अयोध्या में नौ लाख दीये जलने से प्रजापति समाज को क्या मिलेगा?

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आने वाले कुछ महीनों में विधान सभा चुनाव होने को हैं, जिसको लेकर राजनीतिक पार्टियां बड़ी-बड़ी जनसभाएं कर जनता को लुभाने के प्रयास में लगी हुई हैं। लेकिन सबसे ज्यादा जलवा उत्तर प्रदेश सरकार बिखेरने की कोशिश कर रही है। कथित तौर पर हर सभा में मुख्यमंत्री और उनकी कैबिनेट के मंत्री हजारों करोड़ की योजना लागू करने का दावा करते हैं लेकिन वास्तव में कितनी हकीकत की जमीन पर उतर चुकी हैं और कितनी ज़बानी जमाखर्च हैं इसका फालोअप करना एक बड़ा काम है। मज़े की बात है कि इस योजना-वीरता का हिसाब कोई भी नहीं मांग रहा है। चुनावी सरगर्मियाँ धीरे-धीरे ज़ोर पकड़ रही हैं और बयानवीरता का आलम यह है कि पक्ष-विपक्ष दोनो ही एक दूसरे पर दोषारोपण करके लोकप्रियता में बढ़त हासिल करना चाहते हैं।

विगत दिनों इसका एक उदाहरण लखनऊ में देखने को मिला। लखनऊ में भाजपा के सामाजिक प्रतिनिधि सम्मेलन में सीएम योगी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘सपा के शासन में तालाबों का पट्टा कर कुम्हार, प्रजापति समाज को रोजगार से वंचित कर उनका शोषण किया जाता था। वहीं भाजपा सरकार ने बीते साढ़े चार साल में पॉलिथीन को प्रतिबंधित कर मिट्टी के बर्तनों के उपयोग को बढ़ावा देकर समाज के लोगों को स्वरोजगार देने का रिकॉर्ड काम किया है। शहरी आवास योजना में आंवटित किए गए 9 लाख आवासों के लाभार्थियों की ओर से इस वर्ष सरकार अयोध्या में 9 लाख दिए जलायेगी।’

कहीं पे निगाहें कहीं पे निशाना 

योगी के भाषण को अमर उजाला ने जिस शीर्षक से छापा वह बहुत दिलचस्प है – दंगाइयों की सात पुश्तें करेंगी भरपाई। पिछले अनेक वर्षों में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की भाषा यही रही है। इस बात से उनका आशय था कि जिनके ऊपर सरकार ने दंगा-फसाद को लेकर फ़र्जी मुकदमें लादे हैं अथवा जो सीएए-एनआरसी अथवा कृषि बिल का विरोध करने को लेकर चिन्हित किए गए हैं उन्हें लगातार परेशान किया जाएगा और उनसे वसूली भी की जाती रहेगी।

उत्तर प्रदेश में विगत साढ़े चार साल से योगी के बयान इसी तरह धमकी भरे होते रहे हैं। उन्होंने ठोंक दो नीति के तहत राज्य चलाया है जिसके स्वाभाविक परिणाम के रूप में उत्तर प्रदेश पुलिस की बेलगाम कार्यशैली और निर्दोष लोगों के इनकाउंटर हैं। सामाजिक सम्मेलन में भी इस तरह का बयान यह जाहिर करता है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लोगों को यह संदेश देना चाहते हैं कि यदि कोई समाज उनकी अधीनता नहीं स्वीकार करेगा तो उसको बुरे परिणाम भुगतने होंगे।

गौरतलब है कि प्रजापति समाज ने अनेक परिवारों पर योगी सरकार में अत्याचार हुआ है। मैनपुरी जैसा जघन्य कांड योगीराज में कुम्हारों पर हुये अत्याचार का सबसे भयानक मामला है। एक ही परिवार के पांच लोगों को जला दिया गया था लेकिन लंबे समय तक अपराधी खुलेआम घूमते रहे क्योंकि कथित रूप से उन्हें राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था।

