कौन होगा छुपा रुस्तम और कौन होगा किंगमेकर?

देवेंद्र यादव

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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर देश के राजनीतिक पंडित और राजनीतिक विशेषज्ञ मान रहे हैं कि प्रदेश में भाजपा या समाजवादी पार्टी सरकार बना सकती है? राजनीतिक पंडित मान रहे हैं कि उत्तर प्रदेश चुनाव में भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच टक्कर है ?

राजनीतिक पंडित और विशेषज्ञों की बात मानें तो प्रदेश में भाजपा या समाजवादी पार्टी दोनों में से एक पार्टी सरकार बनाने जा रही है, मगर सवाल यह है कि क्या भाजपा और समाजवादी पार्टी स्पष्ट बहुमत के साथ सरकार बनायेंगी या फिर उन्हें किसी अन्य पार्टी के समर्थन की जरूरत पड़ेगी? कौन होगा छुपा रुस्तम और कौन बनेगा किंगमेकर? कांग्रेस या बहुजन समाज पार्टी या फिर छोटे-छोटे दल होंगे किंग मेकर ?

विधानसभा चुनाव की घोषणा होने से पहले की बात करें तो, भाजपा कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की अपनी-अपनी रैलियों, रोड शो और जनसभाओं से भी लग रहा था कि भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच में टक्कर है, मगर कांग्रेस की जनसभा, रोड शो शक्ति, विधान शक्ति. संवाद और महिला मैराथन दौड़ से लग रहा था कि उत्तर प्रदेश चुनाव में कांग्रेस किंगमेकर की भूमिका में होगी ? उत्तर प्रदेश चुनाव में बहुजन समाज पार्टी की खामोशी का राज क्या है, यह अभी तक पता नहीं चला है। क्या बहुजन समाज पार्टी छुपा रुस्तम निकलेगी और क्या बहुजन समाज पार्टी किंगमेकर की भूमिका में होगी?

इन तमाम बड़े राजनीतिक दलों के अलावा भी उत्तर प्रदेश की राजनीति में अनेक छुपे रुस्तम दल हैं, जो किंगमेकर की भूमिका में नजर आ सकते हैं? विधानसभा चुनाव के ऐलान से पहले यह छोटे-छोटे राजनीतिक दल बड़े-बड़े राजनीतिक दलों की रैलियों जनसभाओं और रोड-शो के कारण नजर नहीं आ रहे थे, मगर चुनाव की घोषणा के बाद नए नियम बनने के बाद अब यह छोटे दल भी जनता के सामने खड़े नजर आएँगे?

उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव में कौन जीत रहा है और कौन हार रहा है, इसके आकलन का समय अब शुरू होगा, जब राजनीतिक पार्टियां अपनी-अपनी पार्टियों के प्रत्याशियों की घोषणा करेंगी तब रूठने मनाने का सिलसिला शुरू होगा और सिलसिला जिधर दम उधर हम का भी शुरू होगा?

कोरोना महामारी की तीसरी लहर की दस्तक के साथ ही चुनाव आयोग ने नए नियमों के साथ चुनाव कराने का एलान किया है। राजनीतिक दल नए नियमों के साथ चुनावी मैदान में उतरेंगे जो राजनीतिक दलों के लिए एक बड़ी चुनौती है। खासकर विपक्षी दलों के सामने और विपक्ष में भी उन दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती है जिन दलों के पास अपने सीमित संसाधन हैं? राजनीतिक पार्टियां नए नियमों के साथ उत्तर प्रदेश में नए सिरे से चुनावी बिसात बिछाते हुए नजर आएंगे! जहां तक चुनावों में राजनीतिक दलों की लोक-लुभावन घोषणाओं का सवाल है, भाजपा, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने यह कार्य रैलियों, रोड शो और जनसभाओं के माध्यम से चुनाव की घोषणा होने से पहले ही कर लिया है! तीनों ही बड़ी पार्टियों ने उत्तर प्रदेश में चुनाव की घोषणा होने से पहले ही ताबड़तोड़ रैलियां कर ली है! चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उत्तर प्रदेश में अनेक विकास कार्यों की आधारशिला रखी और विकास कार्यों का उद्घाटन किया। रैलियां और रोड शो भी किए! अब राजनीतिक दलों के नेताओं का काम मतदाताओं में कानाफूसी करने का है, नए नियमों के अनुसार? अब मतदाता के मूड पर है कि वह किस पार्टी को मतदान करें, क्योंकि नए नियम के अनुसार रोड-शो रैलियों और जनसभाओं का शोर नहीं सुनाई देगा, इसकी जगह कानाफूसी का दौर दिखाई देगा? जनता को राजनीतिक दल मुद्दों को भी मतदाता के घर पर जाकर मतदाता के कान में समझाते हुए नजर आएंगे?

बात वही है, उत्तर प्रदेश चुनाव में छुपा रुस्तम कौन होगा और कौन बनेगा किंगमेकर ?

देवेंद्र यादव कोटा स्थित वरिष्ठ पत्रकार हैं।

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