Wednesday, July 24, 2024
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सागर जिले में पटवारी रिकॉर्ड पर जमीन दर्ज न होने से परेशान है दलित समुदाय

देश का हदय कहे जाने वाले सागर जिले को हरिसिंह गौर की नगरी भी कहते हैं। जिला व्यापक होने से कई वार्डों में बंटा है। यहाँ अंबेडकर वार्ड में करीब 400 परिवारों (दलित) सालों से बसे हैं। लेकिन इनकी जमीन पटवारी रिकॉर्ड में नहीं दर्ज है। जबकि, अपने-अपने जमीन की रजिस्ट्रियां लोगों के पास हैं। ऐसे में निवासी जमीन पर अपना अधिकार जताने में असमर्थ हैं।

सागर (मध्य प्रदेश)। पटवारी रिकॉर्ड में जमीन दर्ज न होना हमारे पूरे मुहल्ले की समस्या है। सागर के अंबेडकर वार्ड में 60-70 साल पुराने घर बने हुए हैं। घरों के लिए जमीन हमने गोटिराम अहिरवार से खरीदी थी, जो अब इस दुनिया में नहीं रहे। पहले लोग ज्यादा शिक्षित नहीं हुआ करते थे। तब रसीदों पर रजिस्ट्री हुआ करती थी। पहले पटवारी रिकार्ड से नहीं, विश्वास से काम चलता था। उस हिसाब से यहाँ मकान बने हुए थे। बीते कुछ साल से नई स्कीम के तहत हम जमीन का रिकार्ड आनलाईन कराने के लिए परेशान हो रहे हैं। पटवारी के पास जाते हैं तो वह कहते हैं कि खसरे में जगह नहीं है। जब इस समस्या को लेकर हम कलेक्टर के यहाँ पहुँचे तो वहाँ से हमें सिर्फ आश्वासन मिला है। बहुत दिन बीत जाने के बाद भी हमारी समस्या का समाधान नहीं हुई है।

यह समस्या सागर जिले के छतर सिंह की हैं। राजस्व विभाग की इस व्यवस्था से वह काफी नाराज भी हैं। आगे छोटेलाल अहिरवार बताते हैं कि हम अंबेडकर वार्ड में करीब 37 साल से निवासरत हैं। यहाँ 30 बाय 30 वर्ग फुट में हमारा मकान है। साथ ही यहाँ दलित समुदाय के करीब 400 घरों की बस्ती है। इन बस्ती वालों के पास खसरा नंबर 122-123 में जमीन की रजिस्ट्री थी। लेकिन, खसरा नंबर 122-123 का भू-अभिलेखीय रिकार्ड ऑनलाइन दर्ज नहीं हो पाया था। ऐसें में, खसरा नंबर 122-123 पर अन्य जमीन का रिकार्ड दिख रहा है। जिससे खसरा क्रमांक 122-123 पर वास्तविक भू-स्वामियों यानी हमारी जमीन का रिकार्ड आनलाईन नहीं हो पा रहा है।

देश का हदय कहे जाने वाले सागर जिले को हरिसिंह गौर की नगरी भी कहते हैं। जिला व्यापक होने से कई वार्डों में बंटा है। यहाँ अंबेडकर वार्ड में करीब 400 परिवारों (दलित) सालों से बसे हैं। लेकिन इनकी जमीन पटवारी रिकॉर्ड में नहीं दर्ज है। जबकि, अपने-अपने जमीन की रजिस्ट्रियां लोगों के पास हैं। ऐसे में निवासी जमीन पर अपना अधिकार जताने में असमर्थ हैं।

इस समस्या के लिए अंबेडकर वार्ड निवासियों से जब संवाद किया गया तब लोगों ने कई तरह के विचार रखें।

वर्षों पहले हो चुकी है कई जमीनों की रजिस्ट्री

यहीं के महेश अहिरवार बताते हैं कि मैं बीड़ी बनाने का काम करता हूँ। मेरे पिता ने 900 वर्ग फुट जमीन खरीदी थी, जिसका रिकार्ड ऑनलाईन नहीं होने से हमें जमीन पर अधिकार जताने में अब कठिनाई आ रही है।

नंदू अहिरवार कहते हैं कि मैं लगभग 700 वर्ग फुट जमीन में 40 साल से रहता हूँ। मैंने 40 साल पहले 800 रुपये में यह जमीन खरीदी थी। मैं जमीन ऑनलाईन करवाने के लिए 20,000 हजार रुपये खर्च कर चुका हूँ, पर रिकार्ड ज्यों का त्यों है।

