Wednesday, February 28, 2024
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राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने महानिदेशक स्कूल शिक्षा एवं उत्तर प्रदेश शासन के खिलाफ दिया धरना

केंद्र के समान पेंशन मेमोरेंडम के माध्यम से शिक्षकों को भी दिया जाय पुराना पेंशन शिक्षामित्रों, अनुदेशकों को 30 हजार रुपये का मिले सम्मानजनक मानदेय शिक्षकों की वर्षों से लंबित पदोन्नति को 15 दिन में किया जाय परिषदीय शिक्षकों को भी अपना शिक्षक विधायक चुनने के लिए मिले मतदान का अधिकार वाराणसी। शिक्षकों को पुरानी […]

  • केंद्र के समान पेंशन मेमोरेंडम के माध्यम से शिक्षकों को भी दिया जाय पुराना पेंशन
  • शिक्षामित्रों, अनुदेशकों को 30 हजार रुपये का मिले सम्मानजनक मानदेय
  • शिक्षकों की वर्षों से लंबित पदोन्नति को 15 दिन में किया जाय
  • परिषदीय शिक्षकों को भी अपना शिक्षक विधायक चुनने के लिए मिले मतदान का अधिकार

वाराणसी। शिक्षकों को पुरानी पेंशन से आच्छादित करने, पेंशन मेमोरेंडम जारी करने,राज्य कर्मचारियों की तरह शिक्षकों को कैशलेश चिकित्सा सुविधा देने, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों एवं रसोइयों का मानदेय बढ़ाने,पदोन्नति प्राप्त शिक्षकों को रु० 17140/18150 का मूल वेतन देकर उनकी वेतन विसंगति दूर करने,शिक्षकों को शिक्षक विधायक निर्वाचन में मतदान का अधिकार देने,वर्षों से लंबित शिक्षकों की पदोन्नति करने सहित अपने 22 सूत्री मांगपत्र पर महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरण आनंद द्वारा कोई कार्यवाही न करने पर राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ वाराणसी ने अपने प्रांतीय नेतृत्व के आह्वान पर जिला बेसिक शिक्षाधिकारी कार्यालय पर महानिदेशक स्कूल शिक्षा तथा उत्तर प्रदेश शासन के खिलाफ जनपद के सैकड़ों शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों एवं रसोइयों के साथ जोरदार धरना लगाया और महानिदेशक एवं मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिला बेसिक शिक्षाधिकारी वाराणसी डाक्टर अरविंद पाठक को सौंपा। धरना कार्यक्रम का नेतृत्व प्रदेश संयुक्त मंत्री एवं वाराणसी के जिलाध्यक्ष शशांक कुमार पाण्डेय “शेखर” ने संचालन जिला महामंत्री आनंद कुमार सिंह ने तथा संयोजन जिला संघर्ष समिति के संयोजक एवं वरिष्ठ उपाध्यक्ष सत्यप्रकाश पाल ने किया।

शशांक कुमार पाण्डेय “शेखर” ने कहा कि परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों, शिक्षामित्रों,अनुदेशकों एवं रसोइयों की तमाम समस्याएं वर्षों से लंबित हैं जिनके समाधान के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश ने कई बार ज्ञापन दिया लेकिन महानिदेशक स्कूल शिक्षा इन समस्याओं को सुलझाने के बजाय हर बार टाल मटोल का रवैया अपनाते रहे। विगत 1 जून 2023 को उनके कार्यालय में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश ने 22 मांगों का एक मांगपत्र सौंपा था जिस पर उचित कार्यवाही के लिए 8 जून 2023 को राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधिमंडल ने महानिदेशक से उनके कार्यालय पर मुलाकात किया था जिसके 14 दिन बीतने के बाद आज तक किसी मुद्दे पर भी उनके द्वारा कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया जिसकी वजह से शिक्षकों शिक्षामित्रों अनुदेशकों और रसोइयों में भारी आक्रोश है इसी वजह से प्रदेश नेतृत्व ने 22 जून 2023 को पूरे प्रदेश में एक साथ महानिदेशक के खिलाफ सभी जिला बेसिक शिक्षाधिकारी कार्यालय पर धरना देने का कार्यक्रम तंय किया था जिसके क्रम में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ वाराणसी द्वारा भी आंदोलन किया जा रहा है। धरने के बाद यदि महानिदेशक एवं उत्तर प्रदेश शासन ने शिक्षकों की 22 सुत्रीय मांगों को नहीं माना तो 11,12 ,13 जुलाई को प्रांतीय पदाधिकारियों एवं संघर्ष समिति के सदस्यों द्वारा महानिदेशक स्कूल शिक्षा के कार्यालय पर धरना लगाया जायेगा तथा नवंबर माह में पूरे प्रदेश के शिक्षकों शिक्षामित्रों अनुदेशकों रसोइयों के साथ विधानसभा का घेराव किया जायेगा।

ज्ञापन सौंपते हुए शिक्षा कर्मी

धरना कार्यक्रम में बोलते हुए राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ वाराणसी के महामंत्री आनंद कुमार सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार ने 3 मार्च 2023 को पेंशन मेमोरेंडम जारी करके अपने हर उस कर्मचारी एवं शिक्षक को पुरानी पेंशन दे दिया है जो एनपीएस नोटिफिकेशन से पुर्व के विज्ञापन से चयनित हुए थे परंतु केंद्र के सभी नीतिगत निर्णयों को मानने वाली उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने शिक्षकों कर्मचारियों के लिए आज तक ऐसा पेंशन मेमोरेंडम जारी नहीं किया जो उत्तर प्रदेश राज्य में एनपीएस नोटिफिकेशन 1 अप्रैल 2005 से पुर्व के विज्ञापन से चयनित हुए थे।

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ वाराणसी के कार्यकारी जिलाध्यक्ष ज्योति प्रकाश ने कहा कि माननीय न्यायालय ने कई बार आदेश जारी करके शिक्षकों से गैर शैक्षणिक कार्य लेने से मना किया है परंतु जबसे विजय किरण आनंद जी महानिदेशक बने हैं तबसे शिक्षकों को दिन-रात गैर शैक्षणिक कार्यों में न केवल उलझाया जा रहा है अपितु उनसे छुट्टियों में भी काम लिया जा रहा है यही नहीं इन अतिरिक्त कामों के बदले मिलने वाले प्रतिकर अवकाश को भी उनके द्वारा समाप्त कर दिया गया है जिसका हम विरोध करते हैं और मांग करते हैं कि छुट्टियों में काम के बदले प्रतिकर अवकाश दिया जाय तथा किसी इमरजेंसी में शिक्षकों को भी हाफ सीएल लेने का अधिकार दिया जाय।

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