Tuesday, April 16, 2024
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झारखंड : शुरू हुई ‘मुख्यमंत्री ग्राम गाड़ी योजना,’ सुगम होगी आमजन की यात्रा

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के कार्यकाल में जिस 'मुख्यमंत्री ग्राम गाड़ी योजना' की परिकल्पना की गयी थी,वर्तमान मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने उसकी शुरुआत कर दी। हालाँकि मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में हेमंत सोरेन को ही इसका क्रेडिट दिया।

झारखंड। हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी और सीएम पद से इस्तीफे के बाद दो फरवरी को नये मुख्यमंत्री का कार्यभार संभालने वाले चंपाई सोरेन के लिए 21 फरवरी का दिन खास रहा। हेमंत सोरेन की सरकार में बतौर परिवहन मंत्री उन्होंने राज्य में सुदूर इलाकों और गांवों- कस्बों में ग्रामीणों की वाहन सुविधा को आसान बनाने के लिए जिस ‘मुख्यमंत्री ग्राम गाड़ी योजना’ की परिकल्पना की थी, उस योजना की उन्होंने मुख्यमंत्री के तौर पर शुरुआत की। हालांकि उन्होंने अपने भाषण में हेमंत सोरेन को ही इसका क्रेडिट दिया।

इस योजना के तहत ग्रामीण इलाके में वृद्धजन (साठ साल), छात्र-छात्राएं, विधवा महिलाएं, दिव्यांग, मान्यता प्राप्त झारखंड आंदोलनकारी, नेत्रहीन, मूक-बधिर, एचआईवी पीड़ित, मानसिक रूप से कमजोर लोगों को सफर में पैसे नहीं देने पड़ेंगे। जाहिर तौर पर राज्य के ग्रामीण इलाकों में रहने वाली बड़ी आबादी की नजरें इस योजना पर जा टिकी हैं

झारखंड की राजधानी रांची के मोराबादी मैदान से सरकार ने इस योजना की शुरुआत की है। अभी छोटी-बड़ी 83 गाड़ियों को हरी झंडी दिखाई गई है। अब परिवहन विभाग इन गाड़ियों के लिए रूट तय करेगा। साथ ही यह भी तय किया जायेगा कि किस जिले में कितनी गाड़ियां चलेंगी।

झारखंड की राजधानी रांची के मोराबादी मैदान से बस को हरी झंडी दिखाते मुख्यमंत्री चंपई सोरेन

गौरतलब है कि सरकार ने कुछ ही दिनों में 250 गाड़ियों को सड़कों पर लाने की तैयारी की है। फिलहाल इस योजना पर पर 25 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। योजना को साकार करने के लिए विस्तार से इसकी रूपरेखा तय की गई है।

इस योजना में सरकार खुद गाड़ियां नहीं खरीद रही। ग्रामीण इलाके में अपनी गाड़ियां चलाने के इच्छुक लोग योजना से जुड़ेंगे। बदले में वाहन संचालकों को सरकार ने कई किस्म की रियायतें तथा सब्सिडी देने का निर्णय लिया गया है। ग्राम गाड़ी योजना में 7 से 42 सीटें गाड़ियों का संचालन होगा।

मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन कहते हैं, ‘हमने ग्रामीण इलाके और खासकर आदिवासी इलाके में यातायात व्यवस्था को लेकर लोगों की तकलीफ को नजदीक से देखा है। सरकार की यह योजना अब सुदूर गांवों में परिवहन व्यवस्था को सुगम बनायेगी। गांवों से प्रखंड मुख्यालय से अनुमंडल और जिला मुख्यालय को जोड़ने के लिए ये गाड़ियां सड़कों पर चलेंगीं। ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी से विकास का पहिया भी तेज घूमेगा। किसान अपना उत्पाद बाजारों तक ले जा सकेंगे।’

गौरतलब है कि झारखंड राज्य की 3.5 करोड़ आबादी में लगभग 75 फीसदी ग्रामीण क्षेत्रों, सुदूरवर्ती बसावट और पहाड़  की तराई में निवास करती है। खेती, मजदूरी, और वन उत्पाद इनके जीविकोपार्जन का मुख्य आधार है, लेकिन इन इलाकों में आवागमन की सुविधा कम है।

अधिकारियों के मुताबिक कम-से-कम सात लाख लोग (छात्र- छात्राएं, वृद्धजन, किसान, मजदूर, कामगार, मरीज) रोजाना गांवों से प्रखंड अनुमंडल और जिला मुख्यालयों में आना-जाना करते हैं। सुदूर इलाके में यातायात और आर्थिक तंगी के कारण इस वर्ग को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। यह योजना उनके लिए सहूलयित वाली होगी।

कौन लोग मुफ्त में कर सकेंगे यात्रा
  • सीनियर सिटीजन (साठ वर्ष से अधिक)
  • राज्य सरकार द्वारा विधवा पेंशन प्राप्त कर रही महिलाएं
  • दिव्यांगजन (40 प्रतिशत से अधिक)
  • एचआईवी संक्रमित मरीज
  • प्रखंड, अनुमंडल और जिला मुख्यालय जाने वाले छात्र-छात्राएं
  • नेत्रहीन और मूक बधिर व्यक्ति
  • मान्यता प्राप्त झारखंड आंदोलनकारी
  • रियायत के लिए आधार कार्ड, विकलांग प्रमाण पत्र, विधवा प्रमाण पत्र, छात्र आईडी कार्ड, अस्पताल का प्रमाण पत्र पास में रखना होगा।
झारखंड आंदोलनकारियों का सम्मान प्राथमिकता

