कोरोना की चौथी लहर का इंतजार क्यों?

देवेंद्र यादव

1 96

पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के दरमियान 137 दिन तक पेट्रोल, डीजल और गैस के दाम नहीं बढ़े थे, मगर चुनाव खत्म होने के बाद पेट्रोल-डीजल और गैस के दाम बढ़ने शुरू हो गए। विधानसभा चुनाव से पहले पेट्रोल और डीजल के दामों में प्रतिदिन 35 पैसे लीटर का इजाफा होता था, लेकिन चुनाव की घोषणा होने से पहले केंद्र सरकार ने कुछ टैक्स भी कम किया और प्रतिदिन की बढ़ोतरी पर भी अंकुश लगाया। मगर चुनाव खत्म होने और चुनाव परिणाम आने के 137 दिन बाद पेट्रोल पर 80 पैसा प्रति लीटर का भाव बढ़ा जो लगातार 2 दिन तक बढ़ता रहा।

राजनीतिक विश्लेषक चुनावों में अक्सर चुनावी ट्रेंड की बात करते हैं, मतदाताओं के रुझान पर जीत और हार का विश्लेषण होता है लेकिन, महंगाई और कोरोना महामारी के ट्रेंड की बात कोई नहीं करता। इसकी बात जनता करती है और बताती है कि महंगाई कब बढ़ेगी और कोरोना महामारी कब आएगी?

लोगों के मन में आशंका है कि क्या पेट्रोल और डीजल का दाम पहले 35 पैसा बढ़ता था क्या अब 80 पैसा प्रतिदिन बढ़ेगा जब पेट्रोल, डीजल और गैस के दाम स्थिर थे, तब जनता चर्चा करती थी कि इनके दाम चुनाव खत्म होने के बाद बढ़ेंगे? चुनाव खत्म होने के बाद जनता की भविष्यवाणी सच साबित हुई। चुनाव के बीच ही चाइना से कोरोना महामारी की चौथी लहर के समाचार आने लगे, मगर जनता को यकीन था कि देश के पाँच राज्यों में विधानसभा के चुनाव चल रहे हैं इसलिए हमारे देश में अभी चौथी लहर नहीं आएगी? मगर अब चुनाव खत्म हो गए हैं और चुनाव परिणाम भी आ गया है। उत्तर प्रदेश को छोड़कर बाकी चार राज्यों में नई सरकार का गठन भी हो गया है।

जनता की पेट्रोल, डीजल और गैस में चुनाव के बाद बढ़ोतरी होने की भविष्यवाणी भी सत्य साबित हो गई है। अब इंतजार है कोरोना की चौथी लहर का। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने चौथी लहर की चिंता करना भी शुरू कर दिया है और केंद्र सरकार को इसे रोकने के लिए सुझाव भी दिए हैं। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव की घोषणा होने से पहले देश में कोरोना की तीसरी लहर ओमीक्रोन ने अपनी दस्तक दी थी मगर जब चुनाव की घोषणा हुई तब ओमीक्रोन भी पेट्रोल, डीजल और गैस के दामों की तरह स्थिर नजर आया।

एक बार फिर से जनता को इंतजार है कि क्या गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चुनाव की घोषणा होने से पहले, पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव की तरह एक बार फिर से केंद्र सरकार पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों को स्टील रखेगी और क्या केंद्र सरकार के टैक्स में कमी करेगी? क्योंकि रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ने के बावजूद भाजपा तो चुनाव जीत रही है।

राजनीतिक विश्लेषक चुनावों में अक्सर चुनावी ट्रेंड की बात करते हैं, मतदाताओं के रुझान पर जीत और हार का विश्लेषण होता है लेकिन, महंगाई और कोरोना महामारी के ट्रेंड की बात कोई नहीं करता। इसकी बात जनता करती है और बताती है कि महंगाई कब बढ़ेगी और कोरोना महामारी कब आएगी? 2019 के बाद जितने भी राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए तब महंगाई और कोरोना महामारी का एक जैसा ट्रेंड देखा गया। चुनाव के दरमियान ना तो महंगाई बढ़ी और ना ही कोरोना महामारी बड़ी हुई दिखाई दी। चुनाव में दोनों स्थिर रहे।

अगोरा प्रकाशन की किताबें अब किन्डल पर भी उपलब्ध :

अब पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव खत्म हो गए हैं। पेट्रोल-डीजल और गैस के दाम भी बढ़ने लगे हैं। अब इंतजार है कोरोना महामारी की चौथी लहर का जो आएगी या नहीं? वैसे चौथी लहर की चर्चा और चिंता दोनों होने लगी है। जनता अपनी भविष्यवाणी के सत्य होने का इंतजार कर रही है तो वही राजनीतिक दलों के नेता पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद, इसी साल के अंत में और 2 राज्यों के विधानसभा चुनाव का इंतजार कर रहे हैं। इसी साल के अंत में गुजरात और हिमाचल प्रदेश मैं विधानसभा के चुनाव होने हैं।

यह भी पढ़ें :

क्या भाजपा को महिला शक्ति का एहसास हो गया है?

पांच राज्यों में से चार राज्य जीतने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने गृह राज्य गुजरात में एक भव्य रोड-शो कर गत दिनों चुनावी आगाज भी कर दिया है। एक बार फिर से जनता को इंतजार है कि क्या गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चुनाव की घोषणा होने से पहले, पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव की तरह एक बार फिर से केंद्र सरकार पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों को स्टील रखेगी और क्या केंद्र सरकार के टैक्स में कमी करेगी? क्योंकि रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ने के बावजूद  भाजपा तो चुनाव जीत रही है।

देवेंद्र यादव कोटा स्थित वरिष्ठ पत्रकार हैं।

Leave A Reply

Your email address will not be published.