Friday, June 21, 2024
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देवी अहिल्याबाई होल्कर : जिन्होंने समाज के आदिवासी, दलित और पिछड़े समाज की बेहतरी के लिए काम किया

देवी अहिल्याबाई होल्कर आज से तीन सौ वर्ष पहले समाज के पिछड़े, व वंचित समुदाय के साथ-साथ स्त्रियों के लिए भी बहुत से ऐसे काम किए, जो उन दिनों साहस का कदम था। आदिवासियों और दलित जो समाज से पूरी तरह कटे हुए थे के लिए ऐसी व्यवस्था की ताकि वे मेहनत कर अपनी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ कर सकें। धर्म-अन्धविश्वास, भय-त्रास में और रूढ़ियों में फंसा हुआ था तबअहिल्याबाई ने अपनी प्रजा को इससे निकाला। वे धार्मिक थीं लेकिन अंधविश्वासी नहीं थीं।

धार्मिक सेक्टर में अवसरों का पुनर्वितरण बने चुनावी मुद्दा

आज हमारे देश के मंदिरों में अकूत संपत्ति पड़ी हुई। इस संपत्ति का भोग एक खास वर्ग ब्राम्हण ही कर रहा है। यदि धार्मिक सेक्टर में जितनी आबादी-उतना हक का सिद्धांत लागू हो जाता है तो मंदिरों के ट्रस्टी बोर्ड से लेकर पुजारियों की नियुक्ति में अब्राह्मणों का वर्चस्व हो जाएगा और वे मठों–मंदिरों की बेहिसाब संपदा के भोग का अवसर भी पा जाएंगे और आर्थिक रूप से मजबूत भी होंगे।

अग्निवीर योजना : दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक युवाओं के खिलाफ भाजपा-आरएसएस की बड़ी साजिश

अग्निवीर योजना की शुरुआत एक सोची समझी साजिश का हिस्सा है। भारतीय सेना में दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक युवाओं को शामिल होने से रोकने के लिए एक गहरा इकोसिस्टम तैयार किया गया है। नरेंद्र मोदी और आरएसएस द्वारा तैयार की गई इस रणनीति को समझना एक सामान्य भारतीय नागरिक के लिए आसान नहीं है।

कांग्रेस के घोषणापत्र पर सिर्फ आंबेडकरवाद की छाप है

कांग्रेस का घोषणा पत्र पूरी तरह से आंबेडकरवाद से प्रभावित है। इस घोषणा पत्र में दलित, आदिवासी,पिछड़ों के उत्थान के मार्ग को प्रशस्त करने का खाका खीचा गया है। इसी कड़ी में विविधता आयोग की स्थापना करने का वादा कर कांग्रेस ने आंबेडकरवाद को सम्मान देने का ऐतिहासिक कार्य भी किया है।

भाजपा-आरएसएस की राजनीति हमेशा से ही दलित,पिछड़ा,अल्पसंख्यक विरोधी रही है

भाजपा और आरएसएस हमेशा से दलित,ओबीसी विरोधी रहे हैं। देश के संविधान को बदलने के लिए इस चुनाव में 400 पार का नारा दिया लेकिन संविधान बदलने और आरक्षण खत्म करने को लेकर जनता की तरफ से आ रहे विरोध को देखते हुए इन्होंने चुनाव का नेरेटिव बदल इनके शुभचिंतक होने की बात बार-बार दोहरा रहे हैं।

जातिगत भेदभाव : मैं ‘जय भीम’ वालों को काम पर नहीं रखती, कहने वाली महिला के खिलाफ केस दर्ज

14 अप्रैल को कम्पनी मालिक नेहा दत्त ने युवक को व्हाट्सएप पर एक मैसेज किया था। इस मैसेज में नेहा ने युवक से पूछा था कि, 'तू जय भीम वाला है क्या' इस पर युवक ने जवाब देते हुए हामी भरी थी, इसके बाद नेहा ने उत्तर में लिखा, 'मैं जय भीम वाले को नौकरी नहीं देती हूँ।' 

BHU में दलित छात्र से अप्राकृतिक दुष्कर्म की कोशिश एवं मारपीट, दो आरोपितों के खिलाफ केस दर्ज

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के राजाराम छात्रावास में रहने वाले MA समाजशास्त्र, फाइनल ईयर के एक छात्र के साथ दिनांक 31/03/2024 की सुबह में राजाराम हॉस्टल में ही रहने वाले छात्र ने जबरन अप्राकृतिक दुष्कर्म करने की कोशिश की।

अपना कोई गाँव नहीं था लेकिन पूरा बचपन गाँवों में ही बीता

दलित समाज से जुड़े़ लेखक अपनी आत्मकथाएं लिख रहे हैं। इन आत्मकथाओं में दलित जीवन व दलित समाज से जुड़े़ जातीय भेदभाव को मूल रूप से उजागर किया है। जहां तक लेखिकाओं की आत्‍मकथाओं का सवाल है तो वहां भी जाति के साथ-साथ लिंग भेद अपने मुखर रूप में मौजूद रहता है। कवि-आलोचक ईश कुमार गंगानिया ने हरियाणा के विभिन्न गाँवों में बीते अपने बचपन की सहज कहानी कही है।

सामंती दमन के खिलाफ 18 वर्ष चले मुकदमे में जीत, संघर्ष की मिसाल हैं डॉ विजय कुमार त्रिशरण