गौरतलब है कि प्रजापति समाज ने अनेक परिवारों पर योगी सरकार में अत्याचार हुआ है। मैनपुरी जैसा जघन्य कांड योगीराज में कुम्हारों पर हुये अत्याचार का सबसे भयानक मामला है। एक ही परिवार के सात लोगों को जला डाला गया था लेकिन लंबे समय तक अपराधी खुलेआम घूमते रहे क्योंकि कथित रूप से उन्हें राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था।

लोगों ने नौ लाख दीये जलाने की योजना पर उठाए सवाल 

योगी के इस कथन पर तीखी प्रतिक्रिया हुई। प्रजापति समाज के अनेक नेताओं ने जहां इसे केवल धुप्पल माना वहीं योगी के इस बयान की दूसरे राजनीतिक दलों ने भी आलोचना की। लोगों ने कहा कि अयोध्या में नौ लाख दीये जलाने से प्रजापति समाज को क्या लाभ होगा?

सपा नेता संजय यादव

समाजवादी पार्टी के नेता संजय यादव कहते हैं कि ‘प्रजापति समाज को सर्वप्रथम अगर किसी ने अधिकार देने का कार्य किया तो वो समाजवादी पार्टी ने उनको पट्टा देकर के किया है। आप  दीया तो खरीद सकते हैं लेकिन प्रजापति क्या केवल दीया ही बनाता है वो पुरवा, गगरी, मिट्टी का खिलौना भी बनाता है। और ये अधिकार उन्हें समाजवादी पार्टी ने दिया। केवल दीपावली के दिन दीया खरीद लेने भर से किसी का पेट भर जायेगा? असल बात तो ये है कि 365 दिन हमें अपने लोगों का पेट भरना है। और 365 दिन में हमें दीया, गगरी, कुल्हण मिट्टी के खिलौनें भी बेचने हैं। तो आखिर योगी सरकार सारी चीजों को क्यों नहीं खरीदती।’ संजय कहते हैं कि ‘केवल दीया को खरीदने की बात क्यों करती है? उससे क्या कुम्हार समाज का भला हो जाएगा? उनको उनके अधिकार देने से इस समाज का भला होगा। आज किसी जाति की पहचान कोई एक पेशा नहीं है इसलिए योगी और मोदी जी को इमोशनली बरगलाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। समाजवादी पार्टी ने जो हमारे हक की लड़ाई लड़ी है वो योगी जी के बस की बात नहीं है। ये तो केवल जाति धर्म के नाम पर बांटने वाले लोग हैं। ये क्या किसी को रोजगार देंगे और साढ़े चार साल में कितना रोजगार दिया है?’

15 सितंबर को हुआ प्रजापति शौर्य सम्मेलन
छेदी लाल निराला

पिछले महीने जगतपुर डिग्री कॉलेज के मैदान में प्रजापति शौर्य दिवस मनाने वाले पीएस-4 संगठन के संयोजक छेदी लाल निराला ने कहा कि ‘ये सरकार केवल दिपावली पर 9 लाख दीये की क्यों बात करती है। कुम्हारों की शिक्षा, उनके व्यवसाय और रोजगार की बात क्यों नहीं करती है। राम मंदिर के आस-पास 9 लाख दीया जलाने से कुम्हारों को क्या लाभ होगा। उनको तो कुम्हारों के हित की बात करनी चाहिए, उनके अधिकार की बात करनी चाहिए। आये दिन प्रदेश में कुम्हारों की हत्या और उत्पीड़न के मामले बढ़ रहे हैं उस पर योगी-मोदी सरकार क्यों नहीं बात कर रही है। प्रदेश सरकार क्यों इसको नजरअंदाज कर रही है? मुझे तो नहीं लगता की 9 लाख दीये जल जाने से कुम्हार का का कोई भला होने वाला है। और ये कैसे कह सकते हैं कि सपा सरकार ने प्रजापति समाज का शोषण किया है। कम से कम सपा ने पट्टा आवंटित कर कुम्हारों का कुछ तो भला किया है। लेकिन योगी सरकार की तरफ से क्या किया गया? वाराणसी में प्रधानमंत्री जी की तरफ से इलेक्ट्रॉनिक चॉक दिया गया। उसमें लगभग 70% चॉक बंद हैं। मेरा मानना है कि ये बस दिखावे की बात है।’

