधिकारण को पूर्व में बनारस के काल्हा तालाब, दुधिया तालाब, लक्ष्मीकुंड, पहड़िया तालाब, रिवा तालाब, संत कबीर प्राकट्य स्थल का काम दिया गया था, जो अभी तक चल रहा है। वीडीए की ओर से पाण्डेयपुर पोखरा, शिवपुर का चंचा ताल, संत कबीर प्राकट्य स्थल (लहरतारा) का दूसरा ताल, रामनगर का सगरा और क्षीर सागर तालाब का सुंदरीकरण करवाया जाएगा।

बनारस तालाब और कुंडों के शहर के लिए जाना जाता रहा। पिछले ढाई दशकों में भू-माफियाओं ने नगर के तालाबों और कुंडों पर कब्जे कर बड़ी-बड़ी इमारतें बना ली। स्व. गौड़ साहब द्वारा छेड़े गए अभियान के चलते सरकार ने काशी की लुप्त हो रही धरोहरों को बचाने और लुप्त हो चुके तालाबों और कुंडों को पुन: पुनर्स्थापित करने का काम शुरू किया है। तालाबों की देखरेख का काम नगर निगम का है। लेकिन नगर निगम और विकास प्राधिकरण के कुछ अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने पैसे की लालच में तालाबों और कुंडों को पाटकर वहाँ बड़ी- बड़ी इमारते खड़ी करा दी। शासन-प्रशासन की अब कुम्भकर्णी निद्रा टूटी है। अस्तित्वविहीन हो चुके तालाबों और कुंडों को पुनर्स्थापित करने का काम शुरू हो गया। शासन-प्रशासन को चाहिए कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों ने भू-माफियाओं को तालाबों और कुंडों पर कब्जा कराने में सहयोग किया है, उन्हें दंडित करें। साथ ही लुप्त हो चुके तालाबों और कुंडों को पुनर्स्थापित करे। ‘गाँव के लोग’ टीम ने लुप्त हो चुके तालाब और कुंडों की जानकारी जनमानस के सामने लाने का संकल्प लिया है। इसके लिए हम लुप्त हो चुके तालाबों और कुंडों को सूची और जानकारियाँ आपके अपने बेवसाईट पर समय-समय पर उपलब्ध कराएँगे।

बनारस के कुछ तालाबों और कुंडों के नाम

  • अगस्त कुंड : अगस्त कुंड मुहल्ले में सिर्फ़ प्रतीक के रूप में स्थित है।
  • इंद्रेश्वर कुंड : नागकुआं में स्थित था जैनपरा (जैतपुरा मुहल्ले में)।
  • उर्वशी कुंड : औसानगंज में शिवनारायण मंदिर के उत्तर में स्थित।
  • अंगोरेश्वर कुंड : ऋण मोचन के पास था, लेकिन अब समाप्त हो चुका है।
  • काम कुंड : यह कामेश्वर से दक्षिण में था।
  • कालोदक कूप : यह बुद्धकाल का प्रसिद्ध कुआँ है।
  • गोकर्ण सरोवर : इसे पाटकर यहाँ काज़ीपुरा मुहल्ले में बना है।
  • गौतम कुंड : यह गोदौलिया पर स्थित है।
  • गौरी कुंड : यह केदारघाट पर स्थित है।
  • गन्धर्व सरोवर : नागकुआँ के पश्चिम में स्थित है।
  • कर्णघंटा तालाब : मकान नम्बर के. 60/67 में।
  • जानकी कुंड : यह सीताकुंड के नाम से प्रसिद्ध है और लक्सा पर स्थित है।
  • धु्रव कुंड : यह सनातन धर्म इंटर कॉलेज के पास था।
  • पादोदक कूप : यह त्रिलोचन की गली में पूर्व मकान सं. ए 3/87ए में स्थित है, जो पिलपिला का कुआँ के नाम से प्रसिद्ध है।
  • तार तीर्थ कुंड (रानी भवानी का तालाब/ ओमकालेश्वर महादेव तालाब) : छित्तनपुरा मुहल्ले में 10वीं सदी में स्थापित अंकालेश्वर में (आराजी नम्बर 233 रकबा एक बीघा) जिसे पाटकर वीडीए द्वारा एकता नगर कॉलोनी बना दी गई है। इस कुंड का उल्लेख स्कन्द पुराण काशीखण्ड, काशी रहस्य पद्मपुराण में है।
  • तीर्थ शुभोदक कूप : छित्तनपुर स्थित ओंकालेश्वर महादेव के पूर्व में आराजी नम्बर 2074 मौजा कज्जाकपुरा पर था जिसे अवांछनीय तत्वों ने पाटकर भूमि पर कब्जा कर लिया है।
  • पितृ कुंड : पिशाचमोचन के दक्षिण तथा सूर्य कुंड के उत्तर स्थित यह कुंड पितरकाण्ड के नाम से विख्यात है।
  • मरीचि कुंड : यह नाग कुआँ के उत्तर में स्थित था जो अब लुप्त हो गया है।
  • महासिद्ध कुंड : इस कुंड को लेकर दो मत है, कुछ लोग क्री-कुंड को सिद्ध कुंड मानते हैं तो कुछ लोग भद्रवनी पोखरी (भदैनी) को, जो अब लुप्त हो चुकी है।
  • रुद्रवास कुंड : यह सुग्गा गढ़ही के नाम से जाना जाता है। यह कोयला बाजार और छित्तनपुरा के पास का मुहल्ला है।
  • अमृत कुंड : बुद्धकाल के मंदिर में मकान नम्बर 52/39 में स्थित है।
  • सुमता कुंड : लुप्तप्राय हो गया है या पाटकर कब्जा कर लिया गया है।
  • गंगा कुंड : लुप्तप्राय हो गया है या पाटकर कब्जा कर लिया गया है।
  • अज कुंड : लुप्तप्राय हो गया है या पाटकर कब्जा कर लिया गया है।
  • सागर तालाब : लुप्तप्राय हो गया है या पाटकर कब्जा कर लिया गया है।
  • कर्महन्या कुंड : लुप्तप्राय हो गया है या पाटकर कब्जा कर लिया गया है।
  • महाकुंड : लुप्तप्राय हो गया है या पाटकर कब्जा कर लिया गया है।
  • विजय तीर्थ स्नान कुंड : लुप्तप्राय हो गया है या पाटकर कब्जा कर लिया गया है।
  • मोक्ष कुंड : लुप्तप्राय हो गया है या पाटकर कब्जा कर लिया गया है।
  • रामकुंड : रामकुंड मुहल्ले में स्थित था। रामतीर्थ का उल्लेख काशी खण्ड, काशी रहस्य, शिव रहस्य यह तीर्थ केदार अंतगृही यात्रा में है।
  • विनायक कुंड : मंडुवाडीह मुहल्ले में विनायक तीर्थ कुंड है। उल्लेख-स्कंदपुराण काशीखण्ड और काशी रहस्य में।
  • तृवासना सरोवर : आदि अनेक कुंड पाटकर कब्जा कर मकान आदि बनाए गए हैं।
  • महामृत्युंजय कुआँ : दारानगर स्थित महामृत्युंजय मंदिर के अंदर है।
  • औगढ़ तकिया का कुआँ : कबीरचौरा बड़ी पियरी मुहल्ले में।

 

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