आज दलितों के ऊपर जो भी अत्याचार हो रहे हैं, उसका मूल कारण उनका आर्थिक रूप से कमजोर होना है। वर्तमान बीजेपी की सरकार के कार्यकाल में दलितों के ऊपर अत्याचार की घटनाओं में इजाफा हुआ है ।

मेरे गाँव ने वतनदारी प्रथा को कब्र में गाड़कर बराबरी का जीवन अपनाया

आशालता कांबले सुप्रसिद्ध मराठी लेखिका, कवियत्री, कहानीकार और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। महात्मा फुले और अंबेडकरवादी साहित्य सृजन में उनका महत्वपूर्ण योगदान है। वह एक कुशल वक्ता हैं जिन्होंने मराठी सामाजिक, सांस्कृतिक आंदोलनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। आशालता की अनेक पुस्तकें छप चुकी हैं। बहिनाबाई चौधरी, सावित्रीबाई फुले, रमाबाई, अहिल्याबाई होल्कर और कवि कुसुमाग्रज पर उनकी उल्लेखनीय किताबें हैं। अपनी माँ के जीवन पर उनकी एक किताब ‘आमची आई’ बहुत प्रसिद्ध हुई थी। इनके अलावा जनजागृति के लिए आशालता जी ने एक दर्जन से अधिक पुस्तिकाएँ लिखी हैं। पेशे से वह अध्यापिका रही हैं। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर शुरू किए जा रहे कॉलम ‘मेरा गाँव’ में उन्होंने अपने गाँव कांदलगाँव के अनुभवों को प्रस्तुत किया है। इस आलेख में कोंकण इलाके में दलितों के जीवन और उस पर डॉ अंबेडकर के प्रभावों का बहुत सघन परिचय मिलता है।

हत्या के 28 साल बाद ‘इंसाफ’ में मृतक के परिजन सहित 40 लोगों को जेल

उत्तर प्रदेश के इतिहास में शायद यह पहली बार होगा जब अट्ठाईस साल पुराने मामले में एक साथ 40 लोगों को सजा सुनाई गई...

रामपुर : दलित युवक की पुलिस की गोली से मौत, जबरदस्ती अंतिम संस्कार कर, किया मानवाधिकार का उल्लंघन

यूपी के रामपुर में हाथरस जैसा मामला सामने आया है। फर्क बस इतना है कि हाथरस में दलित युवती को जलाया गया था जबकि...

यूपी : आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थी, 69000 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में सरकार की गलत नीतियों का खामियाजा भुगत रहे हैं

 उत्तर प्रदेश में प्राथमिक शिक्षक भर्ती में आरक्षण घोटाले का आरोप लगाते हुए सैकड़ों अभ्यर्थी पिछले तीन साल से आंदोलनरत हैं। पांच अभ्यर्थी 38...

कर्नाटक : मुख्यमंत्री सिद्धारमैया दलितों के खिलाफ अत्याचार के मामले में कम सजा मिलने पर चिंता व्यक्त की 

बेंगलुरु (भाषा)। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने दलितों के खिलाफ अत्याचार से संबंधित मामलों में सजा की खराब दर पर मंगलवार को असंतोष व्यक्त...

शासन-प्रशासन के भरोसे सामाजिक एकता की कामना दिवास्वप्न है

अगर आपको यह लगता है कि भारत में जातिवाद खत्म हो गया है, तो शायद आप गलत सोच रहे है। ताजा उदाहरण है लाइन...

दलित उत्पीड़न वार्षिकी-2023 : नहीं थमी घटनाएँ, कहीं हत्या तो कहीं पेशाब पिलाने का हुआ अपराध

एक और साल अब अलविदा कहने को तैयार है। दुनिया एक नए साल के स्वागत के इंतजार में खड़ी है। यह विश्लेषण का वक्त...

बहुजन समाज का भ्रम है कि जाति-प्रथा कमजोर पड़ रही है

गाँवों से शहरों में आकर बसे दलित वर्ग के लोग इस भ्रम में जी रहे हैं कि वक्त के साथ-साथ जाति-प्रथा कमजोर पड़ती जा...

बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में जलाई गयी मनुस्मृति की प्रतीकात्मक प्रतियां

वाराणसी। बनारस हिन्दू विश्वविदद्यालय में 25 दिसंबर को मनुस्मृति की प्रतीकात्मक प्रतियाँ जलाई गईं। भगत सिंह छात्र  मोर्चा के  8-10 की संख्या में छात्रों...

कानपुर : ‘बुद्ध कथा’ कार्यक्रम में हमले के खिलाफ न्याय के लिए तेज हुआ संघर्ष

पुलिस द्वारा जांच के लिए गए संयुक्त कमिश्नर आनंद प्रकाश ने घटना को लेकर ब्राह्मण समाज द्वारा लगाए गए आरोप 'पिछले साल आयोजित कथा में ब्राह्मण की मूर्ति पर कालिख पोतने और उसे जूतों की मामला पहनाने की वजह से ब्राह्मण समाज आक्रोशित था' को पूरी तरह से निराधार बताया है।

ठाणे : आदिवासियों को बंधुआ मजदूर बनाने के आरोप में दो गिरफ्तार

ठाणे (भाषा)। महाराष्ट्र के ठाणे जिले के एक गांव में आदिवासी व्यक्तियों के समूह को बंधुआ मजदूर बनाने और उनका शारीरिक उत्पीड़न करने का...

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