लीपापोती की ‘राजनीति’ की भेंट चढ़ती जा रही है गैंगरेप पीड़िता की आवाज़

अमन विश्वकर्मा

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वाराणसी। ‘बीएचयू के आईआईटी की छात्रा से गन प्वॉइंट पर छेड़खानी और बदसलूकी के मामले को आज पूरे दस दिन हो गए हैं। बावजूद इसके पुलिस के हाथ आरोपियों तक नहीं पहुँच पाए हैं। दूसरी तरफ, आईआईटी के छात्रों में भी पुलिस की इस शिथिलता पर काफी नाराज़गी है। प्रॉक्टोरियल बोर्ड के रहते हुए बीएचयू प्रशासन को पुलिस का सहारा लेना पड़ रहा है।’ आईआईटी की एक छात्रा और तीन छात्रों ने नाम न छापने की शर्त पर आगे बताया कि ’बीएचयू परिसर में स्थित बड़े कर्मनबीर बाबा मंदिर के पास काफी सन्नाटा रहता है। वहाँ एक सीसीटीवी कैमरा लगा तो हुआ है लेकिन चलता है कि नहीं, यह हमें नहीं मालूम। उस तरफ कभी-कभार सुरक्षाकर्मी भी नहीं रहते। काफी अंधेरा भी रहता है। छेड़खानी का मामला जिस दिन हुआ, उस वक्त वहाँ सुरक्षाकर्मी नहीं था।’

गौरतलब है कि बीटेक की छात्रा से बदलसलूकी के बाद जब बीएचयू के छात्रों ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए धरना-प्रदर्शन किया तब जाकर जिला प्रशासन ने पुलिस की कुछ टुकड़ियाँ सिंह द्वार से लेकर आईआईटी के गेट पर तैनात की। परिसर के कुछ तिराहों और चौराहों पर भी सुरक्षाकर्मियों के साथ एक-एक पुलिसकर्मी बैठने लगे हैं। परिसर में लगभग दर्जनभर स्थानों पर यूपी पुलिस के वे बोर्ड लग चुके हैं जिन पर लिखा है- ‘आप सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में हैं’। साथ ही बीएचयू कंट्रोल रूम, आईआईटी कंट्रोल रूम, बीएचयू चौकी, वोमेन हेल्पलाईन, सिटी कंट्रोल रूम, एसीपी भेलूपुर, एसएचओ लंका और डायल 112 का नम्बर लिखा हुआ है।

BHU कैंपस में लगा उत्तर प्रदेश पुलिस का बोर्ड

मामले को दस दिन से ज़्याद बीत चुके हैं लेकिन जिला प्रशासन ने ऐसे एफआईआर को दर्ज किया है जिसे एबीवीपी ने दूसरे छात्र संगठन के खिलाफ दर्ज कराया है। इससे यह मामला दूसरा रंग पकड़ चुका है। पीड़िता के लिए न्याय की आवाज़ उठा रहे छात्र संगठनों का कहना है कि पुलिस आरोपियों तक पहुँचने में ढिलाई कर रही है। जबकि एबीवीपी जैसे संगठन द्वारा हम लोगों के खिलाफ दिया गया एक छोटा सा बयान भी हमको प्रताड़ित करने के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। हमारी तहरीर और शिकायत को दर्ज तक नहीं किया जा रहा है। पीड़िता का बयान होने के बावजूद जाँच में कोई तेजी नहीं आई और आरोपियों तक पहुँचने की कोशिश किसी अंजाम तक नहीं पहुँच पाई है।

इस पूरे मामले पर छात्र नेता आकांक्षा आज़ाद ने बताया कि ‘एक नवम्बर को हुई इस घटना के बाद तीन नवम्बर की शाम से हम छात्रों ने धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया था। पाँच नवम्बर को पुतला दहन की तैयारी थी जिसके लिए चार नवम्बर को हम लोगों ने प्रॉक्टोरियल बोर्ड को जानकारी दे दी थी। पाँच नवम्बर को हम पुतला दहन की तैयारी कर ही रहे थे कि उसी भीड़ में मौजूद एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने हम पर हमला कर दिया। आकांक्षा ने आरोप लगाया कि एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने यह हमला जिला प्रशासन की शह पर किया है। उस समय हम लोगों के साथ मारपीट की गई। लड़कियों के प्राइवेट पार्ट को हाथ लगाया गया।’

