किसान आन्दोलन में जाना-पहचाना चेहरा था मारुति मानव : अफलातून देसाई

भुआल यादव, विशेष संवाददाता, गाँव के लोग डॉट कॉम

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कोविड-19 महामारी के समय मोदी सरकार ने आपदा को अवसर में तब्दील करते हुए खेती-बाड़ी से जुड़े तीन काले कृषि कानून बना डाली, जो किसी भी तरह से किसानों के लिए लाभदायक नहीं थे। संसद से पास तीनों काले कृषि कानूनों की वापसी को लेकर भारतीय किसानों ने दिल्ली और दिल्ली सरकार को साल भर से अधिक दिनों तक घेरे रहा। आन्दोलन के शुरू-शुरू में सरकार ने आन्दोलनकारी किसानों से कुछ दौर में बातचीत की, लेकिन किसानों को मनाने में असफल सरकार ने बाद में किसानों से बातचीत बंद कर दी। बीच-बीच में किसानों को बदनाम करने के लिए सत्ता की शह पर कई तरह की कोशिशें भी हुई। परंतु आन्दोलनकारी किसानों ने समन्वय और सद्भाव का परिचय देते हुए आन्दोलन को जारी रखा और अंततः सरकार को किसानों की जिद के आगे नतमस्तक होना पड़ा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 नवंबर,2021 को काले कृषि कानूनों को रद्द करने की घोषणा किया।
कृषि कानून रद्द होने के उपरांत आन्दोलन में शामिल किसान अपने-अपने घर लौट रहे हैं। रास्ते में जगह-जगह उनका स्वागत किया जा रहा है, लोग गले मिलकर एक-दूसरे को बधाई और शुभकामना दे रहे हैं। खुशी में मिठाइयां बांटी जा रही है।
किसान आंदोलन में शामिल मारुति मानव भी आज बुधवार को लंका गेट, बीएचयू पहुंचे, जहां पर उनका स्वागत काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में  किसान-मजदूरों के पढ़ने वाले बेटा-बेटियों ने किया। मारुति मानव किसान आंदोलन की शुरुआत से ही दिल्ली के सिंघु बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर पर जमे रहे। मारुति ने समय-समय पूर्वांचल के किसानों और कॉलेजों-विश्वविद्यालयों में किसानों-मजदूरों के पढ़ने वाले बेटा-बेटियों को आन्दोलन में शामिल होने के लिए प्रेरित करते रहे।
स्वागत समारोह के दौरान उपस्थित काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र नेता और ‘समाजवादी जन परिषद’ के नेता अफलातून देसाई ने कहा कि किसान आंदोलन में शामिल मारुति मानव आंदोलन में एक जाना-पहचाना चेहरा था। मारुति मानव अपने कर्मों और मेहनत से ‘संयुक्त किसान मोर्चा’ के सभी बड़े-बड़े किसान नेताओं का विश्वास जीता। आन्दोलन में शामिल ऐसे ही समर्पित किसान के बेटा-बेटियों से संयुक्त किसान मोर्चा ने अपने संघर्ष को जीत में तब्दील किया है। आज काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के लंका गेट पर जब मारुति मानव का स्वागत किया जा रहा है, तो मैं गौरवान्वित महसूस कर रहा हूॅ कि जिस काशी हिन्दू विश्वविद्यालय का मैं छात्र रहा; उस विश्वविद्यालय के छात्र तीनों काले कृषि कानूनों के रद्द होने के बाद अपने घर की ओर लौटे किसान मारुति मानव का स्वागत कर रहे हैं। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के गेट पर मारुति मानव का स्वागत यह साबित कर रहा है कि किसान आंदोलन किसी विशेष क्षेत्रों के किसानों का आन्दोलन नहीं था, बल्कि पूरे भारत का आन्दोलन था। इस आन्दोलन में पूरब से पश्चिम और दक्षिण से उत्तर सब जगह के किसान-मजदूर शामिल थे।
किसान आन्दोलन से लौटे युवा किसान नेता का स्वागत करते
बीएचयू के ही पूर्व छात्र नेता चौधरी राजेन्द्र ने कहा कि किसानों और किसान आंदोलन ने देश के लोकतंत्र को बचाने का काम किया है और लोकतंत्र बचाने की लड़ाई में मारुति मानव अपने जीवन के बहुमूल्य समय दिया है, इसलिए महामना की पावन धरती एवं बीएचयू के लंका गेट पर इनका स्वागत करते हुए हमें बहुत खुशी हो रही है। किसानों का आन्दोलन थोड़ी देर के लिए स्थगित हुआ है, समाप्त नहीं। हम एमएसपी और अन्य समस्याओं का लेकर अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। किसानों ने अपनी जीद और उम्मीद से तानाशाही सरकार को अपने आगे नतमस्तक किया है, देश के लोकतंत्र को बचाया है। ऐसे में मारुति का स्वागत जायज है।
बीएचयू के छात्रों के स्वागत से अभिभूत मारुति मानव ने कहा कि मैं किसान आंदोलन में साल भर रहा, लेकिन अपने लोगों के प्यार-दुलार, प्रोत्साहन और मार्गदर्शन के चलते पता ही नहीं चला कि कब एक साल बीत गया। दिल्ली के बॉर्डर पर चल रहे आंदोलन में जितना सहयोग हमारा नहीं था, उससे अधिक किसान आंदोलन में पूर्वांचल के किसानों और उनके बेटा-बेटियों का सहयोग था। बीएचयू के ये हमारे भाई-बहन पीछले साल के अक्टूबर-नवम्बर 2020 से लेकर आज तक किसान-आन्दोलन में जो सहयोग किया है, उससे केवल मैं ही नहीं, पूरा किसान आंदोलन अवगत है।
स्वागत समारोह में बीएचयू के श्रवण यादव, सलमान खान, बेबी पटेल, अनुराग, सुमित, नीतीश, अनुपम, बलीराम, सरोज, राजेश, खेताराम जाट, अखिलानंद, अनील, कुलदीप, सुजीत, सीपी, सतीश कुमार प्रजापति, शिवाकांत, शिवदास, शुभम सिंह, शुभम यादव, धीरु, हरेंद्र कुमार, हरेंद्र चौहान, अजय कुमार सहित सौकड़ो की संख्या में छात्र-छात्राएं एवं नागरिक उपस्थित थे।
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