नरेंद्र मोदी, राबड़ी देवी और देश के खिलाफ साजिश(डायरी, 18 जनवरी 2022) 

नवल किशोर कुमार

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बात सात साल पुरानी है। बिहार सरकार के कार्मिक विभाग को प्राप्त एक पत्र की प्रति मुझे वहां के एक सूत्र ने उपलब्ध करायी थी। हम पत्रकारों के लिए ये सूत्र बड़े अहम होते हैं। इनके जरिए हमें अंदर की भी खबरें मिल जाया करती हैं। यदि ये नहीं हों तो हम पत्रकार किसी काम के नहीं। तो हुआ यह कि जो पत्र मुझे हासिल हुआ था, उसे मुख्य सचिव के माध्यम से सभी विभागों, जिलाधिकारियों और प्रखंड कार्यालयों तक भेजा गया था। इस पत्र में एक खास बात थी। दरअसल, उस पत्र में सभी सरकारी अधिकारियों को अपना ईमेल आईडी एनआईसी यानी नेशनल इनफॉरमेशन सेंटर के द्वारा उपलब्ध करायी जानेवाली सुविधा के अनुसार बनाने का आदेश दिया गया था। साथ ही यह हिदायत भी कि कोई गूगल आदि अन्य ईमेल सर्विस प्रदाता के जरिए उपलब्ध करायी जा रही सुविधा का उपयोग सरकारी कामकाज के लिए नहीं करे।
इसके पीछे की खास वजह का उल्लेख पत्र में नहीं था। दरअसल, भारत सरकार ने यह हिदायत सभी राज्यों को दी थी कि एनआईसी भारत सरकार का उपक्रम है और इसके जरिए सूचनाओं के अदान-प्रदान से सूचनाएं बाहर नहीं जाएंगी। सरकार को यह डर था कि सरकारी सूचनाएं जो कि गोपनीय रहनी चाहिए, उसके लिए गूगल आदि इस्तेमाल न किया जाय, क्योंकि गूगल प्रत्यक्ष तौर पर भारत सरकार के अधीन नहीं है।

बहरहाल, कल ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम को वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। एक वीडियो सोशल मीडिया पर जबरदस्त तरीके से वायरल हुआ। वीडियो में प्रधानमंत्री बोलते-बोलते न केवल रूक जाते हैं बल्कि हकलाने भी लगते हैं। सोशल मीडिया पर लोगों के मुताबिक, प्रधानमंत्री टेलीप्रॉम्पटर देखकर अपना भाषण पूरे जोश से पढ़ रहे थे गाेया सब उनके जेहन में हो और उन्हें भाषण देने में पारंगता हासिल है, लेकिन टेलीप्रॉम्पटर के बाधित हो जाने के बाद वे हकलाने लगे तथा उनकी कलई खुल गई।

 

खैर, असली मसला तो डाटा की सुरक्षा का था। हालांकि जब मैंने खबर लिखी तो उसके मूल में यह था कि बिहार के मुख्य सचिव ने सभी सरकारी अधिकारियों और कर्मियों को एनआईसी के जरिए ईमेल का इस्तेमाल करने की हिदायत दी है, वहीं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ‘जीमेल’ का उपयोग धड़ल्ले से करते हैं। मेरी खबर पर संज्ञान करीब दस दिनों के बाद लिया गया जब इन दोनों महाशयों ने भी अपना ईमेल आईडी बदला।

बहरहाल, कल ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम को वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। एक वीडियो सोशल मीडिया पर जबरदस्त तरीके से वायरल हुआ। वीडियो में प्रधानमंत्री बोलते-बोलते न केवल रूक जाते हैं बल्कि हकलाने भी लगते हैं। सोशल मीडिया पर लोगों के मुताबिक, प्रधानमंत्री टेलीप्रॉम्पटर देखकर अपना भाषण पूरे जोश से पढ़ रहे थे गाेया सब उनके जेहन में हो और उन्हें भाषण देने में पारंगता हासिल है, लेकिन टेलीप्रॉम्पटर के बाधित हो जाने के बाद वे हकलाने लगे तथा उनकी कलई खुल गई।