वह बताती हैं कि ‘एबीवीपी कार्यकर्ता मेघा मुखर्जी और अदिति मौर्या ने यह आरोप लगाया कि हम लोगों ने उन पर हमला किया। उनका हाथ और पैर टूट गया है, शाम को उन्होंने ट्रॉमा सेंटर में इलाज करवाया है। जबकि हम पर हमले के तुरंत बाद मेघा मुखर्जी मीडिया से बातचीत करने आ जाती हैं, जिसमें उनका हाथ ठीक है। यानी उनका आरोप फर्जी है और उन पर करवाई होनी चाहिए। इन कार्यकर्ताओं ने जिस मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर हम पर मुकदमा दर्ज करवाया उसे भी पुलिस हम लोगों ने नहीं दिखा रही है।

छात्रों की ओर से प्रोक्टोरियल बोर्ड को दिया गया पत्रक

आकांक्षा आज़ाद ने बताया कि इसी के बाद हम 17 लोगों के खिलाफ पुलिस ने गम्भीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया, जिसमें एससी/ एसटी एक्ट भी शामिल है। जबकि जिसने हमारे खिलाफ यह आरोप (एससी/ एसटी) लगाया है उसे हम 17 लोग नहीं जानते हैं।

लेकिन भेलूपुर एसीपी प्रवीण सिंह ने बताया कि अभी तक ‘बीसीएम की तरफ से कोई तहरीर नहीं दी गई है। अगर किसी को कोई भी शिकायत दर्ज करानी है तो लंका थानाध्यक्ष के सामने जाए। जो भी उचित होगा कार्रवाई अवश्य की जाएगी।’

अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की राष्ट्रीय संयुक्त सचिव मधु गर्ग के अनुसार, ‘इस मामले में होना यह चाहिए कि बीएचयू प्रशासन छात्रों के साथ खुद मीटिंग करे। वीसी भी स्टूडेंट्स के बीच जाएँ, उनसे बातचीत कर शांति व्यवस्था बनाने रखने की अपील करें।’ गर्ग ने कहा ‘यह घटना निर्भया कांड की तरह वीभत्स है। पीड़िता के बयान के बाद पुलिस ने तहरीर में धारा 376डी और 509 का मुकदमा भी शामिल किया है। अभी तक आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। अगर पुलिस को ही सब करना है तो बीएचयू के प्रॉक्टोरियल बोर्ड को भंग कर देना चाहिए। सुरक्षा के नाम पर जो करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं, उसे भी समाप्त कर देना चाहिए।’ मधु गर्ग सवाल उठाती हैं कि ‘इस मामले में राजनीति उसी दिन शुरू हो गई थी जिस दिन छात्रों को समझाकर आईआईटी के चारों तरफ बाउंड्रीवॉल खड़ा करने की बात होने लगी। बीएचयू के पूरे कैम्पस में बाउंड्रीवॉल है तब भी लड़कियाँ सुरक्षित नहीं हैं, तो फिर हर फैकल्टी के लिए बाउंड्रीवॉल खड़ा करने से क्या सुरक्षा दुरुस्त हो जाएगी? फिर तो यूनिवर्सिटी का कॉन्सेप्ट ही खत्म हो जाएगा। यह समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि महामना मदनमोहन मालवीय की मूल भावना से खिलवाड़ जरूर होगा।’

पूर्व सांसद और कांग्रेस नेता राजेश मिश्रा ने कहा कि ‘यह बीएचयू के इतिहास में सबसे ज़्यादा शर्मसार करने वाली घटना है। बीएचयू के विद्यार्थी, जो पूरे विश्व में कहीं न कहीं हैं, वह भी आक्रोशित हुए ही होंगे। चूँकि मैं भी बीएचयू का छात्र रहा हूँ। इस मामले को संज्ञान में आने के तुरंत बाद पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए मुहिम छेड़ दी है। बीते नौ नवंबर को भी पुलिस आयुक्त से मुलाकात कर पाँच सूत्री ज्ञापन भी सौंपा गया है। इस मामले में बीएचयू के चीफ प्रॉक्टोरियल बोर्ड की नाकामियाँ भी सामने आ गई हैं। इस बोर्ड में बीएचयू परिसर की सुरक्षा के नाम पर 11 करोड़ रुपये सालाना खर्च किए जाते हैं बावजूद इसके इन कर्मचारियों को पुलिस प्रशासन की सहायता लेनी पड़ रही है। वहीं, पुलिस भी इस मामले बीएचयू प्रशासन के साथ मिलकर लीपापोती करने पर तुला हुआ है। बीते दिनों गिरफ्तार किए गए दो संदिग्धों को हिरासत में लेकर मामले को ठंडा करने का प्रयास भी किया जा रहा है। प्रॉक्टोरियल बोर्ड कर्मियों के रहते हुए पुलिस प्रशासन बीएचयू की सुरक्षा में तैनात है। आई कार्ड जाँचने के नाम पर छात्र-छात्राओं को अब परेशान किया जा रहा है। जो सही आरोपी हैं उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। न्याय माँगने वाले बच्चों के खिलाफ ही मुकदमे दर्ज कर दिए जा रहे हैं। यह काफी शर्मनाक और निंदनीय है।’