वहीं, रघुवर अहिरवार बताते हैं कि हम लोगों की जमीन का ऑनलाईन रिकार्ड न होने से हम जमीन बेच नहीं पा रहे हैं। खरीदार तो आते हैं, लेकिन जमीन उनके नाम नहीं हो पाती। ऐसे जमीन बेचने के सौदे रद्द हो जाते हैं।

गोलन अहिरवार का कहना है कि खसरा 122-123 के अंतर्गत हमारी जमीन आती है। लेकिन, दलालों ने खसरा 122-123 से सटी नगर निगम की जमीन इसी खसरे में दर्ज करा दी। हम किसी से लड़ाई- झगड़ा नहीं चाहते। हमारी मांग है कि प्रशासन हमारे साथ न्याय करे, ताकि हम अपनी जमीन पर पूर्ण अधिकार जता सकें।

प्रेमबाई

प्रेमबाई कहती हैं कि हम जमीन का रिकार्ड ऑनलाइन कराने के लिए दो साल से अफसरों के यहाँ चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अभी तक हमें न्याय नहीं मिला।

गौराबाई का कहना है कि हमारा घर 30 बाय 30 वर्ग फुट में बना हुया है। मगर, खसरे पर जमीन दर्ज न होने से हम चैन की नींद नहीं सो पाते। हमें इस बात का डर बना रहता है कि प्रशासन हमारे घरों को अवैध करार देकर धराशायी न कर दे।

यहाँ के दर्जनों लोगों ने कलेक्टर को एक आवेदन भी लिखा। जिसमें दर्ज जानकारी इस प्रकार है-

पत्र का विषय- सागर नगर अंतर्गत अंबेडकर वार्ड क्रमांक 48 में खसरा क्रमांक 122/123 में निवासी लोगों के उक्त खसरे में पटवारी रिकॉर्ड दर्ज करने बाबत।

कलेक्ट्रेट को दिया गया शिकायत पत्र

पत्र में आगे वर्णित है- सागर नगर अंतर्गत अंबेडकर वार्ड क्रमांक 48 में उक्त आवेदक 50 सालों से निवासरत हैं। आवेदकों के पास उक्त जमीन की रजिस्ट्रियाँ हैं। लेकिन, बेचवार फर्जीवाड़ा करके उक्त जमीन की राजिस्ट्रियाँ तो कर दी, पर वह पटवारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं की जा रहीं। पटवारी का कहना है कि उक्त खसरे में जगह नहीं है।

पत्र में आगे दर्ज है कि उक्त खसरा नंबर की जांच करवाकर उस खसरे के निवासियों की रजिस्ट्रियाँ पटवारी रिकार्ड में ऑनलाइन दर्ज करवाने की कृपया करें।

अंबेडकर वार्ड निवासियों ने रजिस्ट्री के कागज भी दिखाए। उसमे गोलन अहिरवार की जमीन रजिस्ट्री का अध्ययन करने पर यह विवरण दर्ज है- 5-10-70 को हमने (गोलन) ने जमीन खरीदी है। जमीन की खरीदारी 3500 रुपये में की गई है। यह जमीन 450 वर्ग फुट है। जमीन की जगह धर्मसरी (अंबेडकर वार्ड) सागर है।

अपनी जमीन का कागज दिखाते हुए

कुंजिलाल पंडा के जमीन की रजिस्ट्री में कागज पर उल्लिखित विवरण कुछ यूं मिलते हैं- खरीद दिनांक 21-05-87 जमीन क्षेत्रफल 450 वर्ग फुट है। यह जमीन खसरा नंबर 122/9 में स्थित है। इस जमीन में कोई कट-पिट नहीं है। कुंजिलाल की जमीन से प्रेमबाई और मोहनलाल की जमीन भी सटी है।

अंबेडकर वार्ड निवासियों की इस समस्या‌ के बावत जिला न्यायालय हरदा (मध्य प्रदेश) के एडवोकेट शेख मुईन से बताते हैं कि इस मामले की जांच के लिए नजूल (रेसीडेंटल/ आवासीय) भूमि की सर्च रिपोर्ट बनाना जरूरी है। इससे भूमि मालिकों का स्पष्ट विवरण प्राप्त किया जा सकता है।

वह आगे कहते हैं कि प्रभावित पक्ष को भूमि के नामांतरण हेतु तहसीलदार या एसडीएम के यहाँ प्रकरण भी दर्ज करना चाहिए। साथ-साथ प्रकरण में पुराने रिकॉर्ड को संलग्न करना चाहिए। मध्य प्रदेश राजस्व संहिता के अनुसार, जिन भूमियों का नामांतरण किन्हीं कारणों से नहीं हो पाया है। यदि वह नामांतरण योग्य भूमि है। तब उनका रिकॉर्ड दुरुस्त करना अधिकारियों का कर्त्तव्य है।

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