Tuesday, February 17, 2026
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विचार

किशन पटनायक के चिंतन में अच्छी राजनीति का विकल्प बचा हुआ था

किशन पटनायक विकास के विनाशकारी मॉडलों का विरोध करने वाले आंदोलनों में सक्रिय रहे, कभी अपने स्वास्थ्य की परवाह नहीं की। एक सच्चे दार्शनिक की तरह निरंतर लिखते और सोचते रहे। वे एक लोकतांत्रिक समाजवादी थे, इसमें कोई शक नहीं, लेकिन उन्होंने अपने लेखों या भाषणों में कभी किसी नेता का हवाला देते नहीं देखा। सच्चे अर्थों में एक स्वतंत्र विचारक थे। ‘विकल्पीन नहीं है दुनिया’ से लेकर ‘भारत शूद्रों का होगा’ तक, समाजवाद, किसानों के मुद्दे, सांप्रदायिकता, धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र और लैंगिक संबंधों को कवर करने वाली उनकी रचनाएँ, विचारों की मौलिकता को दर्शाती हैं। पढ़िये, उनके साथ बिताए लेखक के अनुभव और संस्मरण।

भाजपा शासन के ग्यारह वर्ष : संविधान और धर्मनिरपेक्षता का लगातार दमन

पिछले 11 वर्षों से केंद्र सरकार और कई राज्य सरकारों पर नियंत्रण रखते हुए, ये ताकतें संविधान के तीन स्तंभों..धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र और संघवाद  को कमज़ोर करने और उसकी जगह समाज के एक अंधकारमय, मध्ययुगीन दृष्टिकोण पर आधारित एक फ़ासीवादी हिंदू राष्ट्र स्थापित करने के लिए जी-जान से जुटी हैं।

हिंदुत्ववादी राजनीति ने इतिहास के पाठ्यक्रम से गायब किया मुस्लिम शासन का पाठ

भारतीय शिक्षा प्रणाली पर हिंदू साम्प्रदायिक तत्वों के पहले भी आरएसएस के साम्प्रदायिक संस्करण के माध्यम से प्रतिभाओं, एकल संप्रदायों और शैक्षणिक संस्थानों को बढ़ावा दिया जा रहा था। एनसीईआरटी की इतिहास की किताब से कक्षा सात से मुगलकालीन शासकों का पाठ हटाकर कुम्भ मेला का पाठ शामिल किया गया।

पहलगाम त्रासदी : आतंकवाद के चलते क्या कभी कश्मीर में शान्ति संभव हो पाएगी

आतंकवाद का खात्मा कैसे हो सकता है? स्थानीय लोगों को राज्य के मामलों से दूर रखने का निरंकुश तरीका आतंकवाद से निपटने में सबसे बड़ी बाधा है। सुरक्षा में बार-बार विफल होना, पुलवामा और अब पहलगाम में सुरक्षा व्यवस्था का विफल होना गहरी चिंता का विषय है।

क्या नेहा सिंह राठौर पर एफआईआर से आतंकवाद की कमर टूट जाएगी

नेहा राठौर और लखनऊ विश्वविद्यालय की प्रोफेसर डॉ माद्री ककोटी उर्फ डॉ मेडुसा के ऊपर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज कर लिया गया। गोदी मीडिया और भाजपा के ट्रोल ने उनके खिलाफ ज़हर उगलना शुरू कर दिया है।न तो नेहा राठौर और न ही माद्री ककोटी ने इस मामले में कोई खेद व्यक्त किया बल्कि नेहा लगातार आलोचना जारी रखे हुये हैं। एक वीडियों में उन्होंने गोदी मीडिया को देश का गद्दार और अपराधी भी कहा।

भौकाल बनाना आज के लिए महत्वपूर्ण (डायरी 20 फरवरी, 2022) 

हिंदी में अनेक शब्द ऐसे हैं, जिनके कई अर्थ होते हैं। ऐसा क्यों होता है, यह एक बड़ा सवाल है। हालांकि कई बार ऐसा...

बोलो हुक्मरान– जमीन किसकी? (डायरी 19 फरवरी, 2022)

जमीन बहुत महत्वपूर्ण संसाधन है। यह बात वही समझ सकता है जिसके पास जमीन नहीं है। भारत में अभी भी बड़ी आबादी है जिसके...

चित्रा रामकृष्ण के अंधविश्वास पर हंगामा क्यों? (डायरी 18 फरवरी, 2022)

आडंबर, पाखंड और अंधविश्वास के अलावा कई और शब्द हैं, जिनका संबंध असल में वर्चस्ववाद से जुड़ा है। आप चाहें तो इसमें भूत-पिशाच से...

मत करिए कबीर-रैदास की तुलना मार्क्स से (डायरी 17 फरवरी, 2022)

सवर्ण लेखकों और दलित-बहुजन लेखकों में फर्क करना मुश्किल काम नहीं है। सवर्ण लेखकों की खासियत यह होती है कि उनके लेखन के केंद्र...

चारा ‘घोटाले’ के घोटाले का एक पेंच (डायरी 16 फरवरी, 2022)

कल फिर चारा घोटाला से संबंधित पांचवे मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने अपना फैसला सुनाया। इसकी अपेक्षा पहले से की जा रही...

गांधी-आंबेडकर की जीत और आरएसएस की हार (डायरी 15 फरवरी, 2022)

भारतीय समाज का वह तबका कौन है जो हिंसा में सबसे अधिक विश्वास रखता है? यह सवाल बेवजह का सवाल नहीं है। इस सवाल...
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