कुछ दिनों पहले जब भाजपा की ओर से लखनऊ में प्रजापति सम्मेलन करने की घोषणा हुई तो पीएस-4 ने इस बात का खंडन किया कि इसमें प्रजापति समाज की कोई हिस्सेदारी नहीं होगी। इसमें इस बात की ओर संकेत किया गया कि प्रदेश में कुम्हारों के बढ़ते उत्पीड़न को रोकने की बजाय सरकार समाज को बरगलाने में लगी है। इस मुद्दे पर निराला स्पष्ट कहते हैं कि ‘नौ लाख दिये की बजाय सरकार को नौ लाख नौकरियाँ देनी चाहिए।’

चेखुर प्रजापति

वहीं सीएम योगी द्वारा दिये गये बयान पर ऊर्जांचल प्रजापति सहासंघ के संरक्षक चेखुर प्रजापति का कहना है कि, ‘योगी जी कुम्हारों से केवल मिट्टी का काम करवाना चाहते हैं। दीया बनवाकर के कौन सा भला करना चाहते हैं यो तो वो ही जाने। कुम्हारों के शिक्षा, नौकरी और स्वास्थ्य की चिंता उनको नहीं है। योगी सरकार तो चाहती है कि कुम्हार मिट्टी का काम करें मिट्टी में सन जाये मिट्टी में मिल जाये। समाजवादी पार्टी ने जो पीछड़े वर्ग को सम्मान दिया है, कौन जानता था प्रजापति, पाल, गड़ेरिया, राजभर को। पहली बार मुलायम सिंह जब सत्ता में आये कुम्हारों को प्रजापति का नाम दिया। कुम्हारों को जमीन का पट्टा दिया और राजनीतिक सोच दी। तो कैसे कहते हैं कि प्रजापति का शोषण हुआ है। शोषण तो अब हो रहा है जितने देश के उद्योग हैं बेच दे रहें हैं तो नौकरी खोजने कहां जाएं। मोदी जी की अब नई शिक्षा नीति आ गई है जिसके तहत कक्षा 8 में इंटरव्यू लिया जाएगा और कमेटी में कौन रहेगा- वही पंडित ठाकुर रहेंगे। हमारे जितने लोग रहेंगे। कुम्हार है तो कुम्हार का काम करो, बढ़ई है तो बढ़ई का काम करो। अभी नहीं समझ आ रहा है लोगों को। नई शिक्षा में भी लोग हमारे लोगों को पीछे धकेलने का काम कर रहें हैं।

उत्तर प्रदेश में विगत साढ़े चार साल से योगी के बयान इसी तरह धमकी भरे होते रहे हैं। उन्होंने ठोंक दो नीति के तहत राज्य चलाया है जिसके स्वाभाविक परिणाम के रूप में उत्तर प्रदेश पुलिस की बेलगाम कार्यशैली और निर्दोष लोगों के इनकाउंटर हैं। सामाजिक सम्मेलन में भी इस तरह का बयान यह जाहिर करता है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लोगों को यह संदेश देना चाहते हैं कि यदि कोई समाज उनकी अधीनता नहीं स्वीकार करेगा तो उसको बुरे परिणाम भुगतने होंगे।