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि ‘घटना में बीजेपी की स्टूडेंट विंग अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हुए लोग शामिल थे।’ उन्होंने जोर देकर कहा कि ‘एबीपीवी कार्यकर्ताओं ने ही घटना को अंजाम दिया है।’ अजय राय ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि ‘सरकार ने विश्वविद्यालयों में संघ से जुड़े हुए लोगों को बिठा दिया गया है। विश्वविद्यालयों का संघीकरण किए जाने की वजह से यह अमानवीय घटना सामने आई है।’ उन्होंने एबीपीवी कार्यकर्ताओं को शह देने वाले संघ से जुड़े हुए लोगों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की।

पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष और कांग्रेस नेता अनिल श्रीवास्तव ने कहा कि ‘बीएचयू में इधर कुछ वर्षों से अशांति, अराजकता और हिंसा का बोलबाला हो गया है। यह स्थिति छात्र-छात्राओं के भविष्य के लिए ठीक नहीं है। बीएचयू का अपना एक सम्मान है जिसे अब ठेस पहुँचाने की साजिश की जा रही है। ऐसी साजिशों पर बीएचयू प्रशासन की चुप्पी निराशाजनक है। अपनी इसी नाकामी को छिपाने के लिए प्रॉक्टोरियल बोर्ड ने परिसर में पुलिस चौकी भी बनवा दी।’ श्रीवास्तव ने आगे कहा कि ‘बनारस के सांसद रहते हुए नरेंद्र मोदी ने इस पर अभी तक कोई टिप्पणी नहीं की। शासन-प्रशासन भी इस हैवानियत को दबाने की कोशिश में लगा है। महिलाओं के लिए नारे लगाने वाली सरकार के लिए यह मामला कलंक के समान है। देश के प्रधानमंत्री और यूपी के मुख्यमंत्री को चाहिए कि इस मामले को तत्काल संज्ञान में लेकर आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी करवाएँ। इन नेताओं को शर्म करना चाहिए कि दूसरे जिले की लड़की बीएचयू जैसे संस्थान में पढ़ने के लिए आई और उसके साथ हुई हैवानियत पर लोग चुप्पी साधे हुए हैं।’

समाजवादी जनपरिषद के सचिव अफलातून ने कहा कि ‘बीएचयू कैम्पस में गन प्वाइंट पर लड़की से गैंगरेप के मामले ने यूपी सरकार के लॉ एंड ऑर्डर की पोल खोलकर रख दी है। इस मामले में दो संदिग्धों की गिरफ्तारी फर्जी है। दूसरी तरफ, इस मामले के बाद सबसे दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि छात्र गुट आपसे में भिड़ गए हैं। इस मामले में चीफ प्रॉक्टर की भूमिका भी संदेहास्पद है। ऐसे में प्रॉक्टोरियल बोर्ड को पहले बर्खास्त किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि बीएचयू में मदनमोहन मालवीय के समय में एक बार किसी मामले को लेकर आस्ट्रेलियन आर्मी मार्च करने घुस आई थी। इससे नाराज होकर डॉ. राधाकृष्णन और मालवीय ने अंग्रेज कलेक्टर को टोका कि हमारे इज़ाज़त के बिना आप लोग कैसे अंदर घुस आए? अब समय यह आ गया है कि कैम्पस में जगह-जगह पुलिसकर्मी बैठे हुए हैं।’ अफलातून ने कहा कि ‘लड़की से गैंगरेप मामले में होना यह चाहिए कि प्रॉक्टोरियल बोर्ड को तुरंत भंग कर देना चाहिए। या किसी महिला कर्मचारी के माध्यम से पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए तत्परता दिखानी चाहिए।