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मैं यह नहीं जानता कि प्रधानमंत्री उपरोक्त वीडियो में क्यों हकला रहे थे। वैसे भी टेलीप्रॉम्पटर देखकर अपना भाषण पढ़ना कोई गुनाह नहीं है। प्रधानमंत्री जैसे चाहें अपनी बात रखें। उनकी सहायता के लिए अधिकारियों की पूरी टीम लगी रहती है। बहुत कम ही ऐसे होते हैं तो खुद कुछ बोलने की क्षमता रखते हैं।
मैं तो राबड़ी देवी का उदाहरण देना चाहता हूं। विधान परिषद में बजट सत्र के दौरान उन्हें विपक्ष की ओर से अपनी बात रखनी थी। उनके आप्त सचिव महोदय बड़े-बड़े अक्षरों में मोटी-महीन बातें टाइप कराकर लाए थे। मैं उस वक्त विधान परिषद में उनके कक्ष में ही था। राबड़ी देवी ने उन बातों को देखा और मुझसे मुखातिब हो गईं। इस बीच सदन की कार्यवाही शुरू होने की सूचना मिल गयी। बिहार विधानमंडल में कार्यवाही शुरू होने की सूचना एक घंटी के माध्यम से दी जाती है और यह पांच मिनट पहले से बजने लगती है। दरअसल, ऐसा इसलिए ताकि सभी सदस्य सदन में उपस्थित हो जाएं।
तो उस दिन भी घंटी का बजना शुरू हुआ और राबड़ी देवी मेरे एक राजनीतिक सवाल का जवाब दे रही थीं। उन्होंने पूरी तन्मयता से अपनी बात रखी। मैं एक और सवाल रखना चाहता था, लेकिन जानता था कि अब वह सदन में जाएंगीं। इस बीच उनके आप्त सचिव ने उन्हें फिर से बताना शुरू किया कि सदन में आज उन्हें किन-किन बिंदुओं पर बात रखनी है। राबड़ी देवी हंसते हुए अपने आप्त सचिव को बोलीं कि क्या आप बोलेंगे मेरी जगह? मुझे पता है कि मुझे क्या बोलना है और कैसे बोलना है। और वह सदन में चली गईं। मैं पत्रकार दीर्घा में था। राबड़ी देवी ने बजट का विरोध करते हुए कहा कि मैं कोई अर्थशास्त्री नहीं हूं, लेकिन आज बिहार की जनता महंगाई से त्रस्त है। करूआ तेल का भाव देखा है आपने? नेनूआ, तरोई, आलू और प्याज की कीमत का भी अंदाज लगाइए। आप कहते हैं कि सुशासन है तो फिर लोगों के चेहरे पर खुशी क्यों नहीं है? क्यों हर महिला अपना और अपने परिजनों का पेट काटने पर मजबूर है। राबड़ी देवी बोलती रहीं। कभी मगही तो कभी भोजपुरी और कभी हिंदी में। उन्हें किसी टेलीप्रॉम्पटर की आवश्यकता नहीं हुई।
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खैर, नरेंद्र मोदी अच्छे वक्ता नहीं हैं और ना ही उन्हें विषयों की समझ है, यह महत्वपूर्ण नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि वह वीडियो लीक कैसे हुई? आखिर किसने लीक किया? यह सवाल बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के आधिकारिक वेबसाइट पर नरेंद्र मोदी के संबोधन का जो वीडियो जारी किया गया है, उसमें वे कहीं भी हकला नहीं रहे हैं। यह मुमकिन है कि संबोधन के प्रारंभ में उन्हें मुश्किलें आयी हों, लेकिन बाद मे टेलीप्रॉम्पटर के सुचारू हो जाने के बाद सब ठीक हो गया था। यह तो साफ तौर पर फोरम के द्वारा जारी वीडियो में देखा जा सकता है। फिर वह वीडियो जिसमें भारत के प्रधानमंत्री की घिग्घी बंध जा रही है, वह लीक कैसे हुआ? क्या पीएमओ में कोई है जो नरेंद्र मोदी के साथ गद्दारी कर रहा है, या फिर किसी अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागी ने जानबुझकर भारत की छवि को बदनाम करने के लिए वीडियो को लीक किया?
मैं तो यह सोच रहा हूं कि प्रधानमंत्री के हकलाते समय के वीडियो का लीक होना एक गंभीर चूक है और एक साजिश का संकेत भी देता है। यह देश के लिए अच्छी बात नहीं है।

नवल किशोर कुमार फॉरवर्ड प्रेस में संपादक हैं ।

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