भारतीय प्रजापति महासभा के प्रदेश अध्यक्ष हरवीर सिंह कहते हैं कि, ‘9 लाख दीये जलाने की जगह अगर वो ये कह दिये होते कि हर प्रजापति को और उनके बच्चों को रोजगार और शिक्षा देंगे तब तो प्रजापति समाज का कुछ भला होता। दूसरी बात योगी जी के मुख्यमंत्री काल में प्रजापति समाज के ऊपर अन्याय किसी से छिपा नहीं है मैंनपुरी में पांच  प्रजापतियों को जिंदा जलाया गया। उत्तर प्रदेश सरकार ने एक-एक लाख रुपये का पांच लोगों पर मुवाअजा दिया। अभी पूर्वांचल में मनीष प्रजापति की हत्या हुई। तो प्रजापतियों पर अत्याचार भी सरकार कर रही है और प्रजापति को मिट्टी में लाने का प्रयास सरकार कर रही है। अब प्रजपतियों का योगदान सरकार में है कि नहीं है ये तो योगी जी जानते हैं, मैं नहीं जानता। मगर सही बात ये है कि प्रजापतियों का भला अगर करना चाहतें हैं तो उनके विकास के लिए फैक्ट्रियों का ऋण दें उनके बच्चों को पढ़ाएं सुविधाएं दें। 9 लाख दीए जलाने से लाभ क्या है? क्या 9 लाख दीये से प्रजापतियों के घर और उनके भविष्य सुधर जाएंगे। सरकार किसी की भी रही हो सबसे ज्यादा प्रजापति समाज ही पीछड़ता जा रहा है। सरकार किसी की भी बने सबसे ज्यादा उत्पीड़न प्रजापतियों पर ही होता है। और सपा ने प्रजापति के विकाश को लिए बहुत कुछ किया है। योगी के शासन के साढ़े चार साल खत्म हो गए अब जाके उन्होंने धर्मवीर प्रजापति को राज्यमंत्री बनाया है। बृजेश प्रजापति जीते हुए एमएलए उनको कोई पद नहीं मिला। आप उनको राज्य मंत्री बना देते, मैं पार्टी को लेकर के नहीं, मैं समाज के लिए बात कह रहा हूं। तो शायद प्रजापतियों को लगता कि बीजेपी ने कुछ हमारे लिये किया है।’

पत्रकार शिवदास प्रजापति

लगातार सामाजिक मुद्दों पर कलम चलाने वाले पत्रकार और वनांचल एक्सप्रेस के संपादक शिवदास प्रजापति समाज पर होने वाले सामंती और प्रशासनिक जुल्म के खिलाफ आंदोलन और लिखा-पढ़ी करते रहे हैं। वे भाजपा सरकार के इस उत्सवधर्मिता से इत्तफाक नहीं रखते। शिवदास का कहना है कि ‘कुम्हार समुदाय के दीये खरीद जाने से कुम्हार समुदाय का विकास होने वाला नहीं है। प्रजापति समाज के शोषण की बात करें तो सिर्फ दो सालों में करीब 12 लोगों की हत्या की गई है। उसके लिए इन्होंने संवेदना तक नहीं जाहिर नहीं किया और मुआवजे भी नहीं दिये। मैनपुरी में एक घर के पांच लोगों को जिंदा जलाया गया। कोई मुआवजा नहीं मिला। डेढ़ महीने आंदोलन के बाद सरकार ने पांच लाख रुपये का मुआवजा दिया। कुम्हारों की स्थिति हकीकत में अनुसूचित जनजातियों से भी गई-गुजरी है। पहले भी अयोध्या में दीया खरीदा गया था उससे किसका भला हुआ।  और अब सब लोग अपना पुश्तैनी काम छोड़ना चाह रहे हैं। क्योंकि उससे ना घर का खर्च ना ही बच्चों की पढ़ाई-लिखाई हो पा रही है। और बहुत ज्यादे खरीदारी भी नहीं है। पट्टा का प्रावधान पहले से ही था। जब से ग्राम पंचायत योजना शुरू हुई थी तब से ग्राम सभा की जमीन कुम्हारों के लिए मिट्टी निकालने के लिए भी रिजर्व होती थी। सपा सरकार के पहले से ही यह योजना थी। और उन पट्टों पर अवैध कब्जा पहले भी था आज भी है।’