चंपाई सोरेन कैबिनेट में शामिल परिवहन मंत्री दीपक बिरूआ का कहना है,‘वे खुद एक आंदोलनकारी रहे हैं। झारखंड आंदोलन का दर्द सहा है। कई दफा जेल जाना पड़ा। मुख्यमंत्री ग्राम गाड़ी योजना के तहत झारखंड आंदोलनकारियों के लिए मुफ्त यात्रा का निर्णय सुकून दे रहा है। दीपक बिरूआ कहते हैं, राज्य सरकार ने झारखंड आंदोलनकारियों का सम्मान राशि (पेंशन) भी बढ़ाया है।’

गौरतलब है कि झारखंड की सरकार ने यह योजना उस वक्त लांच कर लोगों का ध्यान खींचा है, जब किसानों का एक वर्ग न्यूनतम समर्थन मूल्य के लिए कानून बनाने और स्वामीनाथन आयोग की सभी सिफारिशों को लागू करने की मांग को लेकर शंभू बॉर्डर पर आंदोलन कर रहा है।

क्या नहीं लगता, इस योजना को सफल बनाना कठिन हो सकता है और बाद में सब कुछ जैसे-तैसे होने वाला है, इस सवाल पर मंत्री कहते हैं कि सब कुछ सही ढंग से क्रियान्वित हो, इसके लिए योजनाबद्ध तरीके से काम हो रहा है। जो वाहन संचालक इस योजना से जुड़ रहे हैं, उन्हें किराये की क्षतिपूर्ति के लिए कई रियायतें दी जा रही हैं। यह योजना रोजगार का अवसर भी बढ़ायेगी।

झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के सचिव पुष्कर महतो उपाध्यक्ष जीतेंद्र सिंह समेत कई सदस्यों ने 21 फरवरी की शाम परिवहन मंत्री से मुलाकात कर आंदोलनकारियों को मुफ्त यात्रा की सुविधा देने के निर्णय़ का स्वागत करते हुए इस सुविधा को अंतर्राज्यीय स्तर पर उपलब्ध कराने समेत पेंशन की राशि और बढ़ाने और अन्य सुविधाएं लागू करने के लिए एक मांग पत्र भी सौंपा है।

पुष्कर बताते हैं कि अभी झारखंड में लगभग 20 हजार आंदोलनकारियों का आधिकारिक तौर पर चिह्नतिकरण हुआ है। जिन लोगों ने जेल काटी है, उन्हें पेंशन दी जाती है। जेल में रहने की मियाद के हिसाब से उन्हें हर महीने साढ़े तीन हजार से सात हजार रुपये तक की राशि दी जाती है।

वाहन संचालकों को क्या सुविधाएं

अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व पिछड़ा वर्ग की महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी

  • नये वाहनों के क्रय पर लगनेवाले वार्षिक ब्याज में 5 प्रतिशत सब्सिडी 5 साल तक देने का प्रावधान
  • परमिट, फिटनेस पर केवल एक रुपए का टोकन मनी देना होगा
  • सिर्फ एक रुपए में वाहन का निबंधन कराने की सुविधा
  • निशुल्क यात्रा करने वाले ग्रामीणों के भाड़ा की प्रतिपूर्ति के लिए सरकार वाहन संचालकों को राशि देगी
  • 33-42 सीटर गाड़ियों को एक किलोमीटर पर 18 रुपए व 25-32 सीट गाड़ियों को 14 रुपए रुपए मिलेंगे
  • जबकि 13-24 सीटर गाड़ियों को प्रति किमी 10 व 7-12 सीटर गाड़ियों को 7.50 रुपए दिए जाएंगे
  • कौन सी गाड़ियां कितने किलोमीटर चलीं, इसके लिए जीपीएस सिस्टम का इल्तेमाल किया जाएगा
एसओपी जारी, कमेटियों का गठन

झारखंड़ सरकार के संयुक्त परिवहन आयुक्त प्रवीण प्रकाश बताते हैं कि मुख्यमंत्री ग्राम गाड़ी योजना के लिए परिवहन विभाग ने विस्तार से मार्गदर्शी नीति (एसओपी) जारी कर दी है। इसके अलावा योजना के सफलतापूर्वक संचालन के लिए जिला एवं प्रखंड स्तर के अधिकारियों के नेतृत्व में कमेटी का गठन किया गया है। ये कमेटियां इस योजना के अंतर्गत शामिल किए गए वाहनों और वाहन संचालकों पर निगरानी रखेंगी। इस योजना के तहत राज्य के ग्रामीण लोगों की सुविधा के लिए गांवों में स्टैंड बनाए जाएंगे। इसके अलावा वाहनों के रंग भी अलग-अलग हों- ताकि आसानी से लोग वाहनों की पहचान कर सकें। निशुल्क यात्रा के लिए अधिकृत लोगों के अलावा जो लोग यात्रा करेंगे, उन्हें सरकार द्वारा निर्धारित किराये का भुगतान करना होगा।

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