ये वही जगह है, जहाँ हुआ था गैंगरेप

समाजवादी छात्र सभा के महानगर अध्यक्ष आयुष यादव ने इस मामले पर अपना रोष जताया। उन्होंने कहा कि ‘प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में छात्रा के साथ ऐसी बदलसलूकी काफी निराशाजनक है। ऐसे में उसे न्याय दिलाने के लिए जिसे के सभी छात्रों को एकजुट होना पड़ेगा। जिला प्रशासन के लचर व्यवस्था के कारण आरोपियों की आज तक पहचान तक नहीं हो पाई, गिरफ्तारी तो दूर की बात है। कलेक्ट्रेट बनने के बाद भी बनारस में पुलिसिंग की ऐसी व्यवस्था काफी निराशाजनक है।’

सीपीआईएम प्रदेश सचिव और बीएचयू के पुरातन छात्र डॉ. हीरालाल यादव ने कहा ‘हम लोगों के समय भी में भी प्रॉक्टोरियल बोर्ड था लेकिन उनका ऐसा घिनौना स्वरूप कभी नहीं देखा गया। कैम्पस में छात्रा के साथ गैंगरेप मामले में वीसी और प्रॉक्टोरियल चीफ की जवाबदेही होनी चाहिए। बीएचयू प्रशासन को छात्रों को आपस में लड़वाने की बजाए पीड़िता का न्याय दिलाने के लिए कार्रवाई करनी चाहिए। यह मामला पुलिस प्रशासन के लिए कलंक है। चूंकि, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी दस-पंद्रह दिन के अंतराल पर बनारस का दौरा करने चले आते हैं, वह भी इस मामले में खामोश हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में ऐसी घटना और उस पर कोई ठोस कार्रवाई न होना भी कई सवाल खड़े करता है। जबकि महिलाओं और बेटियों के लिए भाजपा आए दिन नए-नए नारे बना रही है, अभियान चला रही है, ऐसे में भाजपा के शीर्षस्थ नेताओं की इस जघन्य मामले में जवाबदेही तो होनी चाहिए। लेकिन आज तक भाजपा का कोई नेता सामने नहीं आया। उल्टे धरनारत छात्रों पर ही मुकदमें की कार्रवाई कर दी गई। यह सरकार का दमनात्मक चेहरा है।’

बीएचयू में बीटेक की छात्रा से गैंगरेप मामले में वरिष्ठ पत्रकार विजय सिंह ने कहा कि ‘यह घटना जहाँ हुई वह ‘अवांछनीय’ जगह है। इसका मतलब वहाँ सुनसान ज़्यादा रहती है। बीएचयू को अपनी सुरक्षा के साथ-साथ सर्विलांस-विजिलेंस की भूमिका भी निभानी चाहिए। यानी कि  पहरा कम और निगरानी ज़्यादा होनी चाहिए। छात्रों को नशे में रोकथाम के अलावा उनकी बौद्धिक क्षमता का प्रवाह बढ़ाना चाहिए।

फिलहाल मामले में पुलिस की ओर से बताया जा रहा है कि ‘आरोपियों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई में किसी प्रकार की कोई लापरवाही नहीं बरती जा रही है।’ वहीं अब पीड़िता के बयानों के आधार पर पुलिस ने मुकदमे में धाराओं को बढ़ाने का भी काम कर दिया है। पुलिस का कहना है कि ‘छात्रा से छेड़छाड़ करने वाले तीनों आरोपियों की तलाश की जा रही है। वहीं, तीनों को गिरफ्तार किए जाने के बाद उन पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी।’

वाराणसी के पुलिस आयुक्त अशोक मुथा जैन ने गाँव के लोग को बताया कि ‘इस मामले पुलिस में पाँच टीमों को तीनों आरोपियों को चिन्हित करने और उनकी धरपकड़ के लिए लगाया गया था। जिसमें असफल रहने के बाद अब दो और टीमें इस काम में लगाई गई हैं।’ सीपी ने कहा कि ‘पुलिस की टीमें लगातार इस मामले को जल्द से जल्द हल करने के लिए लगी हुई हैं। वहीं तीनों अपराधियों के पकड़े जाने के बाद उन पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी।’

बीएचयू के बीटेक छात्रा से छेड़खानी मामले में पुलिस ने सम्बंधित कुछ ही धाराएँ लगाई थीं। गैंगरेप की धाराएँ तब बढायीं गईं जब पीड़िता ने मजिस्ट्रेटी जाँच में गैंगरेप का बयान दर्ज कराया। दूसरी तरफ, बीएचयू के प्रॉक्टोरियल बोर्ड के खिलाफ छात्रों में नाराज़गी बरकरार है। फिलहाल, त्योहार के कारण अभी माहौल शांत है। लेकिन सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि फिलहाल चल रही लीपापोती की बजाय पीड़िता के साथ न्याय कब होगा?

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