मोहिंदर प्रजापति

भारतीय समता समाज पार्टी के अध्यक्ष मोहिंदर प्रजापति का कहना है कि, ‘अगर वो प्रजापति समाज से मिट्टी के दीये खरीदेंगे तो क्या नया काम करेंगे? क्या दीपक अन्य जाति के लोग भी बनाते हैं नहीं ना? तो हमसे ही खरीदेंगे। और हमारे समाज के लिए किया ही क्या किया है इन्होंने, आज हर चौक पर मोची की दुकान मिल जायेगी लेकिन हर चौक मिट्टी के बर्तन की दुकान नहीं मिलेगी। वैसे भी आज के दौर में कौन मिट्टी के बर्तनों का उपयोग करना चाहता है। हमारी आबादी लगभग6-7% है। संसद भवन में हमारी कितनी आबादी है। तो कहीं ना कहीं हर पार्टियां हमको नजर अंदाज करती आयी हैं। राजभर की हमसे कम आबादी है, लेकिन उनके मंत्री स्टेट सेन्ट्रल में  हैं। अभी एक महीना पहले एक प्रजापति को मंत्री बनाया गया है। इसके लिए पूरे व्यवस्था को मैं तो जिम्मेदार मानता हूं कि क्या कारण हैं कि हमारे समाज के लोग प्रतिनिधित्व करने के लिए अभी तक सामने नहीं आ पाएं हैं।

हरिश्चंद्र प्रजापति

समाजवादी पार्टी, पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ट के महासचिव हरिश्चन्द्र प्रजापति का कहते हैं कि, ‘योगी जी समाज और देश को गुमराह कर रहे हैं। क्या 9 लाख दीपक जलाने से इस समाज का कल्याण और उद्धार हो जाएगा। जो मूल भूत जरुरतें अन्य समाज की हैं वो प्रजापति समाज की भी हैं रोटी कपड़ा और मकान, दवा सुरक्षा और सम्मान ये हर आदमी की जरुरत है जिनसे से वो एक भी चीज नहीं दे पायें हैं। मैनपुरी में हमारे समाज के पांच लोगों को जिंदा जला दिया गया क्या मिला उनको? वहीं बनारस में एक लड़की की हत्या हुई कह दिया प्रेम का मामला है। अभी गोरखपुर में हत्या हुई। कोई मुआवजा नहीं वहीं गाजियाबाद में एक पत्रकार मरें चूंकि वो ऊंची जाति के थे तो तुरंत 10 लाख रुपये एक नौकरी का एलान किया गया। कुल मिलाकर के ये जो बीजेपी की सरकार है ये पीछड़ा वर्ग विरोधी है ये प्रजापति विरोधी है हम एक सवाल करना चाहते हैं कि साढ़े चार साल हो गए अब आके धर्मवीर प्रजापति को राज्यमंत्री बनाने की इन्हें याद आयी। ये बस पिछड़े समाज, प्रजापति समाज को सबको बेवकूफ बनाके उनसे वोट लेना चाहते हैं। अगर वास्तव में प्रजापति समाज को उठाना चाहते तो बृजेश प्रजापति जी इन्हीं केे विधायक हैं उनकों क्यों नहीं बनाया। पूरी मेजोरिटी रहते हुए भी उन्होंने प्रजापति समाज की उपेक्षा की हिन्दूवाद के नाम पर केवल वोट लिया। इस समाज के लिए कुछ नहीं जो थोड़ा बहुत किया वो ऊंट के मुह में जीरा के समान है। मुख्यमंत्री चाहते तो इस समाज के हित के लिे बहुत कुछ कर सकते थे। और तो और हमारे बहन बेटियों की सुरक्षा खतरे में है ये राष्ट्रीय महिला आयोग की एक रिपोर्ट कहती है कि दुगने अपराध इस वर्ष में हुये हैं जिसमें आधे अपराध महिलाओं पर उत्तर प्रदेश में बढ़े हैं। आप इसी आंकलन कर लीजिए कि समाज को मिला क्या है? 2005 में माननीय मुलायम सिंह जी ने प्रजापति समाज को एससी में शामिल किया था। उस समय मायावती, कांग्रेस और बीजेपी सभी इसके खिलाफ थे।हमारा प्रजापति समाज सबसे सीधा सच्चा, भोला जिसमें अपराधी तरह के लोग नहीं हैं ये सरकार चाहती तो उनको विशेष सुविधा देकर उनके उत्थान की बात कर सकती थी। लेकिन कुछ भी नहीं किया।

