जातिगत जनगणना के मुद्दे पर जनसंवाद संपन्न 

प्रेम प्रकाश यादव

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4 अगस्त को दिन में 3:00 बजे से जातिगत जनगणना के मुद्दे पर जन  संवाद का आयोजन तहसील सदर वाराणसी के सभागार  में किया गया। जनसंवाद को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि जातिगत जनगणना न कराना सरकारों की मनुवादी मानसिकता को प्रदर्शित करता है ,जब जनगणना वर्ष आता है सरकार कोई अन्य मुद्दा खड़ा कर जातिगत जनगणना के सवाल को पीछे धकेल देती हैं। 1931 के बाद से आज तक पिछड़ों की जातिगत जनगणना नहीं हुई ,1941 में  द्वितीय विश्वयुद्ध दौर था ,1951 में देश की आजादी के बाद पिछड़ों की जातिगत जनगणना होनी थी, सरकार ने आजादी व गणतंत्र मे पिछड़ों को भुलवा दिया ,1961 में जनगणना होनी थी तो 1962 का युद्ध ला दिया, 1971 में बांग्लादेश प्रकरण आ गया, 1981 में इमरजेंसी के बाद का दौर था, 1991 से पहले मंडल कमीशन के बाद कमंडल ला दिया, 2001 में गोधरा कांड हुआ, 2011 में इंडिया अगेंस्ट करप्शन के नाम पर भुलवाया गया , संसद में बहस के बाद जातिगत जनगणना के लिए सरकार तैयार भी हुई जातिगत जनगणना भी कराया लेकिन उसको सार्वजनिक नहीं किया वह भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। 2021 से पहले किसान कानून, सीए एनआरसी, मजदूर कानून, सहित तमाम जन विरोधी कानून लाए गए और  सरकारी संपत्तियों व संस्थानों का निजीकरण कर देश को गुमराह कर जातिगत जनगणना से ध्यान भटकाने का प्रयास हो रहा है, इसके बावजूद जब मांग की गई तो सरकार ने संसद में स्पष्ट तौर पर कहा कि वह पिछड़ों का अलग से जातिगत जनगणना नहीं कराएगी इससे सरकार की मनुवादी व ब्राह्मणवादी सोच पर परिलक्षित होती है , साथ ही साथ विपक्षी पार्टियां जिन्हें संसद से लेकर सड़क तक  आंदोलन  करना चाहिए वे  मीडिया , संसद व विधानसभाओं में बयान तक ही सीमित है।

1931 के बाद से आज तक पिछड़ों की जातिगत जनगणना नहीं हुई ,1941 में द्वितीय विश्वयुद्ध दौर था ,1951 में देश की आजादी के बाद पिछड़ों की जातिगत जनगणना होनी थी, सरकार ने आजादी व गणतंत्र मे पिछड़ों को भुलवा दिया ,1961 में जनगणना होनी थी तो 1962 का युद्ध ला दिया, 1971 में बांग्लादेश प्रकरण आ गया, 1981 में इमरजेंसी के बाद का दौर था, 1991 से पहले मंडल कमीशन के बाद कमंडल ला दिया, 2001 में गोधरा कांड हुआ, 2011 में इंडिया अगेंस्ट करप्शन के नाम पर भुलवाया गया

ऐसे में विपक्षी पार्टियों को यह लगता है कि वे मनुवादी, सामंतवादी, पूंजीवादी ताकतों को नाराज कर सत्ता में नहीं आ सकते, इसलिए वह भी सत्ता की लालच में इस मुद्दे पर संघर्ष व आंदोलन में नहीं आ रहे हैं। ऐसे में हम सभी अधिवक्ताओं, सामाजिक व राजनीतिक संगठन के साथियों की यह जिम्मेदारी है कि सरकार के साथ-साथ विपक्ष पर भी दबाव बनाकर जातिगत जनगणना को लागू करवाया जाए। इसके लिए बगैर आंदोलन व जन दबाव के जातिगत जनगणना होना संभव नहीं है। जनसंवाद में उपस्थित वक्ताओं ने कहा की जातिगत जनगणना के मुद्दे पर संघर्ष करने लिए एक फोरम होना चाहिए जिसका नाम सर्वसम्मति से भारतीय जातिगत जनगणना संयुक्त मोर्चा रखा गया, जिसके नेतृत्व में 7 अगस्त को मंडल दिवस के अवसर पर जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति महोदय को मंडल कमीशन की पूरी रिपोर्ट लागू करने व जातिगत जनगणना कराने हेतु ज्ञापन दिया जाएगा व 9 अगस्त को अगस्त क्रांति दिवस के अवसर पर जातिगत जनगणना लागू कराने हेतु जिला स्तरीय सभा का आयोजन किया जाएगा।
जातिगत जनगणना पर विचार रखते प्रेमप्रकाश यादव
जनसंवाद कार्यक्रम में  राम जन्म भाई ,केशव वर्मा ,अनूप श्रमिक ,रामजी यादव, मुसाफिर प्रसाद, आशुतोष, जगन्नाथ कुशवाहा ,सच्चिदानंद, सुक्खू जी, राजमणि ,अनुपम , एडवोकेट हरीश चंद्र मौर्या ,एडवोकेट मनमोहन गुप्ता ,एडवोकेट रामदुलार ,एडवोकेट राजेश यादव, एडवोकेट कमलेश यादव, इंद्रजीत सिंह पटेल,कन्हैया ,मनीष शर्मा ,शुभम ,सुमित ,ओम प्रकाश पटेल, जगधारी ,राजेंद्र पटेल, गणेश प्रसाद शर्मा ,यशपाल सिंह, राजकुमार पटेल ,धनंजय पटेल, अवध नारायण, सत्यनारायण, शहजादी बानो ,शशि कांत, नंदलाल ,एडवोकेट सच्चिदानंद सिंह ,बीरबल सिंह यादव, एडवोकेट राम रेणु चंदन ,अपर्णा, छेदीलाल निराला ,राकेश कुमार गौड़, रमाशंकर सिंह दाढ़ी, सूबेदार प्रसाद, ब्रह्मचारी, एडवोकेट मनोज कुमार यादव, करीम ,मारुति मानव ,कृपा शंकर पाल ,बच्चा लाल भास्कर सहित सैकड़ों अधिवक्ताओं सामाजिक राजनीतिक कार्यकर्ताओं किसान नेताओं व बुद्धिजीवियों  ने अपने विचार रखे व आंदोलन को धार देने मे सक्रिय सहयोग देने का वादा किया।
जनसंवाद कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता विश्राम जी, संचालन एडवोकेट प्रेम प्रकाश सिंह यादव व धन्यवाद ज्ञापन योगीराज पटेल ने किया।
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