उत्तर प्रदेश में पिछले दो सालों के दौरान कुम्हारों की हुई प्रमुख हत्याओं का विवरणः
(1) 13 अक्टूबर 2021         कौशाम्बी में किसान देवराज प्रजापति की हत्या, ग्राम- बिशारा, थाना-कोखराज, जिला-कौशाम्बी
(2) 30 सितंबर 2021          गोरखपुर में वेटर मनीष प्रजापति की हत्या, स्थान- मॉडल शॉप, थाना- रामगढ़ ताल, जिला गोरखपुर, पिता का नाम- श्रवण प्रजापति, ग्राम- पनगढ़ी, जिला- रिवा, राज्य-मध्य प्रदेश
(3) 10 सितंबर 2021          गोरखपुर में विजय प्रजापति का फर्जी एनकाउंटर, ग्राम- जगदीशपुर भलुआन, थाना- गगहा, जिला गोरखपुर
(4) 13 जुलाई 2021           वाराणसी में प्लंबर कन्हैया लाल प्रजापति की दिन-दहाड़े हत्या, ग्राम- केराकतपुर, थाना लोहता, जिला-वाराणसी
(5) 6 जून 2021                 प्रयागराज में सोनी प्रजापति की हत्या, शांतिनगर, राजरूपपुर, प्रयागराज/इलाहाबाद
(6) 27 मई 2021               हमीरपुर में कर्ज से डूबे इंडियन बैंक का ग्राहक सेवा केंद्र संचालक ओम प्रकाश प्रजापति की हत्या, ग्राम कुरारा, जिला-हमीरपुर
(7) 13 फरवरी, 2021         अमेठी में शुभम प्रजापति की हत्या, ग्राम- परसावा छोटा बेनीपुर, कोतवाली-अमेठी, जिला अमेठी  पूर्व कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति का भतीजा
(8) 31 जनवरी 2021          प्रतापगढ़ में छात्र लकी प्रजापति की हत्या, ग्राम- सराय सुजान सुजहा, थाना- मान्धाता, जिला- प्रतापगढ़
(9) 25 सितंबर 2020          महराजगंज में ग्राम प्रधान के पिता श्रीनंद प्रजापति की हत्या, ग्राम- विसोखोर, थाना-  के कोठीभार, जिला-महाराजगंज
(10) 13 जुलाई 2020         जौनपुर में चंदन प्रजापति की हत्या, ग्राम कुसवा, तहसील- केराकत, थाना- जलालपुर, जिला- जौनपुर
(11) 17-18 जून 2020        मैनपुरी में कुम्हार परिवार के पांच लोगों को जिंदा जलाया गया। राम बहादुर प्रजापति, सरला देवी, संध्या प्रजापति उर्फ रोली, शिखा प्रजापति, ऋषि प्रजापति, माधोनगर मोहल्ला, खरपरी गांव, मैनपुरी
(12) 14 जनवरी 2020        जौनपुर में लेखपाल अनिल प्रजापति की हत्या, घटनाः ग्राम- बगेरवां (बम्बावन), थाना-केराकत, जिला जौनपुर, निवासी ग्राम-मिर्जापुर देवगांव, थाना-देवगांव कोतवाली, लालगंज, जिला आजमगढ़
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